भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ युगांडा

भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ युगांडा

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Posted: December 20, 2021
Category: आवरण कथा
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मनोज भावुक

भूमध्य रेखा पर बसल पूर्वी अफ्रिका के एगो छोट देश युगाण्डा (UGANDA ) अपना पूर्व राष्ट्रपति इदी अमीन के क्रूर, खौफनाक, तानाशाही आ आदमखोर चरित्र के चलते विश्व के मानस पटल पर ओही तरे छा गइल, जइसे हिटलर के चलते जर्मनी आ ओसामा बिन लादेन के चलते अफगानिस्तान।

इदी अमीन के चलते युगाण्डा के छवि पर जवन दाग लागल वर्तमान राष्ट्रपति वाई. के. मुसेवनी अपना उदार स्वभाव आ दूरदर्शी व्यक्तित्व से काफी हद तक ओकरा के धो देले बाड़न, जवना के सुफल बा कि विश्व के तमाम देशन के लोग, जवना में भारत सबसे आगे बा, आपन बिजनेस आ इण्डस्ट्री लगाके बहुत शांति आ सुकून के जिन्दगी जी रहल बा।  हमरा ई कहे में तनिको गुरेज नइखे कि युगाण्डा में एगो छोट गुजरात बसल बा। सब कइल-धइल ओही लोग के ह। उहे लोग सबसे पहिले आइल इहाँ। बाद में तमिल आ तेलुगु भाषी लोग भी पसर गइल। अब त राजस्थानी, पंजाबी, मराठी आ मलयालयी लोग भी नीमन संख्या में बा। बस, मुठ्टीभर अगर केहू बा त ऊ भोजपुरिया लोग (उत्तर-प्रदेश आ बिहार के लोग)। एह लोग के खोजल मरूथल में पानी खोजला लेखा बा। ‘ईद के चाँद’ लेखा कौनो खासे मौका पर एह लोग के दीदार होला। मंदिर में, क्लब में या कवनो सभा समारोह मे एह लोग (भोजपुरिया लोग) के पहचानलो  मुश्किल बा। दोसरा कवनो भाषा के लोग के आप आसानी से पहचान लेब, बाकिर इहाँ भोजपुरिहा के खोजल अन्हार मे सूई खोजला लेखा बा। दूगो मराठी, दूगो बंगाली, दूगो पंजाबी या दूगो गुजराती होइहें त ऊ अपना-अपना भाषा में बतिअइहें, खट से पहचान हो जाई। बाकिर दूगो भोजपुरिहा होइहें त या त हिन्दी बोलिहें या अंगरेजी छटिहें। रउरा पासे में खड़ा रहिहें बाकिर रउरा  हवा ना लागी कि ई हमरा घर के सवाँग हउएँ। ‘लगही पियवा परिचय नाहीं’। हिन्दी त हिन्दुस्तान के हरके राज्य के लोग बोलेला, एह से ई कहल मुश्किल बा कि पास में खड़ा आदमी जे हिन्दी में बतिया रहल बा, उत्तर प्रदेश या बिहारे के होई। अइसना में भोजपुरी एसोसिएसन के बारे में सोचल पागलपने होई। बाकिर बिना पागलपन के कवनो चुनौती भरल काम होखबो ना करे।

आज से साल भर पहिले ठीक 21 अगस्त के ऑल इण्डिया एसोसियसन ऑफ युगाण्डा के तत्वाधान में ‘स्वतंत्रता दिवस’ पर एगो सांस्कृतिक कार्यक्रम (INDIA DAY CELEBRATIONS-2004 ) होत रहे। दर्शकदीर्घा में हमहूँ रहनी। केरला समाज, मराठा मण्डल, राजस्थानी ग्रुप, पंजाबी समाज सभे अपना-अपना क्षेत्र के लोकगीत, लोकनृत्य प्रस्तुत कइलस। हमरा मन में टीस उठल कि का उत्तर-प्रदेश आ बिहार से केहू फगुओ गावे वाला नइखे। हमनी के एतना कंगाल बानी जा कि हमनी के पास देखावे खातिर कुछुओ नइखे?  हमनी के पास आपन कल्चर नइखे कि गीत-संगीत नइखे? आ जब सब बा त हम इहाँ का करत बानी?….हमरा भीतर के भोजपुरी के कीड़ा काटे लागल हमरा के। …. साँच पूछीं त ओही समय हमरा  मन के भीतर  Bhojpuri Association of Uganda  के बीजारोपण हो गइल।….. आ फेर तलाश शुरू हो गइल युगाण्डा में भोजपुरियन के। नगरे-नगरे, द्वारे-द्वारे। बाकिर हमरा कवनो खास सफलता ना मिलल। …..हँ, एने मई महिना में कुछ भोजपुरिया परिवार समेत कम्पाला के सुप्रसिद्ध( S.D.M. Temple) हनुमान मन्दिर में एक-दूसरा से मिलल जरूर रहलें आ हमरा विचार के कुछ बल मिलल रहे।  तबो हम भीतर से सशंकित रहनी।

