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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min350

मनोज भावुक 

अगर अन्हरिया से अँजोरिया के तरफ बढ़े के बा त आपन धरती आ आकाश बढ़ावे के पड़ी। आपन सुरुज खुद उगावे के पड़ी। तबे भीतर अँजोर होई। राउर आपन औरा (आभा) बनी। मन खुश रही। जीवन मजबूती से जीयब आ बोध के क्षमता बढ़ी।

हम बुद्धि के बात नइखीं करत, बोध के बात करत बानी। बुद्धि त युद्ध करा रहल बा। यूक्रेन आ रसिया में उठल बवाल से त पूरा दुनिया में भूचाल आइल बा। मानवता तबाह बा। मानव जवना अदभुत गिफ्ट या वरदान ‘’ बुद्धि’’ के चलते प्राणियन में सर्वश्रेष्ठ बा, उहे बुद्धि ओकरा के उलझवले बा। बुद्धि आदमी के बालनोचवा बना देले बा। सभे आपन बाल नोचत बा। सुख आ आनंद देवे में समर्थ बुद्धि दुख, डर, पीड़ा आ दहशत दे रहल बा।

दरअसल बुद्धि ई त बता देले कि दिल का ह, कहाँ बा, कइसे काम करेला बाकिर दिल में का बा, ई बुद्धि ना बता पावेले। ई बोध से पता चलेला। एहसास से पता चलेला। ओकरा खातिर अपना मन के धरती आ विश्वास के आकाश के बढ़ावे के पड़ी। कई गो सरहद के तूरे के पड़ी। देश, जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा, लिंग आदि के सरहद। इहाँ तक कि अपना देह के सरहद भी तूरे के पड़ी आ अध्यात्म के एह गूढ़ रहस्य के समझे के पड़ी कि हम ना त देह हईं ना मन…. हमरा विस्तार के कवनो सीमा नइखे। एह से हमरा के सीमा आ सरहद में नइखे बान्हल जा सकत।

दरअसल समझ के तीन गो स्तर बा- बुद्धि, बुद्धू आ बुद्ध। बुद्धि के हालत त रउरा देखते बानी। दिया जरा के अँजोर करे के जगह लुकार भाँज के घर जरा रहल बा। दोसरो के आ अपनो। आपन बुद्धि अपने खिलाफ बा।

त परेशान लोग थोड़े देर खातिर बुद्धू बने के कोशिश करता। दारू, अफीम, गाँजा पीके  भा सेक्सुआलिटी में जाके भा ड्रग्स के इस्तेमाल करके थोड़े देर खातिर अपना नर्वस सिस्टम के, अपना तंत्रिका तंत्र के डाइवर्ट करता भा ओकरा एक्टिविटी के कम करता। हउ गनवा नइखीं सुनले, ‘’ मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूँ गम भुलाने को ‘’। त इहे हाल बा।

जानवर के पास बुद्धि नइखे। एह से ओकरा टेन्शनो नइखे। ओकर संघर्ष खाली प्रजनन आ भोजन भर बा। ओकरा ना त घर आ गाड़ी के ई. एम. आई. देवे के बा, ना यूक्रेन, पाकिस्तान से लड़े के बा। लड़ाई अंतिम समाधान नइखे। रहित त सम्राट अशोक बौद्ध धर्म के प्रचारक अशोक ना बनितन। हर युग में युद्ध भइल बा बाकिर अंततः प्रेम के प्रकट होखहीं के पड़ल बा।

अभी महामारी (कोरोना) खतमों ना भइल कि युद्ध शुरू हो गइल। अभी त प्रकृति के करीब जाये, आपन जीवन शैली सुधारे, अपना के सजावे-सँवारे आ वृहत्तर अर्थ में मानवता के बचावे के कोशिश होखे के चाहीं। .. बाकिर हमनी के बारूद के ढेर पर बइठ गइनी जा। त ई बुद्धि हमनी के असंवेदनशील बनवले बा कि जागरूक?

कोरोना में लाश प लाश गिरल ह। अब युद्ध में गिरता। चीख-पुकार जारी बा। साँच पूछीं त टेंशन बुद्धि वाला के बा। बुद्धू आ बुद्ध के ना। काहे कि बुद्ध बनला पर राउर बुद्धि राउर दोस्त बन जाले। उ रउरा खिलाफ काम ना करे। उ परम आनंद आ परम शांति में ले जाले आ मन में करुणा भर देले, अहंकार के गला देले। .. ना त एह घरी आदमी के बुद्धि आ ओकरा भीतर बइठल अहंकार लाख रूपिया के प्रॉपर्टी खातिर करोड़ रूपिया के किडनी डैमेज करवा देता। देह-रूप-रस से बहकल शैतान मन अच्छा-अच्छा लोग के साम्राज्य मटियामेट क के जेल भेजवा देता। हम ई नइखीं कहत कि पइसा भा सेक्स जरूरी नइखे। अरे भाई पैसा ना रही त जियले मुश्किल हो जाई। सेक्स ना रही त सृजन भा यौवन सुख कइसे प्राप्त होई। ई त जरूरिए बा। एह में कहाँ कवनों दिक्कत बा। बाकिर ई जहां रहे के चाहीं, ओही जी रहे त ठीक बा। पइसा पॉकेट में रहे, सेक्स देह में रहे त समय आ जरूरत पर सुख दी, कामे आई बाकिर ई कपार पर चढ़ जाई त दुख दी, जेल भेजवाई।

त कपार में जवन रहे के चाहीं, उहे रहो .. कचड़ा ना। एकरे खातिर योग जरूरी बा। योगी बनल जरूरी बा। योग पूरा दुनिया में हर आदमी खातिर अनिवार्य शर्त होखे के चाहीं। तबे आदमी के भूमि तत्व आ आकाश तत्व सुधरी भा विकसित होई। तबे आदमी पंच तत्व के मरम बूझीं आ एकर श्रेष्ठतम उपयोग करी आ परिणाम दी। योगी ही विश्व के आ मानवता के बचा सकेलें। काश! विश्व के हर बच्चा योगी बने।

विश्व बंधुत्व के भावना के विकास के कामना करत बानी। इहे भावना युद्ध से बचा पाई।


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min290

दीपक कुमार

यूक्रेन आउर रूस  के बीच चल रहल युद्ध के बारे में ज्योतिषीय विश्लेषण

आज सम्पूर्ण विश्व के सामने एकही सवाल बा कि यूक्रेन आउर रूस के बीच चल रहल युद्ध  कब समाप्त होई ?

हमरा परिचित लोग के कईगो फोन आइल कि रउवा ई बताईं कि युद्ध कब खत्म होई;

हमार स्पष्ट उत्तर बा – 8 अप्रैल 2022 के बादे।

लोग के कहनाम बा, अइसन काहे ? ई युद्ध 3-4 दिन से ज्यादा ना चले के चाहीं …

जब हम ए बात के लिखत बानी युद्ध के शुरू भइला लगभग 20 दिन हो गइल बा।

लोग के युद्ध के बारे में जिज्ञासा आउर अनिश्चितता बढ़ गइल बा।

हमरा ए दुनो देशन के बारे में तनी-सा सामान्य जानकारी बा आउर हमरा ई नइखे मालूम कि कवन देश सही बा आ कवन देश गलत बा ?

