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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min780

शशि कुमार सिंह प्रेमदेव

( हिंदुस्तान के आजाद करवला में बलिया ज़िला क अभूतपूर्व योगदान इतिहास में दर्ज बा। सन् बयालीस के ‘ भारत छोड़ो ‘ आंदोलन का दौरान, जवन तीन गो जनपद कुछ दिन खातिर अंग्रेजी हुकूमत के धकिया के आजाद हो गइल रहलन सs ,ओह में बलिया सबसे आगे रहे। बाद में, बलियाटिकन के एह् कारनामा का बारे में सुनि के कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद कहले रहीं — ” मैं बलिया की उस सरजमीं को चूम लेना चाहता हूं जहां इतने बहादुर और शहीद पैदा हुए !”  ) – संपादक

 

‘ नेह-छोह, बैराग, बगावत

इहवां के पहिचान !

बलिया जिला देश कs शान !!

 

०००

एह् माटी का कोख से जनमे  त्यागी-संत-बिरागी !

सोना-चानी  का  पाछा  ई  भागल  बा, ना भागी !

 

तपोभूमि  हs; जे  एकरा से  घात करी  ए, भाई !

सात जनम  तक  छाती पीटी, रोई  आ  पछताई !

 

बेसी ना कूदे-फानेला !

बलियाटिक एतने जानेला –

बैमानी का  धन-दौलत से  बढ़ि के बा  ईमान !! बलिया …

 

०००

 

डेग-डेग  पर  जंगे-आजादी  के  अमिट निशानी !

मंगल, चित्तू, कौशल, जेपी, शेखर-जस  अभिमानी !

 

कौनौ जुग आयी, दोहराई   एकर   गौरव-गाथा !

केतनो जोर लगवलस बैरी, हेठ भइल ना माथा !

 

लिलकरलसि जब तानि के सीना !

अंगरेजन कs छुटल पसेना !

असहीं ना ‘बागी’ कहि-कहि के दुनिया करे बखान !! बलिया…

 

०००

 

झारि के धोती-कुर्ता, कान्ही पर गमछा लटका के !

चले  त’ सइ गो  मनई  में  लउके बेटा बलिया के !

 

चाल नदी के धार मतिन, सुरहा* जस चाकर छाती !

आंखि मिलाके  बतियावे, जाने ना  ठकुर-सुहाती !

 

संघतिया असली मोका कs !

गुन गावे लिट्टी-चोखा क s !

ऊपर   से  सुकुवार-सुकोमल , भीतर  से   चट्टान !! बलिया…

 

०००

 

सोच-समझ के हमनीं  पs  हंसिहs तूं फेरु ठठाके !

कुछुवो कहला से पहिले पढ़ि लs इतिहास उठाके !

 

राजनीति, साहित्य, कला, विज्ञान  भा  खेती-बारी …

परल  बा  हरमेसा  बलियाबासी सबका पs भारी !

 

खबरदार ! जनि आंखि देखावs !

‘शशी’, अदब से  सीस झुकावs !

एह् धरती पर आके बौना* बनि जालन भगवान !! बलिया…

( सुरहा = बलिया जनपद के एगो विशाल ताल क नांव ; बौना= राजा बलि के परीक्षा लेबे खातिर वामन रुप धरिके भगवान विष्णु इहवां पधरले रहलन  )


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min850

मनोज भावुक

 

( एक )

 ( कारगिल मोर्चा पर विदा करत नई नवेली दुलहिन के अन्तरात्मा )

लवटब त चौठारी होई

जाई प्रियतम कर्मक्षेत्र में

पौरुष के इजहार करी

दुश्मन आइल, सीमा भीतर

दुश्मन के संहार करीं।

 

घूंघट में मत झाँकी रउरा

झाँकी हमरा हियरा में

देखीं, कइसन-कइसन झांकी

देश-प्रेम के, जियरा में

हृदयेश्वर! हे प्राणेश्वर

हमरा मन के श्रृंगार करीं

पापी आइल सीमा भीतर

पापी के संहार करीं।

 

