पापा-मम्मी के तालमेल

पापा-मम्मी के तालमेल

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Posted: August 13, 2021
Category: आलेख
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डॉ. कादम्बिनी सिंह

पापा के आ मम्मी के देख के इहे बुझाला की नाना के चुनाव केतना सही रहे, दुनू  लोग एकदम एकही अइसन विचार धारा के, दुनू लोग घर-परिवार के प्रति एकदम समर्पित!

ई बात लखनऊ में ओह घरी के ह जब हमनी के छोट रहीं सन। हम पढ़े गइल रहीं आ छोट भाई घरहीं खेलत रहे। ओह दिन भगवान जी दिनो तनी निमन कइले रहलें, आकाश साफ आ हवा ओतने सिहरावन कि बाउर ना लागे, मोटा मोटी बुझ लीं कि जाड़ केवाड़ी खटकावत रहे आवे खातिर! भाई अंगीठी से तनीये सा दूरिया बइठल रहे, आ मम्मी कुकर ओहि अंगीठी पर भात बने खातिर चढइले रही। अब का जाने का बात भइल रहे कि कुकरवा सिटिये ना देवे,आ भाई त छोट रहे ऊ निर्द्वन्द् होके ओहिजा खेलत रहे, तले अचानक इतना जोर से आवाज भइल कि बुझाइल कि दस गो बंदूक एक सङ्गे छुटली ह सन! हमरा स्कूल ले सुनाइल रहे।

कुकर त फाट गइल जेतना गरम भात ओमे रहे ऊ छत पर सटल जा के आ भाई के देह में जेतना भाग खुलल रहे, भात से जर गइल! ऊ आवाज से अइसन डेरा गइल कि सहम गइल रहे आ रोवत रहे खूब! मम्मी अकेले रहली। हमरा के स्कूल से बोलवा लेली। पापा के ऑफिस में कइसहूँ सूचना भेजवइली। पापा भागल गइलन। ओतना देर में मम्मी सब भात देह में से छोड़ा देली।

पापा पहुंच के तुरंत भाई के डॉक्टर किहाँ ले गइलन आ दवाई मिलते राहत मिले लागल भाई के अचरज के बात रहे कि जेतना जरल रहे ओतना फोकचा ना घिंचलस ! दवाई आ माई दुनू के मिलल जुलल असर के ओजह से!

हम त डेराइल रहीं कि कहीं पापा लापरवाही के इल्जाम मम्मी पर मत लगा देस आ खिसिआस। बाकिर पापा तनिको ना खिसिअइलन मम्मी पर। बल्कि अपना ओरी से इतना भाई के दुलार देलन की हफ्ता भर में ऊ ठीक होखे लागल। मम्मी रोये घबरा के, बाकि पापा के कबो उदास ना देखनी। हो सके कि लइकन के आगे ऊ ना देखावस आपन उदासी!

मां पापा के आपस के तालमेल आ नेह-स्नेह से घर में फेरू पहिले अइसन माहौल हो गइल। मम्मी से फेर कबो ओइसन चूक ना भइल।

ओकरा बाद अगिला दसहरा के मेला में रावण के जरल देखे खातिर सब लोग गइल। ऊ मेला हमनी के एसे पसंद आवे काहे कि ओजा माटी के खूब खेलवना मिले। ओह दिन मुड़ी हिलावे आली बूढ़ा बूढ़ी किन के ली अइनी सन आ खूब खेलीं सन, बूढ़ा-बूढ़ी के मुड़िया छू छू के। कइयों हाली मम्मी-पापा के ओह लोग से तुलना कइल जाओ कि जब तूं लोग बूढ़ हो जइबs  लोग त अइसही हर बतिया पर मूडी हिलावे के परी।

एही तरे खुसीहाली से हमनी के बड़ कइलस लो। हमनी के पढ़ा-लिखा के काबिल बनवलस लो। हमनी के तीनों भाई बहिन में संस्कार के बीज बोए वाला माँ पापा के अथाह खुसी मिलो।
ई ओही लोग के त्याग, समर्पण आ दीहल संस्कार ह कि हर मोड़ पर सब लोग एकजुट रहेला।

 

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