समृद्ध परंपरा के अंत ना हो जाए

समृद्ध परंपरा के अंत ना हो जाए

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Posted: August 13, 2021
Category: आलेख
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डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’

दुनिया के प्रत्येक इंसान के दिल में ओकरा माई-बाबूजी के छवि उम्र भर रहेला। सुख-दुःख के सब अवसर पर माई-बाबूजी के याद आवेला। माई-बाबूजी से जुड़ल बहुत सारा बात बा जवन हमरा भी दिल में बा। हमरा स्वर्गीय बाबूजी के नाम श्री रामदेव माँझी रहे आउर माई के नाम श्रीमती शिवकुमारी देवी हवे। हमार बाबूजी दिल्ली में महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड में लाइन इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत रहनी आ इंस्ट्रक्टर पद पर प्रन्नोत होके वर्ष 2005 में वीआरएस ले लेहनी आ अप्रैल 2012 में ब्रेन हैमरेज के चलते दिल्ली के एम्स में दम तुड़ देहनी। बाबूजी के स्वर्गवास के बाद अब हमरा सिर पर माई के ही हाथ रह गइल बा।

जब से हम होश संभलनी अपना बाबूजी के कुछ एक खूबी हमरा मन में  बइठ गइल। पहिला खूबी ई कि कवनो भी काम मन लगाके करे के चाहीं। दोसर खूबी जरूरतमंद के यथा संभव सहायता तन मन धन से करे के हम अपना बाबूजी से ही सीखनी। कुछ एक खूबी जवन हम ना सीख सकनी ऊ ह छोट मोट हाथ के काम– जइसे कि खटिया बुनाई, बढ़ईगिरी, घर के चूना-रंगाई के काम आउर खेत में मेहनत वाला काम इत्यादि जवना खातिर अफ़सोस बा। एगो आउर खूबी जवन हम ना सीख सकनी ऊ ह भोजपुरी देवी गीत, पचरा गायन, साँझा-पराती, राहू गीत, होली गीत, चइता, सोहर इत्यादि ।

भोजपुरी के समृद्ध वाचिक परंपरा के जानकारी हमरा अपना माई बाबूजी से ही मिलल। शादी बिआह के अवसर पर जवन मांगलिक गीत औरत लोग गावेला ओकर जानकारी भी हमरा केहू दोसर व्यक्ति ना बल्कि हमरा अपना माई से मिलल। भोजपुरी के वाचिक परंपरा अब आगे कहवां ले जाई एकरा बारे में हमरा बहुते संदेह बा। कारण ई बा कि जब हम खुदे भोजपुरी के समृद्ध वाचिक परंपरा के ना सीख सकनी त आगे के संतति का सीखी। डर ई बा कि भोजपुरी के समृद्ध वाचिक परंपरा के हमनी जा कहीं गवां ना दीहीं जा।

आज के दौर में ज्यादातर घर में पारंपरिक मांगलिक गीत के कवनो महत्व नइखे। महानगर में ही ना बल्कि गाँव देहात में भी कवनो शुभ अवसर पर फ़िल्मी गीत के शोर सुनाई देत बा । आज के मेहरारू लोग अपना सास, ददिया सास आदि से गीत गवनई सीखे से परहेज करत बा लोग। एगो आउर बात जवन मन में खलबली मचवले बा ऊ ई ह कि माई बाबूजी के बाद अधिकतर घर-आँगन में परिवार के आपस में जोड़के के रखी? आज देखेके ई मिलत बा कि एगो घर आँगन में भाई के भाई से नइखे बनत जवना के कारण अनेकानेक बा। एकही घर में आज दस दस को चूल्हा जलत बा। केहू के माई बाबूजी ई ना चाहेला कि ओकरा जिनगी में ही उनकर बच्चा लोग में जमीन जायजाद के चलते बंटवारा हो जाए, जवन आज अधिकतर परिवार में हो रहल बा। आज माई बाबूजी के प्यार तराजू पर तौलात बा। का एकरे के आधुनिकता आउर विकास कहल जाई ?

आज एकल परिवार में मानसिक अवसाद, एकाकीपन आदि देखल जा सकेला जवन कि संयुक्त परिवार में कबो सुने के ना मिलत रहे। कोरोना जइसन वैश्विक महामारी आज फेर से संयुक्त परिवार के अहमियत देश दुनिया के बता देले बा। दुनिया में पइसा के बल पर सब कुछ संभव नइखे। पइसा से परिवार के प्यार ना ख़रीदा सकी। पइसा से केहू अपना माई बाबूजी आउर घर-परिवार के सदस्य लोग से शुभकामना आ सुख समृधि के आशीष ना खरीद पाई।

आज जरूरत ई बा कि परिवार के सदस्य एक दोसरा पर विश्वास करे, एक दोसरा के धोखा ना देबे, एक दोसरा के सुख दुःख में मन से शामिल होखे आ सहयोग करे ना कि देखावा खातिर।  माई बाबूजी ऊ छायादार गाछ होखेला लोग जेकर छाया सब बच्चा लोग पर एक जइसन मिलेला जइसे कि सूर्य-किरण। का हमनी के नवही पीढ़ी अपना अपना माई बाबूजी जइसन ऊ छायादार गाछ ना बन सकेनी जा जवना से प्रेरित होके हमनी के भावी पीढ़ी में भी ई गुण प्रसारित हो सके।

एकरा आलावा आज समय के इहो मांग बा कि हमनी जा अपना अपना माई बाबूजी से भोजपुरी के समृद्ध वाचिक परंपरा के सीखीं जा आउर आज जरुरत इहो बा कि माई बाबूजी के मधुर कंठ से जवन किस्सा कहानी, गीत, भजन, सोहर, झूमर सुनेके मिलत बा ओकरा के रिकार्ड कइल जाए आ ओकरा के लिपिबद्ध कइल जाव।

ए दिशा में हम अपना माई के मुख से उच्चारित कुछ मांगलिक गीत के रिकार्ड, लिपिबद्ध आ अनुवाद करे के शुरू कर देले बानी ताकि दुनिया के बता सकीं कि हम अपना माई बाबूजी से का सीख पइनी। बाबूजी के लिखल एगो कॉपी हमरा लगे थाती स्वरूप बा जवना में राहू पूजा से संबंधित गीत बा। बाबूजी के लिखल राहू पूजा के गीत त हमरा लगे बा जवना के हम पढ़  सकेनी पर कवना तरह से गावल जाई ई हम अपना बाबूजी से ना सीख सकनी जवना के अफ़सोस जिंदगी भर रही। एही कारण हम चाहत बानी कि रउवा लोग भी अपना अपना माई बाबूजी से भोजपुरी के समृद्ध वाचिक परंपरा के सीखीं। कोरोना महामारी के दौर में माई बाबूजी से परिवार के एक साथ बांध के रखे के गुण भी आज सिखल जरूरी महसूस हो रहल बा। देर भइला पर कहीं माई बाबूजी के साथे समृद्ध परंपरा के अंत ना हो जाए।

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