कोरोना काल में ‘ राम रसायन तुम्हरे पासा ‘

कोरोना काल में ‘ राम रसायन तुम्हरे पासा ‘

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Posted: May 21, 2021
Category: आवरण कथा
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मनोज भावुक

ई चइत के महीना हऽ. भगवान श्रीराम के जनम के महीना. अब राम से बड़ा नायक के बा ? जेतना राम पर लिखाइल बा, कहाइल बा, गवाइल बा आ मंचन भइल बा, सीरियल-सिनेमा बनल बा, ओतना कवना नायक पर काम भइल बा ?...आ बात खाली भइला के नइखे, भावना के बा. जवना भावना से लोक में राम के स्वीकार कइल गइल बा, उ भाव दोसरा कवनो नायक के नइखे भेंटाइल. साँच कहीं त जीवन के हर भाव में राम बाड़े. राम हर काल में प्रासंगिक बाड़े. कोरोना काल में भी.

लोक में राम, भोजपुरी साहित्य में राम, भोजपुरी कविता में राम, सिनेमा में राम, लोकगीतन में राम, हमनी के जीवन में राम, जीवन शैली में राम, अयोध्या में राम अउर हमनी के धड़कन में राम. हमनी के रोंआ-रोंआ में राम बाड़े, इहे एह लेख के सुर बा. राम के एही तरे के मौजूदगी कोरोना होखे चाहे दोसर कवनो आफत ओकरा से उबरे खातिर धैर्य, सबल अउर सकारात्मक सोच के दिशा सुनिश्चित करेला.

हमनी के लोकगीतन में राम जनम से लेके मृत्यु तक बाड़े. सोहर से लेके ' राम नाम सत्य है' तक. हमनी के हर संस्कार में राम बाड़े. व्यवहार में राम बाड़े. गणना-गणित में राम बाड़े. भोजन-भजन में राम बाड़े. साँच पूछीं त राम रसायन आजो सब समस्या के समाधान बतावे में सक्षम बा. रामलीला आ रामचरित मानस आजो सबसे आसानी से समझ में आवे वाला दर्शन शास्त्र बा. सिनेमा-सीरियल खातिर सबसे इंटरेस्टिंग एक्शन बा, ड्रामा बा, इमोशन बा. मानी भा मत मानी राम के बिना राउर काम चले वाला नइखे.

भजिलऽ ए मनराम नाम ना तऽ फेर पाछे पछितइबs हो !

एह लोकप्रिय भजन से साफे पता चलsता कि भारतीय जनमानस के राम पर केतना भरोसा बा. विद्वान् लोग कहेला कि ऋग्वेद में भी राम के जिक्र बा लेकिन राम के स्थापित करे वाला पहिलका काव्य ‘वाल्मीकि रामायण' ह. महर्षि वाल्मीकि राम के महापुरुष मनले बाड़े.

त्रेता युग में भगवान विष्णु राम का रूप में राजा दशरथ के बेटा बनके उतरलें, ई बात सबका पता बा. अब एह कथा के आ राम के चरित्र के गोस्वामी तुलसीदास अइसन गढ़लें कि राम ग्रन्थ के पन्ना से निकल के घर-घर में समा गइलें. तुलसी के राम चमत्कारी राम ना, गृहस्थ जीवन वाला राम, लोक के चिंता करे वाला राम बनलें. एही से उ लोक के चित प चढ़ के मन, प्राण आ  आत्मा में समा गइलें. गीत-संगीत में समा गइलें. राग-सुर पर उतर गइलें. ठेकान बा कि राम पर केतना भजन बा.

भजु राम जी के नाम भइया रेअति सुखदाई
एगो उहे अइहे काम भइया रेअति सुखदाई

भजने ना, बिआह-शादी के माड़ो तक ले राम गूँजे लगलें. अब राम से बढ़िया दूल्हा भारतीय जनमानस में दोसर केहू नइखे-

साजी बरात चलेलें राजा दशरथ
गगन गरद उड़ि जाए
आजु देखों कोसिला के गोद, रामचंद्र दूलहा बनें

अतने ना, फगुवा-चइता तक ले राम गवाये लगालें-

होरी खेले रघुवीरा अवध मेंहोरी खेले रघुवीरा
केकरे हाथ कनक पिचकारीकेकरे हाथ अबीरा
राम के हाथ कनक पिचकारीलछुमन हाथ अबीरा

चइता के त सब लइनिये रामा आ ए हो रामा से ख़तम होला.

संस्कार गीतन के बात करीं त सोहरे से राम जी के जय-जय होखे लागेला-

"धनि धनि अयोध्या रउरो भाग त परम सुहावन हो, ललना कहवां जनमले राम त केकरा ही लछुमन नूँ हो।।' केकरा जनमले भरत....उठे सोहर हो / कोसिला के जनमले राम, सुमित्रा के लक्ष्मण हो, ललना केकई के भरत अब त अयोध्या उठे सोहर नूँ हो"...

