जो रे कोरोना तोर माटी लागो..

जो रे कोरोना तोर माटी लागो..

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Posted: October 22, 2021
Category: आलेख
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अतुल कुमार राय

बात पिछला साल के ह। पश्चिम टोला के शशांकवा के बियाह मार्च में तय भइल। तब तक ना जाने कहाँ से ई माटीलगना कोरोना आ गइल। पंडित जी लइका-लइकी के बाप से कहनी कि जजमान,ढेर मत सोचीं। लइका-लइकी के देह से जून में एगो साइत बनत बा,कहीं त रख दी ?

लइका के बाबूजी कहनी कि ए समधी जी जवन डेट बा,तवन बटले बा।रउरा ढेर मत सोची... बियाह तय करीं..ले आवs हो कागज पर हल्दी छूआवs"

लेकिन ई का ?....लइका कइलस बवाल!

जून के गर्मी सोच के ओकर मिज़ाज उखड़ गइल। कहलस कि ना बाबूजी,जून में त एकदम बियाह ना होई। हम तनी और बरदाश के दवाई खा लेब लेकिन बियाह हमार जाड़ा में होई।

उ का बात बा कि जाड़ा में काफी आराम रहेला...!

बाऊजी कहलन, " रे बउचट तू जवन मेहरी के मुँह देख के आराम सोचत बाड़े,तवन सोच-सोच के हमार चानी के सगरो बार पाक गइल। बियाह के एक-डेढ़ साल बाद जाड़ा-गर्मी और बरसात सब एक्के लेखा लागेला रे बबुआ। बात मान जो, अपना मन के बेसी होशियार ना बनल जाला..."

लइका कहलस कि ना बाबूजी मेहरारु के बड़ा मन बा गोवा में हनीमून मनावे के। जाड़ा में ही सही रही।

खैर,लइका-लइकी के बाबूजी मान गइल लो।

नवम्बर 2020 में शादी के दिन रखा गइल।

तबसे लइका अँकवारी में तकिया लेके उंगली पर महीना गिनत सुते लागल...!रात-रात भर सगरी दू जीबी डाटा वीडियो कॉल में जियान होखे लागल।

एने नवंबर कहे कि हम अइबे ना करब। लइका कहे कि ए करेजा अब सगरी फीलिंग फफाता ! मंदिर पर जवन भजन सुनतानी, उहो डीजे लेखा लागत बा। चार किलोमीटर दूर कहीं बैंड बाजा बाजता त अइसन बुझाता कि हमरा बियाहे में बाजता।

लइकी बैंगलोर में नौकरी करत रहे..धीरे से कहलस कि प्लीज स्टॉप..लेट्स टॉक सम स्प्रिचुअल थिंग्स..अदरवाइज आई नॉट विल एबल टू स्लीप!

लइका मेहरारु के बात मान लिहलस और एगो आध्यात्मिक प्रश्न पूछलस, "ए करेजा हमरा ख़ातिर तू करवा चौथ के बरत रहबू, हम तहरा ख़ातिर का भूखब हो ?"

मेहरारु कहलस कि कुछ नहीं टाइम से बर्तन धो देना वही मेरे लिये सबसे बड़ा व्रत है।"

खैर, इहे कुल बतियावत सितंबर आ गइल। अब लइका के दू जीबी डाटा रात के बदले दुपहरिया में ख़तम होखे लागल...!

अक्टूबर बीतल और नवम्बर आइल त भइल दुर्घटना।

पता चलल कि होखे वाली मेहरारु के बड़का बाबा के देहान्त हो गइल.. अब का होइ हो शशांक, तब बियाह ना होई...?

साइत बढ़िया नइखे.. अब मई 2021 में होई।

आही दादा!  मई सुनते लइका के ऑक्सीजन लेवल 70 से नीचें जाए लागल। मेहरारु से कहलस कि बतावs ना हो सगरी गोवा के ख़्वाब माटी में मिल गइल..अब का होई ? तहरो बाबा के हमार बियहवे के समय डेट मिलल ह..?

मेहरारु फेर समझदारी देखवलस, "जैसे छह महीने बर्दास्त किया...छह महीने और सही.. खूबसूरत चीजें थोड़ी मेहनत के बाद मिलें तो और प्रसन्नता होती है, लेट्स एंज्वाय दिस टाइम! "

आही हो दादा ! अब का एंज्वाय करीं हो...

मेहरारू के ई बात लइका के करेजा में पत्थर लेखा लागे लागल..

लेकिन अभी-अभी ताजा जानकारी तक!

पिछला 12 मई के लइका के बियाह रहल ह.. !

बियाह बड़ा बढ़िया से भइल बा.. लेकिन दुःख के बात बा कि बियाह बाद लइका पाजीटिव होके क्वारंटाइन हो गइल बा।

आगे के सगरी कार्यक्रम पर ब्रेक लागल बा। ककन भी नइखे छूटल!

अब लइका जल्दी से निगेटिव होखे ख़ातिर दिन भर में तेरह हाली काढ़ा पियत बा। आतना जोगासन कर देले बा कि रामदेव बाबा ओकरा आगे हाथ जोड़ देले बाड़े कि कहीं पतंजलि मुनि प्रगट ना हो जास !

ओने मेहरारु आजुओ वीडियो कॉल पर बतियाके दिलासा देतिया.. " आएंगे अच्छे दिन, जरूर आएंगे...!

लेकिन लइका का करो ? घर में जस-जस पायल और चूड़ी के छन-छन आवाज सूनाता, तस-तस ओकरा करेजा के नस में छन-छन करत बा...!

चौदह दिन, चौदह बरिश के बनवास लेखा बीत रहल बा।

मेहरारु कहत बिया कि इससे तो अच्छा था कि मैं भी पाजीटिव हो जाती...

लइका के ना कुछ कहले कहाता, न रहले रहाता।

लेकिन लइका के बाउजी रोज खिड़की पर से पूछत बाड़े..!

"काहो इंजीनियर साहेब, कहत रहनी न कि बड़-जेठ के बात मानल जाला..अब ना जइबा गोवा..ना मनइबा हनीमून.. ?

लइका का करो... उदास बा.. और मने मन कहता.

जो रे कोरोना तोर माटी लागो.. !

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