img141-1280x407.jpg

Hum BhojpuriaJanuary 1, 20211min7710

आर.के.सिन्हा

कभी-कभी हमरा ये बात के हैरानी होला कि काहे हमरा देश के मुसलमानन के एक बड़ा तबका नकारात्मक सोच के शिकार हो गइल बा? इनका फ्रांस में गला काटे वाला के हक में त बढ़-चढ़ के बोले के होला, पर मोजाम्बिक में इस्लामिक कट्टरपंथियन द्वारा दर्जनों मुसलमान लोगन के जब कत्लेआम होला तब ई लोग चुप रहेला। ई लोग हर मसले पर केंद्र के मोदी सरकार के आदतन भले ही रस्म अदायगी खातिर ही काहे ना होखे, विरोध त अवश्य ही करेला। एसे ये लोग के का लाभ बा, ई समझ से परे के बात बा। ये लोग के पूरा तरह से ब्रेन वाश कर देहल गइल बा, स्वयंभू सेक्यूलरवादियन आ  कठमुल्लन द्वारा।

पाकिस्तान में जनमल आ अब कनाडा में निर्वासित जीवन बीता रहल प्रसिद्ध लेखक आ पत्रकार ठीक ही कहेले कि कठमुल्लन अउर जिहादी आतंकवादी सबके निहित स्वार्थ के कारण अल्ला के इस्लाम अब तेजी से “मुल्ला का इस्लाम” बनत जा रहल बा जेसे विश्व के अमन चैन खतरा में पड़ गइल बा। सबसे ज्यादा खतरा एसे मुसलमान लोग के ही बा, काहे कि सबसे ज्यादा निर्दोष मुसलमान ही मारल जा रहल बा। दरअसल, देश के चाहीं डॉ. ए. पी.जे.अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद, अजीम प्रेमजी, सानिया मिर्जा, मौलाना वहीदुद्दीन खान, उर्दू अदब के चोटी के लेखक डॉ. शमीम हनफी जइसन मुस्लिम शख्सियत। ये तरह के अनगिनत मुसलमान चुपचाप अपने ढंग से राष्ट्र निर्माण में लागल बाटे। मौलाना वहीदुद्दीन खान के हमनी के बीच भइल सुकून देला। गांधीवादी मौलाना के अमेरिकी जार्जटाउन यूनिवर्सिटी दुनिया के 500 सबसे ज्यादा असरदार इस्लाम के आध्यात्मिक नेता लोग के श्रेणी में रखले बा। जामिया मिलिया इस्लामिया में लम्बा समय तक पढ़ावत रहल हनफी साहब जइसन राष्ट्रवादी मुसलमानन पर भारत गर्व करेला। ऊ आज के दिन उर्दू अदब के सबसे सम्मानित नाम बा। ऊ जब गालिब या इकबाल पर बोलेलन त ओके बड़ ध्यान से आ अदब से सुनल जाला।

आईटी कंपनी विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी शुरू से ही परामर्थ कार्यन में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेत रहल बाड़े। ऊ देश के एक महान नायक बाड़े। ऊ पिछला वित्त वर्ष 2019-20 में परोपकार से जुड़ल सामाजिक कार्य खातिर हर दिन 22 करोड़ रुपया यानी कुल मिला के 7904 करोड़ रुपया दान देले बाड़न। दूसरे तरफ पिछले लगभग 70 वर्ष से साम्प्रदायिक दंगा प्रायोजित कराके स्वयंभू सेक्युलरवादी नेता गरीब मुसलमानन के संघ के डर देखावत रहेला। ये लोग के सोचे के चाहीं कि मोदी शासन के 6 वर्ष में जवन अमन-चैन के माहौल बनल बा, का अइसन कभी कवनो दूसरा प्रधानमंत्री के कार्यकाल में रहल? नेहरू से लेके मनमोहन सिंह तक के शासन काल में आये दिन दंगा ही होत रहल।

अब मौलाना आजाद के पौत्र फ़िरोज़ बख्त अहमद के ही लीं। ऊ दशको दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में अंग्रेजी पढ़ावत रहलन। लेकिन, उनका से मुसलमानन के एक कट्टरपंथी तबका एसे नाराज हो गइल कि केंद्र सरकार उनका के हैदराबाद के मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर बनवलस। का रउआ यकीन करेम, कवनो विश्विद्यालय के उपकुलपति कुलपति खातिर दरवाजा ये लिए बंद कर देहले होखे कि कुलपति उहाँ पर कुछ सुधार लावे के चाहत होखस, छात्रन के पढ़ावे के चाहत होखस, विश्विद्यालय में मौलाना आजाद “सेंटर फॉर प्रोग्रेसिव स्टडीज अउर सेंटर फॉर इम्पावरमेंट टू मुस्लिम वूमेन” के स्थापना करे के चाह राखत होखस अउर जे उर्दू बाल साहित्य पर कार्यक्रम करे के चाह रखत होखस? फिरोज बख्त के साथ ई सब कुछ एसे भइल कि ऊ संघ से जुड़ल रहल बाड़े। ऊ संघ के शाखा में भी जाले। बख्त साहब एक बार बतावत रहनी कि जब उहाँ के संघ के लोगन के साथ वक्त गुजारे लगनी त उहाँ के अलग तरह के एहसास भइल। तब पता चलल कि संघ त कत्तई मुस्लिम विरोधी नइखे।

माफ करीं दू बार उपराष्ट्रपति रहल हमीद अंसारी जइसन मुसलमान त ये देश के कत्तई ना चाहीं। ऊ जब तक कुर्सी पर रहलन त सरकार के खिलाफ एक शब्द भी ना बोललन अउर जब उनका के तीसरा बार उपराष्ट्रपति ना बनावल गइल (वोइसे ऊ राष्ट्रपति बने के अरमान पलले रहलन) त ऊ मुस्लिम नेता बन गइले। अइसन लोगन के उटपटांग कारनामन के खामियाजा सामान्य मुसलमान लोग के उठावे के परे ला जेकरा ये राजनीति से कवनो मतलब ही नइखे। ऊ लोग त बस रात-दिन मेहनत कर के कमाए-खाए के फ़िक्र में ही लागल रहेले। उनकर स्थिति बहुत खराब हो जाला। ऊ लोग हर जगह पिसते रहेला। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह जब रिटायर भइलें त उनके कवनों देश के राजदूत, राज्यसभा सांसद अथवा राज्यपाल ना नियुक्त कइल गइल। त फेर ऊहो मुस्लिम नेता बन गइले। ऊ मोदी जी के विरुद्ध पुस्तक “द सरकारी मुसलमान: लाइफ एंड ट्रावेल्स ऑफ़ ए सोल्जर” लिख डललन अउर उन पर गुजरात दंगा के आरोप ठोक देहलन। यदि जनरल साहब एतने ही बहादुर रहले आ मुस्लिम कौम के बफादार रहले त ऊ तुरंत सेना के उच्च जनरल के पद से या बाद में कुलपति पद से इस्तीफा देके मुसलमानन के नेतागिरी करते। कुलपति पद पर बइठ के मलाई डकारे के का आवश्यकता रहे? अइसन लचर आ दोगला चरित्र के लोगन के केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से सीख लेवे के आवश्यता बा जे अपने व्याख्यानन में कुरान अउर गीता के कथन पर सद्भाव बनावे के प्रयत्न करेले।

देश के चाहीं एयर चीफ मार्शल इदरीस हसन लतीफ जइसन महान मुसलमान। ऊ 31 अगस्त 1978 के एयर चीफ मार्शल एच मूलगांवकर के रिटायर भइला के बाद भारतीय एयर फोर्स के प्रमुख नियुक्त कइल गइल रहले। सन 1947 में देश के बँटवारा के वक्त सशस्त्र सेनन के विभाजन के बात आइल त एक मुस्लिम अफसर भइला के नाते इदरीस लतीफ के सामने भारत या पाकिस्तान दुनू में से कवनों भी एक वायुसेना में शामिल होखे के विकल्प मौजूद रहे। परंतु ऊ भारत के ही चुनलन। ऊ 1950 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली सलामी उड़ान के नेतृत्व कइले रहले। ऊ 1981 में सेवानिवृत्त भइले। एकरा बाद ऊ महाराष्ट्र के राज्यपाल अउर फिर फ्रांस में भारत के राजदूत के पदभार सम्हरले। आपन कार्यकाल पूरा करके इहाँ के 1988 में फ्रांस से वापस अइनीं अउर अपना गृह स्थान हैदराबाद में रहे लगनी।

अब बात करsतानी, 1965 के जंग के नायक शहीद अब्दुल हमीद (परमवीर चक्र) के बहादुरी के। देश निश्चित रूप से 1965 के जंग में अब्दुल हमीद के शौर्य के इयाद राखी। येही तरह अगर कारगिल जंग के बात होई त इयाद आवत रहिहें कैप्टन हनीफुद्दीन। ऊ राजपुताना राइफल्स के कैप्टन रहले। कैप्टन हनीफुद्दीन कारगिल के जंग के समय तुरतुक में शहादत हासिल कइले रहलन। कारगिल के तुरतुक के ऊँची बर्फ से ढँकल ऊँची पहाड़िन पर बइठल दुश्मन के मार गिरावे खातिर हनीफुद्दीन भीषण पाकिस्तानी गोलाबारी के बावजूद आगे बढ़त रहलन। उनके बहादुरी के कहानी आज भी देश वासी सबके जुबान पर बा। पाकिस्तानी सैनिक मई 1999 में कारगिल सेक्टर में घुसपैठियन के शक्ल में घुसलन आ नियंत्रण रेखा पार कर हमनी के कई चोटिन पर कब्जा कर लेहलस। दुश्मन के ये नापाक हरकत के जबाब देवे खातिर आर्मी, “ऑपरेशन विजय” शुरू कइल, जेमे 30 हजार सैनिक शामिल रहे। ओही में से रहले बहादुर मोहम्मद हनीफुद्दीन। हाल के दौर में देश देख आ पहचान लिहले बा राष्ट्रवादी अउर कठमुल्ला मुसलमानन के। “कठमुल्ला मुसलमान के कौम” देश के हितैषी नइखे। अब देश चाहता सिर्फ राष्ट्रवादी मुसलमानन के जे भारत के मिट्टी से प्यार करे आ सभ देशवासी के साथ मिलजुल के रहे। ई काहे भुलातानी सन कि सभ भारतवासी लोग के पूर्वज तब से एक ही बा जब ना त ईसायत के जनम भइल रहे नाहीं इस्लाम के। फिर काहे पैदा करsतानी भेदभाव अउर कट्टरपूर्ण माहौल?