हमरा सपना के ठोस धरातल मिलल आजमगढ़ के रहनिहार बाबू अजय सिंह से मुलाकात के बाद। अजय बाबू बहुते मिलनसार आ सामाजिक आदमी। ऊ कहलें कि ‘बाबू साहेब अब हमनी के एक से दू हो गइनी जा, ई काम जरूर होई।   2  जुलाई के रात हमनी दूनू आदमी भोजपुरिहा लोगन के एगो लिस्ट बनइनी जा। संस्था के नाम ( जवन कि हम अपना मन में पहिलहीं से सोच के रखले रहनी) धराइल- भोजपुरी एसोसियसन ऑफ युगाण्डा (BAU)।  BAU के पहिला मेम्बर हम (मनोज ‘भावुक’) बननी। दूसरा अजय सिंह। तीसरा हमार पत्नी अनिता सिंह आ चउथा अजय बाबू के पत्नी संध्या सिंह।   ऊ एसोसियसन के पहिला मीटिंग रहे। स्थापना समारोह खातिर भोजपुरियन के खोज-बीन शुरू हो गइल।

संयोग देखीं आज से साल भर पहिले जवना तारीख के ( 21 August ) INDIA DAY CELEBRATION- 2004 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भोजपुरियन के भागीदारी ना रहला से हमरा मन में टीस उठल आ ओह टीस से  (BAU) के स्थापना के बीजरोपण भइल, ठीक ओही तारीख के यानी 21 अगस्त 2005 के BAU के स्थापना के घोषण हो गइल।

21 अगस्त 2005 दिन रविवार, कोलोलो, युगाण्डा में ‘भोजपुरी एसोसियसन ऑफ युगाण्डा के ‘स्थापना समारोह’  के अवसर पर उमड़ल भीड़ देख के हमार आँख छलक गइल। ढेर लोग के जुबान पर इहे बात रहे कि ‘ हम त जानत रहनी ह कि इहाँ हमहीं अकेले भोजपुरिहा बानी’।    समारोह में कुल 41 आदमी शिरकत कइलें। 10-12 आदमी फोन कइल कि आज हमार ड्यूटी बा, बहुत जरूरी काम पेण्डिग बा। हम आ ना सकब, एकर अफसोस बा, बाकिर हम मन से कार्यक्रम मे शामिल बानी। घरी-घरी ऊ लोग पूछे कि अभी का चल रहल बा। केतना लोग आइल बा। कहाँ-कहाँ से लोग जुटल बा। हमरा जिला के केहू बा कि ना?  कुछ लोग ड्यूटी छोड़ के भाग आइल। कुछ लोग नाइट ड्यूटी कइले रहे, आँख लाल रहे, तबो आइल रहे। कार्यक्रम के शुरू होखे से पहिलहीं पीट-पीट के बरखा होखे लागल शायद भोजपुरियन के ई प्रेम, उत्साह आ उमंग देख के भगवानो के आँख झरे लागल। भोजपुरिया जवान बरखा-बूनी के परवाह ना कइलें। भींज-भींज के लोग-बाग आइल।   समारोह में शामिल 41 आदमी हमरा खातिर 41लाख आदमी रहलें। हम खुशी से पागल रहनी। 41 में एगो भाई उतरांचल के, एगो मिथिलांचल के आ एगो कानपुर के रहलें। शेष 38 खाँटी भोजपुरिया, जवना में सात जानी भउजाई रहली आ एगो हमार पत्नी। यानी 8 गो मेहरारू आ 30 गो मरदाना। अभी हम बाल-बच्चा के गिनबे ना कइली ह। एहू लोग के संख्या आधा दर्जन से कम ना रहे।   कार्यक्रम के शुरूआते मे हम कहनीं कि आज त मन करता कि भाई लोग फागुवा-चइता गावे आ भउजाई लोग कजरी-झूमर। सभे ठठा के हँसल। हँसी के एह फुलझड़ी से कार्यक्रम के शुरूआत हो गइल। दोपहर के एक बजत रहे। लंच के टाइम रहे। भोजन समारोह से कार्यक्रम के शुरूआत भइल। खा-पी के सभे आपन-आपन सीट धके जमके बइठ गइल। सभे चकचिहाइल रहे कि अब का होई?  एह युगाण्डा के धरती पर ई कवन करिश्मा हो रहल बा। भोजपुरियन के मिलन हो रहल बा। ई मिलन समारोह ह। अंग्रेजी में कादो एकरे के गेट-टुगेदर कहल जाला। बाकिर हम सोच लेले रहनी कि हम एकरा के खाली गेट-टुगेदर ना रहे देब। एकरा के एगो यादगार समारोह बनाएब। जे मिलल बा ओकरा के बिछड़े ना देब। सब कोई बकायदे फार्म भरके सदस्य बनल, सदस्यता शुल्क जमा कइलस यानी कि संस्था के फाइल में सबकर नाम, पता, गाँव,जिला, फोन, ई-मेल दर्ज हो गइल। अब केहू कहाँ जाई आ जाये खातिर ई संस्था थोडे बनता। इ त आवे खातिर बनत बा। आवत जाईं जुटत जाईं…. दोसरों के जोड़त जाईं। ई त युगाण्डा के भोजपुरियन खातिर एगो कामन प्लेटफार्म बनत बा, जवना के सख्त जरूरत रहल ह।