युद्ध अपने आप में एगो अप्रिय घटना होखेला आउर एकरा से दु:खे-दु:ख मिलेला। युद्ध के बारे में नीचे दिहल विश्लेषण ज्योतिषीय बा आउर ई विश्लेषण मये ग्रह के चाल पर आधारित बा।

ए विश्लेषण में ई जाने के कोशिश कइल गइल बा कि ई युद्ध कब खत्म सकेला?  ई विश्लेषण केतना सही बा, ई बात त आवे वाला समय ही बताई।

यूक्रेन आउर रूस के बीच युद्ध के शुरुआत 24 फरवरी 2022 के भइल रहे।

ए तिथियन के दौरान यदि हमनी के महत्वपूर्ण ग्रह सब के स्थिति के देखम सन आउर ए बात के पता लगाएम सन कि ग्रह सब के चाल में का विषम बा त पाएब सन कि 15 फरवरी 2022 से मंगल ग्रह आउर शुक्र ग्रह पृथ्वी से धनु राशि में लगभग एके साथ बहुते नजदीक से गुजर रहल बा।

सच्चाई ई बा कि दुनो ग्रह एक दूसरा से बहुते दूर बा  परंतु काहे से कि हमनी का पृथ्वी पर से ओ सब के देखत बानी सन त हमनी के अइसन लागता कि मये ग्रह एके साथे बा।

मंगल ग्रह के युद्ध, आक्रामकता, सेना, अग्नि, दुख-दर्द आदि के ग्रह मानल जाला आउर शुक्र ग्रह के संगीत, सिनेमा, नाटक, अभिनेता, कलाकार आदि खातिर शुभ मानल जाला।

काहेसे कि ई ग्रह लंबा समय से एक दोसरा से बहुत नजदीक बाड़न स, एही से ई मानल जात रहे कि ई संकेत कलाकार आउर संगीत समुदाय खातिर शुभ नइखे आउर अइसन आदमी खातिर त अउरो जेकरा खातिर शुक्र या मंगल या दुनो ही ग्रह हानिकारक होलें। ए समयावधि में लता मंगेशकर, बप्पी लहिड़ी जइसन कलाकार आउर संगीत क्षेत्र के कवगो बड़हन हस्ती हमनी से दूर हो गइल लोग।

ई बात याद रहे के चाहीं कि 15 दिसंबर 2021 से 26 मार्च 2022 तक ग्रह भी अपना अवस्थिति रहे सब। ग्रह सन के असंतुलन एगो अइसन विकट स्थिति होला जहवाँ मये ग्रह राहु-केतु अक्ष के एकही ओर संरेखित होखेलें।

यूक्रेन के राष्ट्रपति भी देश के राष्ट्रपति बने से पूर्व एगो कलाकार रहलें।

विदित होखे कि 27 फरवरी 2022 से मंगल ग्रह लगभग 44 दिन खातिर मकर राशि में चल गइल आउर उहवाँ घुस के बहुते मजबूत हो गइल। मकर राशि पर शनि ग्रह के प्रभाव पड़ल। शनि आम जनता आउर श्रमिक समुदाय खातिर शुभ मानल जालें। मकर राशि के स्वामी शनि भी गोचर होत रहलें, एही से ए बात के आशा ना रहे कि हालत एतना खराब हो जाई। एकरा अलावा बुध ग्रह ( जेकरा के धैर्य आउर संचार खातिर शुभ मानल जाला) आउर शुक्र भी शनि के साथे दिखत रहे। एही सब के चलते ए समय अवधि में अप्रिय घटना के आशंका रहे।

जवन ग्रह शुक्र ग्रह के संगे विचरण करत रहे ऊ 15 मार्च 2022 के बाद एक-दोसरा से दूर होखे लागी। एही से संभावना बा कि 15 मार्च 2022 के बाद ही कवनों सकारात्मक बात सामने आई।

दिनांक 8 अप्रैल 2022 के बाद मंगल ग्रह मकर राशि से कुम्भ राशि में चल जाई जहवां मंगल बलशाली ना रही तब शुभ के संभावना हो सकेला। अइसन भइला पर ही हमनी का ए दुनो देश के बीच चल रहल युद्ध में कुछ नरमी देख सकेनी जा।

दिनांक 26 मार्च 2022 तक ग्रह सब के असंतुलन भी खत्म हो जाई। कहे के मतलब ई बा कि 8 अप्रैल 2022 तक युद्ध समाप्त हो जाए के चाहीं। परंतु एकरा पहिले दिनांक 1 से 6 अप्रैल 2022 के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण तिथि बा। 5 अप्रैल 2022 के दिने ग्रह सब के समूह अइसन हो जाई कि ई कवनों बड़हन बदलाव के इशारा करी। 5 अप्रैल 2022 के मंगल ग्रह आउर शनि ग्रह एक दोसरा के बहुत नजदीक होईहें, बृहस्पति ग्रह पर छाया ग्रह केतू पड़ी  आउर सूर्य आ बुध ग्रह एक दोसरा के बहुते नजदीक होईहें जवन बुध के प्रभाव के नष्ट कर दिही।

उपर्युक्त तथ्यन के आधार पर हमरा ई उम्मीद बा कि यूक्रेन आउर रूस के बीच चल रहल  युद्ध 8 अप्रैल 2022 तक खत्म हो जाई।

इंजीनियर दीपक कुमार (मूल लेखक)

डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’ (अँग्रेजी से भोजपुरी अनुवाद)


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min280

मनोज भावुक

कश्मीर फाइल्स में लउक बा 32 साल बाद नंगा सच

आज लोग-बाग, मीडिया आ भारते ना बलुक पूरा दुनिया के जुबान पर जवना दू गो बात के खूब चर्चा बा, उ बा पहिला– रूस-यूक्रेन युद्ध आ दूसरा- द कश्मीर फाइल्स। रूस-यूक्रेन युद्ध से तनिको कम भयावह नइखे कश्मीरी पण्डितन के कहानी।

ई फिल्म के देखला के बाद लोग सिनेमाहाल में आपन आँसू, दर्द आ रोआई नइखे रोक पावत। कश्मीरी हिन्दू के साथे हेतना कुछ भइल आ आज ले लोग के पता नइखे। तत्कालीन सरकार, मीडिया आ बुद्धिजीवी एह सब पर आसानी से लीपा-पोती कर देहलें अउरी कुछ ना भइल। अपने देश में, आपन धरती छोड़ के दोसरा जगह जा के शरणार्थी बने के पड़ल अउरी केहू कुछ ना कइल। हमनी रउआ उ दर्द नइखी बुझ सकत जवन एगो कश्मीरी पंडित सहले होई। जब ओकरा सामने आपन भाई बंधु के बर्बरता से हत्या भइल होई, जब ओकरा सामने ओकरा माई बहिन के बलात्कार करके आरा मशीन से दू टुकड़ा में काट दिहल गइल होई। ओ दर्द के कल्पना करते हमार हाड़ ले कांप जाता। एतना सब कुछ हमनी जइसन इंसान के साथे भइल अउरी हमनी का, का कइनी जा त भुला गइनी जा। बुद्धिजीवी लोग मानवता के पाठ सिखावल कि जवन बीत गइल ओके भुला जा, आगे के सोचs। अरे भाई, तोहरा एगो बालतोड़ हो जाला त लोकतंत्र के खतरा में आ गइला के दुहाई देबे लागेलs, तू अइसन बात करत बिल्कुल भांड लागेलs, दुमुहा, धूर्त आ पंजाबी में कहीं त दोगला।

