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Hum BhojpuriaOctober 22, 20211min370

हम का करब कह के

के मानीं?

 

के कही कि हमरो

एगो कहानी बा!

 

राम अस ना

त रावणो अस ना

कन्हइया अस ना

त कंसो अस ना।

 

अजातशत्रु,चन्द्रगुप्त, हर्षवर्द्धन भा

पल्लवराज महेन्द्रवर्मन-

केहू के छिटिको भर नइखे

हमार जिनिगी के सात पुश्त

हम जानत बानीं।

 

गाँधी, सुबास, भगत, आजाद

चाहे एकदम पीछे चलीं त

भक्त प्रहलाद

केहू के जिनगी के कुछुओ

हमरा जिनगी से नइखे जुटत

त कइसे कह दीं

आपन वजन बढ़ा के कुछुओ?

 

आन्ही में उड़त

सूखल कोंढ़ी

केने जाई

केने बिलाई

के बता सकत बा?

 

खपड़ा वाला घर में

भइल रहलीं हम

माई कहत रहे

हमरा से बड़ एगो भाई भइल

मुअले भइल

हमार जनम भइल त

चनरमा के उगरह हो गइल रहे

हम आजु ले गरहने में

गोताइल बानीं

गोर पैदा भइल रहीं

बाकिर करिखे पोताइल बानीं

सवखे लागत रह गइल

तनियो-मनी पेट फुललगर होइत

से ना भइल।

 

जनमे से

अपना भार से बेसी

भार से जँताइल बानीं

कुछ कहींला त लोग कहेला

करियट्ठा मनसपापी ह

देख-देख जरेला।

 

हमार रोज-रोज के मुअलका

केहू के लउके ना।

 

हमरा जिनगी में

ताकीं मत, महाराज!

हमार जिनगी केहू से ना मिली।

 

ठीक बा कि मनरेगा वाला

मजूर हम ना हईं

त गद्दी के नासूरो त ना हईं

देश के माटी, हवा, पानी

जइसे सबके ह

ओइसे हमरो

जहिया मूअब ओही में मिलब

पइसा होई त

जिअते काम-किरिया सपरा देब

मुअला के बाद के

कवनो विधान में

हमरा विश्वास ना ह

अब ई रउआ प बा कि

हमरा के का कहब!

 

ओइसे हम

खाली एगो बात कहब

हमरा के केहू ऊ ना कहल

जे हम रहीं

अब रउए बताईं

हम का कहीं?


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Hum BhojpuriaOctober 22, 20211min280

सुरेश कांटक

का कहीं ए हरिचरना के माई

जिनगी बेहाल भइल होत ना कमाई

चारो ओरी ताकतानी केहू ना सहाई

कइसे के बाल बाचा जिनगी बचाईं

 

सगरो बाजार बंद कइसे का बेचाई

बंद इसकूल बाटे होखे ना पढ़ाई

करजो भेटात नइखे आवेला रोआई

सँझिया सबेर कइसे चुल्हवा जोराई

का कहीं ए हरिचरना के माई !

 

हीत नाता कामे नाहीं आवे कवनो भाई

लागेला कि दुनिया बनल बा कसाई

मुअलो प अब केहू कामे नाहीं आई

दूरे दूरे सभे रहे के से हम बताईं

का कहीं ए हरिचरना के माई !

 

सगरो बढ़ल जाता बड़े बड़े खाई

रतिया अन्हरिया में पड़े ना दिखाई

अस मन करेला जहर हम खाईं

बाकिर तोर मुँह परि जाला दिखलाई

का कहीं ए हरिचरना के माई !

 

बबुआ बेमार बाटे मिले ना दवाई

देखे सभ लोग बाकिर भीरी नाहीं आई

लीलेला समइया बनल बैरी बाबू माई

कांटक के करेज कुहुँकेला कसमसाई

का कहीं ए हरिचरना के माई !