घीव के दीया जराके भगवान के पूजन भइल आ ठीक दू बजे महफिल पर भोजपुरिया रंग चढ़े लागल। सभा के संचालन मनोज ‘भावुक’ स्वागत भाषण शुरू कइलें। (BAU) यानी कि ‘भोजपुरी एसोसिएसन आफ युगाण्डा’  के स्थापना खातिर मन मे परल बीज के अँखफोर होखे के कहानी सुनवलें। सबके हार्दिक स्वागत कइलें आ फेर आज के कार्यक्रम के अध्यक्षता खातिर Mukwano group of companies  के जनरल मैंनेजर आजमगढ़ के रहनिहार श्री वी.पी.त्रीपाठी आ मुख्य अतिथि के रूप में  Polysac Industry के मैंनेजर श्री  अखिलेश मिश्रा के मंच पर आमंत्रित कइलें। एकरा बाद अजय सिंह सभा में आइल सब भोजपुरियन के एक-दोसरा से परिचय करवलें। लोग जान गइल कि के कवना जिला से आइल बा, कवना कम्पनी में आ कवना पोस्ट पर काम करेला वगैरह-वगैरह आ फेर ऊ मंच मनोज ‘भावुक’ के सुपुर्द कर देले। एकरा बाद ‘भावुक’ के लमहर भाषण भइल।  ‘भावुक बतवलें कि (BAU) के स्थापना के का जरूरत बा।


  1. कॉमन प्लेटफार्म

  2. ऑल इण्डिया एसोसियसन ऑफ युगाण्डा के कार्यक्रम में भोजपुरियन के उपस्थिति।

  3. तीज त्यौहार पर एकजुट होके गावल-बजावल, मिलल-जुलल।

  4. विश्व के तमाम देशन मे बनल भोजपुरी संगठन से जुड़ल। सूचना, योजना, विचार आदि के आदान-प्रदान।

  5. विश्वजाल(internet) पर फइलल भोजपुरी में युगाण्डा के भी एगो अध्याय जोड़ल।

  6. भोजपुरी के पत्र-पत्रिकन से जुड़ल आ जोड़ल। (हरेक भोजपुरिया के कम से कम एगो भोजपुरी पत्रिका, खरीद के मंगावे के चाहीं, पढ़े के चाहीं आ चिट्ठी-पत्री करेके चाहीं। एह से ज्ञान आ मनोरंजन के अलावा भोजपुरी पत्रकारिता के बल मिली, भोजपुरी के प्रचार-प्रसार होई)।