विजयपताका फहरावे में,

गौरव गरिमा के सुख बा

कायर-कर्मविमुखता में त,

समझी, बस दुखे-दुख बा।

सीमा पर हमनी के सेना

दुश्मन पर भारी होई

करगिल से लवटब, तबहीं

हमनी के चौठारी होई।

 

(दू )

 

 (शहीद बाप के अन्तरात्मा)

 

थूथून थूरल मजबूरी बा

 

बढ़ जा बेटा लाहौर तक

दुश्मन के ठप्पा-ठौर तक

‘काहे कि अइसे मानी ना,

ऊ दुष्ट जीव पहचानी ना।

 

ऊ रह-रह के खोदियावत बा

बेमतलब बात बढ़ावत बा

लतियावल बहुत जरूरी बा

घर का भीतर ले जाके

सुधियावल बहुत जरूरी बा

नक्शा से नाँव मिटा के।

 

ऊ थेंथर हऽ अभिमानी हऽ

ऊ दगाबाज खनदानी हऽ

ऊ पौरुष के ललकारत बा

ऊ झूठे शान बधारत बा

ऊ रहल सदा से हारत बा

तबहूँ त करत शरारत बा

जे खोल ओदि याराना के

पीछे से भोंकत छूरी बा

ओकरा ला इहे जरूरी बा

थूथुन थूरल मजबूरी बा।

 

 

( तीन )

 

( शहीद दादा के अन्तरात्मा )

 

खाक करऽ नापाक पाक के

 

खाये के त ठीके नइखे

तबो ऊ टेटियात बा।

कारगिल में बिल बनाके

सुननी हऽ..केकियात बा।

भाड़ा के टट्टू का बल पे

का-का-दो मिमियात बा

ओह पिल्ला पर…ओकरे पिल्ला

काहे दो खिसियात बा।

 

 

मादा बनिके पोंछ उठवले,

कई दुआरी छिछिआइल

चारा ना डालल केहू त

पता चलल अवकात बा।

भावुक हियरा भारत के

जीतल जमीन जे दान करे

ऊ का बोली…लंगटे नाचब

ओकरा इहे बुझात बा।

 

एह से ओकर भरम मिटावल

भारत के मजबूरी बा।

खाक कइल नापाक पाक के,

बेटा बहुत जरूरी बा।

 

 

        ( चार )

 

( कोख लुटाइल महतारी के अन्तरात्मा )

 

अन्तरराष्ट्रीय शान्ति

 

बबुआ रे …

ई देश-विदेश काहे बनल

काहे बन्हाइल बाँध सरहद के।

दुनिया के ऊपर,

एके गो छत ………आसमान

आ एके गो जमीन….धरती

के कइलस टुकड़ा-टुकड़ा…?

झगड़ा के गाछ के लगावल…..

के बनावल नफरत के किला ?

 

 

का दो ‘धरती’ माई हई

…………माईयो टुकी-टुकी ?

लड़े वाला भाईये नू …… दूनू देशभक्त।

देशभक्ति माने…भाई के खून…बहिन के शीलहरण ..

….माई के कोख लूटल… भउजी के मांग धोअल…।

हाय रे हाय….खून के धारा।

मानवता के राग ध के रोये के नामे देशभक्ति ह…का रे बबुओ ।

लोग कहता कि हमार कोख लुटाइल नइखे….

……..’अमर हो गइल बा।’

तू मुअल नइखऽ……..अमर हो गइलऽ।

सरहद पर लड़े वाला मरबे ना करे….मरिओ के अमर हो जाला

‘अमरे’ होखे खातिर….सरहद बनावल गइल बा….का ए हमार बाबू?