(लेखक वरिष्ठ सम्पादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं)


Photo1.jpg

Hum BhojpuriaDecember 15, 20201min16300

  आर.के. सिन्हा

18 नवम्बर 2020 के दिन भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्तन खातिर खासकर बिहार से जुड़ल लोगन खातिर अत्यंत दुःखद रहल, जब मृदुला भाभी( गोवा के भूतपूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा) के देहावसान हो गइल। सुबह लगभग 7 बजे ही बिहार के नव-नियुक्त उप-मुख्यमंत्री श्रीमती रेणु देवी के फोन आइल अउर उ चिंता भरल लहजा में कहली- “भइया, मामी के हालत सीरियस हो गइल बा।” ऊ मृदुला जी के मामी कहल करस। मृदुला जी हमरा खातिर हमार प्रिय भाभी रहनी। एही तरे देशभर के कार्यकर्तन में ऊ केहू के भाभी, केहू के चाची, केहू के दीदी, केहू के ताई, केहू के नानी, केहू के दादी, ना जाने का-का रहली। वात्सल्य के साक्षात् ऊ एक अइसन भारतीय विदुषी नारी रहली, जेकर कल्पना भारतीय संस्कृति में आदर्श पत्नी, आदर्श माता अउर आदर्श सामाजिक कार्यकर्ता आ कुशल गृहणी के रूप में होत रहल बा।

मृदुला भाभी के हृदय में भारतीय संस्कृति अउर खासकर बिहार आ मिथिला के लोक संस्कृति रोम-रोम में बसल रहे। उहाँ के ओ क्षेत्र से आवत रहनी जेकरा बहुत निकट सीतामढ़ी में जनक पुत्री सीता जी के जन्म स्थान बा। ई संयोग कहल जाई कि राजा रामचंद्र के पत्नी सीता पर गहन शोध क के एक अद्भुत उपन्यास लिखे के श्रेय भी मृदुला भाभी के ही जाला। ओ अद्भुत उपन्यास के नाम ह- “सीता पुनि बोली।” सीता के चरित्र के, सीता के मनोदशा के, उनका अंतर्व्यथा के, उनके विडम्बनन के, सीता के समक्ष उपस्थित समस्यन अउर ओ सबके निदान के जवना तरे से रोचक वर्णन डॉ. श्रीमती मृदुला सिन्हा जी “सीता पुनि बोली” में कइले बानी ओके पढ़ के कई बार अइसन लागेला कि उहाँ के अपना चरित्र के वर्णन कर रहल बानी। उहाँ के खुद भी मिथिला के ही रहनी। मृदुला सिन्हा जी बाल्यकाल से ही अइसन संस्कारन में पलनी-बढ़नी, कि उनके संस्कार आ उनके रुचि में लोक संस्कृति, लोक साहित्य, लोक कथा आ लोक गीतन के समन्यव गहराई से पनप गइल।

ओह समय में लड़किन के होस्टल में रख के पढ़ावे वाला ग्रामीण परिवार कम ही होखे। लेकिन मृदुला जी के पिता जी उनके बाल्यावस्था में ही बिहार के लखीसराय के बालिका विद्यापीठ में पढ़े खातिर भेज देहले रहनी। ई विद्यापीठ ओ घरी एतना उच्च कोटि के और अच्छा शिक्षण संस्थान रहे कि ओके बिहार के “वनस्थली” कह के पुकारल जाय। मृदुला जी जब बी.ए. के पढ़ाई करत रहनी तबे उनकर विवाह डॉ. रामकृपाल सिन्हा जी से हो गइल, जे मुजफ्फरपुर में बिहार विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक रहनी। लेकिन डॉ. रामकृपाल सिन्हा जी के प्रोत्साहन से ना केवल उहाँ ले बी.ए. के परीक्षा पास कइनी बल्कि एम.ए. भी कइनी अउर उहें के प्रोत्साहन से लोक कथा के लिखल शुरू कइनी, जवन साप्ताहिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, धर्मयुग, माया, मनोरमा आदि पत्र पत्रिकन में लगातार छपत रहल। बाद में ये सब लोक कथा के दू खण्ड में ” बिहार की लोक कथाओं” के नाम से प्रकाशन कइल गइल।

1968 में डॉ. रामकृपाल सिन्हा भाई साहब एम.एल.सी. होके पटना अइनी। हम भागलपुर में आयोजित वर्ष 1966 के संघ शिक्षा वर्ग पूरा कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आशीर्वाद से भारतीय जनसंघ में शामिल हो गइल रहनी। हम पटना महानगर के एक सामान्य सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में काम करत रहनी। साथ ही हिन्दुस्थान समाचार में रिपोर्टर भी रहनी। पटना महानगर में जे भी प्रमुख कार्यकर्ता पटना आवे, उनके देखभाल के जिम्मेवारी सामान्यतः हमरे के देहल जाय। एसे हम रामकृपाल भाई साहब के सम्पर्क में 1968 में अइनी। जब बिहार में 1971 में कर्पूरी ठाकुर जी के नेतृत्व में संयुक्त विधायक दल के सरकार बनल त जनसंघ कोटा से डॉ. रामकृपाल सिन्हा जी कैबिनेट मंत्री भी बननी। अप्रैल 1974 में जब उहाँ के एम.एल.सी. के कार्यकाल समाप्त भइल तब रामकृपाल भाई साहब भारतीय जनसंघ के टिकट पर राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित होके दिल्ली आ गइनी।

1977 में जब जनता पार्टी के सरकार बनल तब रामकृपाल सिन्हा जी के मोरारजी देसाई मंत्रिमंडल में संसदीय कार्य मंत्रालय एवं श्रम मंत्रालय में राज्य मंत्री बनावल गइल।

1980 में जब उहाँ के राज्यसभा के कार्यकाल समाप्त हो गइल, त उहाँ के वापस मुजफ्फरपुर जाके बिहार विश्विद्यालय में पढ़ावे लगनी। लेकिन, मृदुला भाभी दिल्ली में ही रह गइनी। काहे कि तीनू बच्चा नवीन, प्रवीण और लिली छोट रहे लोग अउर दिल्ली में ही पढ़त रहे। ओ समय बिहार प्रदेश के संगठन मंत्री श्री अश्विनी कुमार जी राज्य सभा में आ गइल रहनी अउर रफी मार्ग पर विट्ठल भाई पटेल भवन में 301 अउर 302 नं. कमरा में रहत रहनी। मृदुला भाभी अउर उनकर बच्चा लोग 302 नं. कमरा में आ गइनी। माननीय अश्विनी कुमार जी 301 नं. कमरा के बॉलकनी के घेर के एक छोटा सा कमरा बनवा लेले रहीं आ ओही में रहत रहनी। हमनी पटना के कार्यकर्ता जब दिल्ली जाईं त 302 नं. के कमरा में जेमे एक सोफा आ एक बेड लागल रहे ओही पर सोईं जा। 302 नं. कमरा में हमनी के भोजन बने। भोजन, जलपान, चाय, नास्ता आदि के पूरा जिम्मेवारी मृदुला भाभी अपना ऊपर उठा लेहले रहनी। चाहे हम पटना से दो या चार लोग भी जाईं, सबका के ओतने प्यार से पूछ-पूछ के मनपसंद भोजन बना के खियावल अउर सबके देखभाल कइल, केहू के कवनो तकलीफ ना होखे, एकर ख्याल उहें के करीं। कपड़ा गंदा हो जाये त बी.पी. हाउस से धोबिन के बोला के कपड़ा देके धुलवावल, इहाँ तक कि जब हम पटना वापस लौटीं त पराठा-सब्जी बना के ट्रेन में खाए के वास्ते दे देहल, एतना सारा कुछ करत रहनी। उहाँ के बात इयाद कइला पर आँख भर आवेला। हमरा के त एतना प्यार देत रहीं जेतना आपन भाभी लोग भी ना देहले होई।

जब उहाँ के भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बननी,  महिला आयोग के अध्यक्ष बननी, तब उहाँ के ग्वालियर के महारानी विजया राजे सिंधिया पर उपन्यास लिखनीं। चाहे मामला व्यक्तिगत या राजनीतिक रहे, जब भी उहाँ के दुविधा में रहीं त हमरा से जरूर बात करीं। जब कहीं कुछ काम ना हो पावत रहे त हमरे से ही कहीं। जब उहाँ के गोवा के राज्यपाल बननी त हमरा के सपत्निक  गोवा बोलववनी। राजभवन में ठहरवनी। कई बार त उहाँ के अपने रसोई घर में घुस जाईं अउर मना कइला पर कहीं, “मेरे देवर जी आए हैं। मैं स्वयं उन्हें उनके मनपसंद बिहारी व्यंजन बनाकर खिलाऊँगी।” ई सब घटना सबके बतावल भी मुश्किल बा।

हम उहाँ के अपने विद्यालय द इंडियन पब्लिक स्कूल, देहरादून में एक कार्यक्रम में बोलवनी त उहाँ के आगमन के दिने उत्तराखंड के राज्यपाल राजभवन के गाड़ी अपने ए.डी.सी. के साथ एयर पोर्ट भेजनी। उहाँ के राजभवन के गाड़ी में ना बइठ के हमरा गाड़ी में बइठनी आ कहनी कि “मैं राज भवन में न ठहर कर अपने देवर जी के यहाँ ही ठहरूँगी।” उहाँ के हमरा विद्यालय परिसर के हमरा आवास पर ही रूकनी  अउर एक दिन के कार्यक्रम खातिर आइल रहनी पर चार-पाँच दिन रुकनी। अइसन अनेकों संस्मरण बा। अभी कुछ महीने पहिले महान साहित्यकार, लेखक, सांसद डॉ. शंकर दयाल सिंह जी के पुत्री डॉ. रश्मि सिंह अपना आवास पर 9 अप्रैल के एक कार्यक्रम में मृदुला भाभी अउर हमरा के साथे बोलवनी। ओह कार्यक्रम में मृदुला भाभी हमरा के शाल ओढ़ा के सम्मानित कइनी। उहाँ के हमरा प्रति एतना सम्मान रहे। उहाँ के जब लागल कि उहाँ के कार्यक्रम में आइल बानी त हमरो सम्मान मिले के चाहीं। अइसन विदुषी भारतीय नारी रहनी मृदुला जी। उहाँ के कवना प्रकार से श्रद्धांजलि अर्पित कइल जाय ई समझ मे नइखे आवत। उहाँ के व्यक्तित्व बार-बार ईयाद आ रहल बा। एक बार दीदी मां साध्वी ऋतंभरा जी के वृन्दावन आश्रम में एक कार्यक्रम में उहाँ के मंच पर बइठल रहनी आ हम उहाँ के ठीक सामने नीचे के कुर्सी पर बइठल रहनी। उहाँ के अपना भाषण में मंच पर से कहनी कि” मेरे सामने मेरे देवर जी आर.के.सिन्हा बैठे हैं।” मैंने भी कहा फिर अपने देवर को एक गीत सुना दीजिएगा। उहाँ के आपन भाषण समाप्त कइला के बाद एक लोकगीत गाके सुनवनी। सारा श्रोतागण खुशी से झूम उठल। ई हमार मर्मस्पर्शी क्षण ही रहे। एही तरे बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के, पटना में “शताब्दी समारोह” मनावल जात रहे। हम स्वागताध्यक्ष रहनीं। ओह समय के तत्कालीन राज्यपाल अउर अब देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के आमन्त्रित कइले रहनी। मृदुला भाभी के भी हम आग्रहपूर्वक बोलवले रहनी। उहाँ के पटना अइनी। दुनू तत्कालीन राज्यपाल सब के साथ मंच पर बइठे के सौभाग्य मिलल। उहाँ के मंच पर बइठले-बइठल रामनाथ कोविंद जी के हमरा बारे में बहुत सारा बात कह गइनी। ऊ सब ईयाद कर के मन भर आवता।

ईश्वर से प्रार्थना बा कि उहाँ के पवित्र आत्मा के चीर शांति प्रदान करीं अउर डॉ. रामकृपाल सिन्हा जी, नवीन, प्रवीण, लिली अउर सभ परिवार जन आ उनके चाहे वाला लाखो कार्यकर्ता भाई लोग के शोक के घड़ी में शक्ति अउर संबल प्रदान करीं। अइसन महान कार्यकर्ता बार-बार भाजपा में आवत रहे। ओम शांति! ओम शांति!! ओम शांति!!