 


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Hum BhojpuriaOctober 22, 20211min290

डॉ. दीप्ति

श्रद्धा, शक्ति

सम्मान के प्रतीक नारी

लांछन, शोषण

अपमान के प्रतीक नारी।

मूरत बनाके

थोप दीं मंदिर में

चढाईं फूल, अच्छत्

आ गाईं-

तू हीं हऊ लछिमी,

मेधा, प्रतिभा, बुद्धि, सरस्वती, आदिशक्ति भवानी।

 

मन में जब आ जाये

सड़क पर खींच के आंचर

आ साड़ी फाड़ दीं-

धनका दीं एकरा के

काहे कि ..अबला ह नारी

अन बोलता गाय खानी

कुछुओ ना कही।

 

ई समाज हवे

दुमुहँआ साँप-

कब काट ली भरोसा नइखे

टुटलो पर दाँत विष के

ई फोंफ मारी-

कालिया दही खानी

खद बद करेला अपने जहर से

मनई के मन!!

 

लोभ के पांकी में सनाइल

ई अहंकार के पुतला

ना धरती बा एकरा लगे

ना मुट्ठी भर आकाशे बा,

काहे कि एकरा

सपना पर तनिको विश्वास नइखे,

नारी प्रतिष्ठा बढत बा

बाकी

ओकर आपन का बा???

उत्थान हो रहल बा,

नारियन के……

नारियन के सपना बुना रहल बा,

बाकी सपना पर तनिको

विश्वास नइखे!

अपना सपना पर विश्वास नइखे।।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min980

मनोरंजन प्रसाद सिन्हा

सुन्दर सुघर भूमि भारत के रहे रामा,

आज इहे भइल मसान रे फिरंगिया

अन्न धन जल बल बुद्धि सब नास भइल

कौनों के ना रहल निसान रे फिरंगिया

 

जहॅवाँ थोड़े ही दिन पहिले ही होत रहे,

लाखों मन गल्ला और धान रे फिरंगिया

उहें आज हाय रामा मथवा पर हाथ धरि,

बिलखि के रोवेला किसान रे फिरंगिया,

 

सात सौ लाख लोग दू-दू साँझ भूखे रहे,

हरदम पड़ेला अकाल रे फिरंगिया

जेहु कुछु बॉचेला त ओकरो के लादि लादि,

ले जाला समुन्दर के पार रे फिरंगिया

 

घरे लोग भूखे मरे, गेहुँआ बिदेस जाय,

कइसन बाटे जग के व्यवहार रे फिरंगिया

जहॅवा के लोग सब खात ना अधात रहे, रूपयासे

रहे मालामाल रे फिरंगिया

 

उहें आज जेने-जेने आँखिया घुमाके देखु, तेने, तेने

देखबे कंगाल रे फिरंगिया

बनिज-बेपार सब एकहू रहल नाहीं,

सब कर होइ गइल नास रे फिरंगिया

 

तनि-तनि बात लागि हमनी का हाय रामा,

जोहिले बिदेसिया के आसरे फिरंगिया

कपड़ों जे आवेला बिदेश से त हमनी का

पेन्ह के रखिला निज लाज रे फिरंगिया

 

आज जो बिदेसवा से आवे ना कपड़वा त

लंगटे करब जा निवास रे फिरंगिया

हमनी से ससता में रूई लेके ओकरे से

कपड़ा बना-बना के बेचे रे फिरंगिया

 

अइसहीं दीन भारत के धनवा

लूटि लूटि ले जाला बिदेस फिरंगिया

रूपया चालिस कोट भारत के साले-साल,

चल जाला दूसरा के पास रे फिरंगिया

 

अइसन जो हाल आउर कुछदिन रही रामा,

होइ जाइ भारत के नास रे फिरंगिया

स्वाभिमान लोगन में नामों के रहल नाहीं,

ठकुरसुहाती बोले बात रे फिरंगिया

 

दिन रात करे ले खुसामद सहेबावा के,

चाटेले बिदेसिया के लात रे फिरंगिया

जहॅवाँ भइल रहे राणा परताप सिंह

और सुलतान अइसन वीर रे फिरंगिया

 

जिनकर टेक रहे जान चाहे चलि जाय,

तबहु नवाइब ना सिर रे फिरंगिया

उहॅवे के लोग आज अइसन अधम भइले,

चाटेले बिदेसिया के लात रे फिरंगिया

 

सहेबा के खुशी लागी करेलन सब हीन,

अपनो भइअवा के घात रे फिरंगिया

जहवाँ भइल रहे अरजुन, भीम, द्रोण,

भीषम, करन सम सूर रे फिरंगिया।

 

