हमार स्वतन्त्रता सेनानी माई-बाबूजी

हमार स्वतन्त्रता सेनानी माई-बाबूजी

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Posted: August 13, 2021
Category: आलेख
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सुरेन्द्र कुमार रस्तोगी

हमार बाबूजी रामनाथ रस्तोगी के जनम 3 सितम्बर 1926 के कुदरा (कैमूर) बिहार के एगो जमींदार परिवार में भइल रहे। हमार बाबा परमेश्वर शाह गान्धीवादी रहले आ घर में चरखो चलत रहे। बाबूजी के शुरुआती पढ़ाई गाँव के स्कूल में भइल। एकरा बाद तिलौथू आ फिन सासाराम हाई स्कूल में दाखिल लेले।

पढ़ाई के दौरान एक दिन अचके अखवार के पहिलका पन्ना प नज़र पड़ल  “भारत माता की आत्मा ब्रिटिश बूटों के नीचे कराह रही है। भारत के लाल, गुलामी की जंजीरों से जकड़ लिए गये है। महात्मा गान्ही, नेहरु आदि नेता जेल में बन्द कर दिए गये हैं।” उ भावुक हो गइलें, कांप उठलें आ रोए लगलन, कहवाँ जाई का करी कुछ समझ में नइखे आवत, अपना मातृभूमि खातिर बेचैन हो गइलें आ नवयुक संघ के निर्वाचित महामंत्री के रूप में आपन कईगो साथियन के साथ कुदरा थाना फूंके में दरोगा द्वारा पकड़इला के परयास में उहाँ पड़ल लोटा से दरोगा के दांत तोड़ भागे में सफल हो गइलें।

सन् 1942 में स्कूली लइकन पर अत्याचार होखे लागल आ महात्मा गान्ही जी  अंगरेजन के भारत छोड़ खातिर आहवान कइलें। ओकर प्रभाव बाबूजी के मानस पटल प पड़ल आ उ ब्रिटिश सम्राज के खिलाफ आन्दोलन में कूद पड़लें। आपन दोस्तन के साथे सरकारी कार्यालय के तोड़ फोड़ देलें आ संचार व्वयस्था अउर रेलवे लाइन के आवाजाही रोकला के आरोप में लाठी चार्ज भइल जेमे घवाहिलो हो गइलें।

12 अगस्त 1942 तक स्वतन्त्रा संग्राम आन्दोलन पुरज़ोर फइले लागल। बाबूजी ओ घरी सासाराम हाई स्कूल में 10वां किलास में पढ़त रहले। अंगरेजन के बढ़त अत्याचार के खिलाफ आपन दोस्तन के साथ धरना प बइठ गइलें। गोली के बउछार शुरू हो गइल, जेमे उनका गोड़ में 3ठो गोली लागल, बुत मरे से बच गइलें। इनका के गिरफ्तार क के इनकर अउर सब सथियन केदार सिंह, रामअधार सिंह, जगदीश प्रसाद, निरंतर सिंह, सूयमल, तारा सिंह, इन्द्रमन पाठक आदि के घिसिअवते सासाराम जेल में डाल देहलसन जहाँ 145 भारतीय दंड विधान के अधीन 6 माह सश्रम कारावास के सजा सुनावल गइल अउर 100 रूपया के दंडो लागल।

तीन महीना के बाद इनका के हजारीबाग सेंट्रल जेल में बदली क देलसन। जेल में जगतनारायण लाल, जगलाल चौधरी, रामबृक्ष बेनीपुरी, सदानंद मिश्र से दोस्ती भइल। पहिलही से इनकर अभिन्न मित्र (लरिकइंये के साथी) जयप्रकाश नारायण आपन कइगो दोस्तन रामानंद मिश्र, योगेन्द्र शुक्ल, सूर्य नारायण सिंह आ गुलाल जी साथ बन रहले। मित्र मंडली के एह टोली से बाबूजी के अउर बल मिलल। जय प्रकाश के जेल से मुक्ति दिलावे खातिर चिंता में पड़ गइलें। एक दिन संस्कृतिक कार्यक्रम के दउरान जेलरन आ दोसर कैदीयन के मनोरंजन में उलझवले रखलन आ ओह घरी जयप्रकाश नारायण आपन पांच गो साथियन के साथ 9 नवम्बर 1942 में जेल के डड़वारी फान के भाग गइलें।

दिन प दिन उनका दिल में देश प्रेम के प्रति लालसा बढ़ते गइल। जेल में रह के भी आपन दोसर बंदी साथियन के देश प्रेम के भावना आपन गीत, कविता से जोश भरत रहन अउर बाहर के दोस्तन के भी चिठ्ठी के जरिये भारत माई के गुलामी से मुक्ति दिलावे खातिर उजागर करत रहलें। मार्च 1944 में आपन साथियन के साथ जेल से रिहा भइलें। एही दरमेयान उनकर बिआह हो गइल।

आगे बेसी पढ़े खातिर काशी विद्यापीठ में नामांकन करवले। पढ़े के दउरान लाल बहादुर शात्री, सम्पुरनानंद, आचार्य कृपलानी, अलगूराम शास्त्री, शम्भूनाथ मिश्र, आचार्य नरेन्द्र देव लेखा कईगो नामी नेतन से समपरक भइल, जेकरा से देश प्रेम के भावना फिन से जाग उठल आ  कई गो संस्था से जुड़के तन-मन-धन से देश सेवा कइलें। अंतत: 1947 में सुखद सबेरा परगट हो के विशाल भारत में छा गइल यानि आपन देश आजाद हो गइल।