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं।)


img139-1.jpg

Hum BhojpuriaNovember 23, 20201min12636

आर.के.सिन्हा

फ्रांस अउर इटली में जेहादी कठमुल्लन के करतूतन से सारी दुनिया स्तब्ध बा। ई लोग बेवजह कत्लेआम करे से बाज नइखे आवत। बम बिस्फोट आ कत्लेआम कइल जा रहल बा। ई लोग कोरोनो के विश्वव्यापी काल में सारी दुनिया के सामने एगो लमहर चुनौती पेश क देले बा। सबसे गम्भीर बात ई बा कि ए कठमुल्लन के बहुते मुसलमान सबके साथ आ समर्थन मिल रहल बा। विश्वभर से आ भारत में भी। उम्मीद के किरण जवन आइल बा उ ई कि जावेद अख्तर, शबाना आजमी आ नसीरुद्दीन शाह जइसन कुछ खास मुस्लिम हस्ती फ्रांस हमला के निंदा कइले बा। ई लोग मुनव्वर राणा सरीखे कुछ मुस्लिम धार्मिक अउर राजनीतिक नेतन के जरिए देहल गइल अपमानजनक बयान के खारिज क देहले बा जेमे ऊ लोग फ्रांस में भीषण हत्यन के तर्कसंगत होखे के बात कहले रहे।

संवेदनशील सवालन पर खामोशी-

अभी तक देश के असरदार मुस्लिम लेखक, कलाकार आ बुद्धिजीवी मुसलमान सबसे जुड़ल संवेदनशील सवालन पर गम्भीर चुप्पी साध लेहल करत रहे। ए आलोक में मुख्य रूप से जावेद अख्तर, शबाना आजमी अउर नसीरुद्दीन शाह के खुल के सामने आइल स्वागत योग्य बा। इहे मौका बा जब आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान अउर बाकी तमाम असरदार मुसलमान लोग कठमुल्लन के हरकतन के खारिज क के उनके सभ्य मुसलमान सबसे अलग-थलग करे। उनका ऑस्ट्रिया के वियना शहर में भइल भीषण”आतंकी” हमला के भी निंदा करे के होई। वियना में मारल गइल बंदूकधारी हमलावर इस्लामिक स्टेट के समर्थक रहे।

वियना के कुछ हथियार बंद बंदूकधारी सब छह जगहन पर गोलीबारी कइल जेमे बहुत से लोग मारल गइल अउर दर्जनो अभी भी मौत से संघर्ष कर रहल बाड़े। ए आतंकी हरकत के निंदा खातिर भी महत्वपूर्ण मुसलमान सबके आगे आवे के होई। ओ सबके अब चुप नइखे बइठे के। मुस्लिम बुद्धिजीवी सबके साथ दिक्कत ई बा कि ऊ सब अपने समाज के कठमुल्लन आ गुंडन से डरे ला। ओकनी से लड़े खातिर कबो सामने ना आवे। ना जाने काहे ए सबसे एतना डरे ला लोग। एही से ई गुंडा सब आतंक मचावेलन। रउआ सबके वफ़ादारी धर्म के साथ जरूर रहे के चाहीं, लेकिन राष्ट्रहित के ताक पर रख के ना, राष्ट्रहित त सर्वोपरि होखे के चाहीं।

चीन पर चुप्पी-

चीन में मुसलमान सब के साथ का हो रहल बा, ये पर कवनो कठमुल्ला आवाज ना उठावे। उहाँ केहू के गर्दन ना काटल जाला आ गोली ना मारल जाला। के ना जाने कि चीन में मुसलमान सब पर लगातार भीषण अत्याचार हो रहल बा। चीन मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में रहे वाला मुसलमान सबके कस रखले बा। वो लोग के खानपान के स्तर पर ऊ सबकुछ मजबूरी में करे के पड़ रहल बा, जवन उनका धर्म में पूर्णरूप से निषेध बा। ई सबकुछ शासक कम्युनिस्ट पार्टी के इशारा पर ये लोग के धर्म भ्रष्ट करे खातिर हो रहल बा। सारी इस्लामी दुनिया ये अत्याचारन पर चुप बा। कहीं कवनों प्रतिक्रिया सुनाई नइखे देत।

इस्लामिक देशन के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कारपोरेशन(ओआईसी) चीन में मुसलमानन पर हो रहल ज्यादतिन पर एक शब्द विरोध के दर्ज नइखे कइले। पाकिस्तान भी पूरी तरह चुप बा। ऊ त चीन के खिलाफ कबो ना बोली। ऊ चीन के पूरा तरह गुलाम बन चुकल बा। इहे स्थित सऊदी अरब आ ईरान के भी बा। शिनजियांग प्रांत के मुसलमान सबके री-एजुकेशन कैम्प सब में ले जाके कम्युनिस्ट पार्टी के विचारधारा से रू-ब-रू करवावल जा रहल बा। बतावल जा रहल बा कि ये शिविरन में अभी दस लाख से अधिक चीनी मुसलमान लोग बा। इहाँ ये लोग से जबरन इस्लाम के निंदा करे के कहल जाला। ये लोग के डेरवावल,धमकावल जाला। अइसन आहार देहल जाला जवन इस्लाम में हराम मानल जाला। ई सब कुछ एह खातिर हो रहल बा ताकि चीनी मुसलमान कम्युनिस्ट विचारधारा अपना लेस। ऊ लोग इस्लाम के मूल शिक्षा से दूर हो जास।

गौर करीं कि चीन के खिलाफ हमरा देश के वामपंथी आ सेक्युलरवादी भी कबो ना बोले। मजाल बा कि ई लोग कभी कठमुल्लन या फिर चीन के मुस्लिम विरोधी अभियान पर एक शब्द बोले। ये लोग के तबो जबान सिल गइल रहे जब भारत में ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनत रहे। ई लोग तबो ना मानत रहे कि भारत में मुस्लिम औरत सब के स्थिति बहुत खराब बा।

बुनियादी सवालन से परहेज काहे-

फ्रांस में हत्यारन के हक में मुंबई, भोपाल अउर सहारनपुर में प्रदर्शन करे वाला मुसलमान महंगाई, बेरोजगारी या अपना इलाका में नया इस्कूल, कॉलेज या अस्पताल खुलवावे आदि के  माँग के लेके कभी सड़क पर ना उतरे। का केहू बता सकsता कि ई लोग अपना बुनियादी सवालन के लेके भी सड़कन पर उतरी? का ये लोग खातिर महंगाई, निरक्षरता या बेरोजगारी जइसन सवाल गौण बा? का कबो देश के मुसलमान, किसान, दलित, आदिवासी या समाज के अन्य कमजोर वर्ग के हित खातिर भी आगे आइल बा? कभी ना। लेकिन ई लोग ओ हत्यारन खातिर सड़क पर आ जाला जे मासूमन के फ्रांस या आस्ट्रिया में मारेला। ई लोग कबो कश्मीर में इस्लामिक कट्टरपंथी सबके हाथे मारल गइल पंडित सब खातिर ना लड़े। ये लोग के अपना के हमेशा विक्टिम बतावे के शौक बा। ई लोग सिर्फ अपने अधिकार के बात करेला। ई लोग कर्तव्यन के चर्चा करते हत्थे से उखड़ जाला। अब देखीं जवना मुनव्वर राणा के ई देश दिल से प्यार देले बा ऊ आदमी विक्षिप्त के तरह बात कर रहल बा। काहे लिबरल मुसलमान राणा के कसके ना कोसे ताकि ओकरा एहसास हो जाय कि ऊ केतना नीच बन्दा बा। राणा ई साबित क देहलन कि ऊ उन्मादी, असहिष्णु आ कट्टर हउअन। ऊ घोर कट्टर, साम्प्रदायिक आ सामंती निकललन। लेकिन मुसलमानन के बौद्धिक वर्ग उनके कहे पर चुप्पी सधले बा। मुस्लिम बुद्धिजीवी लोग के साथे इहे समस्या बा कि ऊ आतंकवाद के लेके उदासीन रहेला। एही से पूरा मुस्लिम बिरादरी नाहक कटघरा में आ जाला। अभी भारत अउर पूरी दुनिया देख रहल बा कि बात-बात पर हस्ताक्षर अभियान चलावे वाला बुद्धिजीवी, वाममार्गी, सेक्युलर वगैरह जेहादी आतंकवाद के खिलाफ कवना तरे स्टैंड लेला।

जहाँ तक भारत के बात बा त औसतन मुसलमान हिन्दू सबसे उम्मीद राखेला कि ऊ नास्तिकता के हद तक सेक्युलर हो जाय लेकिन ऊ लोग खुद कठमुल्ला बनल रहे। ई विकृत आ ओछी मानसिकता ह। एके भारत के आम जनता द्वारा अच्छी तरह पहचान लेहल गइल बा। अब भारत अपना देशवासी मुसलमान सबसे उम्मीद करsता कि ऊ लोग अपने ही कौम के कठमुल्लन से लड़े। उनके परास्त करे। उनका ए जंग में देश के समर्थन मिली अउर तब उनका एक स्वाभिमानी आ राष्ट्रवादी कौम के रूप में पूरा सम्मान भी मिली।

 

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं। )


img139.jpg

Hum BhojpuriaNovember 11, 20201min8910

आर.के.सिन्हा

कवनो युवक-युवती में प्रेम भइल या एकतरफा प्रेम भइल सदियन से चलत आ रहल सामान्य बात बा। इहो होला कि अनेक बार एक दोसरा के चाहे वाला में कई कारन से विवाह भी ना होखे। एकर तमाम वजह हो सकsता जेकर चर्चा क के राउर समय बर्बाद नइखीं करे के चाहत। लेकिन कवनो कन्या से एकतरफा प्रेम कइल आ फेर ओकरा पर आपन धर्म बदल के इस्लाम धर्म स्वीकार कर शादी करे के जिद्द करे वाला इंसान के रउआ का कहेम। बेशक ऊ त मानसिक रूप से विक्षिप्त ही होई। एके जेहादी अउर कट्टरपंथी मानसिकता भी कहल जा सकsता। अइसन विक्षिप्त इंसान केतना भयानक कदम उठा सकsता, ई हाले में पूरा देश हरियाणा के औद्योगिक शहर बल्लभगढ़ शहर में देखले बा। ई राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करीब हीं बा। उहाँ बीकॉम के पढ़ाई कर रहल 21 वर्षीय मेधावी  छात्रा निकिता तोमर के एक सिरफिरा कट्टरपंथी विक्षिप्त नवयुवक के द्वारा अपना एक मित्र के मदद से हत्या कर देहल गइल। ओके 21 साल के तौसीफ नाम के इंसान खाली ए खातिर गोली से भून दिहलस कि ऊ निकिता से एकतरफा प्यार करत रहे आ ओकरा पर साथ भाग के अउर धर्म परिवर्तन करके शादी करे के दबाव बनावत रहे जेमे असफल भइला पर ऊ ये अपराध के अंजाम दिहलस। पुलिस के शुरुआती तफ्तीश अउर निकिता के माँ के बयान से साफ बा कि तौसीफ आ ओकर माँ भी लगातार निकिता पर दबाव डालत रहे लोग कि ऊ इस्लाम धर्म के स्वीकार करके उनकर बहू बन जाय। ऊ ई सब ना कइलस त ओकर जान ही ले लेहल गइल। एकरा पहिले निकिता के अपहरण भी कइल गइल रहे।

ताज्जुब त ई हो रहल बा कि अइसन भयावह घटना के बाद भी ऊ सारा लोग चुप बा जे हाथरस में एक दलित कन्या के बलात्कार अउर हत्या के घटना के ले के सोशल मीडिया से ले के सड़कन तक उतर आइल रहे। का ऊ लोग अपना चुप्पी के वजह के जरा खुलासा भी करी? का केहू इहो बताई कि भारत में ऊ कौन सा तत्व बा जे तौसीफ जइसन नवजवानन के जेहादी बना रहल बा? जवना उम्र में तौसीफ के पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देवे के चाहत रहे, ओ उम्र में ऊ एक युवती पर धर्म परिवर्तन के दबाव बनावत रहे।

आरोपी तौसीफ के संबंध हरियाणा के सम्पन्न कांग्रेसी परिवार से बा। ओकर दादा कबीर अहमद विधायक रहल बाड़े। ओकर चाचा खुर्शीद अहमद हरियाणा के पूर्व मंत्री रहलन। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ओकर चचेरा भाई हउअन। का जवन राहुल गाँधी आ प्रियंका गाँधी हाथरस के घटना पर सड़क पर उतरल रहे लोग ऊ अपना पार्टी के विधायक के भतीजा के खिलाफ भी तत्काल कठोर कार्रवाई के माँग करी अउर निकिता के घर जाके उनका घर वालन के भी सांत्वना दी? फिलहाल उनके अल्पसंख्यक प्रेम के पूर्व के इतिहास के कारण अइसन लागत त नइखे। बल्लभगढ़ घटना के तीन दिन बाद तक गाँधी परिवार के तरफ से कवनो प्रतिक्रिया तक ना आइल रहे। फिलहाल तौसीफ आ ओकर साथी रेहान के त हरियाणा पुलिस गिरफ्तार कर लेले बा। पर एक निर्दोष बच्ची के जान त चल गइल। निर्भया, हाथरस अउर अब बल्लभगढ़ के घटना में हिंसा के बर्बर अतिरेक बा। ई भी विचार करे के होई कि तौसीफ जइसन अपराधी कइसे आ काहे बनेला?  ये बिंदु पर अपराध शास्त्री के अउर राजनेता लोग के भी गम्भीरता से सोचे के होई।

काबू पावल जाय जेहादी मानसिकता पर

याद रखीं कि बल्लभगढ़ के घटना एकतरफा प्रेम तक ही सीमित नइखे। एकर एक बड़ा आयाम जेहादी मानसिकता भी बा, जवन सारी दुनिया में तेजी से फइल रहल बा। अब जरा देखीं कि यूरोप के जवन देश दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम शरणार्थिन के शरण देहलस ओकरा बदला में का मिलल? सीरिया, अफगानिस्तान, रोहिंग्या के शरणार्थिन के सबसे ज्यादा शरण फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, इंग्लैंड आ ऑस्ट्रेलिया ही देहलस। जर्मनी सीरिया में गृह युद्ध के दौरान 1 लाख शरणार्थिन के शरण देवे वाला खास देश रहल। गौर करीं कि कवनो मुस्लिम मुल्क त उपर्युक्त देशन के शरणार्थिन के अपना इहाँ ना बुलवलस। काहे? का सभी पचास से ज्यादा इस्लामिक राष्ट्र जेहादिन के मूक समर्थन करत रहे?