उहें आज झुंड-झुंड कायर के बास बाटे,

साहस वीरत्व दूर भइल रे फिरंगिया

केकरा करनिया कारन हाय भइल बाटे,

हमनी के अइसन हवाल रे फिरंगिया

 

धन गइल, बल गइल, बुद्धि आ, विद्या गइल,

हो गइलीं जा निपट कंगाल रे फिरंगिया

सब बिधि भइल कंगाल देस तेहू पर,

टीकस के भार ते बढ़ौले रे फिरंगिया

 

नून पर टिकसवा, कूली पर टिकसवा,

सब परटिकस लगौले रे फिरंगिया

स्वाधीनता हमनी के नामों के रहल नाहीं,

अइसन कानून के बाटे जाल रे फिरंगिया

 

प्रेस एक्ट, आर्म्स एक्ट, इंडिया डिफेन्स एक्ट,

सब मिलि कइलस ई हाल रे फिरंगिया

प्रेस एक्ट लिखे के स्वाधीनता छिनलस,

आर्म्स एक्ट लेलस हथियार रे फिरंगिया

 

इंडिया डिफेंस एक्ट रच्छक के नाम लेके,

भच्छक के भइल अवतार रे फिरंगिया

हाय हाय केतना जुवक भइलें भारत के,

ए जाल में फांसे नजरबंद रे फिरंगिया

 

केतना सपूत पूत एकरे करनावा से

पड़ले पुलिसवा के फंद रे फिरंगिया

आजो पंजबवा के करि के सुरतिया,

से फाटेला करेजवा हमार रे फिरंगिया

 

भारते के छाती पर भारते के बचवन के,

बहल रकतवा के धारे रे फिरंगिया

छोटे-छोटे लाल सब बालक मदन सब,

तड़पि-तड़पि देले जान रे फिरंगिया

 

छटपट करि-करिबूढ़ सब मरि गइलें,

मरि गइलें सुधर जवान रे फिरंगिया

बुढ़िया महतारी के लकुटिया छिनाइ गइल,

जे रहे बुढ़ापा के सहारा रे फिरंगिया

 

जुवती सती से प्राणपति हाय बिलग भइल,

रहे जे जीवन के आधार रे फिरंगिया

साधुओं के देहवा पर चुनवा के पोति-पोति

रहि आगे लंगटा करौले रे फिरंगिया

 

हमनी के पसु से भी हालत खराब कइले, पेटवा के

बल रेंगअवले रे फिरंगिया

हाय हाय खाय सबे रोवत विकल होके,

पीटि-पीटि आपन कपार रे फिरंगिया

 

जिनकर हाल देखि फाटेला करेजवा से,

अँसुआ बहेला चहुँधार रे फिरंगिया

भारत बेहाल भइल लोग के इ हाल भइल

चारों ओर मचल हाय-हाय रे फिरंगिया

 

तेहु पर अपना कसाई अफसरवन के

देले नाहीं कवनो सजाय रे फिरंगिया

चेति जाउ चेति जाउ भैया रे फिरंगिया से,

छोड़ि दे कुनीतिया सुनीतिया के बांह गहु,

भला तोर करी भगवन्त रे फिरंगिया

 

दुखिआ के आह तोर देहिआ भसम करी,

जूरि-भूनि होइ जइबे छार रे फिरंगिया

ऐही से त कहतानी भैया रे फिरंगी तोहे,

धरम से करू ते बिचार रे फिरंगिया

 

जुलुमी कानुन ओ टिकसवा के रद क दे,

भारत के दे दे तें स्वराज रे फिरंगिया

नाहीं त ई सांचे-सांचे तोरा से कहत बानी, चौपट

हो जाई तोर राज रे फिरंगिया

 

तेंतिस करोड़ लोग अंसुआ बहाई ओमें

बहि जाई तोर सभराज रे फिरंगिया

अन्न-धन-जन-बल सकल बिलाय जाई,

डूब जाई राष्ट्र के जहाज रे फिरंगिया


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min820

सूर्येन्दु मिश्र

तिरबेनी नाम रहे उनकर लेकिन गांव के लोग उनके तिबेनिया के नाम से ही जाने। तिरबेनी लरिकाईये से गाँव के बाकी लड़िकन से अलगे बुझात रहलें। कवनो काम होखे चाहे खेलकूद उनकर मुकाबिला उनकरी उमिर के लड़िका लो ना क पावे।