भोजपुरी साहित्य के चर्चा करत ‘भावुक’ कहलें कि भोजपुरी क्षेत्र के दिग्गज साहित्यकार लोग माई के फाड़ में से निकाल-निकाल मउसी के आँचर भरत रहल लोग। एकरा के अइसे समझीं कि ऊ लोग यशोदा मइया( हिन्दी) के सेवा में अइसे अझुराइल लोग कि देवकी मइया( भोजपुरी) एकदम से बिसर गइली। ना त आज भोजपुरी के कुछ दोसरे तस्वीर रहित। एकरा बावजूद भोजपुरी में जवन साहित्य-सृजन हो रहल बा, ओकरा के लेके हमनी कवनो भाषा के समकक्ष खड़ा होखे में समर्थ बानी। हिन्दी खातिर जौन हमनी के कुर्बानी देहनी जा आ दे रहल बानी जा, ओकर कवनो अफसोस नइखे। ओकरा खातिर हमनी के छाती उतान बा। बाकिर मातृभाषा के भूलल-बिसरावल या ओकरा प्रति ना सोचल शर्म के बात बा। मातृभाषा महतारी लेखा होले आ महतारी के स्थान देवता-पीतर से ऊपर बा। पहिले घर में दीया बार के मन्दिर में दीया जराईं। घर में अन्हार रही त ओह में दलिदर घुस जाई। भाई हो एही दलिदर ले भगावे के बा। एकरे खातिर (BAU) के स्थापना कइल जा रहल बा।  भोजपुरी देश-विदेश पर चर्चा के अंतर्गत खास क के दूगो देश मारिशस आ गुयाना में भोजपुरियन के स्थिति पर बड़ी विस्तार से चर्चा भइल।  मारिशस के नाम ‘मारिच द्वीप’ कइसे पड़ल। इहाँ भोजपुरिया कइसे अइलें। 12 लाख आबादी वाला मारिशस में आठ,साढ़े आठ लाख आबादी वाला भोजपुरी भाषा के आज का स्थिति बा। भोजपुरी बहार (मारिशस टी.वी के कार्यक्रम ), मारिशस में भोजपुरी के किताब, नाटक प्रतियोगिता आदि पर रोचक ढंग से चर्चा करत सरिता बुधु (महात्मा गाँधी संस्थान), श्रीमती सुचिता रामदीन, श्रीमती सीतारामयाद आ श्री दीमलाला मोहित आदि के योगदान के भी चर्चा भइल।  एह तरे गुयाना के राष्ट्रपति भरत जगदेव जे कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हउवन, के चर्चा करत बतावल गइल कि केह तरे  169 साल पहिले गुयाना पहुँचल गिरमीटिया शासन-सत्ता पर आपन कब्जा जमा लेले बाड़न।  भोजपुरी के पढ़ाई-लिखाई के बारे में बात-चीत करत मनोज ‘भावुक’  कहलें कि भोजपुरी अब इनार-पोखरा, खेत-खलिहान आ बँसवारी-घोंसारी से यूनिवर्सिटी आ पार्लियामेंट तक में पहुँच गइल बिया। एह में एम.ए. आ पी.एच.डी. हो रहल बा। लगभग हरेक विधा-कविता, कहानी, नाटक, उपन्यास, यात्रा वृतांत, गजल, संस्मरण, व्याकरण, शब्दकोष, मुहावरा-कोष आदि पर उच्च श्रेणी के किताब उपलब्ध बा। भोजपुरी के आठवीं अनुसुची में शामिल करे खातिर संसद में माँग उठावल गइल बा। इहो दुनिया के एगो अचरज बा कि एगो भाषा (भोजपुरी) दुनिया के 14 गो देश में 16 करोड़ लोग बोलेला, तबो एकरा के 8 वीं अनुसुची में शामिल नइखे कइल गइल।   भोजपुरी पत्रकरिता के चर्चा कई बेर भइल। एह बात पर बहुत जोर देहल गइल कि हरेक भोजपुरिया के ई नैतिक जिम्मेवारी बा कि उ कम से कम एगो भोजपुरी पत्रिका खरीद के जरूर पढ़ो। भोजपुरी के लगभग सब महत्त्वपूर्ण पत्रिकन के चर्चा भइल आ साथही विश्व भोजपुरी सम्मेलन, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पश्चिम बंग भोजपुरी परिषद, भोजपुरी संस्थान, रंगश्री आदि भोजपुरी के कई गो महत्त्वपूर्ण संस्थान के योगदान पर भी मनोज भावुक प्रकाश डललन।   एकरा बाद चर्चा भइल इलेक्ट्रानिक मीडिया के- भोजपुरी के कैसेट, भोजपुरी सिनेमा, धारावाहिक आ टेलिफिल्म के।   ‘भावुक’ कहले कि भोजपुरी के बर्बाद करे में भोजपुरी के अलूल-जलूल कैसेटन के सबसे बड़ हाथ बा। एह कुकुरमुत्ता नियर फइलत भकचोन्हर गीतकारन के बियाइल कैसेटन में लंगटे होके नाचत बिया भोजपुरी संस्कृति। एहनिये के चलते भोजपुरी के नाम पर लोग नाक-भौंह सिकोड़ेला। एह पर रोक लागल जरूरी बा, आ साथ ही जबाब में भोजपुरी के उच्च श्रेणी के गीत जवना में भोजपुरिया संस्कृति के दुलहिन सज-धज के आवस आ सबकर मन मोह लेस, अइसन गीतन के कैसेट बाजार में आवे के चाहीं।  भोजपुरी सिनेमा पर चर्चा करत ‘भावुक’ जानकारी दिहलें कि भोजपुरी सिनेमा के विकास-यात्रा’ नामक उनकर एगो शोध-पुस्तक बा, जवना में लगभग दौ सौ (200) भोजपुरी फिल्म के कथा, गीत-संगीत, कलाकार आदि के डिटेल्स बा, साथ ही भोजपुरी सिनेमा के इतिहास, भोजपुरी धारावाहिक, टेलीफिल्म आ सुप्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक-अभिनेता जइसे कि अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, राकेश पाण्डेय, कुणाल सिहं, निर्माता मोहन जी प्रसाद, अशोक जैन, विनय सिन्हा, आदि के साक्षात्कार भी शामिल बा।  