स्मृतिशेष अम्मा-बाबूजी

स्मृतिशेष अम्मा-बाबूजी

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Posted: December 20, 2021
Category: आलेख
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गरिमा बंधु

आपन जन्मदाता, अम्मा बाबूजी पर कुछ लिखल हमरा बस में नइखे। जे हमरा के जनम देहल आ पाल पोस के जिनीगी संवार देहल ओकरा के हम शब्दन में का बांधेव। मतारी-बाप आ वड़ बुजुर्ग त भगवान के प्रतिनिधि हउए। काहे कि, भगवान खुद उतर के ना त हमरा के आशीष दिहें ना प्यार करिहें ना, ना हमरा गलतियन पर हमरा के डांट फटकार लगइहन।

अइसे त हमार बाबूजी श्री पाण्डेय कपिल जी आ अम्मा श्रीमति सुशीला पाण्डेय के साथ बितावल ढेर सारा संस्मरण बा। जे में से कुछ साझा कर रहल बानी। आज ओह लोग के बारे में सोचत खा आँख लोरा जा रहल बा। 2 नवम्बर के हमरा बाबूजी के पुण्यतिथि ह। 2 नवम्बर 2017 के उँहा के बैकुंठ धाम सिधार गइल रहीं आ अब त 19 अप्रैल 2021 के अम्मा भी स्वर्ग लोक सिधार गइली। अब त वोह लोग के स्मृति शेष ही रह गइल बा।

हर साल अम्मा-बाबूजी जाड़ा से पहिले नवम्बर महिना में आवत रहे लोग आ जाड़ा बिता के मार्च महिना में लौटत रहे लोग। संयोग से हमनी के हमेशा अइसने जगह पर रहत रहीं जहाँ जाड़ा ना पड़त रहे। जइसे तमिलनाड़ु, केरल आ मुंबइ । पहिले त उ लोग अकेले आवत जात रहे बाकि उमिर बढ़ला पर हम खुद पटना जा के जाड़ा से पहिले लिया आवत रहीं आ जाड़ा ख़तम भइला पर पंहुचावत रहीं। जेतना दिन उ लोग के साथ रहे के मौका मिलत रहे, ओतना दिन बहुत आनंदमय गुजरत रहे। जब मौका मिलत रहे तव बाबूजी हमनी के साहित्यिक लोग के बारे में आ गाँव घर के बारे में किस्सा कहानी सुनावत रहीं। गाँव में कइसे कवि गोष्ठी होत रहे जेमे बड़-बड़ साहित्यिक लोग पहुँचत रहे। गाँव में नाटक होत रहे जेमें बाबूजी भी हिस्सा लेत रहीं। इ सब सुन के हमनी के बहुत आनंद आवत रहे। इहाँ रहला पर, हर एतवार के हमनी क़वनों ना क़वनों मंदिर घूमे जात रहीं।

ओह लोग के तीर्थाटन के हार्दिक इच्छा रहत रहे। एह से हमनी के, खासकर के हमार पति निरंजन नाथ बंधु एह बात के ध्यान हमेशा राखत रहीं। एह बात के ध्यान देत, बंधुजी जब मौका मिलत रहे तब कहीं ना कहीं तीर्थाटन के प्रोग्राम बना देत रहीं।

अम्मा बाबू जी के माता वैष्णो देवी दर्शन करे के हार्दिक इच्छा रहे। बाबूजी हमेशा कहेब, ऐ बेटा एक बेर वैष्णो देवी के प्रोग्राम बनो। अब हमनी के उमिर बढ़ रहल बा त पहाड़ी यात्रा मुश्किल होखी। बाकि अइसन मान्यता बा कि जब तक माता के बुलावा ना आइ तब तक हमनी माता के दरवार में ना पहुँच सकी, आ उहे भइल। 2006 में हमार बेटा अनुराग बंधु के 10वाँ के बोर्ड परीक्षा समाप्त भइल आ एकाएक प्रोग्राम बन गइल। ओ घड़ी, हम मुंबइ में रहत रहींl हम बाबूजी के फोन कइनी कि अपने लोग मुंबइ आ जाईं तब वैष्णो देवी के दर्शन करे चलल जाओ। सुनते बाबूजी जाये के तइ यार हो गइनी आ बहुत खुश भइनी।