उनकर बाबू जी छबीला पांडे सरकारी महकमा में एगो अच्छा पद पर काम करत रहलें। वो घरी अंग्रेजन के राज रहे आ उहे देश के मालिक रहलें कुल। पांडे जी के इच्छा रहे कि उनकर कुल के चिराग खूब पढ़-लिख के कौनो ऊंच ओहदा पर नौकरी करें…लेकिन पूत के पांव पलनवे में नूं लउक जाला।

तिरबेनी जब कुछ बड़ भइले त कबो कबो  गोरून के चरवाही में भी जाये लगलें। एक दिन जब सब चरवाहा लोग बांधी पर बइठ के बतियावत रहले त तिरबेनी भी उनकर बात सुनें लगलें। एक जाना बुजुर्ग कहल शुरू कइलें…

” देख लोग ई अंगरेजन के हुशियारी सरवा अइलें सन बयपारी बन के घिघिआत आ आजु उहे ए देश के राजा बनिके पूरा देश के अपनी अंगूरी पर नचावत बाड़े सन।”

दूसरा जाने बोललन- “ठीक कहs तारs भाई, अब त ई हाल बा कि जे ई गोरन के खिलाफ बोलता ओकरा के उ तुरंते फांसी पर लटकवा दे तारेसन। पंजाब में त उ क्रांतिकारी लोग के तोपे के मुंह में बान्हि के उड़ा दिहलन ह सन।”

इन्हन के एतना अत्याचार बढ़ गइल बा कि ढाका में अपने देश के कारीगरन के हाथे कटवा देलेसन। ओ लोगन के हाथ से बनल मलमल के पूरा थान एगो अंगुठी से निकल जात रहे ।

तिरबेनी चरवाहा लोगन के बात बड़ी ध्यान से सुनत रहलें। उनका से ना रोकाइल तब पूछ लिहलें ….

“काका, ई कारीगर लोग के हाथ काहे कटवा दिहले? उनके त बहुत खून निकलल होई ?

दुखी काका -“आरे तोरा ना बुझाई रे बबुआ…. उ कारिगरन के रहते अंगरेजी कंपनी के माल बिकईबे ना करित।”

तिबेननी कहलन-” एम्मे कौन बात रहे, सब लोग मिलके कंपनी के माल ख़रीदबे ना करी त कंपनी खुदे बन्द हो जायी।”

दुखी काका – उ त ठीक बा लेकिन अपनिये देश के लोग जब गद्दार बा त का करबा ?”

“काका एकर मतलब हमरा ना बुझाईल”

दुखी काका- ” तहरा ना नू बुझाई, तू त बड़ा बाप के बेटा हउवs, तहार बाप अंग्रेजन के नौकरी करेलन। उ अंग्रेजन के खिलाफ कबो जा सकेलेन ? एहितरे सबके आपन आपन सवारथ बा। कुछ लोग विरोध में जाला त बहुत लोग गोरन के तलुआ चाटे खातिर लाइनी में खाड़ रहेला।”

तिरबेनी के ई बात भीतर जा के समा गइल। दूसरे दिन जब उनकर बाप नौकरी पर जाये खातिर तैयार होत रहलन त उ उनसे पूछलें – “बाबूजी रउवा अंग्रेजन के गुलामी करेनी का ?

उनकर बाबूजी अपनी बेटा के मुंह से ई बात सुनके भौचक्का हो गइले ।

पूछे लगलें- “तोहरा से ई के कहल ह, हम नौकरी करेनी त तनख्वाह पावेनी, नौकरी गुलामी थोड़े ना होला।”

…. लेकिन तिरबेनी उनके ए बात से संतुष्ट ना भइले।

कहे लगनें….” लेकिन बाबू जी जवन अंगरेज अपने देश के लोग के हाथ कटवा दे तारें सन, तोपे से उड़ा दे तारे सन आ भारतमाता के नाम लिहला पर फांसी पर चढ़ा दे तारे सन उनहन के नौकरी त देश के साथे गद्दारी कहल जाई।”