साथ ही एह घरी के कुछ नया फिल्मन के चर्चा भइल जइसे कि ‘पण्डी जी बताई ना बियाह कब होई’। ई फिल्म एह घरी पश्चिम बंगाल में खूबे धूम मचवले बा।  के डी एम प्रोडक्शन के शिवम श्याम त्रिपाठी के फिल्म ‘दुलहिनिया चलल ससुराल’ में हिन्दी मूवी के मशहूर हिरोइन जूही चावला एगो विधवा के रोल में बाड़ी। ‘पण्डीजी बताई ना बियाह कब होई’ में भी हिन्दी हिरोइन नगमा काम कर रहल बाड़ी।   बिग बी के भी एगो भोजपुरी फिल्म में आवे के खबर सुनाता।   एकरा अलावा ‘नइहर के चुनरी’ पिया के साड़ी’ जवना के शूटिंग बलिया में भइल आ श्री उमेश कुमार सिंह (नई दिल्ली) के देख-रेख में निर्माणाधीन फिल्म ‘सती-बिहुला’ के भी चर्चा भइल। भोजपुरी सिनेमा खातिर कहानी के बारे मे ऊ कहलें कि सोरठी वृजाभार, सीत-वसंत या आचार्य पाण्डेय कपिल के उपन्यास ‘फुलसुंघी’ मे एतना फिल्मी मटेरियल बा कि अगर एह पर ढंग से फिल्म बने त एह में कवनो शक नइखे कि ऊ भोजपुरी सिनेमा खातिर मील के पत्थर साबित होई। ‘फुलसुघीं’ त भोजपुरी के एगो अइसन उपन्यास बा, जेके जेतने पढ़ी, कम बा। हम एकर नाट्य रूपांतर कइले बानी, मंचन भी भइल बा। एह पर फिल्म या धारावाहिक जरूर बने के चाहीं।  भोजपुरी सिनेहस्ती से भेंटवार्ता आ फिल्म शूटिंग के रोचक आ हास्य संस्मरण भी सुनवलें ‘भावुक’, जवना के सुन के लोग लोट-पोट हो गइल।   आ सबसे अंत में चर्चा भइल (Internet ) पर। ‘भावुक’ सूचित कइले कि भोजपुरी के एगो बेवसाइट ( www.bhojpuri.org) अभी निर्माणाधीन बा, तबहूं ओह पर बहुत सामग्री उपलब्ध बा। देश-विदेश के भोजपुरियन से बात-चीत करे के त ई एगो बहुत बढ़िया प्लेटफार्म बा। एही प्लेटफार्म के जरिये यू-एस ए, यू.के, सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण अमेरिका, मारिशस  आ दुबई जइसन जगह से (BAU) के स्थापना समारोह पर शुभकामना आ बधाई से भरल कई गो चिट्ठी आइल बा। (BAU) के स्थापना के घोषणा के ई असर भइल कि अमेरिका में भी एगो भोजपुरी एसोसिएसन (Bhojpuri association of America) के निर्माण शुरू हो गइल। लेकिन ई प्रयास अभी इण्टरनेटी बा, लोग सिर्फ (e-mail) से  ही एह ग्रूप (Bhojpuri-usa) से जुड़ल बा। भोजपुरी के मुख्य बेवसाइट (www.bhojpuri.org) के (A apna log- Database of Bhojpuri) पेज मे आप जाईं आ जवना देश के भोजपुरिया से बात-चीत करे के बा या आप ओह देश में जात बानी आ सम्पर्क करे के बा त आप इहाँ ओह देश में रहे वाला भोजपुरी भाई-बहिन के नाम, पता, इमेल फोन आदि एह (Database) पेज पर खोज सकत बानी। एह साइट से जुड़ल सिंगापुर के भाई शाशिभूषण राय के भी एगो साइट बा ‘भोजपुरी नालेज कल्चर। एहू पर भोजपुरी के कुछ सामग्री बा। … हम सिंगापुर से ही जुड़ल एगो ताजा खबर सुनावत बानी कि भाई नीरज चतुर्वेदी के नेतृत्व में सिंगापुर गर्वनमेण्ट के खाता में ‘सिंगापुर भोजपुरी रजिस्टर्ड हो गइल। ई हमनी खातिर एगो अच्छा खबर बा। एकरा वास्ते (BAU) के तरफ से नीरज भाई के बधाई। त कहे के मतलब कि इण्टरनेट पर बहुत काम हो रहल बा। लोग छटपटाता आपस में बतियावे खातिर, एक दूसरा के जाने खातिर। इहाँ तक कि कुछ लोग जे सौ-दू सौ साल पहिले भारत छोड़ के दोसरा देश गइल ( गिरमिटिया) ऊ अपना पूर्वज के पता लगावे खातिर तड़प रहल बा। अइसन कई गो चिट्ठी हमरा पास आइल बा। भोजपुरी बेवसाइट पर एह समस्या के निदान के भी उपाय हो रहल बा।….. भोजपुरी साहित्य के इण्टरनेट पर ले आवल जरूरी बा ताकि दुनिया के लोग एकर लाभ उठा सके। भोजपुरी बेवसाइट पर मात्र एगो साहित्यिक किताब मनोज ‘भावुक’ के गजल-संग्रह ‘तस्वीर जिन्दगी के’ उपलब्ध बा, उहो रोमन में। दरसल भोजपुरी में एगो पूर्णत साहित्यिक बेवसाइट के जरूरत बा।   ‘भावुक’ आपन भाषण एह अनुरोध के साथ खतम कइलें कि हमनी इहाँ एकजुट होके  BAU  के  मजबूत करीं जा। एकरा के विश्वजाल(Inaternet) पर फइलल भोजपुरियन से जोड़ीं जा, कम से कम एगो भोजपुरी पत्रिका अवश्य पढ़ीं जा। आज जवन कामन प्लेटफार्म बनता, समय-समय पर आके फगुआ,कजरी, चइता गाईं जा। आन्नद मनाईं जा। … हमनी में केहू गायक या कलाकर निकले त युगाण्डा के कार्यक्रम में भोजपुरी के भी उपस्थिति दर्ज कराई जा। समय-समय पर विचार गोष्ठी करी जा। … (BAU) के सुचारू रूप से संचालन खातिर जुझारू आ दुधारू यानी कि श्रम देवे वाला आ धन देवे वाला दूनू तरह के लोगन के अधिक से अधिक संख्या में जोड़ी जा। अगिला समारोह में संस्था के एगो समिति बने, एगो कमेटी बने, एगो रणनीति बने… आ हमनी के भोजपुरी के मशाल जरा के चल पड़ीं जा। ….. जै भोजपुरी….. जै भोजपुरी संसार।