देखीं, चईत के रामनवमी पर ई सोहर त खूब गवाला-

चइत अंजोरिया के नवमी, त राम जनम लिहले हो, ललना बाजे लागल अवध बधाव, महलिया उठे सोहर हो"

बतावत चलीं कि भोजपुरी के पहिलका महाकाव्य रामे पर बा- ' अपूर्व रामायण ' . पूरबी पुरोधा महेन्दर मिसिर एकर रचना कइले बाड़े.

रउरा जान के ताजुब्ब होई कि भोजपुरी भाषा में पहिलका समीक्षा-आलोचना के पुस्तक भी रामेकथा से जुड़ल बा- कमला प्रसाद मिश्र ' विप्र ' के ' रामकथा परम्परा में मानस '.

गद्य में  गणेश दत्त ' किरण' रचित उपन्यास 'रावन उवाच ' के कवनो जबाब नइखे.

राम पर भोजपुरी काव्य पुस्तक त खूब लिखाइल बा. अविनाश चन्द्र ' विद्यार्थी ' के ' कौशिकायन’ आ ' सेवकायन ', कुंज बिहारी ' कुंजन ' के ' सीता के लाल', राम बचन लाल श्रीवास्तव के 'बनवासी की शक्ति साधना’, रामबृक्ष राय 'विधुर'  के 'सीता स्वयंवर’, तारकेश्वर मिश्र ' राही' के ' लव कुश ' , विश्वनाथ प्रसाद ' शैदा ' के ' रावण-अंगद संवाद’, वीरेश्वर तिवारी के प्रबंधकाव्य ' लंका विजय ' , श्रद्धा नंद पांडेय के ' श्री रामकथा ', व्रतराज  दूबे ' विकल ' के  ' केकई माई ' , अनिरुद्ध त्रिपाठी ' अशेष '  के ' प्रेमायन' , हीरा ठाकुर के  ' अंजनी के लाल ' , अमर सिंह के प्रबंधकाव्य ' मर्यादा पुरुषोत्तम ' आ ' विश्वामित्र ' , अनिरुद्ध त्रिपाठी 'संयोग' के ' रामप्रिया बनवासिनी ', ब्रजभूषण मिश्र के ' महावीर जी सदा सहाय ' , हीरालाल हीरा के 'केने बाड़ी सीता ' , कुंज बिहारी ' कुंजन ' के  कुंजन रामायण, राम सुरेश पांडेय के ' रावन चरित मानस ' ,  भगवान मिश्र ' श्रीदास ' के ' बालकांड रामायण ' , बद्रीनारायण दूबे ' बक्सरी ' के ' राम रसायन ' , शिव भजन राय  ' वैरागी ' के ' कवित रामायण' आ ' भजन रामायण ', भगवान सिंह ' भास्कर ' के ' भास्कर लोक रामायण ', रामलाल गजपुरी के ' रामचरित दर्शन ' , रामप्रवेश शास्त्री के ' रामभक्त हनुमान' ,  हीरा प्रसाद ठाकुर के ' सबरी ' आ ' रामजी के बिआह ', बद्री नारायण दूबे के ' श्री राम चालीसा ' , गोरखनाथ शर्मा के ' सीताहरण' आ व्रतराज दूबे ' विकल ' के ‘ सती उरमिला’ आदि प्रमुख बा.

भोजपुरी के राष्ट्रगीत ' बटोहिया ' के कवि बाबू रघुवीर नारायण जी के कृति 'कुंवर विजयी रामायण' में  युद्ध के प्रसंग देखीं -

राम यहि ठैयां भीम भय भरना हो ना

राम मारि डरलीं दैत्य कुम्भकरना हो ना

राम यहि ठैयां कैलीं घोर रनवां हो ना

राम मारि डरलीं विकट रवनवा हो ना

 

भिखारी ठाकुर रामभक्त रहलें. अपना नाटक में राम के खूब गवलें. ठाकुर जी के लिखल हई चौपाई देखीं-

राम नाम के भक्त जगत से तरि जालन तत्काल

कुतुबपुर के कहत ' भिखारी', बूढ़ जवान बाल

बहुत कुछ त वाचिक परम्परा में बा. मतलब लिखाइल नइखे बाकिर मंदिर पर झलकूटन में भा खेत-बधार आ नदी तीरे सुने के मिल जाई. कहे के मतलब कि हरवाही-चरवाही से लेके विद्वत मंडली तक राम के सत्ता बा. हमनी किहां एगो लोकप्रिय कहावत बा-

अन्हरी गइया के राम रखवइया

जेने ताकब ओने एह कहावत के एगो नया अर्थ खुली. अइसहूँ राम के जेतने जानब ओतने जाने के मन करी. उनकर महिमा अपरमपार बा. कोरोना काल में उ अउर करीब आ गइल बाड़े. कई जगह सब कुछ राम भरोसे बा. कवनो बात नइखे, दवा-बीरो के साथे ‘ राम रसायन तुम्हरे पासा’ के महामंत्र भी ईयाद रखीं अउर एह कोरोना महामारी से सम्पूर्ण विश्व आ मानवता के मुक्त करावे खातिर राम के नाव लेत रहीं. जय श्रीराम!

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