तिरबेनी के मुंह से अइसन बात सुन के  बाबूजी कुछ बोलले बिना घर से बाहर निकल गइलें  बाकी एतना त उनके नीमन से बुझा गइल रहे कि त्रिवेणी के मन में गोरन के खिलाफ विद्रोह के चिंगारी सुलुग रहल बा।

समय के साथ तिरबेनी जब कुछ और बड़ा हो गइलें तब उनकर दाखिला स्कूल में हो गइल। तिरबेनी तेज दिमाग के रहले, उनकर पढाई अपनें क्लास में आगे आगे चले।  धीरे-धीरे जब उ हाईस्कूल में पहुंच गइले….ओहि समय उनके हाथ कुछ अइसन किताब हाथे लागल जेकरा के पढला के बाद उनके मन में अंग्रेजन के खिलाफ विद्रोह के चिंगारी धधके लागल। अब त उनकर मन पढ़ाइयो से उचाट हो गइल रहे। त्रिवेणी के बात-बेवहार में परिवर्तन देख के उनकर बाबूजी चिंतित रहे लगलें। कवनो बाप अपनी बेटा के खुशहाल जीवन देखल चाहेला ..एकरा खातिर उ समाज के नियम-नेत के भी ताक पर रख देला। तिरबेनी के बाबूजी उनके कई बार ई समझावे के कोशिश कइले कि अंग्रेजन के खिलाफ बगावत सोचल शेर के मुंह में हाथ डलला अस बा लेकिन तिरबेनी के ऊपर उनकी बात के कवनो असर ना भइल।

एहि बीचे, एक दिन अपने स्कूल में एगो समारोह में तिरबेनी के कुछ बोले के मौका मिल गइल।  जब उ बोले खातिर खड़ा भइलन त आपन संबोधन वंदे मातरम से शुरू कइलन। जब उ ब्रिटिश हुकूमत के बघिया उघारल शुरू कइलन त वो समारोह में आइल अंग्रेज अधिकारी बौखला गइल आ मंच से उतरे के संदेशा भेजववलस लेकिन उ आपन बात कहिए  के उतरलन। उनके आवाज में इतना जोश रहे कि उनकर कुछ सहपाठी लोग भी बीच-बीच मे उनके वंदे मातरम आ भारत माता की जय के नारा खूब लगावल लो।

बाद में अफसर के आदेश पर तिरबेनी  के साथे उनके पांच गो और साथिन के नारा लगावे खातिर स्कूल से निकाल दिहल गइल।

तिरबेनी के स्कूल निकलला के खबर जब उनके बाबूजी के मिलल त उ आपन माथा पीटे लगलें। उनके समझावे के एगो कोशिश फेरु कइलें लेकिन तिरबेनी अपनी इरादा से टस से मस ना भइलन।

पढ़ाई छुटला के बाद तिरबेनी पर देशभक्ति के नशा अउर गहिरा गइल। अब उ धीरे-धीरे क्रांतिकारिन के मीटिंग में भी जाए लगले। उनकर जोशीला भाषण आ लगन देखि के उनका के एगो गुट के मुखिया बना दिहल गइल।

एही बीचे तिरबेनी के बाप ओ समय फइलल प्लेग के महामारी में स्वर्गवासी हो गइले। ए प्लेग के महामारी आ साथे पड़ल अकाल दुनों में अंग्रेजन आ जमीनदारन के करिया चेहरा उजागर हो गइल रहे।

धीरे-धीरे समय के साथे तिरबेनी के साथ कुछ नामी विद्रोही लोगन से हो गइल रहे। उनके गुट के लोग हथियार खरीदे खातिर आ पार्टी के काम की खातिर छोट-मोट डकैती भी डाले लागल रहे।

उनकी गुट के ई नियम रहे कि धनी आ जमींदार लोग देशद्रोही बनके जवन धन दौलत बटोर के रखता, ओईमे गरीब के भी हिस्सा होखे के चाहीं।

अब, एक के बाद एक डकैती लूट में उनकर नाम आवे लागल। पुलिस कई बेर गांव में छापा मरलस लेकिन तिरबेनी के परछाइयों ना पवलस। तिरबेनी के ना पकड़इला के कारण इहो रहे कि उ कबो अपनी इलाका में लूटमार ना करस। दूसरे, गरीबन के बेटी के कन्यादान उ खुद आ के करें। उनकरी पैसा से उनकर महतारी कबो अपनी खातिर कुछ ना लिहली बहुत गरीबी में आपन गुजर बसर करस।