एक-डेढ़ घण्टा के ई लमहर भाषण कइसे खतम हो गइल लोगन के पते ना चलल। दरअसल युगाण्डा के भोजपुरिया खातिर ई सब बातचीत एकदम नया रहे। सभे अपना के एक नया अनुभव से गुजरत महसूस कइल। एकरा बाद कार्यक्रम के विराम दिहल गइल। लोग चटनी आ समोसा के साथे कोकोकोला के चुसकी लिहल। फेर मनोज ‘भावुक’ (BAU)  स्थापना समारोह पर देश-विदेश से आइल कुछ चुनिन्दा चिट्ठियन( शुभकामना आ बधाई) के पढ़ के सुनवलें।…. देश से आइल चिट्ठियन में भोजपुरी संस्थान, सम्मेलन आ परिषद के अध्यक्ष आ नामी-गिरामी साहित्यकार लोग के आशिर्वाद रहे त विदेशन से विभिन्य देश के भोजपुरी संगठन के अध्यक्ष, साइट के माडरेटर आ भोजपुरी के खोजबीन करें वाला भाई बहिन के उद्गार आ विचार रहे।

मारिशस से श्रीमती सुचीता  रामदीन त अपना चिट्ठी में (BAU) खातिर एगो बड़हन लेख भेजे के वादा कइली। साथही ईहो सूचना देली कि मारिशस में भी अगिला भोजपुरी सम्मेलन के विचार बा। रंगश्री, दिल्ली अध्य्क्ष श्री महेन्द्र सिंह सास्कृतिक कार्यक्रम करत रहे के सुझाव भेजनी। विदेश से एगो भाई सतीश उपाध्याय सवाल कइले कि हम दार-ए-सलाम आ तंजानिया में भोजपुरी एसोसियशन बनावल चाहत बानी, कुछ रास्ता बतावल जाय कि हम कइसे का करीं। मलेशिया से श्री रमांशकर सिंह ई. मेल कइले कि भाई तू लोग कइसे एसोसियशन बना ले ल लोग, हम त खूब कोशिश के बावजूद 5 आदमी से बेसी ना जुटा सकनी। पिछला साल होली मनइनी जा बाकिर ओमे खाली भोजपुरी ना पूरा उत्तर भारतीय रहले। बाकिर हमनी पूरा प्रयास में बानी जा। सिंगापुर से भाई नीरज चतुर्वेदी के पत्र गौर करें लायक बा- (Manoj Bhai, that Graet work done by you in Uganda. I was just thinking if we can replicat this “Bhojpuri Group” across  world  e.g. we have already  Bhojpuri Group in Singapore, Bangalore, and Delhi and it easily replicated to Guyana, Surinam ,south Africa, Thailand,Malaysia, Canada etc. ) श्री दीपेन्द्र सिन्हा के प्रयास सराहनीय बा-( It is interesting to know that these is a Bhojpuri samaj in Uganda. I run a Bihari organization in San Francisco Area and invite all bihari People and Bhojpuri group to join me at the following-group. yahoo.com/group dipendra sinha ). अमेरिका से शैलेश मिश्रा (USA) में रहे वाला भोजपुरियन खातिर एगो ग्रुप बनवले बाड़न । Group name- Bhojpuri- USA Group home page – group.yahoo.com/group/bhojpuri-USA Group Email-bhojpuri-usa@yahoogroups.com  एही तरे युनाइटेड किंगडम(U.K.) में भोजपुरी के एगो ग्रुप बनवले बाड़न राजेश पाण्डेय।      bhojpuri_ukgroup@yahoo.com     दक्षिणी अमेरिका से एगो बहिन के ग्रिटिंग्स आइल बा- (Pranam, Manoj Bhaiya. Greetings from a Bhojpuri bahan from south America. I am 4th generation PIO. I see that you are from Uganda are you a descendant of immigrants (girmitya) like myself or are you all just Indian who have there to live/work? I am Searching for descenants of Girmityas around the Globe. with kind rigands- Nanda.  कोलकाता से पहरूवा के सम्पादक भाई विमल राय फोन से हमरा के बधाई आ शुभकामना देहले।  करीब 30-35 गो मेल हमरा पास आइल बा, सबसे समेटल संभव नइखे। दरअसल हम डाक या फोन से केहू के BAU  के स्थापना के सूचना ना देले रहीं । भारत से कुछ साहित्यिक मित्र लोग के शिकायत आइल बा कि तू हमरा के खबर ना देल। हम क्षमा चाहब। ई सूचना ओही लोग के दीहल गइल रहे जे (Internet) से हमरा सम्पर्क में बा। डाक विभाग के कछुआ चाल के चलते पत्राचार के मन ना बनल पर आगे से हम ध्यान राखब।   मनोज भावुक चिट्ठी पढ़ला के बाद कहले कि आप सब देखत हई कि केह तरे दुनिया भर में भोजपुरी के ग्लोबलाइजेशन हो रहल बा। एही सिलसिला में एगो कड़ी के रूप में BAU के स्थापना कइल जा रहल बा। BAU एगो कामन प्लेटफार्म बा युगाण्डा के भोजपुरियन खातिर। Internet पर Bhojpuri website  एगो कामन प्लेटफार्म बा दुनिया भर के भोजपुरियन खातिर। हम एगो बात इहाँ कहल चाहब कि पत्र-पत्रिका भी एगो कामन प्लेटफार्म ही होला। हमनी ( BAU) आज जवन कर रहल बानी,  पत्रिका में छपी, भारत के लोग जान जाई। दुनिया भर के लोग जवन करता, ऊ पत्रिका में छ्पता त हमनी के जान जात बानी। एह से पत्र-पत्रिका से जुड़ल त अनिवार्य बा। हम विश्व के तमाम भोजपुरी संगठन के एगो ई-मेल करे जा रहल बानी, जवना में भोजपुरी के समस्त पत्र-पत्रिकन के सूची(आ पता) जारी करब आ सबसे निहोरा करब कि एह पत्रिका से, प्रिंट मीडिया के एह कामन प्लेटफार्म से अवश्य जुड़ीं, ना त हमनी के (Organisation) अधूरा रह जाई आ हम आप सबसे भी उम्मीद करत बानी कि आप बहुत जल्दी भोजपुरी पत्र-पत्रिकन के सदस्य बनब ।….Internet पर एगो भोजपुरी पत्रिका निकालल बहुत जरूरी बा। हम भोजपुरी पत्रिकन के सम्पादक लोग के भी एगो चिट्ठी लिखे जा रहल बानी कि अगर सम्भव होखे त आपन पत्रिका के  Internet से अवश्य  जोड़ी।   एकरा बाद मनोज भावुक सभा में उपस्थित भाई लोग के आपन उद्गार व्यक्त करें खातिर आमंत्रित कइलें। मात्र दूगो नाम आइल। अधिकांश लोग के इहे कहनाम रहे कि अगिला बार। कुछ लोग इहो कहत सुनाइल कि हम त सोचनी कि खाली दाल-भात यानी कि भाई के भवधी होई, बाकिर इहाँ आके त आँखे खुल गइल। उद्गार व्यक्त करें वाला दूगो भाई लोग दुइये शब्द में बहुत बड़ बात कह गइल-‘आपन भोजपुरी एतना ऊपर उठ गइल आ हमनी सुतले बानी जा।… अब हमनी के जाग जाये के चाहीं। एह दूनू भाई लोग के बोलला के बाद कुछ लोग अउर जोशिआइल। ऊ लोग मंच पर आके भोजपुरी के नाम के नारा लगावल, प्रणाम कइल आ संकल्प लीहल कि हमनी भोजपुरी खातिर कुछ करब ।

