स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ल सीवान के कई गो अनकहल इतिहास

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ल सीवान के कई गो अनकहल इतिहास

By:
Posted: September 27, 2021
Category: आवरण कथा
Comments: 0

डॉ. अमित कुमार मुन्नू

आज़ादी के लड़ाई में भोजपुरी माटी के बड़हन योगदान रहल बा l भोजपुरी के ई क्षेत्र वीर-बाँकुड़न के जन्मभूमिये रहल बा l भारत के पहिला राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, चंपारण आन्दोल के मुख्य यजमान बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद, बिहार के पहिलका ग़ैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा, आज़ादी पावे खातिर काला पानी के सजाय काटेवाला श्यामदेव नारायण, पटना सचिवालय पर तिरंगा झण्डा फहरावे के क्रम में शहीद उमाकांत सिंह, शहीद शिरोमणि फुलेना प्रसाद श्रीवास्तव, शहीद शुभलाल महतो, सीवान के शहीद सराय गोलीकांड में शहीद बच्चन विद्यार्थी, शहीद छट्ठू गिरि, टमटम हाँकेवाला शहीद झगड़ू साह l एकरे साथे सीवान ज़िला में शहीद सीताराम, बोधा बरई, रामसेवन राय, रामदेनी कुर्मी, मेवालाल पासवान, खखन डोम आ सीवान ज़िला के पहिला शहीद गंगा प्रसाद राय के साथे ‘बाबू’ (राजेन्द्र बाबू) के बड़ भाई महेन्द्र प्रसाद, श्रीमती प्रभावती देवी, वीरांगना तारा रानी श्रीवास्तव, श्रीमती राजवंशी देवी पर त बहुत लोग लिखल-पढ़ल आ एह लोगन के विषय में सब केहू जानेला, लेकिन आज़ादी के लड़ाई में सीवान के कई गो घटना, परिवार आ आदमी अइसनों बा जेकर जमीन पर काम आ योगदान त बहुत रहे बाकिर ओकरा के इतिहास के पन्ना में स्थान ना मिल सकल l एह से ओह लोगन के समर्पण के जानकारी क्षेत्रीय स्तर पर सिमट के रह गइल l काहेकि कवनों मन्दिर के चमकत कँगूरा त सबके ध्यान अपना ओर सहज ही आकृष्ट कर लेला l बाकिर ओह मन्दिर के नींव के मजबूती देबे खातिर ओह अँधकार के जवन ईंट आत्मसात कर लेले ओह ईंटन पर केकर ध्यान जाला ?

सन् 1921 में असहयोग आंदोलन के रचनात्मक पक्ष में दूगो काम बड़ा महत्त्व के करे के रहे-

1- राष्ट्रीय विद्यालय खोलल आ सरकारी स्कूलन के बहिष्कार

2- गाँव के झगड़न के अंगरेजन के कचहरी में ना भेज के पंचायत में ही ओकर निबटारा करावे के l

एही दूनू बातन पर आपन ध्यान केंद्रित करके सीवान ज़िला के कई लोग एह कामन में लाग गइल l सीवान में कई गो स्कूल खोलल गइल l जवना में ‘सीवान एकैडमी’ आ ‘कर्मयोगी स्कूल’ रहे l ‘सीवान एकैडमी’ स्कूल के अस्तित्व त आज नइखे l बाकिर ‘कर्मयोगी स्कूल’ आजो सरकारी स्कूल के रूप में चलता l

‘सीवान एकैडमी’ के संस्थापक आ सारण ज़िला परिषद के सदस्य बाबू बिलास बिहारी सहाय, वकील सन् 1921 में एह विद्यालय के राष्ट्रीय विद्यालय में परिणत कर देहनीं आ अपना उदेश्य के पूरा करे खातिर एह विद्यालय के प्रधानाचार्य अपना अनुज श्री रसिक बिहारी शरण, प्लीडर के बनवनीं l