द कश्मीर फाइल्स फिल्म, निर्देशक विवेक अग्निहोत्री 2019 में अनाउन्स कइलें। एकर तइयारी उ पिछला कई साल से करत रहलें। एह पर लमहर रिसर्च चलल। 1989 से लेके 90 के दशक में भइल कश्मीर के असली निवासी कश्मीरी हिन्दू के ऊपर अत्याचार आ कश्मीरी पंडितन के नरसंहार पर उनके एगो टीम लगातार तथ्य जुटावत रहल। 90 के हिंसापूर्ण पलायन के बाद आपन जान बचाके भागल कश्मीरी पंडित सगरी विश्व में इहाँ-उहाँ जाके शरण लेहलें। वीडियो इंटरव्यू लेके अधिकतर कश्मीरी पंडितन के कहानी उ रिकॉर्ड कइलें आ फेर पब्लिक डोमेन में फइलल सगरो तथ्य आ जानकारी के इकट्ठा कइल लोग। कई साल के मेहनत के बाद ई फिल्म बनल। हालांकि फिल्म के शूटिंग में 30 से 40 दिन ही लागल। फिल्म के अधिकांश हिस्सा मसूरी, देहरादून में शूट भइल। एक सप्ताह के शूटिंग कश्मीर में भी भइल, डल लेक अउरी आस-पास के जगह पर।

द कश्मीर फाइल्स के बुनावट, रंग संयोजन, कथा नैरेशन, एह दौर से ओकर प्रासंगिकता आ सगरो अभिनेता लोग के अद्भुत अभिनय कौशल भी एह फिल्म के यूएसपी बा। निर्देशक आ लेखक विवेक अग्निहोत्री के फिल्मकारी के जेतने प्रशंसा कइल जाव, कम बा। द कश्मीर फाइल्स एगो मास्टरपीस बा अउरी विवेक जी मास्टरमाइंड! अनुपम खेर, मिथुन दा, पल्लवी जोशी, चिन्मय मांडलेकर, दर्शन कुमार, पुनीत इस्सर…सभे अइसन कौशल देखवले बा कि रउआ लागि कि सब रउआ आँखिन के सामने होता।

द कश्मीर फाइल्स बनल 14 करोड़ के कुल लागत से। एकर कवनो भी बड़ प्लेटफ़ॉर्म पर प्रमोशन ना भइल। कवनो भी बड़ टीवी शो एकरा ओर ध्यान ना देहलस। केहू भी बड़ स्टार एकरा बारे में बातो करे से कतराइल। उल्टा बहुत लोग त ई फिल्म के रोके खातिर आपन पूरा जोर लगा लेहलस। फिल्म कोरोना के चलते 15 अगस्त 2020 से टलत एह साल 11 मार्च 2022 के रिलीज भइल। पहिला शो से भीड़ लागल चालू हो गइल। जब रिलीज भइल त 630 के लगभग स्क्रीन मिलल रहे। कुछ लोग डिस्ट्रिब्यूटर के प्रभावित करके उहो कम करे चाहत रहे। आ देखीं ना, एक दिन में अइसन जादू भइल कि अगिले दिने स्क्रीन के संख्या 2000 के लगभग हो गइल अउरी उ बढ़त बढ़त अब 4000 से ऊपर हो गइल बा। विदेशन में ई फिल्म 100 से भी कम स्क्रीन पर रिलीज भइल, बाकिर उहाँ भी जब फिल्म ब्लॉकबस्टर होखे लागल त आलम ई बा कि सब बड़ देशन में जहां भारतीय लोग के संख्या ढेर बा, उहाँ ई फिल्म दू सप्ताह से हाउसफुल चलत बिया आ स्क्रीन के आंकड़ा 600 के ऊपर पहुँच गइल बा।

ई फिल्म भारत में आज 200 करोड़ के आंकड़ा पार कर गइल। फिल्म अपना दूसरा सप्ताह में अइसन कलेक्शन कइले बिया जवन हिन्दी फिल्मन खातिर ऐतिहासिक बा। पहिला दिन के कॉलेक्शन जहां 3।55 करोड़ रहे उ लगातार दू डिजिट के कमाई करत दूसरा सप्ताह के शुक्रवार के 19।15 करोड़, शनिवार के 24।80 करोड़, रविवार के 26।20 करोड़, सोमवार 12।40, मंगलवार 10।25 आ बुधवार के 10।03 करोड़ के धमाकेदार कॉलेक्शन कइले बा। ई फिल्म लगातार हाउसफुल चल रहल बा अउरी आवे वाला सप्ताह में भी ई रुकी ना। हालांकि एकरा सामने एह शुक्रवार से विशाल फिल्म आर आर आर रिलीज हो रहल बा, जवन बाहुबली फ़ेम राजामौली के बनावल ह अउरी साउथ के दू गो बड़ स्टार राम चरण आ जूनियर एनटीआर बाड़ें। अजय देवगन आ आलिया भी एह फिल्म में बा लोग। ट्रेड पंडित लोग के कहनाम बा कि एह फिल्म के चलते हिन्दी पट्टी में आर आर आर के कलेक्शन से गिरावट जरूर आई। जइसे पिछला हफ्ता रिलीज फिल्म बच्चन पांडे बुरी तरह से पिट गइल बिया। फिल्म के बजट 165 करोड़ बा अउरी ओकर लाइफटाइम कलेक्शन 50 से 55 करोड़ रहे के उम्मीद बा। द कश्मीर फाइल्स के लेके जनता में जवन जोश आइल बा, ओकरा हिसाब से ई फिल्म के लाइफ टाइम कॉलेक्शन 300 करोड़ के आंकड़ा छू जाई।

एह फिल्म के लेके खूब विवाद भी हो रहल बा। पहिला दिन से कॉंग्रेस कश्मीरी पंडितन के नरसंहार आ पलायन के ठीकरा भाजपा सरकार पर फोड़े के कोशिश कर रहल बा। दूसरा ओर सगरो विपक्षी पार्टी आपन आपन जोर आजमाइश में लागल बाड़ी। भाजपा पार्टी के अधिकांश लोग एह फिल्म के समर्थन में आ रहल बा। हालांकि ई सब राजनीति के बात ह, लोग एक दूसरा के ऊपर काँदो फेंका-फेंकी करबे करी। बाकिर एह सब में जान-माल के जवन नुकसान भइल, 32 साल से झेलत आ रहल कश्मीरियन के दर्द के ऊपर मरहम के लगाई। सभे आपन पल्ला झाड़े में लागल बा। भाई, फिल्म में बतावल एगो तथ्य से लोग अब जाके अवगत हो रहल बा कि कश्मीरी पंडितन के एक बार ना, सात बार अइसन पलायन हो चुकल बा जवन इतिहास के गलियारा में गुम हो गइल बा। बाकी बुद्धिजीवी इतिहासकार आ पत्रकार लोग एकरा के नीचे दबा के ऊपर मस्त कुर्सी लगाके बइठल बा लोग। ई फिल्म ओही इतिहास के एगो करिया सच खींच के बाहर निकलले बा त सभ के कुर्सी डोल गइल बा आ हाथ छाती पर आ गइल बा।

सब सच धीरे-धीरे बाहर आएगा, हम देखेंगे।।।

रउआ जदी ई फिल्म अभी ले नइखीं देखले त जरूर जाके देखीं, मानवता खातिर ही सही लेकिन देखीं जरूर!