स्थापना समारोह के दूसरा चरण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। बहुत जोर लगावल गइल कि भाई लोग में से केहू कुछ कढ़ावे खातिर राजी हो जाय। बाकिर सभे इहे कहल कि ‘अगिला बार ढोलक-झाल आई।…हमनी के का मालूम रहल ह कि एतना महफिल जमीं, एतना भीड़ होई’।…अंत में कुछ करीबी मित्र लोग के जिद्द आ अध्यक्ष जी के विशेष आग्रह पर सभा के संचालक मनोज ‘भावुक’ के ही एकल काव्य-पाठ खातिर तइयार होखे के पड़ल । ‘काचर-कूचर कउवा खाई, घीव के लोदा बबुआ खाई’ से ‘भावुक’ आपन काव्य-पाठ शुरू कइलें।… फेर गजल के दौर चलल- ‘शेर जाल में फँस जाला त सियरो आँख देखावेला’।…… ‘मुहब्बत खेल ह अइसन कि हारो जीत लागेला’।…..आ… ‘जिनिगी के जख्म,पीर जमाना के घात बा’,… के बाद एगो गीत ‘बबुआ भइल अब सेयान कि गोदिये नू छोट हो गइल’।  लोग त भुलाइये गइल रहे कि हम देश से बहुत दूर ……सात समुन्दर पार युगाण्डा में बानी। लागल कि सभे अपना घर-अँगना में बइठल गावत-बजावत बा।…. बाहर के टिप-टिप बन्द हो गइल रहे। घड़ी के सुई टिक-टिक करत शाम के साढ़े चार पर पहुँच गइल रहे। हम जनता-जनार्दन से इजाजत लेके आपन काव्य-पाठ बन्द क देनी। अब बारी रहे आज के मुख्य अतिथि आ अध्यक्ष के।