बाबू रसिक बिहारी शरण देश-सेवा के काम में सुविधा होखे, एह खातिर उहाँ के छपरा के आपन चमकत वकालत के छोड़ के सीवान आ गइनीं आ उहईं वकालत करे लगनीं l इहाँ आके भी उहाँ के चैन से आपन वकालत ना कइनीं आ लगनीं देश के काम में गाँवा-गाईं के चक्कर लगावे l उहाँ के सीवान ज़िला के रघुनाथपुर थाना के पंद्रहियन गाँवन में ग्राम-पंचायत के काम खड़ा करे के बीड़ा उठवनीं l उहाँ के बड़ी लगन आ मेहनत से ओह काम के कइनीं आ ओह में सफल भी भइनीं l एतने भर ना उहाँ के दिघवलिया-सैचानी के पहिलका सरपंच भी भइनीं l ओह समय में इहाँ एतना पढ़ल-लिखल (एम. ए., एल. एल. बी.) सरपंच शायदे कोई दोसर बिहार में होखस l रसिक बाबू कांग्रेस के ‘मुठिया; (एक मुट्ठी अनाज कुल घर से) इकट्ठा करे में लोगन के हौसला बढ़ावनीं l कहल त इहाँ तक जाला कि इहाँ के जन-सम्पर्क एतना बेजोड़ रहे कि खाली सात-आठ गाँवन में पाँच महीना के भीतर चार-चार मन चाउर,आटा-दाल आदि ‘मुठिया’ के रूप में इहाँ के जमा क लेहनीं l जवना खातिर सारण ज़िला कांग्रेस कमिटी अपना सम्मेलन में इहाँ के विशेष धन्यवाद-पत्र देहलस l नमक-सत्याग्रह में रसिक बाबू आपन चमकत वकालत के छोड़ गाँव-गाँव में घूम-घूम के विदेशी वस्त्रन के बहिष्कार आ खादी के प्रचार के काम कइनीं l लोगन के खादी के इस्तेमाल करे खातिर प्रेरित कइनीं आ ओकरा पक्ष में जबरदस्त रूप से जनमत खड़ा कइनीं l इहाँ के एह कुल कामन में सर्वश्री रघुनाथ प्रसाद, धर्मनाथ मिश्र, बबन सिंह, गया दूबे आ वैदेही शरण दूबे के भरपूर सहयोग मिलल रहेl

एही तरह से राजेन्द्र बाबू के राष्ट्रपति के पद से सेवा-निवृत भइला पर सदाकत आश्रम में उहाँ के साहित्यिक-सचिव संत कुमार वर्माजी नमक आंदोलन के समय चैनपुर बाजार पर नमक बनावत, धरना देत बारह लोगन के साथे धरा गइनीं l पुलिस एह सब लोगन के बारह माइल उत्तर हसनपुरा बाजार पर अपना गाड़ी में बइठा के ले आइल आ एह बाजार में पहुँचला के बाद गाड़ी खराब के बहाना से गाड़ी ढकेले खातिर सबका के गाड़ी से उतार देहलस l एह लोगन के गाड़ी से उतरला के बाद एह लोगन के ओही जा छोड़ के पुलिस गाड़ी लेके भाग गइल l संत बाबू 13 अगस्त 1942 के जे पुलिस के डरे सीवान से भगनीं त अपना गाँवे दिघवलिया आ ओकरा बाद बलिया में जून 1943 तक फरारी के जिनगी बितवला के बादे सीवान लउकनीं l

सीवान में पटना कॉलेज जरवला के समाचार पढ़के विक्टोरिया मेमोरियल हाई इंग्लिश स्कूल आ डी. ए. वी. हाई स्कूल जरावे के काम युवा छात्रन के गुप्त संगठन ‘सिक्रेट सोसायटी’ के सदस्य लोग कइलस l एह दूनू स्कूलन के जरावे में सर्वश्री गोपीकृष्ण लाल दास, महेन्द्र कुमार, मोख्तार सिंह, विपिन बिहारी वर्मा, रामाधारप्रसाद अंशुमाली, रामचन्द्र प्रसाद, रवीन्द्रदत्त शुक्ल, श्याम किशोर तिवारी, नन्द कुमार उपाध्याय, परमानन्द यादव आ रमाकांत पाण्डेय के प्रमुख भूमिका रहे l

एह संगठन के संस्थापक सदस्य- गोपी कृष्ण लाल दास, महेन्द्र कुमार, रामचन्द्र प्रसाद, मोख्तार सिंह आ विपिन बिहारी वर्मा के सफल अगुआई में वी. एम. एच. इंग्लिश स्कूल में दू दिन ले हड़ताल करावे के काम अपना अंजाम तक पहुँचलl जवना के सफलता के उत्साह में आके ई लोगबबुनिया रोड के नीम के गाछ पर पुलिस के झाँसा देके झण्डा फहरवलसlओकरा बाद फौजदारी कचहरी पर झण्डा फहरावल गइल l जवना में श्री एस. सी. मुखर्जी एस. डी. ओ. साहेब राष्ट्रगान गइनीं आ ओकरा बाद उहाँ के लइकन पर लाठी चार्ज करा देहनीं l जवना में शंकर दास के गम्भीर चोट आइल l