अब बाबूजी के स्वीकृति मिलला के बाद बंधुजी ट्रैन के टिकट आ ठहरे खातिर कटरा में दू दिन आ जम्मू में एक दिन खातिर होटल में कमरा ऑन लाइन बुक करा लेहनी। ठाणे, महाराष्ट्र में विश्व भोजपुरी सम्मलेन के अधिवेशन रहे जेकरा में बाबू जी के शामिल होखे खातिर न्योता मिलल रहे। एह से बाबूजी थोड़ा पहिलहीं मुंबइ आ गइनी। ओह साल हमनी के होली के त्यौहार भी बहुत आनंद दायक रहल काहे कि अम्मा-बाबूजी भी साथ रहे लोग।

10 अप्रैल 2006 के हमनी सब आदमी बांद्रा स्टेशन से जम्मू पहुंचे खातिर ट्रेन पकड़नी। दू दिन के यात्रा तय करके हमनी के होत सवेरे जम्मू पहुँचनी। अब हमनी के कटरा जाय खातिर एक टैक्सी बुक कइनी। जम्मू से कटरा जाय में दू घंटा लागल। कटरा पहुंच के सबसे पहिले देवी के दर्शन खातिर पर्ची कटावल गइल। ओकरा बाद टैक्सी लेके हमनी के पहिले से बुक कइल होटल में पहुंच गइनी। उहाँ नहा धो के फ्रेश भइला के बाद नास्ता चाय भइल। ओकरा बाद हमनी अपना कमरा में दिन भर आराम कइ नी। शाम के समय शहर में कुछ घुमत फिरत रात के खाना खाके हमनी अपना होटल के कमरा में पहुंच गइनी। बिहान भइला सुबह सवेरे नहा धो के नास्ता कइ ला के बाद भवन जाये के तैयारी भइल। कटरा से माता रानी के भवन जाये खातिर कोई पैदल जाला त कोई घोड़ा या पालकी से। हमनी घोड़ा के सवारी तय कइ नी काहे कि अम्मा-बाबूजी पैदल ना जा सकत रहे लोग। वाण गंगा से यात्रा शुरू भइल। हमार अम्मा त घोड़ा पर आराम से सबसे पहिले चढ़ गइली आ जय माता दी के बोल शुरू कर देली। बाबूजी के घोड़ा पर चढ़े में थोड़ा डर लागत रहे बाकिर चढला के बाद खूब आनंद उठवनी। रास्ता भर जय माता दी के नारा गूँजत रहे। बड़ा मनोरम दृश्य रहे। सब लोग में जोश आ उत्साह भरल रहे। दूसरका पड़ाव चरण पादुका रहे आ ओकरा बाद के पड़ाव अर्ध कुवारी। रास्ता के पूरा व्यवस्था माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा कइल जाला। रास्ता में भोजनालय आ चाय नास्ता के व्यवस्था रहे। अर्ध कुवारी पहुंच के हमनी चाय पियनी आ लगभग आधा घंटा विश्राम के बाद आगे बढ़ल गइल। कुछ देर के बाद हमनी वैष्णो देवी भवन पहुँच गइनी। उहाँ प्रसाद खरीदल गइल तथा जूता चप्पल श्राइन बोर्ड द्वारा बनावल लॉकर में रखल गइल। अब दर्शन के लाइन में लागल आदमी। आगे बढला पर प्रसाद के नारियल जमा करे के पड़त रहे ओकरा बदले टोकन मिलत रहेl आगे बढला पर माता रानी के पवित्र गुफा में हमनी के प्रवेश कइनी। उहाँ माता रानी के तीन पवित्र पिंड बनल बा। हमनी के माता रानी के आगे सिर झुका के प्रणाम कइनी। बाहर निकलला पर एक काउंटर बनल बा जहाँ टोकन देला पर नारियल आ माता रानी के एगो पवित्र सिक्का मिलल। उहाँ से निकल के बाबा भैरव नाथ के दर्शन खातिर हमनी के आगे के चढ़ाई घोड़ा से शुरू कइनी। लगभग आधा घंटा के चढ़ाई के बाद हमनी के बाबा भैरव नाथ के दर्शन भइल। इहाँ पर चढ़ाई  ख़तम हो गइल। अब नीचे उतरे के रहे। उतरत समय घोड़ा के सवारी से बहुत असुबिधा होत रहे। एह से हमनी के घोड़ा के सवारी छोड़ देहनी आ पैदल हीं नीचे कटरा तक आ गइनी। कटरा पहुँचत पहुँचत शाम हो गइल। वोह दिन हमनी के कटरा में हीं रुक गइनी। बिहान होके सुबह सवेरे जम्मू खातिर रवाना भइनी। जम्मू पहुंच के हमनी के पहिले से बुक कइल होटल में गइनी। दिन के भोजन कइला के बाद कुछ खरीदारी भइल आ शाम में जम्मू के सुप्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर आ छोट मोट दूसरो मंदिर के दर्शन भइल। दूसरा दिन सुवह में हमनी के पटना खातिर ट्रेन पकड़नी।