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min250

मनोज भावुक

लगभग एक महिना त निगिचाइले बा। ना केहू झुके खातिर तैयार बा, ना रुके खातिर। यूक्रेन के तरफ से साफ संकेत बा कि उ आत्मसमर्पण ना करी। मैरियूपोल में चल रहल भीषण जंग में भी यूक्रेन के सेना हथियार डाले से इंकार कर देले बा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के कहनाम बा कि, उ पुतिन से बातचीत खातिर तैयार बाड़न, लेकिन अगर ई बातचीत फेल भइल त तीसरा विश्व युद्ध होई।

कई दौर के वार्ता आ पश्चिमी देशन के दखल के बादो रूस हमला प हमला करिए रहल बा। रूस के हमला से यूक्रेन थर्रा उठल बा। कई गो शहर तबाह हो गइल बा। तबो जेलेंस्की के युद्ध विराम खातिर रूस के अल्टीमेटम स्वीकार नइखे।

एने रूस के सैनिक अब एह जंग में पस्त हो चुकल बाड़न। निराश-हताश सैनिक अब अपना घरे लौटे के चाहत बाड़न। एकरा खातिर उ खुद के गोलियो मारे खातिर तैयार बाड़न। उ यूक्रेन के बंदूक से अपना गोड़ में खुदे गोली मारके इलाज के बहाने अपना घरे वापस लौटे के प्लान बनावत बाड़न काहे कि युद्ध से भगोड़ा सैनिक खातिर त पुतिन के ‘डेथ स्क्वाड’ तैयारे खड़ा बा।  रूस के एह सैनिकन के हालत पर हमरा आपने एगो शेर मन परता –

पानी के बाहर मौत बा, पानी के भीतर जाल बा

लाचार मछरी का करो जब हर कदम पर काल बा ।।    

राजा के बउरइला पर प्रजा के भोगहीं के पड़ेला। इहाँ त एने कुआं त ओने खाई वाला हाल बा।  यूक्रेन में पकड़ाइल रूसी सैनिक त अब अपना लोगन से पुतिने के खिलाफ आवाज उठावे के अपील कर रहल बाड़न। रउरा सब के त मालूमे बा कि यूक्रेन पर हमला के तुरंते बाद रूस में बड़हन संख्या में लोग युद्ध के विरोध में सड़क पर उतर आइल रहे। बाकिर अब त यूक्रेन के सड़क खूने-खून हो गइल बा आ चीख-पुकार, चीत्कार, घुटन-क्रंदन, हताशा, निराशा आ दहशत दुनों देश में चरम पर बा आ रजवा माने खातिर तइयारे नइखन स। पता ना ई युद्ध कहाँ जाके विराम ली।

ई सब कुछ बड़ा वीभत्स चल रहल बा। युद्ध आ हिंसा कबो अमन चैन ना लेआवेला। ना दोस्त के घर में, ना दुश्मन के घर में। विश्व भर में लड़ल गइल युद्ध के ऊपर कई गो उत्कृष्ट फिल्म बनल बाड़ी सन। जदी रउआ उ फिल्मन के देख लीं त बुझाई कि इंसान शक्ति पावे खातिर केतना आन्हर होला कि उ मानवो  जाति के खून बहावे में हिचक ना करेला। युद्ध के पहिले से लेके युद्ध के बेरा आ ओकरा बाद के भीषण त्रासदी के जवन चित्रण एह फिल्मन में भइल बा, लोग के जरूर देखे के चाहीं। हालांकि ई देखल बड़ा दर्दनाक होला, बाकिर ई सोचीं कि अइसन सच में झेलल केतना ज्यादा कष्टकर होत होई।

युद्ध काल के ऊपर बनल फिल्मन के लिस्ट में कुछ बेहतरीन फिल्मन के देखीं।

रैन

पहिला नाम बा ‘रैन’। ई जापानी फिल्म ह अउरी उहाँ के सबसे महंगा फिल्म भी मानल जाला। 1985 में रिलीज भइल ई फिल्म महान फिल्म निर्देशक अकिरा कुरोसावा के बेहतरीन फिल्मन में से एगो बा। एकरा के कई गो पोर्टल सबसे बेहतरीन वार फिल्म मानेले। ई फिल्म के बनावे में अकिरा के सगरो कुछ दांव पर लाग गइल। एह फिल्म के कहानी रहे एगो योद्धा मोरी मोन्टारी के। मोरी आपन राज के तीन हिस्सा करके आपन तीनू बेटन में बाँटे के चाहत बा। बाकिर तीसरा बेटा ई सब के पक्षधर नइखे। ओकर दू गो बेटा जबकि जमीन अउरी सत्ता खातिर पूरा राज्य के आग में झोंक देत बाड़ें। सगरो इंसान आ जानवर के युद्ध में झोंक के, जब अंत में वीरान अउरी ढहल राज्य लउकत बा, चारु ओर लोगन के खून के तालाब लउकत बा त ओ युद्ध के पक्षधरन के बुझात बा कि ई लड़ाई केकरा खातिर भइल अउरी का मिलल आखिर एकरा से। ई फिल्म रउआ अमेजन प्राइम पर देख सकिलें।

1917

हॉलीवुड के फिल्म ‘1917’ अपना कथानक अउरी प्रोडक्शन डिजाइन (कहे के माने फिल्म के सेट, गेटअप, माहौल) एतना कलात्मक अउरी बेहतरीन रहे कि ई एगो उत्कृष्ट युद्ध फिल्म मानल जाला। ई फिल्म में दू गो अभागा सिपाहियन के कहानी बा। प्रथम विश्व युद्ध के जर्मन सेना के आगे लड़े वाला योद्धा कुल के बारे में एगो गुप्त सूचना मिलत बा। इहे दुनू सिपाही ओ आपन कम से कम 1600 साथियन के बचावे खातिर पल पल मौत से सामना करत जा तारें। ई फिल्म देखला पर बुझाई कि युद्ध काल में कइसे हर पल मौत अउरी त्रासदी मुंह खोल के खड़ा रहेले। एकर निर्देशक सैम मेन्डेस बाड़ें। एकरो के रउआ अमेजन प्राइम पर देख सकीलें।

 

 

 

सेविंग प्राइवेट रयान

‘सेविंग प्राइवेट रयान’ 1998 के फिल्म ह, महान निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग के बनावल। ई फिल्म में कई गो अलग कथानक एक साथे मिला के सेना के जवानन के संघर्ष अउरी बलिदान के कहानी बतावल गइल बा। ई फिल्म के चर्चा अक्सर विश्व भर में बनल महान युद्ध फिल्म के रूप में कइल जाला। जब कप्तान मिलर अपना साथियन के साथे जर्मन फोर्स से सामना करे जात बाड़ें, ओही के इर्द गिर्द ई फिल्म बनल बा। ई फिल्म रउआ अमेजन पर देख सकीलें।

 

 

 

 

कुछ भारतीय बेहतरीन फिल्म जवन युद्ध के इर्द गिर्द बनल बा –

बॉर्डर

एह में सबसे पहिला नाम त जे पी दत्ता के बॉर्डर बा। ई फिल्म हमरा बुझाता रउआ सभे देखले होखब। ई भारत अउरी पाकिस्तान के बीच भइल 1971 के युद्ध काल पर आधारित बा। लॉंगेवाला में लड़ल गइल विशाल लड़ाई के ऊपर ई फिल्म आधारित बा। एह युद्ध में भारत जीतल रहे अउरी बांग्लादेश के मुक्त करवले रहे। ई फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, अक्षय खन्ना आ जैकी श्रॉफ के मुख्य भूमिका रहे। ई फिल्म रउआ युद्ध के समय होखे वाला त्रासदी के देख सकीलें। ई फिल्म अमेजन प्राइम पर उपलब्ध बा।

 


