फगुनाहट हs कि कोरोनाहट

फगुनाहट हs कि कोरोनाहट

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Posted: April 19, 2021
Category: संपादकीय
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संपादक- मनोज भावुक

परसाल होली पनछुछुर रहे काहे कि भारत में कोरोना वायरस के मामला रफ़्तार पकड़ल शुरू क देले रहे। लोग डेराइल शुरू क देले रहे।  ओकरा बाद स्कूल-कॉलेज बंद भइल, अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर रोक लागल आ ओकरा बाद त मिललो-जुलला प रोक लाग गइल। लाग गइल लॉकडाउन आ सोशल एनीमल सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करे लागल।

केतना राउंड के लॉकडाउन से गुजरत साल गुजरल। नया साल लागते कोरोना के टीका आइल। ख़ुशी के लहर दउड़ल कि मिल गइल संजीवनी बूटी। मिल गइल कवच-कुण्डल। बाकिर, आहि दादा.. कादो, कोरोना के दूसरा लहर चल देले बा। आ गइल बा। होली आवते फेरु आ गइल। कोरोनवा के का जाने होली से कवन बैर बा। होली रंग के त्यौहार ह आ ई रंगे में भंग करsता।

खैर, कई जगह लॉकडाउन लगा दिहल गइल बा। टीकाकरण अभियानो तेजी पकड़ले बा। नाक से नीचे मास्क पहिने आ सट-सट के बतियावे वाला लोग अलर्ट हो गइल बा। सरकारो से अलर्ट पर अलर्ट जारी होता। डॉक्टर लोग कहsता कि हमनी के पुरनका अनुभव से सीखे के चाहीं आ सभा-समारोह में जाके  सुपरस्प्रेडर बने से बचे के चाहीं।

अब लइका-बच्चा, स्कूलिहा-कवलेजिया होली के हुडदंग खातिर जवन योजना बनवले रहलें हं, उ त फेल होइये गइल। जीजो-साली आ देवर-भौजाई के प्लानिंग पर पानी फिरल। चनेसर च्चा बेसिये टेंसनिआइल बाड़े। होली मिले-जुले के त्यौहार ह आ मिललके-जुललका पर रोक बा। पतझड़ के बाद बसंत आवेला आ बसंत के साथे फगुआ बाकिर इहाँ त बसंत के साथे फेर से पतझड़ आ गइल। कोरोना के ई दुसरका लहर सब उत्साह आ उमंग के हरियरी चर गइल बा। बुझाते नइखे कि फगुनाहट ह कि कोरोनाहट। टिभियो पर त फाग से बेसी कोरोना राग सुनाता।

हालाँकि बंगाल में कोरोना राग से बेसी चुनावी राग बा। उहाँ त बुझाता कोरोनवा आत्महत्या कर लेले बा। उहवें ना जहाँ-जहाँ इलेक्शन होला, कोरोना उहाँ ना फटके। त हम कंफ्यूज हो जानी कि कोरोना के भगावे खातिर वैक्सीनेशन जरुरी बा कि इलेक्शन!

खैर, भोजपुरी जंक्शन में पूरा के पूरा फाग राग बा। एह अंक पर कोरोना-सोरोना के कवनो असर नइखे। ई कम्पलीट फगुआ विशेषांक बा। 5 दर्जन कवि लोग के होली गीत, भोजपुरी के साथे ब्रज के भी तड़का, बसंत के अइला से लेके फगुआ के बदलत रूप पर बात, बॉलीवुड आ भोजीवुड के फगुआ के गीत-संगीत पर चर्चा, होली-रस आ होलियाना संस्मरण के साथे अंत में इहो कि ‘’ भउजी देह अंइठली अउरी फागुन आय गइल ‘’ तक सब रस, सब रंग मतलब होली के फुल पैकेज। अब कोरोना काल में पढ़े पर त रोक बा ना, पढ़ीं आ आनंद लीं। इहो होली खातिर दस्तावेजे बा।

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