पियवा के चाहीं परधानी ए रामा

May 25, 2021
कविता
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श्री मिथिलेश गहमरी

पियवा के चाहीं परधानी ए रामा,

छुटली चुहनिया

 

पहिले त सुध मुंह, पियवा ना बोले,

महिला कोटा होते आगा पाछा डोले,

बेरी-बेरी कहें दिलजनिया ए रामा,

छुटली चुहनिया

 

पहिले सब कहत रहे हमरा के फुहरी,

आजु सब बनवले बा अँखिया के पुतरी,

छनहीं में बदलल ई दुनिया ए रामा,

छुटली चुहनिया

 

पहिले हमसे आंगनों में घूँघ कढवावे,

वोट बदे आजु गली-गली नचवावे,

सबका से प्यारी कुर्सी रनिया ए रामा,

छुटली चुहनिया

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