समय के राग ह “सुनीं सभे”

समय के राग ह "सुनीं सभे"

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Posted: September 27, 2021
Category: संपादकीय
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मनोज भावुक

अपना समय के बात, करेंट अफेयर्स आ  देश-विदेश आ समाज के तत्कालिक स्थिति पर बोलल आ विमर्श कइल पत्रकारिता के प्रधान धर्म ह।

हालाँकि "भोजपुरी जंक्शन" भोजपुरी साहित्य, सिनेमा, संगीत, राजनीति आ तीज-त्यौहार के समेटत, परंपरा आ आधुनिकता के समन्वय के नाम ह, एकर अधिकांश अंक विशेषांक के रूप में प्रकाशित भइल बा, तेहू पर हरेक अंक में एगो अनिवार्य स्तंभ देश के दशा-दिशा पर मुखर होके बोलत-बतियावत रहल बा, समय के राग सुनावत रहल बा। एह स्तंभ के नाम बा- सुनीं सभे आ लेखक बानी वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व राज्य सभा सांसद आ एह पत्रिका के प्रधान संपादक श्री रवींद्र किशोर सिन्हा।

एही महीना में 22 सितंबर के सिन्हा जी के जन्मदिन बा त भोजपुरी जंक्शन परिवार ई तय कइलस कि काहे ना भोजपुरी जंक्शन के हर अंक में बिखरल अपना समय के दस्तावेज " सुनीं सभे" के संग्रह करके एगो विशेषांक के रूप दे दिहल जाय। त लीं, "सुनीं सभे विशेषांक" सुनीं सभे, गुनीं सभे आ अपना बहुमूल्य सुझाव से अवगत कराईं सभे।

भोजपुरी में कविता, कहानी, नाटक आदि के संग्रह ढेर बा। जहाँ तक हमरा जानकारी बा, करेंट अफेयर्स पर भी लिखात रहल बा बाकिर उ संग्रह के रूप में नइखे आइल या बहुत कम आइल बा। एह लिहाज से ई संग्रह भोजपुरी के रचना संसार के समृद्ध करी आ एगो नया आयाम दी।

एह अंक के साथे भोजपुरी जंक्शन दुसरका साल में प्रवेश करsता। भोजपुरी जंक्शन के ई पचीसवां अंक ह। एकरा पहिले "हम भोजपुरिआ" के चौदह गो अंक निकल चुकल बा। एह सब अंक में से अधिकांश विशेषांके बा, जइसे कि महात्मा गाँधी विशेषांक, वसंत अंक, फगुआ अंक, चइता अंक, वीर कुँवर सिंह अंक, लोक में राम अंक, कोरोना विशेषांक, कोरोना कवितावली, चीन अंक, दशहरा अंक, छठ विशेषांक, गिरमिटिया अंक, रजिंदर बाबू अंक, किसान अंक, नया साल अंक, माई-बाबूजी विशेषांक, माई-बाबूजी कवितावली आ देशभक्ति अंक आदि।

एह सब अंक में "सुनीं सभे" अनिवार्य रूप से शामिल बा। इहाँ तक कि विशेषांक के विषय चाहे जे होखे, "सुनीं सभे" ओकरा से इतर देश आ समाज के वर्तमान स्थिति पर बात करत रहल बा। इहे एह स्तंभ के खासियत बा, खुशबू बा, अनोखापन बा।

‘’ सुनीं सभे ‘’ के लेखक श्री रवींद्र किशोर सिन्हा के पत्रकारिता के मूलाधार राष्ट्रीयता के भाव बा; जवना के गूँज-अनुगूँज एह विशेषांक में संकलित सब लेख में सुनाई पड़sता। एह संग्रह में संकलित सब लेख अपना-अपना समय के कहानी कहत बा। ‘’ सुनीं सभे ‘’ वाकई ध्यान से सुने लायक बा काहे कि ओह में देश आ समाज खातिर खाली चिन्ते नइखे, चिंता से मुक्ति के उपायो बतावल गइल बा। समस्या के समाधान भी सुझावल गइल बा।

एह से, एह स्तंभ के सब आलेख के संग्रह के रूप में परोसत अपार खुशी हो रहल बा। उम्मीद बा, अपने सभे के स्नेह-दुलार मिली।

अंत में, ‘’ सुनीं सभे ‘’ के लेखक सिन्हा जी के जन्मदिन के मंगलकामना।

प्रणाम।

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भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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