 

खैर, अबो देश-विदेश में शान्ति कायम हो जाव

त बुझेमब….जे ई जिनिगी सुकलान हो गइल।

…बाकी ए हमार बाबू ……

उन्नीस सौ सैतालिस में तहरा दादियो के मांग धोआ के अमर हो गइल रहे

आ एकहत्तर में तहार बाबूजी शहीद भइलन त हमरो मांग धोआ के अमर हो गइल

आ अब तहरा मेहारुओ के मांग धोआ के अमर हो गइल।

….बाकी एह नब्बे बरिस का बूढ़ के

कहीं शान्ति ना लउकल..’अन्तरराष्ट्रीय शान्ति’ ।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min970

डॉ. सविता सौरभ

 

फेरू नया- नया  कुछ करे के बिचार  करीं जा।

ऊ जे आवत बा  अन्हरिया  उजियार करीं जा।।

 

फाँसी चढ़के सीस कटा के बलि देके आजादी आइल।

कतना जतन से कमल खिलल बा मत सेंवार करीं जा।।

 

गान्धी,लाल, पाल,सुभाष,ऊधम,खुदी, भगत,आजाद।

बिस्मिल,  कुंवर सिंह, सावरकर से  गोहार करीं जा।।

 

 

केसर के कियारी सूखल कबले तानके रहब सूतल।

चढ़िके  दुश्मन के  छाती पर अब  हुंकार  करीं जा।।

 

माथ पकड़ला से का होई लीं संकल्प नया सब कोई।

डोले  नइया बीच भंवर में  मिलके  पार करीं  जा।।

 

 

कवनो जनि करीं कोताही अपना धरम के निबाहीं।

रहुए  रामराज  के  सपना अब  साकार  करीं  जा।।

 

फेरू  नया – नया कुछ  करे के बिचार  करीं  जा ।

ऊ जे आवत बा अन्हरिया उजियार  करीं  जा।।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min880

सुभाष चंद्र यादव

( एक )

 

कहाँ बा आपन हिंदुस्तान, दुलारा-प्यारा हिंदुस्तान।

पागल मनवां खोज रहल बा बस आपन पहिचान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

जगत गुरु के महिमा सगरो माटी में मिली गइलें,

सोन चिरइया रहे कबो सपना के संपति भइलें,

बेद पुरान भुलाइल सगरो गीता के उ ज्ञान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

जंगल-जंगल कुटिया-कुटिया जरे ज्ञान के जोति,

पर्वत-पर्वत हीरा चमके सागर-सागर मोती,

सगरो शान हवा हो गइलें गिरवी बा अभिमान।।

कहाँ बा आपन…

 

 

एके धरती एक गगन बा एके पवन बहेला,

अइसन आपन देश जहाँ भाँतिन के लोग रहेला,

केहू कश्मीर के मांगे केहू खालिस्तान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

राजनीति के चतुर खिलाड़ी रोजो नाच नचावें,

धर्म जाति में देश बाँटि के सत्ता के हथियावें,

सस्ता खून महंग बा पानी कौड़ी के बा जान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

जहाँ लड़े मंदिर से मस्जिद गिरिजा से गुरुद्वारा,

ऊपर वाला एके बाटे मनइन में बँटवारा,

कैद जहाँ मस्जिद मंदिर में अल्ला औ भगवान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

अबहीन कुछऊ बिगड़ल नइखे आवs गरे लगावs,

भेदभाव विसरा के सगरो भारत नया बनावs,

जागs भारत के रहवइया भारत के संतान।।

कहाँ बा आपन …

 

 

( दू )-

 

देके कुरबानी रखलें देसवा के पानी ।

ओ जवानी के नमन, रहलें कइसन स्वाभिमानी।।

ओ जवानी के …

 

 

कबो राम रावण संघरलें, कृष्ण कंस के मरलें,

जब-जब संकट परल देस पर तब-तब लाज बचवले,

समय शिला पर अंकित बाटे जेकर अमिट निशानी।।

ओ जवानी के …

 

 

वीर शिवा राणा प्रताप के कइसे देश भुलाई,

गुरु गोविंद सिंह छत्रसाल के कइसे देश भुलाई,

जब तक बा इतिहास हमेशा महिमा गावल जाई,

सुनले बानी झाँसी वाली रानी के कहानी।।

ओ जवानी के …

 