शेरशाह

पिछला साल आइल शेरशाह भी युद्ध के त्रासदी के ऊपर बनल एगो सुंदर फिल्म बा। ई फिल्म परमवीर चक्र विजेता कैपटेन विक्रम बत्रा के महान बलिदान के ऊपर बनल बा। जब 1999 के कारगिल युद्ध भइल रहे त कप्तान साहब देश खातिर आपन महान कर्तव्य निभवलें अउरी दुश्मन सेना के खदेड़ देहलें। एह में उ शहीद हो गइल रहलें। रउआ ई फिल्म ओ योद्धा के महान बलिदान अउरी युद्ध के बेरा होखे वाला भीषण त्रासदी के समझे खातिर देख सकीलें।

लिस्ट में बहुत फिल्म बा जवन युद्ध के परिणाम चीख-चीख के बतावेला। हम त बस प्रतीक का रूप में कुछ फिल्मन के चर्चा कइनी ह। हर जगह अमन चैन होखे हम त इहे कामना करब, अपना एह शेर के साथे कि –

” अमन वतन के बनल रहे बस,

हवा में थिरकन बनल रहे बस /

इहे बा ख़्वाहिश वतन के धरती,

वतन के कन-कन बनल रहे बस “


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min240

अभिषेक वत्स : पहिले त सर, भोजपुरी जंक्शन टीम राउर स्वदेश वापसी पर रउआ के स्वागत करत बा अउर राउर हिम्मत खातिर सलाम करत बा।

अभिषेक उपाध्याय :  बहुत बहुत धन्यवाद अभिषेक जी।

अभिषेक वत्स : पहिला सवाल ई बा कि रउआ आपन एगो रिपोर्ट में जिक्र कइले बानी कि युद्ध के सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव ओहिजा के महिला, बच्चा, बुजुर्ग अउर दिव्यांग लोगन पर पड़ल बा। जे कि स्वाभाविक बा। बाकिर सर ओहिजा के जे युवा बा चाहे जे सक्षम लोग बा उनका पर एकर का असर पड़ल बा?

अभिषेक उपाध्याय :  अभिषेक जी, पहिले त हम रउआ के बता दी कि यूक्रेन के सरकार 18 से 60 साल के बीच के आपन नागरिक लोग के देश छोड़ के जाए प प्रतिबंध लगा देले बा। काहे कि रूस के मुकाबला में ओकरा लगे बहुत छोटहन आर्मी बा। त उ आपात स्थिति में आपन सक्षम नागरिकन के मदद लेवे खातिर उनका के रोकले बा। अब अइसन में सब केहू आपन बीवी, बच्चा के त देश के बाहर पहुँचा देत बा, बाकिर उ खुद उहवें रह जाता। अइसन में हर परिवार एगो मानसिक यंत्रणा अउर विघटन के शिकार हो रहल बा। ट्रेन पर, हवाई अड्डा पर लोग आपन परिवार के विदा करत समय टूट जा रहल बा। अंदर रहे वाला अउर बाहर जाए वाला दुनो में से केहू के पता नइखे कि के कब लौटी, कब से फिर मिली…आ फिर मिलबो करी की ना मिली। बहुत अजीब दृश्य बा ई…करेजा फाट जाला।

अभिषेक वत्स : ई युद्ध चाहे हर युद्ध एगो मानवीय त्रासदी होखबे करेला। आदमी के जान आदमी लेला, बाकिर एकर एगो पक्ष अइसनो बा जेकरा बारे में बहुत कम बात होखेला जबकि ओकरो पीड़ा ओतने रहेला, ओकरो ओतने झेले पड़ेला। हम रउआ से जानल चाहब कि ओहिजा के जानवरन पर एह युद्ध के का असर पड़ल बा? कवनो दृश्य रउआ याद होखे त बताईं।

अभिषेक उपाध्याय :  हाँ, अभिषेक जी रउआ ठीक कहनी। उहवाँ लोग आपन पालतू जानवरन के आपन परिवारे मानेला। केहू जब देश छोड़त बा त उनुको के साथे ले जात बा। अइसन नइखे कि केहू आपन पालतू कुत्ता के, बिलाई के मरे खातिर छोड़ देले बा। कतनो परेशानी होखे बाकिर लोग साथे ले जात बा। ई एगो बहुत सवेंदनशील पक्ष रहल बा ओहिजा के नागरिक लोग के अइसन समय में। आपन लइका जइसन लोग आपन कुत्ता के, बिलाई के ऊनी कपड़ा पहिरा के ले जात रहे। उनका खाये पिये के इंतजाम कर के निकलत रहे लोग।

अभिषेक वत्स : सर, रउआ साथे एगो ओहिजे के ड्राइवर रहले। राउर वीडियो ब्लॉग में देखनी। बाकिर उनकर हाव भाव उनकर जिंदादिली देख के ई लगबे ना कइल कि ऊ आदमी ओह जगह में रहत बा जहाँ हर मिनट हर घंटा रॉकेट लॉन्चर, मिसाइल, गोली बरस रहल बा। एह पर कुछ तनी बताईं।

अभिषेक उपाध्याय :  देखीं अभिषेक जी, यूक्रेन खातिर युद्ध कवनो नया बात नइखे। युद्ध उ लोग के लगभग रूटीन बन गइल बा। युद्ध के साथ जिये के लगभग लोग अभ्यस्त हो गइल बा। 2014 से लगातार उहवाँ लड़ाई चलत बा। बगल में दोनबास के इलाका बा। उहाँ 2014 से ही छिटपुट लड़ाई चल रहल बा। त युद्ध ओह लोग खातिर आम बात हो गइल बा। युद्धो लड़े के बा आ जीवनो जिये के बा।

अभिषेक वत्स : सर, एगो सवाल जेकर जवाब सभे जानल चाहत बा कि भारत के कइसन तइयारी रहे उहवाँ से आपन नागरिक के निकाले के। काहे कि एह के ले के इहवाँ खूब राजनीति भइल। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के पक्ष-विपक्ष के बात चलल। बाकिर रउआ का देखनी, उ बताई।

अभिषेक उपाध्याय :  हाँ, ई सही बा कि शुरू में दिक्कत भइल। बाकिर बाद में जब युद्ध एकदम शुरू हो गइल तब एडवाइजरी पर एडवाइजरी जारी करके भारतीय लोगन के निकले खातिर जागरूक कइलस। अउर खरकिव के जवन इलाका रहे उहाँ बहुत बड़ा काम भइल, एह दिशा में। बहुत बड़ा संख्या में भारतीय छात्र लोग के निकालल गइल। दुनो देश से बात करके उहवाँ सुरक्षा घेरा बना के सब लोग के निकालल गइल। बाद में भारत से कई गो अधिकारी लोग मंत्री लोग पहुँचल। त शुरू में जवन दिक्कत भइल, ओकरा बाद में सरकार एक्शन मोड़ में आके आपन नागरिक लोग के सुरक्षित निकाल लिहलस अउर अब त लगभग सब भारतीय यूक्रेन से निकल गइल बाड़े।

अभिषेक वत्स : रउआ एक महीना तक युद्धग्रस्त क्षेत्र में रहनी। जहाँ एक तरफ प्रोफेशनलिज्म रहे एक तरफ सर्वाइवल रहे। पत्रकारिता भी करे के रहे अउर स्वाभाविक ह कि जान के डरो रहे। त एह एक महीना में राउर दिनचर्या पर का असर पड़ल। नींद त नाहीये आवत होई।

अभिषेक उपाध्याय :  हाँ, अभिषेक जी। अब अइसन में कवनो तय रूटीन पर चलल त मुमकिन ना रहे। खतरा हमेशा बनल रहे। काहे कि रिहायशी इलाका में भी अटैक होत रहे। अक्सर रात के सायरन बाजे त छुप के बंकर में जाये के पड़त रहे। जदि कहीं अटैक भइल बा त जा के रिपोर्टिंगो करे के रहे। त एह सब चीज के ले के तनाव त रहत रहे। बाकिर आपन काम त करहीं के ह। कतनो खतरा होखे। उ खतरा सभे खातिर रहे रउआ पत्रकार होखी चाहे आम नागरिक।