बाबूजी भारतीय कांग्रेस के सदस्य, विद्यालय समिति के मेम्बर, ग्राम पंचायत के सदस्य, कोपरेटिव सोसाइटी के मंत्री, प्रजा समाजवादी पार्टी के मंत्री, डेलिगेट के सदस्य आ हरिश्चन्द्र बंशीय समाज के महामंत्री आदि पद प रहके विकास के कइ गो काम कइलें। आपन दोस्तन के साथ मिलके पूंजी पतियन के खिलाफ भी आपन आवाज बुलंद कइलें। इनकर उत्साह अउर समाजवादी भावना के भापत राम मनोहर लोहिया (ओ घरी लोहिया जी कुदरा में आइल रहन) उनका के राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेवे खातिर प्रेरित कइलन। संयुक्त सोसलिट पार्टी (लोहिया दल) के महामंत्री बनवलन, जहां बिपक्षी इनकर सम्मान करस उहा सत्ता के लोग आदर देस। कुदरा राजनीति के विद्यापीठ रहे आ एगो जमाना रहे कि एकरा के मास्को कहल जात रहे । हर पार्टी के लोगन के गुरु रहे कुदरा। एकरा बादे बिहार अउर दोसरा जगहा प इहाँ से सनेश भेजल जात रहे । इहा प गान्ही आश्रम रहे जहां चरखा कटाई, भजन आदि होत रहे ।

बाबूजी के छुआछूत, भेदभाव, धर्मभेद, जाति-पाती आ अमीरी-गरीबी से उपर उठ के जिए के आदत रहे। समाज में प्रताड़ित, शोषित आ कमजोर लोगन के वरग के प्रति ढेरे सहानभूति रखस अउर बिकट परिस्थिति में उनका के हर तरह से मदद करस। मुहर्रम में तजिया कुदरा बजार में अपना दुआरी प लोग रखे ना देस, जेकरा चलते हिन्दू-मुस्लिम में रोज हल्ला होत रहे। बाबूजी के ई बरताव निक ना लागल आ एकता कायम करे के उद्देश से अउर सदभावना के प्रति अपना दुआरी प रखे के आदेश देहलन। तब से बुत सन् 1960 से तजिया हमरे दुआरी प आजो रखल जाला। ई सदभावना अउर भाईचारा के एगो मिसाल बाटे।

सन् 1950 में रामनाथ रस्तोगी जन कल्यान खातिर विजया दशमी के दिन विजय मेडिकल स्टोर के स्थापना कइलें जहवा दवाई के अलावा जरूरत के हर समान चौबीसों घंटा मिलत रहे। एकरा साथे होमियो सेवा सदन भी खोललें जहां फ्री में दवा दिहल जात रहे। अउर साप बिच्छू के कटला के दवाईयों मुफ्त में दिआत रहे ई ब्यवस्था आज भी कायम बाटे। बाबूजी आपन जिन्दगी के एगो-एगो क्षण समाज के विकास अउर जनहित में लगावे के प्रयास करत रहन। सच में उ एगो पुरुषार्थी, साहसी आ समाजसेवी महापुरुष रहलें। 6 नवम्बर 1969 में अइसन महान ब्यक्ति हमनी के छोड़ के सदा-सदा खातिर देवलोक चल गइले।

बाबूजी के अवसान के बाद हमरा माई जानकी देवी के सन् 1972 में प्रधानमंत्री इन्दिरा गान्ही ताम्रपत्र से सम्मानित कइली। डेगे-डेग आपन पति आ स्वतंत्रता सेनानियन के सहयोग देवे खातिर भारत छोड़ो आन्दोलन के स्वर्ण जयंती के मोका प जानकी देवी के “स्वाधीनता संग्राम के महान योद्धा“ से पूर्व मुख्यमंत्री जगरनाथ मिश्र 11 अगस्त 1992 में राजधानी पटना में सम्मानित कइले। 18 अगस्त 1993 में तत्कालिन प्रधानमंत्री पी॰ बी॰ नरसिम्हा राव, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह अउर पूर्व रेलमन्त्री सी॰ के॰ जाफर सरीफ भी सम्मानित क के बधाई पत्र भेंट कइले।

माई-बाबूजी के स्मृति में भारत सरकार के संचार मन्त्रालय के डाक विभाग सन् 2011 में “माई स्टाम्प“ योजना के तहत डाक टिकट जारी कइलस।

व्याकुल जी के श्लोगन संदेश


  • अहिसा परमधरम ई कर ल नोट ।


एकरा के जीनगी में उतार ल न होई खोट ॥

  • जेकर घर में चरखा से कटे सूत ।


उ घर रही सुखी, लईका बनी सपूत ॥

  • ऊच-नीच, छुआ छूत के भेद से रह दूर ।


हम भारतवासी एक हई इहे रहे गुरुर ॥

  • आपन मतारी भाषा के प्रति रख ध्यान ।


तबे हमार भारत देश होई महान ॥

  • पेड़ लगा केकर समरपन ।


इहे ब पुरखन के तरपन ॥

  • परयावरन के जे करी गंदा ।


ओकरा नटई में फांसी के फंदा ॥

  • पेड़-पौधा, धरम स्थल के क र सुरक्षा ।


तब हमार धरम-करम बा अच्छा ॥

  • नशा-पान खातिर काहे बाड़ आकुल ।


स्वस्थ, स्वक्षता के प्रति र ह व्याकुल ॥

  • दीन-दुखिया के सेवा भगवान के ह पूजा ।


माई-बाबु के समान नइखे कोई दुजा ॥

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