एहि बीच में उनके बारे मे पुलिस के पक्का सूचना मिलल कि उनकी गुट के लोग के मीटिंग एगो उखि के खेत मे चलता। एगो तेज तर्रार अफसर मय फोर्स लेके उ खेत के घेर लिहलस आ तिरबेनी के गिरफ्तार क लिहलस। तिरबेनी के गिरफ्तारी से जवार के लोग बहुत दुखी रहे लेकिन अंग्रेजन की शक्ति के आगे सब लोग डेरइबो करे।

जब एगो अफसर उनसे पूछलस कि डकैती के समान कहाँ छुपवले बाड़s? त उ अपने पिछुआरे के खेत बता दिहलन। पुलिस मय फोर्स वो खेत के कई बेर खोदववलस बाकी उहवाँ से एगो फुटल कौड़ी भी ना मिलल।

जब उ अंगरेज अफसर खिसिया के  फेर पूछलसि–  “जब कुछ खेते में ना रहे त बेकार में खेते के खोदाई काहे करववल ह।”

“सरकार, हमार दू गो महतारी बाड़ी, एगो जवने ख़ातिर हमरा के फांसी होखे जाता। दूसर, जवन हमके जनम देले बिया। हमरी ना रहले के बाद उ ओहि खेत में कुछ बो-उपराजके खा सकी। एहि से हम अइसन कहनीं ह। हम जवन धन लुटले बानी ओके देश आ मजलूम लोग के सेवा में खर्च क देले बानी।”

उ अफसर के लगे अब कौनो सवाल ना रहे आ जबाब लोर बनके उनकी आंख से  टपके लागल।

आज भी जवार के लोग तिरबेनिया के बुध्दिमानी आ देशप्रेम के याद करेला।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min920

आकाश महेशपुरी

युग युग से भारत के महिमा

गावत ई सकल जहान हवे

ई भारत देश महान हवे

 

पूरा भारत घर आपन हऽ

घर में सबके आराम मिले

एही घरवा में मिले हवा

भोजन पानी अविराम मिले

बा जनम मिलल ये धरती पर

ई धरती सबकर जान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

 

ना मनइन में बा भेद इहाँ

जइसे कुरान बा वेद इहाँ

जे जाति-धरम में बांटेला

दीहल जाला ऊ खेद इहाँ

मिल-जुल के सभे रहे हरदम

भाईचारा पहिचान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

बा ताजमहल आ लालकिला

एलोरा आ जंतर मंतर

बा किसिम किसिम के भारत में

मंदिर मस्जिद आ गिरिजाघर

युग युग ले नूर रही एकर

जइसे सूरज आ चान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

 

सागर शीतलता दे ताटे

आ माथे सजल हिमालय बा

नदिया, झरना बा हरियाली

दुनिया तऽ एकर कायल बा

ई कोयल के हऽ मधुर गीत

आ कलियन के मुस्कान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

गांधी, गौतम, अब्दुल कलाम

बा कृष्ण राम के नाम इहाँ

नानक आ महावीर स्वामी

कइले बालो सदकाम इहाँ

ई धरती सूर कबीरा के

आ तानसेन के तान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

जे जहवे बा ऊ तहवे से

लागल बा देश सजावे में

वैज्ञानिक खोजे में लागल

अभियंता देश बनावे में

सैनिक सीमा पर पहरा दे

खेती में डटल किसान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min920

रजनी रंजन

( एक )

 

दे दिहले देशवा पर जान, हमरा देशवा के वीर महान
मनवा में देश प्रेम अँखिया में रोष भरी,चली दिहले सीना के तान

हो हमरा देशवा के वीर जवान

 

उ का जानें ओहीपार लोगवा, कब से लगइले बा घात हो
बात बे बात पे गोली दागे, सीमा सिहरे सारी रात हो
भारत माँ पर लाल नेछावर, होके रखलन मान हो
हमरा देशवा के वीर जवान

 