विगत कुछ समय पहिले स्वीडन में जे कुछ घटल ओके दुनिया देखलस। करीब एक दशक पहिले स्कैंडिनेवियायी देश जइसे स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क में इस्लाम के उपस्थिति नाम मात्र के ही रहे, लेकिन सीरियाई अरब शरणार्थिन के खुले दिल से स्वीकार करे के उदारता के कारण ही आजकल उहाँ जिहादी सब जम के बवाल काट रहल बा। कारण ई बतावल जा रहल बा कि उहाँ पर कुछ शरारती तत्व कुरान के साथ अनादर कइल। स्वीडिश जनता के त अपना काम आ मौज-मस्ती से भरपूर जिंदगी के अलावा और कवनों शरारतीपूर्ण कार्य से कभी कवनों मतलब ही ना रहल। फिर भी अफवाह फइलला के बाद उहाँ पर तगड़ा बवाल काटल गइल। ओही शरणार्थी मुसलमान सबके भीड़ सड़कन पर उतर आइल जेके स्वीडन सीरियाई कत्लेआम से बचाके अपना देश में शरण देले रहे। ये पूरा हिंसा के पीछे उहे शरणार्थी सब रहे जेके स्वीडन के सरकार मानवता के आधार पर अपनही देश में शरण देले रहे। ई बा ये जेहादी मानसिकता वालन के एहशान फरामोशी।

मतलब बल्लभगढ़ से लेके स्वीडन तक एक ही प्रकार के कट्टर जेहादी मानसिकता साफतौर पर नजर आ रहल बा। ई सारा संसार में उठल-पुथल मचा के रख देले बा। ये मानसिकता में लोकतांत्रिक तरीका से बहस खातिर कवनों जगह नइखे। बोलबs त मार दिहल जइबs। एमे कवनों इंसान के हत्या चाहे मासूमन के मजहब के नाम पर मार देहल सामान्य सा बात ही मानल जाला। निकिता के साथ इहे त भइल। चूंकि ऊ लफंगा तौसीफ से शादी करे से मना कइलस, ओके सरे राह पहिले खींच के अपहरण करे के कोशिश कइल गइल आ जब उ तइयार ना भइल त गोली मार दिहल गइल।

ई मत भूलीं कि इहे जेहादी सब अपने देश के बैंगलुरू जइसन आधुनिक महानगर में कुछ समय पहिलही जम के आगजनी कइले रहे। एकर वजह ई बतावल गइल रहे कि बैंगलुरू में कांग्रेस के एक विधायक के एक कथित रिश्तेदार पैगम्बर मोहम्मद के लेके सोशल मीडिया पर कवनो अपमानजनक पोस्ट कर देले रहलन, जवना के प्रतिक्रिया में ई सुनियोजित व्यापक हिंसा भइल। अब सवाल ई बा कि का विरोध जतावे खातिर हिंसा के ही सहारा लेहल जाई? आखिर मुस्लिम समाज के जेहादी तत्व कानून के अपना हाथ में काहे लेते जा रहल बा?  ई हम बल्लभगढ़, बैंगलुरू, यूरोप वगैरह सब जगह देख रहल बानी। अइसन क के ई जेहादी सब इस्लाम के बदनाम ही त करsता। ये लोग के शांति से रहे अइबे ना करे। पड़ोसी पाकिस्तान में ई जेहादी ही शिया अउर अहमदी लोग के मारत रहेला। उनका मस्जिद पर बम बिस्फोट करेला। ई समझ में ना आवे कि दरअसल ई लोग चाहेला का? फिलहाल त सारी दुनिया के सामने कोविड-19 अउर इस्लामिक चरमपंथी दुनु लमहर चुनौती के रूप में सामने आइल बा। कोविड-19 के त वैक्सीन मिल ही जाई पर तौसीफ जइसन जालिम जेहादिन के दुनिया कइसे मुकाबला करी? ये विषय पर सारी दुनिया के विशेषकर इस्लामिक राष्ट्रन के खासकर इस्लामिक धर्म गुरुअन के त तत्काल सोचे के होई। कहीं अइसन ना होखे कि ये कुकृत्यन के व्यापक प्रतिक्रिया से भारी नुकसान हो जाय। अइसन स्थिति से सबका बचें के चाहीं।

( लेखक वरिष्ठ सम्पादक, स्तम्भकार अउर पूर्व सांसद हईं)


img122.jpg

Hum BhojpuriaOctober 26, 20201min10300

  आर. के.सिन्हा

बिहार एक बार फेर चुनावी समर खातिर तैयार बा। राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गइल बा। नेता लोग के जनसंपर्क अभियान जारी बा। केतना अच्छा होइत अगर अबकी बिहार विधान सभा चुनाव जाति के सवाल के बजाय विकास के मुद्दा पर ही लड़ल जाइत। ये मसला पर सभ क्षेत्रन में गम्भीर बहस होखे। सब दल अपना विकास के रोडमैप जनता के सामने रखे। दुर्भाग्यवश बिहार में विकास के सवाल गौड़ होते जा रहल बा। हम पिछला राज्य विधान सभा चुनाव भी देखले रहीं। तब कैम्पेन में विकास के सवाल पर महागठबंधन के नेता लोग फोकस ही ना कर पावत रहे। अभी त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के सब कैंपेन के केंद्र में लाके खड़ा कर देले बाड़न।

पिछला चुनाव में त एनडीए के खिलाफ खड़ा तमाम शक्ति राज्य के विकास के बिंदु पर बात करे से भी कतरात रहे। ओ सब में जाति के नाम पर वोट हासिल करे के होड़ सा मचल रहे। एही मानसिकता के चलते बिहार विकास के दौड़ में बाकी राज्यन से कहीं बहुत पीछे छूट गइल। ई सही में बड़ी गम्भीर मसला बा। बिहार में जाति के राजनीति करे वाला लोग के कारण ही राज्य में औद्योगिक विकास ना के बराबर भइल। रउए बता दीं कि बिहार में बिगत तीस साल में कवन औद्योगिक घराना आपन कवनो इकाई लगवलस ?  टाटा, रिलायंस, महिंद्रा, गोयनका, मारुति, इंफोसिस जइसन कवनो भी बड़हन कम्पनी बिहार में निवेश कइल उचित तक ना समझल आ यही के नतीजा ह कि बिहार के नौजवान के अपना घर के आसपास कवनो कायदा के नौकरी ना मिले। उनका घर से बाहर दूर निकलहीं के पड़ेला। आप दिल्ली, मुंबई, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलुरू, लुधियाना समेत देश के कवनो भी औद्योगिक शहर में चल जाईं, उहाँ पर रउआ बिहारी नौजवान हर तरह के नौकरी करत मिली। का बिहार में जाति के राजनीति करे वाला लोग ये सवाल के कवनो जवाब दे पाई कि उनके गलत नीतियन के कारण ही राज्य में निजी क्षेत्र से कोई निवेश करे के हिम्मत तक ना करे।

 

इयाद रख लीं कि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडू जइसन राज्यन के तगड़ा विकास एही से हो रहल बा काहे कि उहाँ हर साल भारी निजी क्षेत्र के निवेश आ रहल बा। केंद्र सरकार हर साल एगो रैंकिंग जारी करेला कि देश के कवना राज्य में कारोबार कइल आसान आ कहाँ सबसे मुश्किल बा। सरकार हाल हीं में “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के रैंकिंग जारी कइलस। एमे पहिला पायदान पर आंध्र प्रदेश बा। एकर मतलब बा कि देश में आंध्र प्रदेश में कारोबार कइल आज के दिन सबसे आसान बा। तेलांगना दूसरा पायदान पर बा। हरियाणा तीसरा नम्बर पर बा। कारोबार करे में आसानी के मामला में आंध्र प्रदेश चौथा त झारखंड पाँचवा स्थान पर बा। उहें छत्तीसगढ़ 6वाँ, हिमाचल प्रदेश 7वाँ आ राजस्थान 8वाँ स्थान पर बा। एकरा अलावे पश्चिम बंगाल अबकी बार शीर्ष 10 में शामिल होते हुए 9वाँ नम्बर पर पहुँच गइल बा। उहवें गुजरात ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामला में 10वाँ पायदान पर बा। लेकिन बिहार त एमे 15वाँ स्थान तक कहीं नइखे। कइसे होई बिहार के विकास?  दरअसल ये रैंकिंग के उद्देश्य घरेलू अउर वैश्विक निवेशक सबके आकर्षित करे खातिर कारोबारी माहौल में सुधार लावे खातिर राज्यन के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू कइल बा। सरकार राज्यन के रैंकिंग के कंस्ट्रक्शन परमिट, श्रम कानून, पर्यावरण पंजीकरण, इन्फॉर्मेशन तक पहुँच, जमीन के उपलब्धता अउर सिंगल विंडो सिस्टम के आधार पर मापी करेला।

उपर्युक्त रैंकिंग से बिहार के सब नेता आ दल के सबक लेहीं के चाहीं। ये लोग के पता चल गइल होई कि उनका राज्य के स्थिति कारोबार करे के लिहाज से कतई उपयुक्त नइखे। ई सही बा कि पिछले लंबा समय से बिहार में औद्योगिक क्षेत्र के विकास थम सा गइल बा। अब बिहार में जवन भी नया सरकार बने ओकरा देश के प्रमुख उद्योग अउर वाणिज्य संगठन जइसे फिक्की, सीआईआई या एसोचैम से तालमेल रख के उद्योगपति सबके राज्य में निवेश करे खातिर प्रयास करे के होई। ई केहू के बतावे के जरूरत नइखे कि बिहार के औद्योगिक क्षेत्र में पिछड़ापन के कई कारण बा। जइसे कि राज्य में नया उद्यमी आ पहिले से चल रहल उद्योग के मसलन के हल करे खातिर कवनो सिंगल विंडो सिस्टम नइखे बनावल गइल। बिहार में आपन कारोबार स्थापित करे वाला उद्योग खातिर भूमि आवंटन के कवनों ठोस व्यवस्था ना कइल गइल आ राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर के मजबूत करे के जरूरत तक ना समझल गइल।

अर्थात बिजली-पानी के आपूर्ति के व्यवस्था तक पक्का नइखे। सड़कन के खस्ताहाल बा। पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बेहद खराब बा। स्वास्थ्य सेवा भी भगवान भरोसे बा। हालांकि नीतीश जी के शासन में विकास के प्रयास कम भइल, अइसन भी नइखे। पर लालू राज्य में जवन छवि राज्य के बन गइल ओके निवेशक सबके मन से निकालल आसान भी त नइखे। ये सब हालात में बिहार में के निवेशक आके निवेश करी भला?  बिहार में फूड प्रोसेसिंग, कृषि आधारित हजारों उद्योग, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर उद्योग, कपड़ा, कागज और आईटी उद्योग वगैरह के भारी विकास संभव बा। ए तरफ ध्यान त देवहीं के परी।

