भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक से भी कष्ट

भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक से भी कष्ट

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Posted: August 17, 2021
Category: सुनीं सभे
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आर.के. सिन्हा

अगर रउआ कवनो ठोस आधार के बिना तैयार कइल कवनो प्रोजेक्ट में मीन-मेख निकालsतानी, त बात कुछ समझ में आवता। लोकतंत्र एतना हक सबके देला। पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के आगे अवरोध एक साजिश के तहत खड़ा कइल जा रहल बा। एकर निंदा अकारण कइल जा रहल बा। समझल जा सकेला कि कुछ तत्वन के लागेला कि एतना विशाल प्रोजेक्ट केन्द्र में मोदी सरकार के सरपरस्ती में बनला से उनके भविष्य के संभावाना पर प्रतिकूल असर होई। ये प्रोजेक्ट के आगे खड़ा करे वाला तमाम अवरोध के कड़ी में ताजा मामला तब सामने आइल जब एपर रोक लगावे खातिर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका तक दायर कइल गइल। पर याचिकाकर्ता के लेने के देने पड़ गइल। दिल्ली हाईकोर्ट याचिकाकर्ता के कड़ी फटकार लगा के कहलस कि निर्माण कार्य के नइखे रोकल जा सकत। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल आ न्यायमूर्ति ज्योति सिंह के पीठ कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के दौरान परियोजना रोके जाये के अनुरोध करे वाली याचिका खारिज करके कहलस कि याचिका कवनो मकसद से ‘‘प्रेरित’’ रहे अउर ‘‘वास्तविक जनहित याचिका’’ ना रहे। न्यायालय याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपया के जुर्माना भी लगवले बा।

दरअसल राष्ट्रीय महत्ता से जुड़ल प्रोजेक्ट के कवनो भी तरह से रुकवावे के कोशिश शर्मनाक बा। ये प्रोजेक्ट के लेके कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी केंद्र पर कई बार हमला बोल चुकल बाड़न। का उनका पता बा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पूरा भइला के बाद सरकार के हर साल लगभग एक हजार करोड़ रुपया बाँची जवन ओकरा किरये के रूप में देवे के पड़ेला। फिलहाल आजादी के 74 वर्ष बीतला के बादो केन्द्र सरकार के बहुत सा दफ्तर प्राइवेट इमारतन से काम कर रहल बाटे जेकरा के सरकार के हर साल एक हजार करोड़ रुपया से अधिक किराया के रूप में देवे के पड़ेला। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नया इमारत बनला के बाद कवनो भी सरकारी दफ्तर किराया के जगह से ना चली। एक बात अउर समझ लेवे के चाहीं कि अब जवन भी नया सरकारी इमारत बनी उ सब गगनचुंबी होई। अब चार-पांच फ्लोर के इमारतन के बने के दौर गुजर गइल बा। जब एडविन लुटियन देश के नया राजधानी के सरकारी इमारतन के डिजाइन बनावत रहले, तब दिल्ली के आबादी 14-15 लाख के आसपास रहे। अब ई ढाई करोड़ पार कर रहल बा। अब इहाँ कार अउर दोसर वाहनन के तादाद भी एक करोड़ से कहीं अधिक होई। सब नया इमारत में पर्याप्त भूतल कार पार्किंग होई। अभी कवनों भी सरकारी दफ्तर में कार पार्किंग के पर्याप्त व्यवस्था नइखे।

अभी ई कहल जल्दीबाजी होई कि नया संसद भवन आ बाकी बने वाला इमारतन के डिजाइन कवना स्तर के होई। हां, एतना त जान ही लीं कि नया बने वाला इमारत डिजाइन के लिहाज से ओतना या ओहू से कहीं ज्यादा भव्य आ बेहतरीन होई जवन लुटियंस आ उनकर साथी लोग डिजाइन कइले रहे। सरकार सेंट्रल विस्टा के विकास खातिर अहमदाबाद के मैसर्स एच सी पी डिज़ाईन, प्लानिंग एण्ड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के जिम्मेदारी देले बा। एकर अभी तक के ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहल बा। ई फ़र्म मुंबई पोर्ट काम्प्लेक्स, गुजरात राज्य सचिवालय, आई आई एम अहमदाबाद आदि के लाजवाब डिज़ाइन तैयार कइले बा। एसे एकरा क्षमता पर सवाल खड़ा कइल गलत होई। सेट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के हासिल करे खातिर कुल 6 नामी गिरामी आर्किटेक्चर फर्म  दावा पेश कइले रहे। वो सब के दावा अउर पहिले के काम के गहराई से अध्ययन कइला के बाद  बाजी एच सी पी डिज़ाईन, प्लानिंग एन्ड  मैनेजमेंट प्राईवेट लिमिटेड मार लिहलस। कुछ सिरफिरा लोग कहत फिर रहल बा कि अहमदाबाद के फर्म के एतना खास प्रोजेक्ट के दायित्व सौंपे में निष्पक्षता आ पारदर्शिता ना देखावल गइल। पर दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन के प्रमुख आ राजधानी दिल्ली स्थित स्कूल ऑफ़ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के डायरेक्टर प्रो.पी.एस.एन राव के अध्यक्षता वाली कमेटी पर बिना पुख्ता प्रमाणन के सवाल खड़ा कइल गलत बा। ओइसे भी लोकतंत्र में केहू के जुबान त बंद नइखे कइल जा सकत। ई सबका पता बा कि जे सवाल खड़ा कर रहल बा उ एक खास एजेंडा के तहत ही काम कर रहल बा। ऊ लोग निश्चित ही बुरी तरह बेनकाब होई।

