जल अउर जंगल से ही बची जिनगी

February 24, 2020
सुनीं सभे
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लेखक:रवीन्द्र किशोर सिन्हा

 

देशभर में व्याप्त चौतरफा नकारात्मक वातावरण से हट के, बिहारजल जीवन हरियालीके अहम जरूरत पऽ  एगो महत्त्वपूर्ण अभियान शुरू क के, देश के निश्चय ही एगो नया दिशा देखावे के सकारात्मक प्रयास कइले बा।

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जलवायु परिवर्तन के मुद्दा पऽ सार्थक पहल क के देश आ दुनिया के सामने, बिहार एगो नजीर पेश कइले बा। एकरा में दू राय नइखे कि अब अइसन स्थिति बनत जा रहल बा कि जल, जीवन आ हरियाली के संरक्षण से जुड़ल कार्यक्रम सभ देश में चलावे के पड़ी। एकरा में समाज आ सरकार के मिल-जुल के प्रयास करे के होई। हमनी के ओह तालाबन के फेर से जियावे के पड़ी जवन विकास के दौड़ में दफन हो गइल भा धनलिप्सा के वजह से अतिक्रमित क लिहल गइल। दिल्ली के ही बात कइल जाय त जब देश आजाद भइल रहे, ओह समय दिल्ली में 363 गो गांव रहे, जवना के आस-पास में 1012 गो तालाब रहे। आबादी बढ़ला अउर दिल्ली के विकास के संगही कुछ

गिनल-चुनल तालाबन के छोड़ के बाकी खतम हो गइल। कई गो तालाब पऽ त आलीशान कॉलोनी बस गइल। जवन तालाब आज के दिन बचलो बा, ओकरा में जादातर, लगभग सूख चुकल बा। का ई केहू से बतावे के जरूरत बा कि जल बा तबे कल (काल्ह) बा? अगर हमनी के शहरन में बारिश के पानी के सही तरीका से संचित कइल जाय त पेयजल के मसला हल हो सकत बा। हमनी के आपन आवे वाली पीढ़ी खातिर एगो हरियरी से भरल-पूरल धरती सौंपे के होई ताकि पृथ्वी पऽ जिनगी के ई क्रम जारी रहे। बाकिर अबहीं तऽ स्थिति बहुते भयावह हो गइल बा। सवाल ई बा कि हमनी के जल संरक्षण खातिर आखिर करत का बानी जा?  बिहार में जल जीवन हरियाली अभियान के बहाने ई सवाल तऽ पूछहीं के चाहीं। एह सवाल के उत्तर बा- ‘कुछ ना। बस तनी-मनी सांकेतिक प्रयास।’ का होखे वाला बा एह सांकेतिक प्रयासन से?

जवन जल, प्रकृति, सुन्दर वन-उपवन आ हरियाली से भरल-पूरल ई वसुंधरा हमनी के आपन पुरखा-पुरनिया लोग देले बा, आज हमनी के ओह सब के अंधाधुंध दोहन आ दुरुपयोग क के, आवे वाली पीढि़यन के जीए के हक छीन रहल बानी जा। ओह लोगन खातिर हमनी के केतना खराब संसार देके जाइब जा। तनी सोच के देखीं, राउर रूह कांप जाई।

दुनिया भर में पेयजल के कमी अब एगो गम्भीर संकट बन चुकल बा। एकर कारण बा पृथ्वी के जलस्तर के लगातार नीचे खिसकल। वर्षा जल संचयन के एगो बहुत प्रचलित पारंपरिक माध्यम बा ‘ट्रेंच’। एकरा तहत छोट-छोट नाली, पइन आ आहर बनाके बारिश के पानी संरक्षित कइल जाला। पोखर-तालाब तऽ बड़ले बा। जल ही हमनी के जिनगी के आधार बा। जल के बिना धरती प जिनगी के कल्पना नइखे कइल जा सकत। हमनी के रोटी, कपड़ा आ मकान के बिना भी कुछ दिन जी सकत बानी जा बाकिर, शुद्ध हवा आ शुद्ध पानी के बिना त एकदम ना। एही से त सुप्रसिद्ध कवि रहीम खानखाना कहले बाड़न – ‘रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून। पानी गये न उबरै, मोती मानुष चून।’  कहे के ना होई कि अगर जल ना रहित त सृष्टि के निर्माणो संभव ना हो पाइत।

आजुओ जब हमनी के चांद अउर मंगल पऽ बसे के बात करेनी जा तऽ सबसे पहिले का ढूंढेनी जा? पानीए नू?  इहे कारण बा कि जल एगो अइसन प्राकृतिक संसाधन बा जवना के कवनो मोल नइखे। जिनगी खातिर जल के महत्त्व के एही से बूझल जा सकत बा कि तमाम बड़-बड़ सभ्यता नदियन के तट पर ही फरल-फुलाइल बा आ अधिकांश प्राचीन नगरो नदियन के तटे प बसल बा। जल के महत्त्व के ध्यान में राखके ई बहुते जरूरी बा कि हमनी के ना सिर्फ जल के संरक्षण करीं जा बलुक ओकरा के प्रदूषित होखला से भी बचाई जा। एह संबंध में भारत में जल संरक्षण के एगो समृद्ध परंपरा रहल बा। ऋ ग्वेद में जल के अमृत के समतुल्य बतावत कहल गइल बा- ”अप्सु अन्त: अमृतं अप्सु भेषनं।”

