राम मंदिर के बूटा सिंह आ सिख लोगन से रिश्ता

राम मंदिर के बूटा सिंह आ सिख लोगन से रिश्ता

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Posted: January 19, 2021
Category: सुनीं सभे
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  आर. के. सिन्हा

सरदार बूटा सिंह के निधन तब भइल जब अय़ोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य के श्रीगणेश हो चुकल रहे। ये तरह से, पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह जी के आत्मा के शांति मिलल होईI ये तथ्य से कम लोग ही वाकिफ बा कि बूटा सिंह भगवान राम के अनन्य भक्त रहलन आ सुप्रीम कोर्ट में मंदिर-मस्जिद मसला पर जवन केस चलल रहे ओमे ऊ हिन्दू पक्ष के एगो महत्वपूर्ण सलाह भी देहले रहलन। कहे वाला त इहो कहेला कि अगर रामलला के ये केस में पक्षकार ना बनावल गइल रहित त फैसला अलग हो सकत रहे। ई जानल दिलचस्प बा कि रामलला के पक्षकार बनावे के पीछे तत्कालीन राजीव गांधी सरकार में गृह मंत्री बूटा सिंह के महत्वपूर्ण भूमिका रहे। जब राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़े लागल अउर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ताला खुलवा देहले त बूटा सिंह शीला दीक्षित के जरिए विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल के संदेश भेजववले कि हिन्दू पक्ष के तरफ से दाखिल कवनों मुकदमा में जमीन के मालिकाना हक नइखे माँगल गइल अउर एसे उनकर मुकदमा हारल तय बा।

अजीब बिडबंना बा कि अयोध्या विवाद के हिन्दू-मुस्लिम मसला के रूप में ही देखल जात रहल बा। लेकिन ये सब प्रकरण से सिख नेता भी करीबी से जुड़ल रहलन। बूटा सिंह के भूमिका एही बात के पुष्टि कर रहल बा। ये पहलू के अभी तक अनदेखी ही भइल बा या ई कहीं कि ई पक्ष सही रूप से जनता के सामने नइखे आइल। देखल जाय त बूटा सिंह ओही परंपरा के आगे बढ़ावत रहले जेकर नींव गुरु नानकदेव भी सन 1510-11 के बीच में डलले रहलन। बाबा नानक अयोध्या जाके राम जन्म मंदिर के दर्शन कइले रहलन। प्रभाकर मिश्र अपना पुस्तक “एक रुका हुआ फैसला” में लिखले बाड़न कि बाबा नानक अय़ोध्या में बाबर के आक्रमण (सन 1526) से पहिले आइल रहले। बाद में नउआँ, गुरु तेग बहादुर जी अउर दसवाँ गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी भी श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन कइले रहलन।

161 साल पहिले विवादित ढाँचा के अंदर सबसे पहिले घुसे वाला व्यक्ति एक निहंग सिख रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसला में 28 नवंबर 1858 के दर्ज एक शिकायत के हवाला दिहल गइल बा जेमे कहल गइल बा कि ‘इस दिन एक निहंग सिख फकीर सिंह खालसा ने विवादित ढांचे के अंदर घुसकर पूजा का आयोजन किया। 20 नवंबर 1858 को स्थानीय निवासी मोहम्मद सलीम ने एक एफआईआर दर्ज करवाई जिसमें कहा गया कि निहंग सिख, बाबरी ढांचे में घुस गया है और राम नाम के साथ हवन करा रहा है।' यानी राम मंदिर खातिर पहिलका एफआईआर हिन्दु लोग के खिलाफ ना, सिख लोग के खिलाफ ही दर्ज भइल रहे। अब जरा सोचीं कि ई निहंग सिख पंजाब से केतना लंबा सफर तय करके अयोध्या तक पहुँचल होइहें।