अभिषेक वत्स :…. रउआ एतना समय दिहनी अउर उहाँ के बहुत सारा अइसन बात बतवनी जे आम तौर पर पब्लिक डोमेन में ना मिलेला। आपन व्यक्तिगत अनुभव बतवनी। एह खातिर हम भोजपुरी जंक्शन टीम के तरफ से रउआ प्रति आभार व्यक्त करत बानी।

अभिषेक उपाध्याय : थैंक यू, अभिषेक जी। रउआ अउर भोजपुरी जंक्शन टीम के आवे वाला अंक खातिर खूब शुभकामना।

 


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min270

महेन्द्र प्रसाद सिंह

युद्ध कहीं होखे, विनाशकारी होला। अक्सर ओकर परिणाम दिल के दहला देबे वाला होला। बाकि कामना से उपजल क्रोध का सोझा ना लउके उजड़ल गांव शहर, बिलखत बाल-गोपाल, असहाय लोग, ना तड़पत मानवता। पुतिन के खीस से शुरू भइल  रूस आ यूक्रेन के बीच युद्ध अइसने बा।   एह युद्ध के समाचार हमरा खातिर ओइसहीं बा जइसे केकरो ससुरारी में दू गो सार  भा केकरो नइहर में दू गो भाई आपुसे में लस्साकुटी आ मारपीट करत होखस आ हम फरिआवे में अलचार बानी। बाप महतारी के ना रहला पर भाईयन के लड़ावे-भिड़ावे वाला उनका लोगिन के संघतिया हो जालन स। राजनैतिको स्तर पर, सोवियत संघ टूटला के बाद रूसो आ उक्रेन  के इहे स्थिति बा। हमनी का देशो खातिर बा ई सांच बा। खैर भारत शांति प्रिय देश ह। भारत दिल से चाहत बा कि शांति कइसहूं बहाल हो जाय। मोदीजी शांति खातिर दुनों पड़ोसिया (बांटल भाई) के निहोरा कर कर के थाक गइलन। काश हमहूं कुछ कर पइतीं! शांति आ मैत्री के भाव जगावे वाला नाटक, “वैर के अंत” रूसी भाषा में?  एगो रंगकर्मी आउर का कर सकत बा? भारतीय नाट्य शास्त्र के रचयिता भरत मुनि के भूमि से आधुनिक मेथड ऐक्टिंग के जन्मदाता सह मास्को आर्ट थिएटर के संस्थापक स्तानिसलावस्की (रूसी) आ ली स्ट्रैसबर्ग (यूक्रेनी मूल) के जन्मभूमि खातिर ई साइत सबसे बढ़ियां पहल होइत। इहो मन होला  कि दुनों मित्रन के आपन ईयारी के किरिया धरइतीं आ जंग रोकवइतीं, ओइसहीं जइसे आज से 44 साल पहिले ओहनी जना आपन ईयारी के किरिया हमरे धरवले रहन।

ई लड़ाई बरबस हमरे 46 बरिस पहिले लेके चल जाला जब दूनों देश सोवियत संघ के अंग रहल।

23 बरिस के उमिर में हम 1975 में, बोकारो स्टील प्लांट में आपन योगदान देले रहीं। ओह समें ई प्लांट एशिया के सबसे बड़ स्टील प्लांट के रूप में जानल जात रहे संगहीं सोवियत संघ आ भारत के मैत्री आ आपसी सहयोग के बड़हन मिसाल रहे। हमार पोस्टिंग हॉट स्ट्रिप मिल में बतौर वरिष्ठ आपरेटिव  भइल। प्लांट के संचालन रूसी विशेषज्ञ लोग करत रहन। केहू रूस से त केहू उक्रेन से त केहू दोसर दोसर प्रदेश से। कांट्रैक्ट के मोताबिक ओहनी जना के सब भारतीय काउंटर पार्ट के प्रशिक्षण देके, संचालन के भार  सऊंपे के रहे। प्रशिक्षण सैद्धांतिक ना होके प्रायोगिक स्तर पर होत रहे। ऑन जॉब ट्रेनिंग, मित्रवत भावना के साथ, आपन-आपन भाषा में। प्रशिक्षक रूसी बोलस आ हम भोजपुरी। बस बुझे गुने के सूत्र रहे अभिनय जवना में अंग संचालन बेसी होत रहे। उनका खातिर जइसे हिन्दी रहे ओइसहीं अंग्रेजी आ भोजपुरी त काहे ना आपन भाषा में बोलीं? एक दोसरा के भाषा सीखे के कोशिश जारी रहे। थोड़े दिन बाद सफलता मिलल। फेनु त काम उड़वले चलीं जा। हंसते-हंसत भारी भरकम काम आसान हो गइल। ईयारी दांतकाटी हो गइल रहे। ई ढेर दिन ना चलल। दू तीन साल बाद ऊ लोग लवटे लगलन। मिल संचालन के खुशी के संगे आपन अज़ीज़ ईयार के जाए के दुखो कम ना रहे। बिदाई के घड़ी रूसी विशेषज्ञ रात्रि भोज में हमनी के अपना घरे बोलवले। पहिले शुरू भइल भोदका। ऊ लोग जानत रहन कि हमरा मदिरा भा कवनो नीसा से सख्त परहेज ह। नीट भोदका गिलासन में सजा के राखल रहे। हमार रूसी मित्र पहिले त निहोरा कइलन भोदका पीए के बाकि जब ऊ हार गइलन त आपन ईयारी के किरिया धरा दिहलन। बस भावना के उदवेग में हम एगो गिलास उठइनी आ गट गट पी गइनी। सोचनीं कि देव आ दानव के झगरा मेटावे खातिर भगवान शंकर विष पी गइल रहन त हम माता के भगत होके ईयारी निभावे खातिर भोदका काहे ना पी सकीं? का बुझाइल कि नरेटी आ अंतड़ी के जरावत रूसी एटम बम हमरा पेट के समुंदर में तूफान मचा के कतहीं विलीन हो गइल। आज ऊहे किरिया धरावे के मन करत बा दूनों मीतवन के कि लड़ाई ना बंद करबs जा त भोदका ना पिअब।

 

मन करे इयारी के किरिया धरइतीं,

दुनो मनमीतन के लड़े से बचइतीं।

 


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min280

संतोष कुमार सिंह 

विश्व में मानवता के बचावे खातिर युद्ध ना, शान्ति के पहल पर शक्तिशाली देशनों के जोर देवे केआवश्यकता बा। पूरा विश्व अभी कोरोना के कहर से संभललो नइखे कि रूस आ यूक्रेन के टकराहट से पूरा विश्व के मानवजाति पर खतरा मंडराय लागल बा। एह बार खतरा कोरोना से नइखे बल्कि वर्चस्व खातिर हो रहल यूक्रेन आ रूस से हो रहल महायुद्ध से बा। हालत अइसन बन रहल बा कि अगर समय रहते शांति समझौता ना भइल त देखत-देखत पूरा संसार ई युद्ध के आग में लहक जाई। हालात एह क़द्दर गंभीर होत जाता कि रुस के राष्ट्रपति परमाणु हथियार के धमकी पर उतारू हो गइल बाड़न अउर अपना सेना के परमाणु बम के इस्तेमाल करे खातिर तैयार रहे के आदेश दे दिहले बाड़न जेकरा बाद से पूरा विश्व में हलचल मचल बा,  जेकरा बाद से तीसरा विश्वयुद्ध के आशंका बढ़त जा रहल बा।