एगो वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक 2030 ले देश के लगभग 40 प्रतिशत लोग तक पीए के पानी के पहुंच खतम हो जाई। चेन्नई में आवे वाला कुछ बरिस में ही तीन गो नदी, चार गो जल स्रोत, पांच गो झील अउर छव गो जंगल पूरा तरह से सूख जाई। अइसन नइखे कि ई हाल खाली एही जगहा होई, देश के बाकी जगहो पऽ एह स्थिति से गुजरे के पड़ी। अइसनो नइखे कि ई रपट पहिला हाली आइल बा। तीन बरिस पहिलहूं नीति आयोग आपन एगो रपट में बतवले रहे कि देश में जल संरक्षण के लेके अधिकांश राज्यन के काम संतोषजनक नइखे। एगो महत्त्वपूर्ण बात इहो बा कि हाल के बरिसन में गांव-देहात में भी जल संकट बढ़ल बा। आज के समय में भी भारत के करोड़ो लोग के साफ पानी खातिर छछने के पड़त बा। वर्तमान में देश के आबादी हर साल 1.5 प्रतिशत बढ़ रहल बा। आशंका जतावल गइल बा कि बरिस 2050 ले भारत के जनसंख्या 150 से 180 करोड़ के बीच पहुंच जाई। अइसे में सभ नागरिकन खातिर देश के हर क्षेत्र में जल के उपलब्धता के सुनिश्चित कइल आसान ना होई। जल के स्रोत तऽ सीमित बा आ रहबो करी। नया स्रोत पैदा होखबो ना करी! अइसे में उपलब्ध जलस्रोतन के संरक्षित राख के आ बरसात के पानी के पूरा तरह से संचय कर के ही हमनी के एह जल संकट के मुकाबला क सकत बानी जा। जल के उपयोग में मितव्ययी भी बने के पड़ी। जलीय कुप्रबंधन के दूर क के ही हमनी के एह समस्या से निपट सकत बानी जा। जदि वर्षा जल के समुचित संग्रह हो सके आ जल के एक-एक बूंद के अनमोल मान के ओकर संरक्षण कइल जाय तऽ कवनो कारण नइखे कि जल संकट के समाधान ना प्राप्त कइल जा सके।

जल के संकट से निपटे खातिर तत्काल कुछ महत्त्वपूर्ण कदम उठावे के पड़ी।

जइसे कि अलग-अलग फसलन खातिर पानी के कम खपत वाला आ अधिक पैदावार वाला बीजन खातिर अनुसंधान के बढ़ावा दिहल जाए के चाहीं। रासायनिक उर्वरक आ कीटनाशक जवना के उपयोग, जादा जल के मांग करेला, ओकरा स्थान पर देशी गौवंश के गोबर आ गौ-मूत्र पऽ आधारित खाद आ कीटनाशकन के बढ़ावा देवे के होई। ताकि जहरमुक्त आहार के पैदावार बढ़े आ धरती प मित्र जीवाणु आ केंचुअन के बढ़ोतरी होखे जवना से पानी के खपत कम होखे। फ्लड सिंचाई पद्धति से स्प्रिंकलर सिंचाई भा ड्रिप सिंचाई अपनावे के होई।

एगो महत्त्वपूर्ण बात अउर कि जहवां तक संभव हो सके अइसन खाद्य उत्पादन के प्रयोग करे के चाहीं, जवना में पानी कम प्रयोग होत होखे। मल्टी लेयर फार्मिंग कइयो के एकही भू-भाग पऽ एकही समय पांच गो भा छव गो फसल लिहल जा सकत बा। एह में पानी के खपत त ओतने होई जेतना एगो फसल के जरूरत होखेला, बाकिर उत्पाद के संख्या पांच चाहे छव हो जाई। उत्पादन पांच गुना आ जल के प्रयोग बीस प्रतिशत। किसान सभ के मेहनत ओतने बाकिर लाभ पांच गुना। किसान भाई लोग के ई जानल जरूरी बा कि फसल के अच्छा उत्पादन खातिर जल के जरूरत ना होखेला, बलुक फसल के अपना जड़ के आसपास नमी मात्र के जरूरत होखेला, जवना के सहारे ऊ आपन भोजन माटी में ही उपलब्ध उर्वरक आ लवण के रूप में खींच सको।  बस अतने भर होखेला सिंचाई के भूमिका। सिंचाई के नाम पऽ जल के बर्बादी में कमी ले आवल एही से जरूरी बा।

रउआ ई जान के अचरज होई कि दुनिया में उत्पादित होखे वाला लगभग 30 प्रतिशत अन्न खाइले ना जाला अउर ई बेकार हो जाला। एह तरे देखल जाव तऽ एकरा उत्पादन में उपयोग भइल पानियो व्यर्थ हो जाला। जानकार लोग त इहो कहेला कि वर्षा जल प्रबंधन अउर मानसून प्रबंधन के समुचित बढ़ावा दिहल जाय  अउर एकरा से जुड़ल शोध कार्यन के प्रोत्साहित कइल जाए।

जल संरक्षण के पढ़ाई के अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम में जगह दिहल जाय, जवन आज के एगो महत्त्वपूर्ण जरूरत बा।

बहरहाल, देश के ‘जल जीवन हरियाली’ के माध्यम से बिहार जवन दिशा देखवले बा, ओकरा से देश के जागरूक करे के दिशा में बहुत लाभ होई।

(लेखक राज्य सभा सदस्य आ हिन्दुस्थान न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष हईं)

 

 

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