 

बिहार काहे ना बनल औद्योगिक हब

विगत 20-25 साल के दौरान देश के अनेक शहर मैन्युफैक्चरिंग अउर सेवा क्षेत्र के हब बनत चल गइल। पर ये लिहाज से बिहार पिछड़ गइल। बिहार के कवनो भी शहर नोएडा, मानेसर, बद्दी या श्रीपेरंबदूर ना बन सकल। नोएडा अउर ग्रेटर नोएडा के हीं देखीं। इहाँ इलेक्ट्रॉनिक सामान आ आटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ल सैकड़न उत्पाद के उत्पादन हो रहल बा। एकरा अलावा इहाँ सैकड़ों आईटी कंपनी सब में लाखों नौजवानन के रोजगार मिल रहल बा जेमे एगो बड़ा प्रतिशत बिहारी जवानन के भी बा। एने दक्षिण कोरिया के एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, मोजर बेयर, यमाहा, न्यू हालैंड ट्रेक्टर्स, वीडियोकॉन इंटरनेशनल श्रीराम होंडा पॉवर इक्विमेंट अउर होंडा सियल नॉएडा- ग्रेटर नॉएडा में तगड़ा निवेश कइले बा।

 

एही तरे से हरियाणा के शहर मानेसर एगो प्रमुख औद्योगिक शहर के रूप में स्थापित हो चुकल बा। मानेसर गुड़गांव जिला के एगो तेजी से उभरत औद्योगिक शहर ह। साथ ही ई दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर के एगो हिस्सा भी ह। मानेसर में ऑटो और ऑटो पार्ट्स के अनेक इकाई खड़ा हो चुकल बा। एमे मारुति सुजुकी, होंडा मोटर साइकिल एंड स्कूटर इंडिया लिमिटेड शामिल बा। इहाँ भी लाखों लोग काम करेला जेमे बड़ी संख्या में बिहारी बाड़न। मानेसर के रउआ उत्तर भारत के श्रीपेरंबदूर मान सकेनी। तमिलनाडू के श्रीपेरंबदूर में भी ऑटो सेक्टर के कम से कम 12 बड़हन कम्पनी उत्पादन कर रहल बा आ एही सब कम्पनीन के पार्ट्-पुर्जा सप्लाई करे खातिर सैकड़न सहयोगी उद्योग भी चल रहल बा।

 

आ अब चलीं महाराष्ट्र के चाकण में। चाकण पुणे से 50 किलोमीटर अउर मुंबई से 160 किलोमीटर के दूरी पर स्थित बा। इहाँ पर बजाज ऑटो अउर टाटा मोटर्स के अनेक इकाई बा। ये दुनू बड़हन कम्पनीन के इकाईं आ गइला के बाद चाकण अपने आप में एक खास मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप ले चुकल बा। इहाँ हजारों पेशेवर अउर श्रमिक काम कर रहल बाड़े। अब महिंद्रा समूह भी चाकण में दस हजार करोड़ रुपया के लागत से आपन एगो नया इकाई स्थापित करे के फैसला कइले बा। वाल्कसवैगन भी इहाँ आ चुकल बा। एकरा अलावे भी देश के अनेक शहर एही तरे मैन्युफैक्चरिंग चाहे सेवा क्षेत्र के केंद्र बनल।

 

दूसरा तरफ जवन बिहार टाटा नगर अउर डालमिया नगर जइसन निजी औद्योगिक शहर आजादी से पहिले बसा रखले रहे,   ओही बिहार के कवनो शहर काहे मैन्युफैक्चरिंग चाहे सेवा क्षेत्र के हब ना बन सकल ? ये बिहार के बिहार विधान सभा के चुनाव में ये सब मसला पर भी बात होखे आ जनता उनहीं के वोट देवे जे बिहार में निजी क्षेत्र के निवेश ले आवे तब त कवनो बात बनी।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं)


rebecca-hendin-bbc-news-chinese-espionage-illustration-1-1920-mr-1280x720.jpg

Hum BhojpuriaOctober 9, 20201min3440

  आर.के.सिन्हा

चीन खातिर जासूसी के आरोप में गिरफ्तार वरिष्ठ पत्रकार राजीव शर्मा के गिरफ्तारी ये ज्वलंत बहस के जन्म दे देले बा कि का पत्रकार के कुछ भी करे के छूट मिलल बा?  का ऊ लोग ये देश आ इहाँ के कानून से ऊपर बा? का अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के नाम पर सब कुछ कइल जायज बा? लोग इहो मांग कर रहल बा कि जे लोग चाहे कवनो भी पद पर काहे ना होखे यदि राष्ट्रीय हित के नुकसान पहुँचा रहल बा, ओकरा कठोरतम सजा मिलहीं के चाहीं।

वास्तव में ई बेहद शर्मनाक स्थिति बा कि अपना देश में ही कुछ प्रतिष्ठित कहल जाए वाला लोग चीन खातिर जासूसी कर रहल बा। अइसन लोग में पत्रकार लोग भी शामिल बा। एह सिलसिला में स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा के  ‘ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट’  (ओएसएस) के तहत गिरफ्तारी आँख खोल देवे वाला बा। यतीश यादव अपना किताब रॉ: अ हिस्ट्री ऑफ इंडियाज कवर्ट ऑपरेशंस’ , जे कुछ दिन पहिलही आइल बा, में लिखले बाड़े – ई निर्विवाद तथ्य ह कि साइबर जासूसी के मामला में चीन दुनिया में सबसे सक्रिय देश ह। उ अपना जासूसी नेटवर्क के विस्तार करे खातिर ठीक ओही तरे ‘सॉफ्ट पॉवर’  के इस्तेमाल कर रहल बा जइसन कबो अमेरिका आ रूस कइले रहे। उ भारत के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के ओट में जासूसी गतिविधि के बढ़ा रहल बा। एकरा खातिर उ शैक्षणिक संस्थान, विद्वान, कारोबारी, पेशेवर आ इहाँ तक कि पत्रकार के भी इस्तेमाल कर रहल बा। हद त ई हो रहल बा कि कुछ पत्रकार मीडिया से जुड़ल संस्थान के भी ई लागता कि पुलिस द्वारा राजीव शर्मा के गिरफ्तारी अन्यायपूर्ण बा।

ई लोग दिल्ली पुलिस के ही कसूरवार ठहरा रहल बा कि उनकर रिकॉर्ड ‘संदिग्ध’ बा। एही तरे कई वेबसाइट भी राजीव शर्मा के पक्ष में उतर आइल बा,  जेकरा बारे में ई आम धारणा बा कि ऊ लोग “अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता” के नाम पर कवनो भी हद तक चल जाला। जब ओ लोग के कुछ कहल जाला, त ऊ लोग आपन आवाज दबावे आ लोकतंत्र के हत्या के राग छेड़ देला। अइसन लोग के एगो शक्तिशाली गठजोड़ बा, जे खुद पर आँच आवत देख एक सुर में हल्ला मचावे लागेला, जबकि ये पत्रकार आ संस्थान सबके ई अच्छा से पता बा कि ओ लोग के बयान के भारत विरोधी ताकत ही भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फइलावे में उपयोग करेला। एकर ढेरों उदाहरण मौजूद बा। राजीव शर्मा के मामला में भी ई बात एक बार फेर सामने आ गइल बा। भारत के घोर विरोध करे वाला तुर्की के एक वेबसाइट त बाकायदा राजीव शर्मा के पक्ष में आर्टिकल लिख के उनका के निर्दोष तक बता देले बा। उ वेबसाइट ये संदर्भ में ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ के बयान के भी उद्धृत कइले बा।

 

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पत्रकार कहल जाए वाला पियक्कड़न आ नशेड़ियन के अड्डा बन के रह गइल बा ई बतावल जरूरी नइखे। ई पूरा तरह से जग जाहिर बा। अब त केहू प्रतिष्ठित पत्रकार उहाँ दिखाई तक ना देला।

 

राजीव शर्मा के बचावे खातिर ई प्रोपेगेंडा भी फइलावल शुरू कर देहल गइल बा कि उ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़ल रहलन। उनका से कई बार मिल चुकल बाड़े आ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में डोभाल के नियुक्ति के जोरदार समर्थन भी कइले रहलन। का ई कवनो उचित तर्क बा कि केहू से मिल लेहला से, ओकर प्रशंसा कर देहला से कोई केहू के करीबी हो जाला? दरअसल ई सब मूल मुद्दा से लोग के ध्यान भटकावे के कोशिश ह। मामला के ट्विस्ट देवे के एक सुनियोजित चाल ह। खुफियागिरी करे वाला के त ई विशेष रूप से सिखावल जाला कि जवन भी तू कर रहल बाड़s  ओकरा से ठीक उलटा दिखs।

 

ये देश के कुछ पत्रकार लोग के मानना बा कि पत्रकार भइला के नाते ऊ सारा नियम-कानून से ऊपर बा। ओ लोग पर कवनो प्रकार के कोई रोक ना होखे के चाहीं, चाहे ऊ लोग राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ ही काहे ना करे। अतीत में भी कई घटना अइसन भइल बा, जेमे जाने- अनजाने कवनो पत्रकार के वजह से सैन्य गतिविधि, संवेदनशील सुरक्षा संस्थानन के जानकारी आसानी से देश विरोधी ताकतन के मिल गइल। ओह लोग पर जब कार्रवाई के मांग उठल, त “अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता” के हल्ला मचा देहल गइल। हमार त अमित भाई शाह से ई अनुरोध होई कि अइसन सब लोग पर भी सख्त निगरानी अउर गहन जाँच करे के जरूरत बा जे राष्ट्र विरोधी हरकत में लागल लोग के बचाव करे में लागल बा।

 

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल ई उठsता कि का पत्रकार देश के सुरक्षा से ऊपर बा?  का उनका राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करे के खुला छूट बा? राजीव शर्मा प्रकरण में कुछ लोग के प्रतिक्रिया से त अइसहीं लागsता कि ऊ लोग अइसहीं माने ला। लेकिन ओह लोग के मान्यता ही अंतिम सत्य त ना ह। अइसन पत्रकार लोग आपन विश्वसनीयता खो चुकल बा। देश के अधिकांश लोग एह लोग के बात पर भरोसा ना करे ला। राष्ट्रीय सुरक्षा के दांव पर लगावे वाला के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी बा। अइसन कार्रवाई जे आगे खातिर मिशाल बन जाय। अइसन लोग के अपराध दोहरा बा। देश के सुरक्षा के साथे खिलवाड़ आ लोग के भरोसा के हत्या। कई हलका से त अब ई भी आवाज आवे लागल बा कि अइसन लोग के फाँसी के सजा दे देवे के चाहीं।

 

ई सुन के मन वास्तव में बहुत उदास आ क्षुब्ध हो जाला कि हमरा सेना में ही कार्यरत कुछ देश के गद्दार महत्वपूर्ण सूचना देश के शत्रु सब के देत रहेला लोग।

 

एक बात जान लीं कि सेना के तीनों अंगों में प्रत्येक संवेदनशील दस्तावेज के सुरक्षा के दृष्टि से अलग-अलग श्रेणी में रखल जाला। एमे गोपनीय, रहस्य, गुप्त और अति गुप्त के श्रेणी बा। ये सब के x के निशान से पहचानल जाला यानि एक x अगर गोपनीय बा त xxxx अति गोपनीय होई। सेना में सोशल मीडिया के इस्तेमाल खातिर एक सख्त नकारात्मक नीति बा। सेना के अधिकारी के सोशल मीडिया के इस्तेमाल के सीमित इजाजत त बा, लेकिन ऊ लोग सेना के वर्दी में आपन फोटो पेस्ट नइखे कर सकत। साथ ही उ कहाँ  तैनात बा, ये संबंध में भी जानकारी साझा नइखे कर सकत। एकरा अलावा कोई भी अधिकारिक जानकारी, प्लान आ इहाँ तक कि कार्यालय के बुनियादी ढांचा के संबंध में भी कोई जानकारी नइखे दे सकत।