पर अफसोस ई देखीं कि आज कल बहुत से शातिर तत्व हिन्दू अउर सिख में वैमनस्य पैदा करे के हर मुमकिन कोशिश कर रहल बाड़े। भगवान राम के महिमा सिख परंपरा में भी बखूबी विवेचित बा। सिख के प्रधान ग्रंथ “गुरुग्रंथ साहब” में साढ़े पाँच हजार बार भगवान राम के नाम के जिक्र मिलल बा। सिख परंपरा में भगवान राम से जुड़ल विरासत रामनगरी में ही स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड में पूरा शिद्दत से प्रवाहमान बा। गुरुद्वारा में हरेक वर्ष राम जन्मोत्सव मनावल जाला। पूर्वाह्न अरदास-कीर्तन के साथ भगवान राम पर केंद्रित गोष्ठी आ मध्याह्न भंडारा आयोजित होला। एही तरह से सब सिख गुरु भी समस्त हिन्दू लोग खातिर भी आराध्य बाड़न। निश्चित रूप से भगवान राम, अयोध्या में बन रहल राम मंदिर अउर सिख के गहरा संबंध पर शोध अउर चर्चा होखे के चाहीं। जाहिर बा, जब ये बिन्दू पर अध्ययन होई त बूटा सिंह के उल्लेख भी बड़ा आदर पूर्वक होई। उनका के सिर्फ एक राजनीतिक हस्ती या केन्द्रीय मंत्री बता देहल भर से बात ना बनी। उनका मृत्यु पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शोक जतवले रहनीं। ई ये बात के प्रमाण बा कि बूटा सिंह के कवनों दल के नेता कहल सही ना होई।

बूटा सिंह अनुभवी प्रशासक त रहले हीं, ऊ गरीबन के साथ-साथ दलित के कल्यान खातिर भी एक प्रभावी आवाज रहले। बूटा सिंह के देहांत से देश एक सच्चा जनसेवक आ निष्ठावान नेता खो दिहलस। ऊ आपन पूरा जीवन देश के सेवा आ जनता के भलाई खातिर समर्पित कर दिहले, जवना खातिर उनका के हमेशा इयाद रखल जाई। ऊ अंतरंग बातचीत में बतावत रहले कि वाल्मिकी समाज में जन्म लेवे के कारण उनका बचपन में केतना घोर कष्ट सहे के पड़ल। उनहीं से स्कूल के टीचर सुबह क्लास साफ़ करे के कहस, काहे कि ऊ वाल्मिकी समाज से रहलन। उ ओ दौर के इयाद करत उदास हो जात रहलन। बूटा सिंह लगातार सफाई कर्मियन के हक़ में बोलत रहलन। ऊ साफ़ कहस कि दलितन में भी सबसे खराब स्थिति वाल्मिकी समाज के बा। उनका सीवर साफ करत सफाई कर्मी के मौत बहुत विचलित कर देत रहे। ऊ ये लिहाज से भी सही रहलन। कवनों सफाई कर्मी के मौत पर ले-देके उनकर घऱ वाला लोग ही आँसू बहा लेला। इनका मरला के खबर एक दिन अइला के बाद अगला दिन से ही कहीं दफन होखे लागेला। ये बदनसीबन के मरला पर ना केहू अफसोस जतावेला, न ही ट्वीट करेला। कवनों तथाकथित प्रगतिवादी मोमबत्ती परेड भी ना निकालेलाI चूंकि मामला कवनों बेसहारा गरीब के मौत से जुड़ल बा, त ओके रफा-दफा कइल भी आसान होला। ये गरीबन के ना त कवनों सही नाम पता ठेकेदार के पास रहेला ना ऊ घटना के बाद कुछ बतावे के कष्ट ही करेलाI  बूटा सिंह जब देश के केन्द्रीय गृह मंत्री या शहरी विकास मंत्री रहले, ऊ तबो अपना वाल्मिकी समाज से जुड़ल मसलन के प्रति बेहद सजग अउर संवेदशील रहलन। एसे समझल जा सकेला कि देश के असरदार अउर शक्तिशाली पद पवला के बाद भी ऊ अपना लोगन के अपना से दूर ना कइलन। बूटा सिंह के प्रति सही श्रद्धांजलि इहे होई कि देश के दलित अउर वाल्मीकि समाज के शैक्षणिक आ सामाजिक स्थिति में सुधार कइल जाय।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं )

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