 

कुँवर सिंह आज़ाद भगत गाँधी सुभाष मस्ताना,

अशफ़ाक उल्ला राजगुरु सुखदेव वीर मरदाना,

कफ़न बाँधि के देश की खातिर हो गइलें दीवाना,

केतने चढलें फाँसी केतने गइलें कालापानी।।

ओ जवानी के …

 

 

कइसन हिन्दू मुसलमान का पंजाबी मदरासी,

जे-जे भइल शहीद उ सगरो रहलें भारतवासी,

अमर शहीदन के सुभाष कहवाँ बा कवनो सानी।।

ओ जवानी के …

 

 

( तीन )

 

देखि आउ देशवा हमार मोर मितवा रे।

मोर हिन्द हउवें जग के सिंगार मोर मितवा रे।।

 

 

तीन ओर सागर के लहरी, लहर लहर लहरावे,

एक ओर हिमवान बिराजे कीर्ति धजा फहरावे,

जुग से खड़ा उ बाड़े बनिके पहरेदार मितवा रे।।

 

उत्तर में कश्मीर तू देखिह जेकर रंग निराला,

झील पहाड़ी सेव की बगिया में मनवां अझुराला,

दीहलें नन्दन बनवा धरती पर उतार मितवा रे।।

 

दखिन सागर उमड़ि-झुमडि के जेकर पाँव पखारे,

मोती रोज निछावर करिके मंगल मंत्र उचारे,

पहिले शीश झुका के करिह नमस्कार मितवा रे।।

 

पुरुब में सोने के बंगला अवर रतन के खानी,

गोद में लेके रोज खेलावेली गंगा महरानी,

उहवें बिखरल होई मलमल के तार मितवा रे।।

 

पछिम में पंजाब राज बा राजन में अभिमानी,

देश की खातिर बच्चा-बच्चा दे दीहलें कुर्बानी,

कबहीं जंग ना लागल जेकरी कटार मितवा रे।।

 

राम कृष्ण जेकरी माटी के अपने अंग लगावें,

एक प्रेम के राह देखावें करतब एक सिखावें,

देवता देखे बदे तरसे एकबार मितवा रे।।

 

बाल्मीकि विद्यापति तुलसी नानक कालिदास,

जेकर कविता प्रान में बसिके करे हास विलास,

जहवाँ रोज बहेला रसवा के धार मितवा रे।।

 

साल में जहवाँ छव रितुवन के हरदम लागे मेला,

खीलल फुलवा देखिके कलियन के मनवां ललचेला,

भंवरा करत होइहें कलियन से मनुहार मितवा रे।।

 

महुआ आम कदम अरु निबिया रस के मातल डोले,

कुहुकि-कुहुकि के डार-डार पर बिरहिन कोइल बोले,

जाने कहवां गइल नेहिया बिसार मितवा रे।।

 

माटी में जेकर जिनिगी बा जेकर कीरति महान,

जेकर खून पसेना मिलि के लहरे गेहूँ धान,

उनुकर रोवां-रोवां भरल बा उपकार मितवा रे।।

 

सीमा पर वीरन के देखिह बंहिया फरकत होई,

दगाबाज़ दुश्मन के देखि के छतिया करकत होई,

कहिह तोहरे से बा देशवा में बहार मितवा रे।।

 

वीर शहीदन के धरती अमर जे जग में बाड़े,

भगत सिंह आज़ाद बोस नेताजी मंगल पांड़े,

जेकरी दम से लहरे झंडा लहरदार मितवा रे।।

 

अंखिया भरि-भरि आवे मनवां रहि-रहि उठे हुलास,

बार बार चरनन में परि के विनती करें ‘सुभाष’,

तन-मन सगरो जाईं हम बलिहार मितवा रे।।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min540

डॉ. अशोक द्विवेदी

 

(एक)

 

जहवाँ हेरइलें आके

बड़-बड़ ज्ञानी…., उहे देसवा

झरे पथरो से पानी; उहे देसवा

हवे मोर देसवा !

