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Hum BhojpuriaNovember 15, 20211min8040

मनोज भावुक

जिनगी के दुपहरिया खोजे जब-जब शीतल छाँव रे

पास बोलावे गाँव रे आपन, पास बोलावे गाँव रे।

गाँव के माटी, माई जइसन

खींचे अपना ओरिया

हर रस्ता, चौराहा खींचे

खींचे खेत-बधरिया

गाँव के बात निराला बाटे, नेह झरे हर ठांव रे।

पास बोलावे गाँव रे आपन..

भोर इहाँ के सोना लागे

हीरा दिन-दुपहरिया

साँझ सेनुरिया दुलहिन जइसन

रात चनन-चंदनिया

केसर के खुशबू में डूबल बा आपन गाँव-गिराँव रे।

पास बोलावे गाँव रे आपन..

कचरी, महिया, छेमी, चिउरा

शहर में कहाँ भेंटाये?

कांच टिकोरा देख-देख के

मन तोता ललचाये

गाँव में अवते याद पड़ेला जाने केतना नाँव रे।

पास बोलावे गाँव रे आपन..

हर मजहब के लोग साथ में

फगुआ-कजरी गावे

जग-परोजन पड़े त सब

मिल-जुल के पार लगावे

दुखवा छू-मंतर हो जाला गाँव में पड़ते पाँव रे।

पास बोलावे गाँव रे आपन..

भारत के जाने के बा तs

जाईं गाँवे-गाँवे

स्वर्ग गाँव में बाटे

ई  त ऋषियो-मुनि बतावें

सुनs संघतिया, गाँव में घुसते, हुलसे मन-लखराँव रे ।

पास बोलावे गाँव रे आपन..

 



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भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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