सवाल ई नइखे की दु गो देशन के बीच युद्ध हो रहल बा। सवाल ई बा कि एतना ताकतवर, एतना विकसित अत्यंत आधुनिक हथियार के का महत्व बा या रह जाई जब मानव जाति ही समाप्ति के कगार पर चल जाई।

एकरा विपरीत कवनों भी विवेकशील व्यक्ति के युद्ध के खबर आनंदित ना करी, बल्कि तबाही के गहरा टीस भीतर ले छोड़ जाई। युद्ध के विनाश लीला से बर्बाद होखे वाला मुल्क के फिर से अपना पैर पर खड़ा होखे में दशकों लाग जाला, जब सरफिरा नेता अपना समझदारी के ताख पर रख के अपना घमंड में युद्ध छेड़ के मानवता के कुचल डालेलन।

युद्ध जब होला त नुकसान दुनो पक्ष के उठावे के पड़ेला। युद्ध छेडल आसान बा लेकिन शांति स्थापित कइल बेहद कठिन। अत्यंत घातक परमाणु हथियार से लैस रूस अउर अमेरिका के भिड़े के संभावना भी बढ़ रहल बा। मिलाजुला के ई कहल जा सकेला कि समय रहते शांति के उपाय ना कइल गइल त परिणाम बडा गंभीर देखे के मिली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जानबूझके आग से खेल रहल बाड़न। युद्ध में बढियां-बढ़िया देश के कमर टूट जाला।

लेकिन एह बीच एगो बढ़िया बात ई बा कि भारत आपन परचम लहरावत सभे भारतीयन के सकुशल वापसी करावें में सफल रहल बा। त ओहिजे एह संकटकाल में विश्व के निगाह फिर से भारत पर टिकल बिया अउर उम्मीद लगा के बइठल बिया कि इ समस्या के निदान भी भारत निकाल के विश्वगुरु के ओर एक अउर सफल कदम बढ़ा सकेला। विचारणीय विषय ई बा कि जवन तरीका से चाहे उ शक्तिशाली देश होखे या कमजोर देश होखे सब मानवतावादी अउर शान्ति के राह छोड़ के विध्वंसक हथियार बनावे के होड़ में जुटल बा। ई बात मानवता खातिर घातक साबित होई। इ समय युद्ध के नइखे बल्कि शांति कायम करके मानवीयता देखावे के बा ताकि समस्त मानवजाति सुकून अउर अमन से जिनगी बिता सके। कोरोना पहिलहीं से जनमानस के रुला रहल बा अइसे में अगर अब तीसरा विश्व युद्ध छिड़ गइल त परिणाम विध्वंसक हो


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min270

सरिता सिंह गोरखपुर

आज विश्व युद्ध के जौंन त्रासदी भइल बा ओसे खाली रूस ही नाही, जेतना भी देस बाटे सबही में खड़मंडन मचल बा, सागरो जहान ई विभीषिका से त्रस्त ह, कतहुं भी शांति नाही लौकत बा,  कुल देसन में भयावह स्थिति बा, सगरो विश्व में हाहाकार मचल बा, कुल ओर त्राहि-त्राहि के दृश्य बा, ई सब देख के एगो प्रश्न मन में उठेला! का युद्ध ही एगो रास्ता बा, काहे नहीं शांति क राह चल के कवनो उपाय खोजल जाय?

अब प्रश्न उठत बा कि शांति के विकल्प का बा? नि:संदेह शान्ति के स्थापना युद्ध ना बुद्धत्व से मिल सकेला। हमनी के ई जाने के जरूरत बा कि बुद्धत्व का ह? एकर सही अर्थ अगर जाने के होखे त हमनी के आपन पौराणिक इतिहास के सहारा लेवे के पड़ी-

तिलक योग्य ना बा तलवार  काटे बेगुनाहन के शीश।

खून सनल बा जेकर हाथ, कइसे उ पाई आशीष।।

जवन  तलवार बेगुनाह के मूडी काटेला ओकर कबो जयकार ना होला। सम्राट अशोक भी अपना राज्य के विस्तार खातिर युद्ध कइलें, जेकर परीणाम बहुत वीभत्स भइल आउर अंतिम बेला थक हार के बुद्ध के शरण ले लिहलें।

मगध के सम्राट अशोक भी शांति के स्थापना खातिर स्त्रियन के सामने आपन अस्त्र डार देहलें आऊर  सेना के सामने आपन अस्त्र डालके युद्ध रोके के  घोषणा कइलें। अंतिम में जाके बुद्ध के शरण में भिक्षु बनके जीवन यापन कइले। ओही जा से  वैचारिक क्रांति के विगुल बजल। अशोक  गौतम बुध के सिखावल राह पर चल के पूरा विश्व के  सत्य, अहिंसा, प्रेम आदि पंचशील के सिद्धांत के संदेश पहुंचइले। विश्व के कोना-कोना में जाईके  सबके  एक ही मूल मंत्र दिहले। प्रेम, दया, सेवा, के साथ लेई  विश्व में नव जागृति के संचार कइले।

विश्व के इतिहास उठा के देखीं। प्राचीन काल से लेके देवता युग में भी कहल गइल बा कि जवना  घर में सब भाई मिलके प्रेम भाव से रहेले, ओही घर में शांति आ संपन्नता के वास होला।  जेकरे अंदर  संतोष ना बा, लूटपाट आ उत्पात ही करेला त होला महाभारत के युद्ध। तब का भइल ? एगो सभ्यता के समूल नाश हो गइल।  रावण के अत्याचार के परिणाम लंका दहन भइल, कुल मिला के निष्कर्ष के रूप में इहे कहे के बा –

युद्ध  शक्ति के स्थापना नाही नाश मात्र बा।

युद्ध विकास के आधार नाही विनाश मात्र बा।

अगर ई युद्ध नाही रुकल त एक दिन अइसन आई कि सागरो दुनिया के समूल नास हो जाई।

बुद्ध के मन में धारण करीं, शुद्ध बनी।

 


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min350

किरण सिंह

अभी कोरोना के कहर से आदमी सम्हरल ना कि  ई दू देसन (रूस आ युक्रेन) के बीच में लड़ाई छिड़ गइल। इ त सभे जानेला कि जंग छिड़ गइला के बाद जीत भले बरियार के हो जाई बाकिर नुकसान अबरा के त होखबे करेला बरियरो के कम ना होखेला। आज दुनिया जतना आगे बढ़ गइल बा लोग तनिको सबुर से काम ली त आरामे आराम बा, बाकिर केकरा के समझावल जाव, सभे लोग त अपने स्वारथ आ अहंकार के तुष्ट करे में लागल बा। अब दू देशो के बीच में लड़ाई भइल त दूगो लोगे नू एकर फैसला कइलस। तनिको दूनो मे से केहुओ अकिल से काम लेले रहित त इ लड़इये ना भइल रहित। एने रूस के राष्ट्रपति पुतिन अपना के जांबाज बुझत रहले ह त युक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी ना डेरइले आ अपना देश के जनता के मन में देशभक्ति के भाव जगा के अपना देश यूक्रेन के हीरो बन गइले।