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत प्रधानमंत्री आ उप राष्ट्रपति के आवास के साथ केतने नया कार्यालय भवन अउर मंत्रालय के कार्यालय लिहले केंद्रीय सचिवालय के निर्माण भी होखे वाला बा। सेंट्रल विस्टा परियोजना के सितंबर 2019 में घोषणा कइल गइल रहे। 10 दिसंबर 2020 के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परियोजना के आधारशिला रखनीं। एकरा अलावे एक केंद्रीय सचिवालय के भी निर्माण कइल जाई। एकरे साथे इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक तीन किलोमीटर लंबा ‘राजपथ’ में भी परिवर्तन प्रस्तावित बा। जब देश के राजधानी नई दिल्ली बनल त इहँवा के सब प्रमुख इमारतन के बने में करीब 20 बरिस लागल रहे। लेकिन सेंट्रल बिष्टा के कार्य त करोना काल में ही मार्च 2024 तक समाप्त हो जाई। यानी 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहिले देश के सेंट्रल विस्टा नया रूप में मिली। अब विनिर्माण क्षेत्र में नया-नया तकनीक आ गइल बा। एमे काम बहुत तेज गति से होला। एसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो ही जाई अइसन लागsता। सरकार के चाहत बा कि संसद के नया इमारत भी 2022 तक बन जाय जब देश अपना आज़ादी के 75वीं वर्षगांठ मना रहल होखे। अगर रउआ संसद भवन के आसपास से गुजरीं त देखेम कि संसद भवन परिसर पर काम तेजी से चल रहल बा। सारा परिसर के लमहर-लमहर बोर्ड से कवर कइल जा चुका बा।

हमरा एक घटना इयाद आवsता। पोलैंड जब आजाद भइल तब पोलैंड के नया सरकार देश के सबसे बड़ा चर्च के तोड़ के ओही स्थान पर एक नया सुन्दर चर्च के निर्माण के आदेश देहलस। एकर आलोचना होखे लागल। लोग कहल कि पोलैंड त ईसाई देश ह। इहाँ पुरान सुंदर विशाल चर्च के तोड़ के उहाँ फिर से नया चर्च बनवला के का तुक बा। पोलैंड के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री के तर्क रहे कि ऊ चर्च अंग्रेज शासक लोग द्वारा निर्मित रहे जवन बार-बार हमनीं के गुलामी के इयाद दिलावत रहे। हम ई नइखीं चाहत कि हमार नया पीढ़ी गुलामी के चिन्हन के देख के शर्मिंदा होखे, एही खातिर हम देश में गुलामी के चिन्हन के नष्ट करके आजाद पोलैंड के नया चिन्हन के निर्माण करे के चाहsतानी। हम ई उदाहरण मात्र एक संकेत के रूप में देले बानी। केहू भी स्वाभिमानी प्रधानमंत्री गुलामी के प्रतीकन के साथ दिन-रात जी कइसे सकता?

खैर ई सब बात छोड़ीं। यकीन मानी कि नया सेंट्रल विस्टा के इमारतन के डिजाइन आ ये सारा क्षेत्र के लैंड स्केपिंग विश्व स्तरीय होई। नई दिल्ली के अनेक इमारतन के दशा ओइसे भी बेहद खराब हो चुकल बा। ओकरा मेंटनेंस पर बार-बार करोड़ों खर्च कइला से बेहतर बा कि ओकरा स्थान पर आधुनिक आ बेहतरीन इमारत बने। अंत में एक बात नोट कर लीं कि समूचा “सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट” पर मात्र 20 हजार करोड़ रुपया व्यय होखे वाला बा। एतना धन के रिकवरी त होइए जाई काहे से कि सरकार के सेंट्रल विस्टा के बनला के बाद हर साल एक हजार करोड़ रुपया किराया पर खर्च ना करे के होई।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं)

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