 

हम 1970-71 में भारत-पाक युद्ध (बांग्लादेश आजादी के लड़ाई) के समय युद्ध संवाददाता के रूप में कार्यरत रहनी। ओह समय कोलकाता और ढाका में तथाकथित वामपंथी पत्रकारन के जवन गुट भारतीय सेना के बांग्लादेश जाए के विरोध करत रहे, अउर पाकिस्तान के समर्थन करत रहे, कुछ अइसहीं समझ लीं कि उनके मानसपुत्र ही आज भी चीन-पाकिस्तान के जासूसी कर रहल बा।

 

संसद के एह पर गंभीरता से विचार करे के चाहीं कि अइसन लोग खातिर कठोर से कठोर सजा के प्रावधान होखे। देश के सुरक्षा से बढ़के त कुछ भी नइखे। देश बा तभिये त हम सब बानी।

 

भारत के रक्षा संबंधी तैयारी से संबंधित दस्तावेज बेचे वाला जयचंद के मौत के सजा होखे। इनके केस पर कोर्ट तुरंत अउर लगातार सुनवाई करके फैसला लेवे। ई केस कवनो भी हालत में लटके के ना चाहीं। अगर केहू पर आरोप सिद्ध होता त ओकर सजा सिर्फ फांसी ही होखे के चाहीं।

( लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं। )


violence-in-sweden_jpeg.jpg

Hum BhojpuriaSeptember 17, 20201min8540

आर.के.सिन्हा

करीब एक दशक पहिले स्कैंडिनेवियायी देशन जइसे स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क में इस्लाम के उपस्थिति नाममात्र के ही रहे, पर सीरियाई अरब शरणार्थी सबके खुला दिल से स्वीकार करे के उदारता के कारण आजकल उहाँ बवाल कट रहल बा, आग लागल बा। बतावल जा रहल बा कि उहाँ पर कुछ शरारती तत्व कुरान के साथ अनादर कइल। स्वीडिश जनता के त अपना काम आ मौजमस्ती के अलावा अउर कवनो शरारतपूर्ण कार्य से कवनो मतलब ना। फिर भी अफवाह फइलला के बाद उहाँ पर तगड़ा बवाल काटल गइल। स्वीडन से हजारन किलोमीटर दूर भारत के आईटी राजधानी बेंगलुरु में भी कुछ सप्ताह पहिले एक छोटहन मसला पर जमके सुनियोजित आगजनी भइल। बैंगलुरू के हिंसा में कुछ मासूमन के जान गइल, अनेक लोग घायल हो गइल आ सरकारी सम्पत्ति के भारी नुकसान भइल।

बैंगलुरू जइसन आधुनिक महानगर में उपद्रवी सब जगह-जगह गाड़ी सब में आग लगवलस अउर  एटीएम तक में तोड़फोड़ कइल गइल। अइसन बतावल जाता कि बेंगलुरु में कांग्रेस के एक विधायक के एक कथित रिश्तेदार पैगम्बर मोहम्मद के लेके सोशल मीडिया पर कवनो अपमानजनक पोस्ट कइले रहे, जवना के प्रतिक्रिया में ई हिंसा भइल। हालांकि उनकर प्रतिक्रिया हिन्दू देवी देवता सबपर कइल गइल टिप्पणी के जबाब में रहे। बावजूद एकरा सुनियोजित तरीका से बेंगलुरु के आग के हवाले करे के साजिश कइल गइल। सवाल ई बा कि का स्वीडन से लेके  भारत में कवनो मसला पर विरोध जतावे खातिर हिंसा के ही सहारा लेहल जाई? आखिर मुसलमान समाज के कट्टरपंथी तत्व कानून के अपना हाथ में काहे लेते जा रहल बा?  दुनु घटना में अगर कानून के आपन काम करे के मौका देहल जाइत त ना तs बैंगलुरू में अउर नाहीं स्वीडन में आग लागित। पर अइसन ना भइल। अइसन क के का ई कट्टरपंथी अपनहीं मुस्लिम समुदाय के कानून माने वाला लोग के शर्मसार आ असुरक्षित ना कर रहल बा लोग?  एकरा से त ओही लोग के हर तरह से नुकसान बा।

उत्तरी यूरोप के देश स्वीडन के माल्मो शहर में कुरआन के अपमान के खबर आइल। एकरा बाद ओही मुसलमान लोग के भीड़ सड़कन पर उतर गइल जेकरा के स्वीडन सीरियाई कत्ल से बचा के अपना देश में शरण देले रहे। ई दंगाई सब पूरे शहर के बंधक बना लेहलस। जगह-जगह मकान आ बाजारन में आग लगा देहल गइल। स्वीडन के पुलिस के अइसन दंगा के काबू करे के कवनो पूर्व अनुभव भी ना रहे। उहाँ के पुलिस के भारत के पुलिस के जइसन ए तरह के हालातन के मुकाबला करे के अनुभव नइखे। ई पहिला बार रहे जब ए खूबसूरत यूरोपीय देश में एतना भयानक हिंसा भइल। पुलिस जब तक दंगाई सबके काबू में कइलस तब तक नुकसान काफी ज्यादा हो चुकल रहे। ए पूरा हिंसा के पीछे उहे शरणार्थी लोग बतावल जाता जवना के स्वीडन के सरकार कुछ साल पहिले मानवता के आधार पर अपना देश में शरण देले रहे। ई ह ओ लोग के एहसान फरामोशी। हमरा स्वीडन जाए के मौका मिलल बा आ हम स्वीडिश लोग के शांति प्रियता आ सौहार्द से खासा प्रभावित बानी।

आप लोगन के इयाद होई कि सीरिया अउर इराक जइसन खाड़ी देशन में हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग यूरोपियन देशन में पनाह लेले रहे। उहाँ पर जवन देश के शरणार्थी सब खातिर आपन दरवाजा खोल देले रहे ओमे स्वीडन सबसे आगे रहे। ओकरा अब अपना ओ सदाशयता अउर उदारता के दण्ड भरे के पड़ रहल बा। स्वीडन के घटना के इस्लाम के शुरुआती दौर से जोड़ के देखल ही समीचीन रही। तब मक्का से बहुते शरणार्थी मदीना हिजरत करे पहुँचल रहे। उहाँ पहिले यहूदी कबीला सब रहत रहे। ये हिजरत के एतना महत्व रहे कि इस्लामी संवत के नाम ही हिजरी रख देहल गइल। मदीना के लोग मोहाजीर सब के जबरदस्त स्वागत कइल। अंसार कबीला त आपन सारा संपत्ति ये शरणार्थी सब के साथ बराबर-बराबर बाँट लिहलस। ओह बेरा मदीना के नाम यसरब रहे जवन बाद में बदल के मदीनतुन्नबी (पैगम्बर के शाह) रखाइल। कुछ ही साल में मदीना के सब बाशिंदा या त मुसलमान बना लेहल गइल या कत्ल कर देहल गइल अउर जे बचल उ पहिले मदीना से फिर अरब से ही निकाल दिहल गइल। आज सऊदी अरब में केहू यहूदी ना रहेला। इस्लाम के आविर्भाव के बाद लगभग सारी दुनिया मे ही अशांति छा गइल।

सारा कौम जे आराम से चैन के साथ सूतल रहे इस्लाम ओकरा पर तलवार लेके टूट परल कि उठs  आ एक अल्लाह के इबादत करs वरना फेर तलवार काहे खातिर बा। स्वीडन अउर बेंगलुरू के घटना सब से त इहे लाग रहल बा।

स्वीडन के माल्मो शहर में जे तरह के भयानक हिंसा भइल ओकर सारी दुनिया के निंदा करे के चाहत रहे। हमरा देश के सेकुलरवादी सब के भी। लेकिन भारत के सेकुलरवादी सबके मुँह में दही जम गइल। उ लोग त बेंगलुरु हिंसा पर भी चुप्पी साध लेले रहे। दरअसल दुनिया के अनेक देश में इस्लामिक कठमुल्लापन अब गम्भीर रूप ले लेले बा। अपना के मुसलमान कहे वाला लोग बात-बात पर सड़क पर उतर रहल बा। ई लोग अपना मजहब के नाम पर अनावश्यक कट्टरता फइला रहल बा। एकरा से जाहिलपना बढ़त जा रहल बा। हमरा अपना बेंगलुरु महानगर में कठमुल्ला लोग ईश निंदा के नाम गरीब बस्तियन में मुसलमान सब के उकसावल-भड़कावल। नतीजा ई भइल कि उन्मादी भीड़ जमा के तोड़फोड़ कइलस। घंटो ई हिंसक उन्माद चलल। ई लोग कभी शिक्षा चाहे स्कूल कॉलेज खातिर सड़क पर ना उतरे। ई बतावल जरूरी बा कि स्वीडन के साथ-साथ, उत्तरी यूरोप के कई अउर देश जइसे डेनमार्क, नार्वे आ फिनलैंड शरणार्थी सब के पनाह देहले रहे। ये देशन के नॉरडिक देश भी कहल जाला। ये देशन के आपन आबादी बहुत कम बा। जब बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी उहाँ पहुँचल त ओ लोग के सामाजिक ताना-बाना बदल गइल। ये देशन में पहिले अपराध लगभग ना के बराबर होखे, अब उहाँ रेप, लूट मार अउर हत्या हो रहल बा। मुस्लिम कट्टरपंथी लोग के खिलाफ लिखल अउर बोलल केतना जरूरी हो गइल बा, ई स्वीडन के दंगन से पता चलsता जहाँ कट्टरपंथी मुस्लिम लोग स्वीडन के जरा के राख में मिला देले बा।

एगो सीधा सा सवाल ई बा कि का स्वीडन में दक्षिणपंथी लोग कट्टरपंथी मुस्लिम के कुकृत्य से परेशान होके उनका धार्मिक पुस्तक में आग लगा दिहल, जवना के प्रतिक्रिया स्वरूप कट्टरपंथी मुस्लिम लोग स्वीडेन में ही आग लगा देहलस। का कुरआन के अपमान कइला पर कानूनी कार्रवाई के इंतजार कइल, स्वीडन के जरवला से बेहतर उपाय ना होइत? निश्चित रूप से कुछ कठमुल्ला मुसलमान लोग के हरकत के सीधा नुकसान अमनपसंद मुसलमान लोग के होला। ओही लोग के अपना कौम के जाहिल तत्वन के खिलाफ आवाज उठावे के होई। उनका चुप्पी से जाहिलन के शह हीं मिलेला आ हिंसा के आग में नाहक ही अमन पसंद मुसलमान भी जरेलें।

(लेखक वरिष्ठ सम्पादक,  स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं।)


fefda5d6-ff6a-11e8-93b7-146c6b325962_image_hires_104313.jpg

Hum BhojpuriaSeptember 11, 20201min9810

आर. के. सिन्हा

भारत अउर चीन सीमा पर तनाव अभी बरकरारे बा आ भारत-पाकिस्तान के बीच भी गोला- बारूद चलिए रहल बा। यानी भारत फिलहाल अपना दुगो घोर शत्रु देशन के सरहद पर एक साथ प्रतिदिन ही सामना कर रहल बा। ई दुनु देश बार-बार साबित कर चुकल बा कि ई लोग त हरगिज ना सुधरी। रउआ ए लोग से मैत्रीपूर्ण संबंध के अपेक्षा करिए नइखीं सकत। ए लोग के डीएनए में ही भारत विरोध बा। त साफ ब कि भारत के अपना ए पड़ोसी मुल्कन के नापाक सब हरकत के मुकाबला करे खातिर हर वक़्त चौकस रहहीं के पड़ीं। अटल बिहारी वाजपेयी बार-बार कहीं कि ‘ रउआ आपन मित्र बदल सकsतानी, लेकिन दुर्भाग्य से पड़ोसी ना।’  बात इहवें समाप्त नइखे होत। ई दुनु दुश्मन देश एक-दोसरा के घनिष्ट मित्र भी ह। कम से कम ऊपर से देखे में त इहे लागेला। हालांकि, कूटनीति में कवनों देश केहू के स्थायी मित्र भा शत्रु ना होला। इहो सम्भव बा कि भारत से खुंदक ही ये लोग के करीब ले आवेला। त का अगर अब कभी भारत के चीन के साथ युद्ध भइल त पाकिस्तान भी मैदान में खुल के आई चीन के हक में? एकरे साथे अगर पाकिस्तान के भारत के साथ युद्ध भइल त चीन भी अपना मित्र देश पाकिस्तान के हक में लड़ी? ई सब सवाल वर्तमान में महत्वपूर्ण हो गइल बा। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह सार्वजनिक रूप से कह रहल बानी कि अगर भारत-चीन के युद्ध छिड़ल त पाकिस्तान शांत ना बइठी। ऊहो चीन के हक में लड़ी। चूंकि अमरिंदर सिंह सैन्य मामलन के गहन जानकार हईं,  एही से उनका चेतावनी के नजरअंदाज नइखे कइल जा सकत।