बात अतने रहे कि रूस बड़ भाई होखे के नाते यूक्रेन के अलगा होखला के बादो उनका पर नज़र राखल ना छोड़ले। मतलब कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन नइखन चाहत कि यूक्रेन नाटो के सदस्य बनस। काहे कि उनको त डर बा नू कि कहीं अमेरिका आ अउरी युरोपीयन देश युक्रेन के आपन खुफिया अड्डा मत बना लेवे। ए तरे सोचल जाव त अपना हिसाब से रूसो के कदम सहिये बा।
बाकिर एगो त बात बड़ले नू बा कि अबर होखे चाहे दूबर केहू के घर में केहू ढूकी त ओकरा के भगावे खातिर त हथियार उठावहीं के पड़ी, अगर स्वाभिमान आ देशभक्ति के नज़र से देखल जाई त युक्रेन के राष्ट्रपति सहिये कदम उठवले।

एगो छोट क्लास में कथा पढ़ले रहनी कि एगो हती मूकी चिउंटी बड़का हाथी के सूढ़े में अमा के उनका के तंग क देहलस। अभिये टीवी पर न्यूज देखत रहनी ह कि रूसी सेना कीव के तीन तरफ़ से घेर लिहले बा बाकिर यूक्रेन आर्मी के जवान अउरी उहाँ के जनता जगह-जगह घात लगा के रूसी सेना के काफिला के तहस-नहस क के मुश्किल में डाल देले बा। ई बात अगर पुतिन बूझ गइल रहते त आज ना उनकर सैनिक माराइल रहित आ ना यूक्रेन तबाह भइल रहित।

एही खातिर नू शान्ति के पाठ पढ़ावल जाला। ना बुझाय त रामायण आ महाभारत ग्रन्थे उठा के देख लीहल जाय कि रामो जी युद्ध से पहिले शांति दूत भेजले रहले आ जब रावण ना मनले त उनकर सोना के लंका जर के राख हो गइल। एही तरे कृष्ण जी भी खूब समझवले बाकिर मति हीन दुर्योधन के ना बुझाइल आ राज के संगे आपन मये खानदान लड़ाई के हवन कुण्ड में झोंक के स्वाहा क देहले।

आज सुने में आइल ह कि भारत, फ्रांस आ अउरी देश के बीचवान पड़ला के बाद युक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की रूस से वार्ता करे के तैयार हो गइल बाड़े। हमनी के त भगवान से इहे प्रार्थना करतानी जा कि हे भगवान अबो से इ लड़इया रुक जाव, काहे कि इ लड़ाई में त दूनो देश बर्बाद होते बा बाकिर ओकरा से जुड़ल अउरीयो देश कम ना परेशानी में पड़ल।

यूक्रेन में पढ़े गइल लइका लोग के कतना परेशानी भइल इ त उहे जान तारे। उ त भला होखे मोदी जी के कि सही बेरा पर फैसला लेके लइका लोगन के निकलववले।

यूक्रेन से आइल एगो स्टूडेंट से हम पूछनी कि “काहे ना तहन लोग पहिलहियें आ गइल ह लोग?” त उ कहले कि “का कहीं हमनी के त डेरवावल जात रहे कि गइलs लोग त तहन लोग के फेल क दियाई।” खैर जान बची त लाखोपाये।

अब देखीं कि मोदी जी सांचों ऊ लइका लोगन के डिग्री दियवावतानी आ कि खाली सान्त्वना देवे खातिर कहतानी इ त समये बताई। ए तरी हमनी के मोदी जी से पूरा उम्मीद बा।
फिलहाल त भगवान से हमनी के इहे बिनती करीं जा कि लड़ाई रुक जाव।


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Hum BhojpuriaMay 6, 20221min430

संजय कुमार पांडेय सिद्धांत 

केहू के असरा मत करिह, बस करिह अपना बल के। कोई भी देश के प्रमुख के ई पहिला जिम्मेदारी बा कि आपन देश के जनता के रक्षा के ध्यान रखीं आ कोई भी दूसरा देश के साथे कभी भी अपना स्वार्थ में या अपना आन में भा दोसरा के बहकवला में युद्ध करे में जोश मत दिखाईं। कुछ अइसने भूल से गुज़र रहल बा यूक्रेन, जेकर अंदाजा ओकरा कभी भी ना रहे। अपना लोग से लड़े के आ दोसरा लोग से सहयोग मांगे के भूल कर रहल बा यूक्रेन।

यूक्रेन-रूस के मनमुटाव सन 2013 से प्रारंभ होके उहे गलती के दुबारे घटवला के कारण आज महायुद्ध जइसन तबाही के मंज़र देखे के मिल रहल बा। एगो कहावत बा भोजपुरी में कि आपन हित-अनहित जानवरो बुझेला, काहे कि उ हर तरफ असुरक्षा के भाव से गुजरेला। अभी मामला सरिया के अझुराइल बा। एह युद्ध के परिणाम रूस के पक्ष में होई, ई निश्चित बा, काहे कि यूक्रेन के लड़कपन के जब ले मुंहतोड़ जवाब ना दियाई, तब ले रूस के शक्ति के लोहा ना त अमेरिका मानी, ना ही नाटो।

थोड़ा सा पीछे देखल जाव त बात और स्पष्ट  हो जाई। देखल जाव त रूस-यूक्रेन के बीच तनाव सन 2013 में तब शुरू भइल, जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर  यानुकोविच के कीव में विरोध शुरू भइल। इनका रूस के समर्थन मिलत रहे, जबकि उहां के प्रदर्शनकारी के ब्रिटेन के साथ मिलत रहे। अइसन स्थिति में फरवरी 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति यानुवोकोविच के देश छोड़े के पड़ल और उनका रूस में जाके शरण लेवे के पड़ल। ओही समय रूस दक्षिणी यूक्रेन क्रीमिया पर कब्जा  कइलख। एतने से बात खत्म ना भइल, रूस यूक्रेन के अलगाववादी लोग के खुला समर्थन देवे लागल। तबे से यूक्रेन सेना और अलगाववादी के बीच जंग होखे लागल। आज भी पूर्वी यूक्रेन के कई इलाका में रूस समर्थित अलगाववादी के कब्जा बा। एही सब के कारण डोनेटस्क और लुहानस्क के रूस अलग देश के रूप में मान्यता दे देले बा। आज एही से पुतिन सैन्य एक्शन के आर्डर दे तारन।

इहाँ एक बात अच्छा से समझे के होई कि यूक्रेन जब से अइसन रणनीति बनइलख कि नाटो से दोस्ती करके अमेरिका के शरण में रहके अलगाववादी लोग से निपटल जाव, तब से एह युद्ध के शुरुआत हो गइल। रूस  एकर भरपूर विरोध कइलख काहे कि रूस ना चाहत रहे कि यूक्रेन नाटो से मिले। काहे कि अइसन भइला पर रूस चारों ओर से घिर जाइत। आगे चलके नाटो देश के कुल जना मिलके रूस पर मिसाइल तानी त रूस  खातिर ई बहुत बड़ा चुनौती हो जाई।

रूस नइखे चाहत कि नाटो आपन विस्तार करे, एही से रूस यूक्रेन और पश्चिमी देश पर दबाव बनावता। अइसन बदतर स्थिति में  रूस के ना चाहते  हुए भी अमेरिका और दोसर देश के पाबंदी के नजरअंदाज करत युद्ध शुरू के पड़ल। आज 25 दिन भइला पर भी युद्ध थमे के जगह और बढ़ल जाता, भारत आज भी एकरा के बातचीत से सुलझावे के सलाह देता। युद्ध कवनो भी समस्या के हल  नइखे, बल्कि विनाश के दोसर नाम ह। जनहित के बारे में सोचके समय रहते राष्ट्र प्रमुख लोग के सही निर्णय लिहल ही बुद्धिमानी होई। जय भारत जय अमन।



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भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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