ई भारत देश महान हवे

October 12, 2021
कविता
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आकाश महेशपुरी

युग युग से भारत के महिमा

गावत ई सकल जहान हवे

ई भारत देश महान हवे

 

पूरा भारत घर आपन हऽ

घर में सबके आराम मिले

एही घरवा में मिले हवा

भोजन पानी अविराम मिले

बा जनम मिलल ये धरती पर

ई धरती सबकर जान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

 

ना मनइन में बा भेद इहाँ

जइसे कुरान बा वेद इहाँ

जे जाति-धरम में बांटेला

दीहल जाला ऊ खेद इहाँ

मिल-जुल के सभे रहे हरदम

भाईचारा पहिचान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

बा ताजमहल आ लालकिला

एलोरा आ जंतर मंतर

बा किसिम किसिम के भारत में

मंदिर मस्जिद आ गिरिजाघर

युग युग ले नूर रही एकर

जइसे सूरज आ चान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

 

सागर शीतलता दे ताटे

आ माथे सजल हिमालय बा

नदिया, झरना बा हरियाली

दुनिया तऽ एकर कायल बा

ई कोयल के हऽ मधुर गीत

आ कलियन के मुस्कान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

गांधी, गौतम, अब्दुल कलाम

बा कृष्ण राम के नाम इहाँ

नानक आ महावीर स्वामी

कइले बालो सदकाम इहाँ

ई धरती सूर कबीरा के

आ तानसेन के तान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

जे जहवे बा ऊ तहवे से

लागल बा देश सजावे में

वैज्ञानिक खोजे में लागल

अभियंता देश बनावे में

सैनिक सीमा पर पहरा दे

खेती में डटल किसान हवे-

ई भारत देश महान हवे

 

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