बहरहाल कुछ दिन पहिलहीं लद्दाख के गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकन के बीच कस के संघर्ष भइल रहे। ओकरा बादे से सीमा पर शांति एगो दूर के कौड़ी बन गइल बा। हालांकि दुनु पक्ष बातचीत भी कर रहल बा, ताकि माहौल शांत हो जाय। पर ई त मानहीं के होई कि बातचीत के नतीजा फिलहाल कवनो बहुत सकारात्मक नइखे। चीन के साथे चल रहल सीमा विवाद पर भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेस स्टाफ़ जनरल बिपिन रावत त 24 अगस्त के कहलन कि लद्दाख में चीनी सेना के अतिक्रमण से निपटे खातिर सैन्य विकल्प भी बा। लेकिन ई तबे अपनावल जाई जब सैनिक आ कूटनीतिक स्तर पर वार्ता विफल रही। रावत के बयान से आम हिंदुस्तानी आश्वस्त हो सकsता कि भारत कवनो भी स्थिति खातिर तैयार बा। रावत जे भी कहनी ओमे कुछ भी गलत ना लागल। ई एक सधल बयान ह। भारत के रक्षा तैयारी युद्ध स्तर पर बा।

एही बीचे फ्रांस से खरीदल गइल बेहद आधुनिक शक्तिशाली 36 राफेल विमानन के पहिलका खेप भारत आ चुकल बा। निश्चित रूप से राफेल लड़ाकू विमान के भारत में आइल अपना सैन्य इतिहास में नया युग के श्रीगणेश बा। ए बहुआयामी विमानन से वायुसेना के क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव आई। राफेल विमान के उड़ान के दौरान प्रदर्शन श्रेष्ठ बा। एमे लागल हथियार, राडार अउर अन्य सेंसर आ इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता लाजवाब मानल जाला। कहे के ना होई राफेल के अइला से भारतीय वायुसेना के बहुत ताकत मिलल बा।

रउआ एकरा के ए तरे समझ सकीले कि हमनी के रक्षा तैयारी सही दिशा में बा। एही से अगर चीन के साथ युद्ध के नौबत आइल त एह बेरा चीन के गला के दबा देवे के पुख्ता इंतजाम भारतीय सेना के पास बा। पर सवाल ऊहे बा कि का तब पाकिस्तान भी युद्ध में कूद पड़ी? अगर हम पीछे मुड़ के देखीं त 1962 में चीन के साथ भइल जंग के समय पाकिस्तान भी ओकरा हक में लड़े के चाहत रहे। लेकिन उहाँ शिखर स्तर पर ए बाबत कवनो सर्वानुमति ना बनला के कारण उ मैदान में ना आइल। ओने पाकिस्तान भारत पर 1965, 1971 अउर फेर कारगिल में हमला बोलल त  चीन भी तटस्थ ही रहे। ओइसे त हमला उ 1948 में भी कइले रहे। लेकिन तब के दुनिया अलग रहे। कहल जाला कि 1965 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान आ उनकर विदेश मंत्री जुल्फिकार भुट्टो के उम्मीद रहे कि चीन ओकरा हक में आई, पर अइसन भइल ना।

पाकिस्तान कच्छ में आपन नापाक हरकत चालू कर देले रहे। पाकिस्तान के अदूरदर्शी सेना प्रमुख मूसा खान कच्छ के बाद कश्मीर में घुसपैठ चालू क देहलन। उ भारत के कच्छ आ कश्मीर में एक साथ उलझावे के चाहत रहे। लेकिन भारतीय सेना उनकर कमर ही तूर देहलस। भारतीय सेना के कब्जा से ढ़ेर दूर ना रहे लाहौर। यानी कश्मीर पर कब्जा जमावे के चाहत राखे वाला पाकिस्तान लाहौर के ही खो देवे वाला रहे। भारत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर(पीओके) से करीब आठ किलोमीटर दूरी पर स्थित हाजी पीर पास पर आपन कब्जा जमा लेले रहे। भारत 1971 के जंग में पाकिस्तान के त दु फाड़ ही क के रख देले रहे अउर कारगिल में भी ओकर कस के धुनाई कइले रहे। ए दुनु मौका पर चीन अपना मित्र के हक में भारत से पंगा लेवे से बचल ही सही मनलस।

हालांकि इहो सच बा कि 1971 से अब तकले वैश्विक स्तर पर दुनिया के चेहरा-मोहरा बहुत बदल चुकल बा। चीन पर पाकिस्तान के निर्भरता के आलम ई बा कि उ चीन में लाखों मुसलमान लोग पर हो रहल अत्याचार के लेके जुबान तक ना खोले। ओकरा भय सतावेला कि कहीं चीन ओकरा से नाराज ना हो जाय। पाकिस्तान के लम्बा समय से मुँहमांगी मदद देवे वाला सऊदी अरब अउर संयुक्त अरब अमीरात भी पाकिस्तान से दूरी बना लेले बा। पिछला साल जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस्लामाबाद के दौरा कइलन त संकट में फँसल पाकिस्तान के अर्थ व्यवस्था खातिर 20 अरब डॉलर के समझौता पर हस्ताक्षर भइल और अइसन लागल कि सऊदी अरब आ पाकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तन के नया आयाम मिल गइल बा। लेकिन हाले में दुनु देश में दूरी एही से भइल काहे कि सऊदी अरब कश्मीर के मसला पर पाकिस्तान के हिसाब से ना चलल। पाकिस्तान के उम्मीद रहे कि भारत जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जा खत्म कइलस त सऊदी अरब ओकरा साथ भारत के निंदा करी। लेकिन ई ना भइल। जबकि चीन ओकरा साथ रहे। एही से कहल जा रहल बा कि अगर अब भारत के चीन से युद्ध भइल त पाकिस्तान ओकरा साथ खुल के आ जाई। एह आशंका के आलोक में भारत के अपना रक्षा तैयारी के अउर चाक-चौबंद राखे के होई।

( लेखक वरिष्ठ सम्पादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं।)


Screenshot-254.png

Hum BhojpuriaAugust 28, 20201min15120

आर. के. सिन्हा

भारत के आईटी राजधानी बेंगलुरु के कुछ इलाका में एगो छोट बात के लेके जे तरे साम्प्रदायिक हिंसा भड़कावे के साजिश रचल गइल, ओकर दोषी बच के ना निकल सके, ई राज्य सरकार के सख्ती से सुनिश्चित करे के होई। ओ लोग पर कठोर से कठोर एक्शन हो ताकि आगे से अइसन दंगा-फसाद करे के संबंध में कोई सोच भी ना सके। बेंगलुरु के हिंसा में कुछ मासूमन के भी जान गइल, तमाम निर्दोष लोग घायल भइल अउर सरकारी संपत्ति के भारी नुकसान भइल। सबसे अहम बात ई बा कि दुनिया भर में ये हिंसा के गलत संदेश गइल।

बेंगलुरु में लाखों विदेशी पेशेवर लोग रहेला। जरा सोचीं कि उनके आ उनके परिवार के जेहन में के तेर के छवि बनल होई बेंगलुरु आ भारत के ये हिंसा के कारण।
बेंगलुरु जइसन आधुनिक महानगर में उपद्रवी लोग जगह-जगह गाड़ी के आग लगावल आ एटीएम तक में तोड़फोड़ कइल। ऊ लोग कांग्रेस के विधायक के घर पर हमला भी कइल। दरअसल बेंगलुरु में कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवासन मूर्ति के एक कथित रिश्तेदार पैगंबर मुहम्मद के लेके सोशल मीडिया पर कुछ अपमानजनक पोस्ट कइले रहलें, जेकरा प्रतिक्रिया में ही ई सुनियोजित हिंसा भइल। सवाल ई बा कि का अब भारत में कवनो भी मसला पर विरोध जतावे खातिर हिंसा के ही सहारा लेहल जाई? उपर्युक्त पोस्ट के लेके संबंधित व्यक्ति के खिलाफ उचित पुलिस एक्शन हो सकत रहे। केहू के भी कानून अपना हाथ में लेवे के अधिकार हरगिज़ नइखे।
बेंगलुरु के ताजा घटना से साफ बा कि देश मे धार्मिक कठमुल्लापन बहुत गम्भीर रूप लेले बा। अपना के कट्टर मुसलमान कहे वाला लोग बात-बात पर सड़क पर उतरे लागल बा। ई लोग अपना मजहब के नाम पर कट्टरता फइला रहल बा। एसे जाहिलपन बढ़ते जा रहल बा। इस्लामी कठमुल्लन के आचरण पर सेक्युलरवादियन के रहस्यमय चुप्पी भी डरावना बा। ई लोग अचानक अज्ञातवास में चल गइल बा। का कठमुल्ला लोग जे तरे से हिंसा कइल ओकर ये लोग के भर्त्सना ना करे के चाहत रहे? बेंगलुरु में कठमुल्ला लोग ए निंदा के नाम पर गरीब बस्तियन में मुसलमान लोग के उकसावल- भड़कावक। नतीजा ई भइल कि उन्मादी भीड़ जम के तोड़फोड़ कइलस। ई हिंसक उन्माद घण्टों चलल। पुलिस हस्तक्षेप कइलस त ओकरो पर भीड़ हमला बोल देहलस। हिंसक भीड़ के हमला में साठ पुलिस घायल हो गइलन। ई सही में बहुत बड़ा आंकड़ा बा।

जरा खाए-पीए-अघाए लिबरल लोग के जमात अब ई त बताओ कि ऊ लोग चुप्पी काहे साध लेले बा? ये तथाकथित बामपंथिन के चलते ओ समस्त लोग के शर्मिंदा होखे के परेला जे बहुसंख्यक आ अल्पसंख्यक फिरकापरस्तन अउर उनका साम्प्रदायिक सोच से लड़ेला। ई वर्ग ओ करोड़ों अल्पसंख्यक के सामने काँटा बिछावेला जे अपना बीच के उन्मादी आ जाहिल सब से लड़ रहल बा। बेशर्म बा ई लोग। ये लोग के ना शर्म बा, ना हया। याद रखीं तुष्टिकरण के राजनीति जल्द खत्म ना होई काहे कि कुछ स्वार्थी राजनेता लोग के एही में आपन भला नजर आवेला। जब तक कवनो कड़ा कानून ना आई आ तुष्टिकरण के खिलाफ सब विपक्षी पार्टी भी मुँह ना खोली तब तक ये बेंगलुरु जइसन हिंसक वारदात त होते रही।