 

जोगिया करेलें धन-संपति स्वाहा

दुलहा बनेलें जहाँ शिव बउराहा

दुलहिन गउरा के हवे रजधानी !

उहे देसवा….झरे पथरो से पानी !

हवे मोर देसवा !

 

तप करें जहाँ रिसि सत चित खातिर

देहियाँ तजेलें लोग परहित खातिर

झुकि-झुकि जालें बड़-बड़ अभिमानी !

उहे देसवा….झरे पथरो से पानी !

हवे मोर देसवा !

 

रतिया चढ़ावेले अँजोरिया के चानी

किरिन पखारे भोरे सोनवाँ के पानी

रूख-सूख खाइ हँसे सरग-पलानी !

उहे देसवा….झरे पथरो से पानी !

हवे मोर देसवा !

 

सहला के सीमा तूरे लोगवा इहाँ के

बाकि स्वाभिमान बदे लड़े छतिया के

नित उतसर्ग के गढ़ेला कहानी !

उहे देसवा…..झरे पथरो से पानी !

हवे मोर देसवा !

 

मिलि-जुलि पूरे जहँ जन गन सपना

प्रकृति रचेले नित नव-नव रचना

खोंइछा भरेलें जहाँ औढरदानी !

उहे देसवा……झरे पथरो से पानी !

हवे मोर देसवा !

 

(दू)

 

मोके देसवा क बाटे गुमान

तिरंग-रंग लहरल करे

जेकर कीरति बा जग में महान

तिरंगा लहरल करे !

 

 

परबत घाटी नदिया पोखर/सजे सबुज धरती बन-तरुवर

प्रेम शान्ति के छंद सुनावे/त्याग अउर बलिदान सिखावे

जहाँ चहकत-चिरइयन क गान

तिरंगा लहरल करे !

 

 

जेकर पगरी हिमगिरि धारे/चरन, समुन्दर रोज पखारे

विन्ध्य-हिमाचल जेकर गहना/गंडक सरजू गंगा जमुना

नित मलि मलि करावे असनान

तिरंगा लहरल करे !

 

प्रेम-भगति-रस छलकत गगरी / संत-गुनी, जोगियन के नगरी

चमके जेकर हरदम पानी/कन-कन लागे सोना-चानी

इ धरतिया हऽ रतनन क खान

तिरंगा लहरल करे !

 

विद्यापति जायसी कबीरा/तुलसी सूर समर्पित मीरा

परहित-धरम, ज्ञान के गरिमा/गुरुनानक अस गुरु के महिमा

करीं कतना ले केकर बखान

तिरंगा लहरल करे !

 

 

कतने बेरि देंहि रउनाइल/मन पर इचिको आँच न आइल

जगल बिबेकानन के स्वर से/गान्ही तिलक सुभाष अमर से

फिरू जागल सुतल अभिमान

तिरंगा लहरल करे !

 

ए  धरती के सौ-सौ रँग बा/सँग-सँग जिये-मुवे के ढंग बा

गोबर लीपल राम-मड़इया/अँगना उचरेले गौरइया

जहाँ उतरेला पूनो क चान

तिरंगा लहरल करे !


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min2340

झगड़ू भइया

सोने क  चिरई  भारत हउऐ

चिरई भइल लचार देख ला।

लगत हौ झुण्ड बहेलियन क

कइले  हौ  खेलवार देख ला।।

मूड़े माथे   हौ  महँगी  गठरी

सबही भयल लचार देख ला।

तेल  लगावै  से  पहिले अब

तेल,  तेल  क धार  देख ला।।

 

अब सेर के खोल में गदहा बा

मखमल के भाव टाट देख ला।।

जेतना चोर जुआरी रहैं लफंगा

अँगूठाछाप  क  ठाट देख  ला।

गुङवा  भी  अब जान गयल हौ

सबके हर दाव क काट देख ला।

अब नाव घाट  पर जाई कइसे

हौ भँवर के लग्गे घाट देख ला।।

 