मुख्य अतिथि श्री अखिलेश मिश्रा आपन भाषण में अत्यंत ‘भावुक’ होके बस अतने कह पवनी कि ‘आज के कार्यक्रम देख के हमरा त अचरज होता कि जब मनोज ‘भावुक’ टेक्निकल फिल्ड में होके,एगो इंजीनियर होके आपन एतना प्रभाव डाल रहल बाड़न कि मन नइखे करत कि कार्यक्रम खतम होखे, बात खतम होखे…. त जे भोजपुरी के योद्धा होई, जे दिन-रात भोजपुरी खातिर काम करत होई, ऊ सामने आई त का हाल होई। धन्य बा भोजपुरी। हम एह भोजपुरी के शत-शत प्रणाम करत हईं।   अध्यक्षीय भाषण करत श्री वी.पी. त्रिपाठी जी कहनी कि युगाण्डा में रहत हमरा एगारह साल हो गइल। हम आइल रहनी त हम अकेला रहनी, आज हमनी 41 बानी, काल्ह 100 होखीं आ फेर हजार। ई संख्या धटो मत, जोश कम मत होखे। जइसे आज BAU के स्थापना पर देश-विदेश से बधाई आइल बा, हमनी के अइसन काम करी जा कि देश-विदेश के लोग हमनी से प्रेरणा लेबे।

श्री अजय सिंह धन्यवाद ज्ञापन कइलें। कार्यक्रम समाप्त हो गइल। लोग पर्दा हटा के खिड़की से झाँकल। आकाश साफ हो गइल रहे। बदरी छट गइल रहे। सभका चेहरा पर रौनक, उमंग आ खुशी झलकत रहे। लोग सभागार से निकल के पहिले भोजपुरी के पत्र-पत्रिकन आ पोस्टरन के अवलोकन कइल। हम भोजपुरी के कई गो पत्र-पत्रिका के कवर पेज, भारत आ विश्व के भोजपुरी क्षेत्र के मानचित्र, आ इण्टरनेट से डाउनलोड कइल भोजपुरी के कई गो महत्वपूर्ण सूचना दीवार पर चिपका देले रहीं। लोग पढ़ल। कुछ लोग कुछ नोट कइल। लोग के जिज्ञासा ओराते ना रहे। सवालन के झड़ी लाग गइल। बाहर के खुला मैदान में हम अपना लोगन से घिरल रहनी। कुछ लोग अपना-अपना कार के सीसा पोछे में लागल रहे। कुछ भउजाई लोग अपना-अपना मरद के चिन्हावत रहे। एगो भउजाई हमरा ओर इशारा क के हमरा मेहरारू के मटकियावत रहली। धीरे-धीरे चुप्पी आ सन्नाटा पसरे लागल। कार गेट से बहरी निकले लगली सन। गेट के एगो कोना पर हम आ दूहरा पर अजय भाई हाथ जोड़ के खड़ा रहलें। धीरे-धीरे सभे निकल गइल। हमनी दूनो आदमी एक दोसरा के मुँह निहारे लगनी जा। केहू-केहू  से कुछ बोलल ना। वापस सभागार में अइलीं जा। भीतर घुसे के मन ना करत रहे। भीतर साँय-साँय, भाँय-भाँय के आवाज रहे। अचानक आँख जाके सामने के बोर्ड पर टँगा गइल -भोजपुरी एसोशिएसन आफ युगाण्डा स्थापना समारोह 21 अगस्त 2005

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भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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