एह संस्था के संस्थापकमहेन्द्र बाबू के अगुआई में पचरुखी आ सीवान में रेल लाइन आ ओकर खम्मा तुड़े के काम कइल गइल l एह काम में इहाँ के सहयोगी श्री रामनारायण प्रसाद रहनीं l सीवानजं. स्टेशन पर महेन्द्र बाबू आ श्याम किशोर तिवारी मिल के मढ़ौरा पुलिस के जवानन से रिवाल्वर छीन लेहलस आ भागे में सफल भी हो गइल l एह गुप्त संगठन के बइठक सीवान ज़िला के गाँवन में हमेशा होत रहे l बाद में एह संगठन के दिशा-निर्देश क्रांतिकारी नेता विद्या भूषण शुक्ल, वासुदेव नारायण सिन्हा, राजवंशी सिंह, जंगबहादुर सिंह (लाट साहेब) आ बिहार के टाइगर के रूप में चर्चित योगेन्द्र शुक्ल से मिले लागल l एही क्रम में सीवान के पंचमंदिरा के एह संगठन के एक गुप्त बइठक में जिलाभर के क्रांतिकारी लोग भाग लेहलस l जवना में योगेंद्र शुक्ल के देहल डायनामाइट से रेल पुलिया उड़ावे के काम के अंजाम तक पहुँचावे में रवीन्द्र नाथ शुक्ल, रामाधार प्र. अंशुमाली आ महेन्द्र कुमार सहित कुछ आउर लोग जान के बाजी लगा के पूरा कइलस l रवीन्द्र शुक्ल जी के पुलिस गिरफ्तार कइलस l अभी ई काम सेराइलो ना रहे कि सीवान थाना में राजेन्द्र गुप्ता के अगुआई में बम फेंक के ज़िला प्रशासन के चूल हिला देहल गइल l एह काण्ड में राजेन्द्र गुप्ता के बाकी सहयोगी श्याम किशोर तिवारी, महेन्द्र कुमार आ गोपीकृष्ण लाल दासत राजेन्द्र गुप्ता के साथ ही भाग गइल लोग l बाकिर थोड़े देर के बाद गुप्ता जी के घर से पुलिस उनका के धर दबोचलस आ ढंग से उनकर मरम्मत कइलस l गुप्ता जी पुलिस के ओतना मार बरदाश्त कर गइले l बाकिर अपना एह साथी लोगन के नाम ना बतवले l

एह संगठन के बाकी लोग भी अपना-अपना स्तर से सक्रिय रहे l जवना लोगन के नाम रहे-सर्वश्री वीरेन्द्र आज़ाद, रमा रमण, रामायण प्रसाद वर्मा, कपिलदेव श्रीवास्तव, पारसनाथ प्रसाद, बद्रीनाथ प्रसाद, रघुनाथ तिवारी, ललन प्रसाद, वीरेन्द्र, उमाशंकर द्विवेदी, सुरेन्द्र नाथ वर्मा, सूर्य नारायण सिंह (भोला बाबू), गणेश प्रसाद, नन्द किशोर, नारायण, विद्यानन्द दूबे, परमा यादव, किशोरी प्रसन्न सिंह, शुकदेव प्रसाद अग्रवाल, पुण्यदेव मिश्र, बद्री प्रसाद उर्फ बाबा, दीनानाथ, विश्वनाथ कलवार, राम अवतार प्रसाद, नगीना लोहार आ कौलेश्वर लोहार l एह में ई सब लोग राष्ट्रीय स्वयं-सेवक संघ के स्वयं–सेवक भी रहे आ राष्ट्रीय-आंदोलन में भी सक्रिय रहे l

एह तरह से सीवान ज़िला स्वतंत्रता-आन्दोलन के क्रम में आपन भूमिका बखूबी निभवले बा l

(परिचय-  डॉ. अमित कुमार मुन्नू l एम ए., एल. एल. बी., पीएच. डी., स्वतंत्र पत्रकार )

Hey, like this? Why not share it with a buddy?

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


About us

भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


Contact us



Newsletter

Your Name (required)

Your Email (required)

Subject

Your Message