प्रथम विद्रोही : महाराजा फ़तेह बहादुर साही

प्रथम विद्रोही : महाराजा फ़तेह बहादुर साही

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Posted: September 27, 2021
Category: आवरण कथा
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विश्वजीत शेखर

देश के आज़ादी के पचहत्तर बरीस पूरा होखे वाला बा आ सरकार का ओर से 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' नाँव से एगो कार्यक्रम चल रहल बा। एह कार्यक्रम में इतिहास में विस्मृत आज़ादी के नायक-महानायक लोग के भी चिन्हित क के उचित सम्मान देहला के योजना बा। ए कार्यक्रम के नज़र से अगर हमनी का पूर्वी उत्तर प्रदेश आ पश्चिमी बिहार के इतिहास के देखल जाव त अठारहवीं सदी के सारण्य क्षेत्र के राजा आ राजतमकुही के संस्थापक महाराजा फ़तेह बहादुर शाही के संघर्ष गाथा बहुत प्रासंगिक लागी।

महाराजा फ़तेह बहादुर शाही के राजधानी हुस्सेपुर रहे जवन ए बेरा के गोपालगंज जिला में भोरे प्रखंड के लगे पड़ेला। इनका राज्य के चौहद्दी ए बेरा के गोपालगंज, सारण (छपरा), सिवान आ कुशीनगर जनपद में रहे। राजा साहेब के शासन काल में ए बेरा के बिहार राज्य सूबा-ए-बंगाल के हिस्सा रहे जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र सूबा-ए-अवध के अंतर्गत स्थापित रहे। महाराजा फतेह बहादुर साही द्वारा बंगाल क्षेत्र के मालगुज़ारी पटना स्थित बंगाल नवाब के कार्यालय में जबकि अवध क्षेत्र के मालगुज़ारी गोरखपुर स्थित नवाब अवध के कार्यालय में जमा करावल जाव।

बक्सर के लड़ाई में कंपनी सरकार से अवध आ बंगाल के सम्मिलित हार के बाद भइल सन 1765 ईसवी के इलाहाबाद संधि के अनुसार बंगाल क्षेत्र पर कंपनी सरकार के हुकूमत कायम हो गइल आ एइजा के मालगुज़ारी के मालिकान हक़ कंपनी सरकार के मिल गइल। महाराज फतेह बहादुर साही गजब के वीर आ स्वातंत्र्यचेता पुरुष रहनी। उहाँ के कवनो विदेशी शक्ति के मालगुज़ारी दिहल उचित ना लागल आ उहाके सन 1765 में कंपनी सरकार से विद्रोह क देहनी। महाराजा फ़तेह साही के विद्रोह ईस्ट इण्डिया कंपनी के सत्ता स्थापित होखे के बाद कइल पहिला विद्रोह रहे। अक्षयवर दीक्षित जी सहित अनेक विद्वान लोग फतेह साही के स्वतंत्रता संग्राम के पहिला नायक के रूप में वर्णित कइले बा।

जयचंद आ मीर जाफ़र से भरल भारत के इतिहास में हर स्वतंत्रता प्रेमी के अपना विद्रोह के कीमत चुकावे के पड़ल बा। महाराजा फ़तेह साही अंग्रेजन से मिलके राज चलावे के स्थान पर उनसे लोहा लेबे के ठान लिहलीं। अंग्रेज जब कवनो कीमत पर उहाँ के राज्य में मालगुज़ारी ना वसूल पवलें सन तब ऊ राजधानी हुस्सेपुर के तबाह कर दिहले सन। अवध पर कंपनी हुकूमत के अधिकार ना रहे, एकर लाभ उठाके राजा साहब अपना राज्य क्षेत्र के अवध वाला हिस्सा में झरही नदी के किनारे, बाकजोगनी जंगल में (वर्तमान तमकुही, कुशीनगर) आपन कैंप लगवलीं आ गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से कंपनी हुकूमत से लड़े लगलीं। राजा साहब सन 1790 के आसपास तमकुही के राजधानी बना के राज तमकुही के स्थापना कइलीं जवन वर्तमान में एगो नगर पंचायत, विकास खंड अउर तहसील मुख्यालय बा।

महाराजा फ़तेह शाही जी कंपनी हुकूमत के खिलाफ 23 बरिस तक लगातार संघर्ष कइलीं जेकरा चलते उहाँ का जियते कम्पनी सरकार तमकुहीराज का क्षेत्र में कर वसूली ना करे पाइल। अंगरेज अपना पत्र अउरी गजट में लिखले बाड़े सन कि "बाजीराव पेशवा जेतना परेशान हमनी के सिपाहिन के ना कइलन, ओसे कई गुना अधिका फतेह बहादुर शाही कर दिहलन। प्रसिद्ध विद्वान महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी फतेह शाही के महाराणा प्रताप के समकक्ष योद्धा लिखले बानी। 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रम के माध्यम से महाराजा फ़तेह बहादुर शाही के चिन्हित कs के यथोचित सम्मान दिहल, इहाँ के गौरवशाली इतिहास अउरी महाराजा के संघर्ष के जन मानस में स्थापित करे के एगो सशक्त कदम होई जेसे आवे वाली पीढ़ी स्वतंत्रता के ए महानायक के जीवन से प्रेरणा ले सकी।

परिचय : विश्वजीत शेखर राय के मूल निवास कुशीनगर जनपद के सलेमगढ़ ग्राम ह। हैदराबाद में एगो बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी में कार्यरत बानी। भोजपुरी भाषा आ साहित्य में रूचि के कारण तमकुही समाचार इ पत्रिका के संपादक बानी। 

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