राउर पाती

March 5, 2020
राउर पाती
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वसंत पऽ शानदार अंक
‘हम भोजपुरिआ’ के वसंत अंक देखनी। पहिले हमरा एकर पता ना रहे। एगो दोस्त हमरा के बतवलस एह ई-पत्रिका के बारे में। भोजपुरी खातिर ई एगो अच्छा शुरुआत बा। वसंत प एतना बढि़या अंक पढ़े के मिलल। एकर सम्पादकीय पढ़नी, एह में मनोज भावुक जी के प्रेम पर लाइन बहुत प्रासंगिक लागल। जल आ जंगल संरक्षण पर लेख भी अच्छा लागल। ई पत्रिका संस्कृति के संगे-संगे आज के जीवंत समस्या पऽ भी फोकस करऽता। अक्षयवर जी के स्मृति में लिखल संस्मरण उहां के ईयाद ताजा कऽ दिहलस। धरती पऽ आइल वसंत आलेख में वसंत के एतना बढि़या वर्णन हाल फिलहाल कवनो पत्रिका में ना आइल रहे। बलमुआ के गांव रे…शीर्षक आलेख बढि़या आ चटपटा लागल। पुलवामा शहीदन के ईयाद भी पुरान घाव के ताजा कऽ दिहलस। हमार पहिला प्रेम कहानी बढि़या लागल। कुल मिला के पत्रिका संग्रहणीय बा।

जनार्दन प्रसाद
छपरा, बिहार

भोजपुरी के बढ़त कद
‘हम भोजपुरिआ’ के वसंत अंक मोबाइल पऽ पढ़नी। पढ़ के अच्छा लागल। वसंत पऽ एतना बढि़या सामग्री इकट्ठे पढ़े के मिलल। वसंत अंक मोबाइल पर देखला के बाद हम तीन घंटा पढ़ते रह गइनी आ पते ना चलल। हम बस में सफर करत रहीं आ हमार उतरे के समय कब आ गइल हमरा पते ना चलल। अगर ई पत्रिका छप के आइत त हमरा जादे खुशी होइत। काहे कि आजकल व्हाट्स-ऐप, फेसबुक पऽ रोज पचहत्तर गो चीज पढ़े के रेकोमेन्डेसन आवेला, लेकिन केहू ध्यान ना देवेला। एही से बढि़यो चीज के केहू के रेकमेंड करीं त लोग देखबे ना करेला। खैर, हम तऽ एकर प्रिंट ले के रखेम। शाहरुख खान के भोजपुरी सिनेमा आवऽता, इहो एगो बढि़या बात बा। अइसे हमरा गिरमिटिया के बारे में जादे जानकारी नइखे। सब आलेख पढ़नी आ सब अच्छा लागल। पहिले से जादे लोग अब भोजपुरी के लेके संजिदा भइल बा। ई बढि़या बात बा। ‘हम भोजपुरिआ’ टीम के बहुत-बहुत बधाई।

  कुमार अभिषेक,
रोहतास

आनन्द आ गइल
‘हम भोजपुरिआ’ के वसंत अंक देखनी, बहुत अच्छा लागल। एकर पहिलको अंक हम पढ़ले रहीं, अच्छा लागल रहे। केहू जाने वाला हमरा के गांधी जी वाला अंक के बारे में बतइले रहे। उ अंक त बड़ रहे लेकिन हम धीरे-धीरे सारा पढ़ गइल रहीं। तबे से हम

दू-तीन हाली ‘हम-भोजपुरिआ’ के साइट खोल के चेक कइले रहनी कि एकरा दूसरा अंक में का आई। जब 18 तारीख के देखनी कि वसंत अंक आइल बा, त मन खुशी से झूम गइल। फेर हम काम-धाम निपटा के अस्थिराहे बइठ के मोबाइल खोल के वसंत अंक पढ़े के शुरू कइनी। एक-एक पन्ना पढ़त-पढ़त, दू-तीन घंटा केंगनी बीत गइल पते ना चलल। वसंत के सम्पादकीय लेख त मन के कुरेद देहलस। स्कूल के समय ईयाद आ गइल, जब हमनी के टीनएजर रहनी जा। सरकारी क्वाटर में रहत रहीं जा आ फूल के बगइचा में खूब खेलीं जा। खैर, इहो अंक हमरा बहुत पसंद आइल।

शिवानी कश्यप,
विक्रमगंज, बिहार

नयका पीढ़ी के भोजपुरी पढ़ावल जरूरी बा
आज के पीढ़ी के लइका सब के इंगलिश खाली सिखावले नइखे जात बलुक भोजपुरी बोले से रोकलो जाता। जब तक हमनी के ई मानसिकता से ना निकलेम सऽ भोजपुरी के उत्थान संभव नइखे। बाकिर हम एगो ई बात जरूर कहेम कि एह पत्रिका में बहुत क्वालिटी के मटेरियल आइल बा। एह में छपल सगरो आलेख के पढ़ गइनी हऽ। हमरा किताब कलेक्शन के शौक बा, हम एह अंक के संजो के रखेम।

सीमा कुमारी
पटना, बिहार

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