जब जब फोन के घंटी बाजे, धड़के जियरा हियरा काँपे

सुन के खबरिया पूत शहीद के, बूढी माँ हे राम के जापे

गोरी के चूड़ी ना बोले, ना रसघोले कान हो

हमरा देशवा के वीर जवान

 

सूनी गोद बा सूना अंगना, सूना सब संसार हो

सूनी अंखियां सूनी सेजरिया, छुटल सब सिंगार हो

आज दुलरूआ सुतल बारन, देके आपन बलिदान

हो हमरा देशवा के वीर जवान

 

 

सुन के खबरिया लाल के जान के, जियरा भइल दुई फाड़

तबहूँ मनवा गरब करत बा, झंडा ललन दिहले गाड़

जान गँवइले देश के खातिर, सभके बढा के सम्मान

हो हमरा देशवा के वीर जवान

 


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min4690

डॉ. आदित्य कुमार अंशु

मंगल पाण्डेय बलि भूमि के

नगवा गाँव के लाल रहलन

कुछ मनई जनम भूमि पर

नवका-नवका विवाद कइलन

 

 

इतिहास में जे वीर बा

ओकर अमिट कहानी बा

सन् सन्तावन के क्रांति के

मंगल पाण्डेय बलिदानी बा

 

 

अंगरेजन के अत्याचार जब

झाँसी में बढ़े लागल,

रानी लक्ष्मीबाई से तब

वीर मंगल के प्रेरणा जागल

 

झाँसी के धन लूट-पाट  के

नेल्सन जब ले जात रहे,

कर्मा जइसन वीरन के

छाती फाटत जात रहे

 

मंगल पाण्डेय खातिर कर्मा

जान के बाजी लगा दिहले

एही खातिर गोरी सरकार

उनका के बड़हन सजा दिहले

 

मंगल पाण्डेय के जब लागल

हमनी संग अत्याचार होता,

कारतूस में गाय सूअर के

चरबी भी लगावल जाता

 

क्रांति के लाल जाग गइल

आपन स्वाभिमान बचावे के

मन ही मन संकल्प लिहलें

अंगरेजन के मजा चखावे के

 

मार-पीट जब शुरू भइल

बैरकपुर के छावनी में,

हिन्दू मुस्लिम जाग गइल

अपनी जोशे जवानी में

 

मंगल वीरा जब देखले जे

हमनी के सम्मान घटी,

मातृभूमि की रक्षा खातिर

हम वीरवन के शीश चढ़ी

 

हुंकार भरी के टूट पड़लन

गोरा अफसर की छाती पर

खिसियाइल अंग्रेज़ी सेना

भारत के हर प्रानी पर

 

गुपचुप ढंग से फाँसी दिहले

बलिया के वीर बाँकुरा के

मचल तूफान नींद खुल गइल

अंगरेजन की बड़का आका के

 

शत शत नमन कारीलां हमहू

नमन करेला देश सुजान

जन-जन के होठन पर बाटे

जे दिहलीं रउआ बलिदान

 

 

आईं-आईं  फेरु भाई

बलिया आज बोलावता,

करुण कहानी भारत आपन

रो के आज सुनावता

 


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min730

डॉ० रामसेवक ‘विकल’

 

अंगरेजन के शोषन के बढ़ि गइल पाप के जब आगार

तब भारत के भी कण-कण में उमड़ल जोस के पारावार

सन् सन्तावन के बदला लेबे खातिर के वीर तैयार,

जूझलन ताल ठोकि रन भीतर हो सब घोड़न पर असवार

 

अस्सी बरिस के बबुआ कुवँर सिंह रहलन बलवान,

गरजि सिंह की नियर लड़ाई में जगलन ले जोस पुरान

जागि गइल जगदीसपुर औ गाँव जवार शहर जागल,

बच्चा, बूढ़ा, नर, नारी सब नवहन के किस्मत जागल

 

गंगा जागलि, जमुना जागलि, सरयू के आँचल जागल,

जन जन में अभिमान जागल,आ सबल वीर भारत जागल

बलिया जागल, आरा जागल, गाजीपुर छपरा जागल,

संतावन के वीरन के तब गर्म खून गौरव जागल

 

रणभेरी बाजे लागल तब, बाजल महत नगाड़ा ढोल,

गुँजि उठल जयगान विजय के पहुँचल गगन बीच जयबोल

एह राजपूती हाड़ माँस में दुर्गा जी के वास भइल,

रणचंडी काली करालिनी के भी आशीर्वाद भइल

 