देखा सोनचिरई  क  पहरेदार

नीद चैन क सोअत सोअत हौ।

सुख क फूल तोर-तोर के माली

पैंड़े पर दुख क काँटा बोअत हौ।।

सबही  छाती पर पाथर रख के

अपने मूड़े पर पाथर ढोअत हौ।

कँड़िहर टूट गइल हर गरीब क,

अब अपने करम पर रोअत हौ।।

 

सबही  आन्हर  हो  के  बइठल

फाँकत  हउऐ  राख  देख  ला।

जरत  हौ  तोहरे  सोनचिरइया

वाली रोजवैं अब पाँख देखला।।

सेंकै वाला सेंकत हउअन रोटी

सबही क फोर के आँख देख ला।

एनकर  बनरघुरकिया  डर  से

बनल हौ बड़की साख देख ला।।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min2190

संगीत सुभाष

फँसरी की रसरी प झुलुहा समझि के,
जिअते जिनिगिया टंगाइल,
ए भइया! तब जाके चान चमचमाइल।

बिस्मिल, सुखदेव, भगत सिंह के जवानी।
असमय ओराइल, लिखाइल कहानी।
गूँजि गइल कन-कन से जयहिन्द के नारा
ठाँव-ठाँव खून से रंगाइल।
ए भइया!….

काँपि गइल अँगरेजी शासन डेराइल।
वीरन के टोली के बाढ़ि देखि आइल।
केसरिया फेटा कफन माथ बन्हले,
जनवाँ हथेली धराइल।
ए भइया!…..

झुकलें ना, रुकलें ना टुटलें मरदाना।
भारत हमार हऽ, सुनावत ई गाना।
दुश्मन की छाती पर भारत के जय लिखि के, रातदिन दलिया दराइल।
ए भइया!….

माथा झुकाईं अब उनुका चरन में।
सरबस लुटा दिहलें अपना परन में।
बूँन-बूँन रकते से सींचि गइलें बगिया,
देखलें जे पात कुम्हिलाइल।
ए भइया!….

 

 


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Hum BhojpuriaSeptember 27, 20211min4390

डॉ. ब्रजभूषण मिश्र

छूटल जहँवा राम के बाण
गूँजल  कान्हा बँसुरी  तान
धइलें  जहँवा शंकर ध्यान
पवलें जहँवा गौतम  ज्ञान

बजवली सरस्वती जहाँ ,आपन वीणा अनमोल ।
जय भारत माता के बोल !

जहाँ के भाखा भेख अनेक
बाकि  बाटे  भीतर से  एक
जहाँ के  खूबी ह  आध्यात्म
अउर ह बुद्धि बेवहार विवेक

इहँवा के  दरसन के  बाटे  देश-विदेश में मोल ।
जय भारत माता के बोल !

बहे गंगा – जमुना जल धार
रहे सब रितुअन के त बहार
इहाँ  जनम  लेवे  के चाहे
करत  देवतो  लोग मनुहारग मनुहार

इहाँ के  लोग  लुटावे प्यार  आपन हिरदा खोल ।
जय भारत माता के बोल !

एकर आपन अलग बा रूप
एकर आपन अलग अंदाज
एकर आपन अलग संगीत
एकर आपन अलग बा साज

ऊपरी  देखावा के  नइखे , इहँवा  कवनो मोल ।
जय भारत माता के बोल !