देश में मुसलमानन के एगो वर्ग भी अब लगभग तालिबानी सोच रखे लागल बा। पिछले दिन राम मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर ई लोग खुल के कहत रहे कि हमनी समय अइला पर उहाँ पर फिर से मस्जिद बना लेम। जरा गौर करीं कि राम मंदिर बनल नइखे आ ओसे पहिले ई लोग मंदिर के तोड़े आ बम से उड़ावे के धमकी देवे लागल। का इहे लोकतंत्र ह? तथाकथित लुटियन गैंग अब काहे नइखे बोलत? अब लेखक वापस काहे नइखन करत आपन पुरस्कार आ कैंडल मार्च काहे नइखन निकालत? ई बेशर्म बुद्धिजीवी देश के सिर्फ अपमानित करे के काम में ही लागल रहेला? जवना थाली में खाईं ओही में छेद करीं। आखिर कब तक अइसन होत रही?
ध्यान दीं कि ई लोग दोसरा के आराध्य के अपमान करेला। काहे करे ला? ई उनकर समस्या ह। लेकिन ऊ लोग अपना रसूल के शान में गुस्ताखी ना बर्दाश्त करी। ऊ लोग गुस्ताख़े रसूल के एक सजा मुकर्रर कइले बा त ऊ देके रही लोग। ये जद्दोजहद में ऊ लोग आपन जान भी दे दी, जान ले भी ली। सरकार आ कानून उनका खातिर कवनो माने ना राखे। ऊ लोग अपना औलाद से भी ज्यादा अपना रसूल से प्रेम करेला। यदि ऊ केहू के प्रेम करत फूल भी पेश करी त कही कि अल्लाह आ उनके रसूल के बाद हम सबसे ज्यादा मुहब्बत तहरे से करीले। जेकरा ई सब शर्त पर ओ लोग से भाईचारा निभावे के बा निभाओ, नइखे निभावे के त मत निभाओ। उनका मीम भीम के परवाह नइखे। उनकर इमान ह कि इज्जत देवे वाला रब्बुल इज्जत ह ना कि बुतपरस्त कुफ्फार। ई लोग स्वस्थ आलोचना तक बर्दाश्त नइखे कर सकत। ई लोग कभी शिक्षा, रोजगार, मांगे त सड़क पर ना उतरी पर धर्म के नाम पर तुरंत आग लगा दी। का कवनो धर्म या मजहब एतना कमजोर हो सकsता, जवन सिर्फ आलोचना भर से ही खतरा में आ जाला।

खैर, जे केहू भी बेंगलुरु में हिंसा भड़कावल या ओमे भाग लेहल, ओ लोग के कवनो भी हालत में छोड़े के ना चाहीं। ओ लोग के सही पहचान कर के कठोर दण्ड मिलहीं के चाहीं। हिंसा के कारण देश के साफ छवि पर अकारण दाग लगा देहल गइल बा। ठोस सबूत मिल रहल बा कि बेंगलुरु में भड़कल हिंसा सुनियोजित साजिश के नतीजा रहे। वर्ना एतना बड़ पैमाना पर अचानक हिंसा भड़क ही ना सकत रहे। बेंगलुरु के जवना-जवना भाग में हिंसा भड़कल उहाँ सब धर्म के लोग मिल जुल के लम्बा समय से रहत चल आवत रहे। ये लोग में कवनो आपसी वैमनस्य दूर-दूर तक के ना रहे। पर अचानक से ये सौहार्द के वातावरण के केहू के नजर लाग गइल। बेशक ये हिंसा से एक बार त दहल ही गइल भारत के आईटी राजधानी। बेंगलुरु पुलिस के तारीफ करे के होई कि ऊ हिंसा के महानगर के बाकी भाग में फइले ना देहलस। ई पुलिस के भारी सफलता ही मानल जाई। अब दंगाई सबके तेजी से पहिचान करे के चाहीं ताकि ओ सबके सबक सिखावल जा सके।

( लेखक वरिष्ठ सम्पादक, स्तंभकार आ पूर्व सांसद हईं।)


img249.jpg

Hum BhojpuriaAugust 10, 20201min7300

  आर.के सिन्हा

अफगानिस्तान में राक्षसी प्रवृत्ति वाला तेजी से पनप रहल तालिबानियन के चंगुल से आजाद भइला के बाद सिख लोग के एगो जत्था दिल्ली पहुँच गइल बा। अब भारत के नागरिकता संसोधन कानून के तहत ए लोग के नागरिकता मिले में आसानी हो जाई। अफगानिस्तान में हिन्दू आ सिख के रहल अब अइसे भी नामुमकिन हो गइल बा। ए लोग पर तालिवानी गुंडा सब बेहिसाब जुलुम -सितम करते रहेला। ये लोग के इस्लाम स्वीकार करे खातिर प्रताड़ित करेला। ये लोग के कन्या सबके अपहरन क के जबर्दस्ती बियाह करा के इस्लाम कबूल करवावल जाला।

अफगानिस्तान में त अब हिंदू मंदिर सायदे कवनो बचल होखे। कुछ गुरुद्वारा जरूर बचल बा। उहवाँ आये दिन हिंदू आ सिख के कत्लेआम जारी बा। कुछ दशक के अंतराल के दौरान ही अफगानिस्तान तालिबान के बढ़त असर के कारन तबाह हो गइल। यकीन मानी कि ऊ पाकिस्तान के विपरीत एक सामान्य रूप से उदारवादी देस रहे। सत्तर के दशक तक त रेडियो काबुल से हिंदी भजन भी सुने के मिल जात रहे। ओ समय तकले अफगानिस्तान आ ईरान बहुत हद तक आधुनिक राष्ट्र रहे। आज जइसन भयानक मजहबी कट्टरता ये देसन में तब ना रहे। काबुल में त हिन्दू आ सिख भी अच्छा-भला रहे लोग। भले ही आबादी कम रहे पर ठीकठाक हालात में ही रहे लोग। ईरान त रज़ा पहलवी के शासनकाल में एकदम आधुनिक देस रहे। अफगानिस्तान में बादशाह ज़हीर शाह के अपदस्थ भइला के बाद उहवाँ कबो शान्ति अइबे ना कइल। कहल जाला नु कि अकबर के खानदान में कब कवनो औरंगजेब पैदा हो जाय, कहल नइखे जा सकत। वक़्त पलटल आ कट्टरता उदारवाद के परखच्चा उड़ा दिहलस। कबो औरंगजेब भारत में संगीत, साहित्य आ कला के बहुत गहिरा दफना देहले रहे। तालिबानी लोग ऊहे अफगानिस्तान में कइले बा।

राजधानी में पहिलहीं से सैकड़न अफगानी सिख लोग शरण लिहले बाड़न। ये सिख लोग के दिल्ली में एगो काबुली गुरुद्वारा भी बा। ये लोग के तुरंत ही इनका अफगानी वेशभूषा के चलते पहचानल जा सकsता। सबलोग सलवार-कमीज पहिरले रहेला। ई लोग आपस में पश्ता में ही बातचीत करत रहेला लोग। अफगानिस्तान में जब 1992 में रूस के समर्थ वाली सरकार गिरल आ देश में गृहयुद्ध छिड़ल त सैकड़न सिख जान बचाके भारत आ गइल रहे लोग। अफगागी सिख लोग चाहsता कि ओ लोग के जल्दी से जल्दी भारत के नागरिकता मिल जाय। केन्द्र में मोदी सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून पारित कइला के बाद ये लोग के उमेद बा कि ई लोग जल्दी ही भारत के नागरिक हो जाई। रउआ सब के राजधानी में गुरुद्वारा सीसगंज, गुरुद्वारा बंगला साहिब आ दोसरो प्रमुख गुरुद्वारा में अफगानी सिख मिल जाई लोग। एकरा से अच्छा कुछ नइखे हो सकत कि अफगानिस्तान के बचल सब हिन्दू-सिख भारत आ जाय। इहाँ ऊ लोग अपना जीवन के नया सिरा से शुरू करो। कारन कि देर सबेर ये लोग के अफगानिस्तान में त मारिए दियाई अगर ई लोग मुसलमान ना बनल। आखिर ये लोग के कसूर का बा। जब धरम के नाम पर देस के बंटवारा होइए गइल त धरम के आधार पर आबादी के लेन-देन में जे कोताही कइल आज ये प्रताड़ित हिन्दू-सिख लोग के श्राप ओ लोग के अउर ओ लोग के खानदान के लागी।

अफगानिस्तान जइसन पाकिस्तान में भी सिख लोग के कत्लेआम भइल अब आम बात हो गइल बा। ये लोग के कत्लेआम के बाद कुछ दिन ले प्रायोजित चउतरफा निंदा के बाद सब कुछ सामान्य हो जाला। पाकिस्तान में पेशावर से लेके लाहौर तक के सब शहरन में सिख लोग पर आए दिन हमला होते रहेला। ये लोग के धार्मिक स्थल के  निशाना बनावल जाला। सही में पाकिस्तान आ अफगानिस्तान में हिन्दू अउर सिख खातिर कवनो जगह नइखे रह गइल। पाकिस्तान में कुछ ही दिन पहिले हजारन बरिस पुरान भगवान बुद्ध के मूर्ति तोड़ दिहल गइल। पाकिस्तान के उत्तरी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मरदान के तख्तबाई इलाका में एगो प्राचीन अउर विशाल बुद्ध मूर्ति के नष्ट कइल सही में बेहद कष्टकारी रहे। ई मूर्ति 1700 साल पुरान रहे आ गान्धार सभ्यता से ताल्लुक रखत रहे। समझ में ई ना आइल कि बुद्ध के मूर्ति तूर के ये जालिम सब के का मिलल। एकरा से पहिले पाकिस्तान के कब्जा वाला कश्मीर में बुद्ध से जुड़ल आर्किलॉजिकल साइट पर भी तोड़फोड़ के मामला सामने आइल रहे।

 

तालिबान ही बामियान के मशहूर बुद्ध प्रतिमा में विस्फोटक लगावे के हुक्म देले रहे। तब तक बामियान के बुद्ध के ऊ बलुआ पत्थर से बनल प्राचीन प्रतिमा विश्व भर में सबसे ऊँचा बुद्ध के मूर्ति मानल जात रहे। जब बुद्ध के ओ प्रतिमा के अनादर होत रहे तबे समझ में आ गइल रहे कि आवे वाला समय में अफगानिस्तान कवना रास्ता पर चली। ओ बुद्ध प्रतिमा पर टैंक आ गोलियन से हमला कइल गइल रहे। ओकरा बाद ओके नष्ट करे के वास्ते ओहिमे विस्फोटक लगावल रहे। जरा समझ लीं केतना जालिम बाड़े ई दुष्ट तालिवानी। ई कहे के ना होई कि अइसन अंधकार युग में जीये वाला देस में गैर-मुसलमान लोग वास्ते कवनो जगह होइए नइखे सकत। एसे ओ लोग के उहाँ से निकल ही जाय के चाहीं। ओ लोग के लिए भारत के अलावे दोसर कवनो देस बचलो नइखे। ये बीचे पाकिस्तान अपना पिछला जनगणना में भी सिख लोग के साथ घोर भेदभाव कइले रहे। ई जनगणना 2018 में भइल रहे। सिख लोग के त जनगणना फारम में जिकरे ना रहे। ओ लोग के एक तरह से अन्य के कैटेगरी में धकेल दिहल गइल रहे। एकरा विरोध में पेशावर के सिख लोग प्रदर्शन कइल त ओ लोग के न्याय देवे के जगह हर तरह से प्रताड़ित कइल गइल।

रउआ लोगिन के इयादे होई, ये साल के शुरू में पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर हमला भइल रहे। गुरुनानक के जन्मस्थली ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर भइल हमला के बाद भारत में सिख लोग आपन कड़ा विरोध जतवले रहे लोग। केतने सिख समूह ये हमला के खिलाफ पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने विरोध प्रदर्शन भी कइले रहे। ननकाना साहिब हमला 1955 के भारत-पाकिस्तान समझौता के उल्लंघन रहे, जेकरा तहत भारत आ पाकिस्तान के ई सुनिश्चित करे के रहे कि ऊ लोग हर संभव प्रयास करी ताकि अइसन पूजा स्थल के पवित्रता के संरक्षित रख सके, जेमे दुनु देस के लोग जाला।

का रउआ सबन यकीन करेम कि ननकाना साहिब के अधिकांश होटल में सिख लोग के अलग बर्तन में भोजन परोसल जाला। कहे के मतलब ई बा कि अबो अफगानिस्तान आ पाकिस्तान के सिख लोग के भारत के रुख कर लेवे के चाहीं। अगर ऊ लोग देरी करी त जान तक जा सकsता।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं )



About us

भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


Contact us



Newsletter

Your Name (required)

Your Email (required)

Subject

Your Message