थहराईल शासक दल तब औ अफसर सब भइलें हैरान,

गरमाइल देशी नवहन में आजादी के उमड़ल प्रान

काँपि गइल ब्रिटिश के शासन लार्ड गवर्नर माने हार,

ई राजपूती शान कबो ना मानें केहू के ललकार

 

शाहनशाह कुवँर महाराजा शिवपुर में पहुँचल रहलन,

हाथी ले गंगा मईया में कूदि पार होखत रहलन

बीच नदी में जबै पहुँचलन, बाँहि में एक गोली लागल,

अंगरेजन की गोली से तब हाथ में विष फैले लागल

 

काटि हाथ के बुढऊ दादा गंगा जी के दे दिहलन,

हँसत-हँसत गंगा मैया के आपन कर बलि दे दिहलन

गंगा की लहरिन में भैया, जय जय के मधुर गीत भरल,

तीन-तीन पर लगल लहर में कुवँर सिंह के प्रीत भरल

 

जाके पार नरेश कुवँर रण दलन से मिलि हँसि के कहलन,

चलऽ लड़े के बा हो बाबू! जोस भरल जय-जय कहलन

जब डगलस ले आपन सेना, पहुँचल आरा के मैदान,

तब मचि गइल महान युद्ध जगदीसपुर में भी घमसान

 

एने बिहारी वीर बाँकुड़ा रहलन कुवँर सिंह बलवान,

ओने लुगाई और डगलस के रहलन सब सैनिक सैतान

लड़ि भिड़ि के देसवा के खातिर कुँवर सिंह बलि हो गइलन,

मारि के अमर महत् जीवन पा भारत में धनि हो गइलन

आवs आज गीत गाईंजा अवर करीजा जय जय कार

वीर कुवँर सिंह बलिदानी के करीजा सब युग में सत्कार


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min890

डॉ. मञ्जरी पाण्डेय

 ( एक )

 

सोनवा से सुग्घर बाटे ई आपन देस हो

रुपवा अस चम-चम चमकै ई आपन देस हो

 

मटिया उगिलै सोना हथवा लगाईं लs

सोनवा अस बलिया फरकै छोड़ा परदेस हो

 

खेती किसानी हवे देसवा के सान हों

सहरी बघार छोड़s बदला अब भेस हो

 

बेद पुरान  एइजा बाँचल  रटल जाला

भइलें  महान जिन्ही लिहलें  हs लेस  हो

 

सोलह संसकार रोजे बीनल बोवल जाला

सहरी किरिनियाँ से जनि डारs मेस हो

 

सागर चरन चूमे मथवा परबत हो

बारी- बारी कुलही मौसम के देस हो

 

जोग अs तन्तर के बड़ा गणतन्तर

जग में मिसाल नाहीं परब क. देस हों

 

तुलसी दल पाई कान्हा बंसी बजावै हो ,

हर- हर महादेव गूँजत जयदेस हो

 

             (दू )

 

जिनिगिया तहरे नांवे  लिखी गइल बाटे

खेतवा में धान  अब पाक गइल बाटे

 

लिखि-लिखि  पतिया  पठवत रहलीं

अँखिया  कै  लोरवा  ओतने पीयत रहलीं  ‘

अखरवा ई हाल सज्जी जान गइल बाटे

खेतवा में धान…..

 

सहत-सहत  मेहना सुखि  गइल बाटीं

काँचे  उमिरिया से बाँचि  गइल बाटीं

बचलै उमिरिया जवाल  भइल बाटे

खेतवा …..

 

लिपि पोति अँगना  जोहत बाँटीं

जिनिगी के कन्हवा  पर ढोवत  बाटीं

रहिया डगरिया बवाल भइल बाटे

खेतवा ……

 

सबके बखरवा में बाँटि  गइल बाटीं

तहरे बखरवा में जीयत बाटीं

अंचरवा का लाज ई सवाल भइल बाटे

खेतवा ……

 

फोनवा जिनिगिया कै ख़ास भइल बाटे

आवे क  खबरिया आस भइल बाटे

सेन्हुरा लिलरवा  हवाल भइल बाटे



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