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Hum BhojpuriaSeptember 27, 20211min4340

रघुवीर नारायण

सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देसवा से,

मोरे प्रान बसे हिमखोह रे बटोहिया।

एक द्वार घेरे रामा हिम कोतवलवा से,

तीन द्वार सिन्धु घहरावे रे बटोहिया।

 

जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ,

जहँवा कुहुँकि कोयल बोले रे बटोहिया।

पवन सुगंध गंध अगर गगनवा से,

कामिनी विरह राग गावे रे बटोहिया।

 

विपिन अगम घन सघन बगन बीच,

चंपक कुसुम रंग देबे रे बटोहिया।

द्रुमवट, पीपल कदम्ब नीम्ब आमवृक्ष,

केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया।

 

तोता तूती बोले रामा बोले भेंगरजवा से,

पपीहा के पी पी जिया साले रे बटोहिया।

सुन्दर सुभूमि भैया भारत के देशवा से,

मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया।

 

गंगा रे जमुनवा के झगमग पनिया से,

सरजू झमकि लहरावे रे बटोहिया।

ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निशिदिन,

सोनभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया।

 

अपर अनेक नदी उमड़ि घुमड़ि नाचे,

जुगन के जदुआ चलावे रे बटोहिया।

आगरा प्रयाग काशी दिल्ली कलकतवा से,

मोरे प्रान बसे सरजू तीर रे बटोहिया।

 

जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ,

जहाँ ऋषि चारो वेद गावे रे बटोहिया।

सीता के विमल जस राम जस कृष्ण जस,

मोरे बाप दादा के कहानी रे बटोहिया।

 

व्यास बाल्मीकि ऋषि गौतम कपिलदेव,

सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया।

रामानुज रामानन्द न्यारी प्यारी रुपकला,

ब्रह्म सुख बन के भँवर रे बटोहिया।

 

नानक कबीर गौरशंकर श्रीराम कृष्ण,

अलख के गतिया बतावे रे बटोहिया।

विद्यापति कालीदास सूर जयदेव कवि,

तुलसी के सरल कहानी रे बटोहिया।

 

जाउ जाउ भैया रे बटोही हिन्द देखि आउ,

जहाँ सुख झुले धान खेत रे बटोहिया।

बुद्धदेव पृथु विक्रमार्जुन शिवाजी के,

फिरि-फिरि हिय सुधि आवे रे बटोहिया।

 

अपर प्रदेस देस सुभग सुघर वेस,

मोरे हिन्द जग के निचोड़ रे बटोहिया।

सुन्दर सुभूमि भैया भारत के भूमि जोहि,

जन रघुवीर सिर नावे रे बटोहिया।


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Hum BhojpuriaSeptember 20, 20211min4680

डा. सुनील कुमार पाठक

माई उचारे

निठाह भोजपुरी

ले अंकवारी

 

सगरी साध

पुरे पुतवन के

बिनवे माई

 

हिचकी भावे

एही बहाने माई

इयाद आवे

 

सींझे सपना

माई पसवे लोर

दूरि बा भोर

 

दुख-पहाड़

पे बइठ पीयेले

आंसू-सागर

 

कठिन बाटे

कविता माई पर

ना लिखा सकी

 

हम नास्तिक

बाकि माई पूजीले

होके आस्तिक

 

बिहंसे सब

सहमल सपना

माई हुलसे

 

गंगा नियन

पावन मन माई

गंगे समाई

 

बात कवनो

बिगड़े त बाबूजी

बाड़ें अलम

 

धेयान रहे

पगड़िया के लाज

बचल रहे

 

आंटे लागल

बाबूजी के जूतवा

बुधियो आंटो

 

माई-बाबूजी

बाड़ें जीवन-धन

पूत नीमन

 

बाढ़स पूत

बाबूजी के धरमे

अपना कर्मे

 

माई सिखावे

जब संझा-पराती

पतोहा रीझे

 

ठीके बइठे

माई के सिन्होरवा

इया हुलसे

 

माई त होले-

पावन वेद-ऋचा,

ईश वंदना

(परिचय- हिन्दी-भोजपुरी में कविता आ समीक्षा में सक्रिय डा. सुनील कुमार पाठक ‘नेवान’,’कविता का सर्वनाम’,’उमड़े निबंध मेघ’,’छवि और छाप’ जइसन महत्वपूर्ण पुस्तकन के लेखक हईं।)



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भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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