बात जून 2012 के ह। ओह घड़ी हमार दीदी अंबुजा सिन्हा एजी कॉलोनी में रहत रही। बाबूजी के आवास पर अम्मा बाबूजी आ उनकर बड़ नाती अभिषेक रहत रहे लोग। एक दिन बाबूजी एकाएक बेहोश होके गिर पड़नी। अभिषेक ऊंहा के मुंह पर पानी के छींटा देलन आ होस अइला पर बिस्तर पर लेटवलन। ओकरा बाद अपना मम्मी अंबुजा सिन्हा के फोन से बतवलन। हमार दीदी अंबुजा आ जीजा जी तुरत पहुंचल लोग आ डॉक्टर से देखावल गइल। बाबूजी के हॉस्पिटल में भर्ती करे के पडल। 12 बजे दिन में दीदी हमरा के फोन से बतवली। इ बात हम अपना पति के ऑफिस में फोन करके बतवनी। उहां के पटना जाए खातिर फ्लाइट के टिकट बुक करा के ही घर अइनी। दूसरा दिन सुबह हम अपना पति के साथ पटना पहुंच गइनी। ओह घड़ी हमार छोटका चाचा चंद्रविनोद जी पटना में ही अपना बेटी पूजा के पास आइल रहीं। बाबूजी के प्रोस्टेट के ऑपरेशन करावे के पड़ल। चाचा जी के रहला से बहुत सहयोग भइल। बाबूजी के हॉस्पिटल से घर अइला के बाद हमार पति बंधु जी मुंबई लौट अइनी। अब बाबूजी के देख रेख करे वाला हम आ अभिषेक रह गइनी। बीमारी के कारण बाबूजी चिड़चिड़ा हो गइल रहीं। बीच-बीच में हमार दीदी तथा छोटका चाचा-चाची लोग आवत रहे। चाचा जी के देख के बाबूजी बहुत प्रसन्न हो जात रहीं। चाचा जी का साथ कविता कहानी भी होखे। हमार बुआ भी कभी-कभी आ जात रही। हमार बड़का चाचाजी पांडेय सुरेंद्र जी अपना बेटा राजीव नयन के साथ बाबूजी से मिले आइल रहीं। बाबूजी बहुत खुश भइनी। जब चारो भाइ बहिन जुटे लोग तब खूब जमत रहे। गांव घर के किस्सा कहानी होखे। बचपन के बात होखे। कभी-कभी सब कोई मिल के अम्मा के चुटकी लेत रहे। ओहमें हमनी के भी बहुत मजा आवत रहे। हमनी भी बीच-बीच में कुछ बोलत रहीं। ओह घड़ी हम बाबूजी का साथ तीन महीना रहके मुंबई आ गइनी।

ओकरा बाद जाड़ा आवे से पहिले नवम्बर में हम पटना जा के अम्मा बाबूजी के मुंबई ले अइनी। समय मजेदार गुजरत रहे एही बीचे मार्च 2013 में बाबूजी के तबियत कुछ ख़राब हो गइल। इहाँ तक कि हॉस्पिटल में भर्ती करावे के परल। हॉस्पिटल में भर्ती भइला पर प्रॉस्टेट के दोवारा ऑपरेशन करावे के पड़ल। इ सुन के हमार दीदी आ जीजाजी मुंबई आइल लोग आ एक सप्ताह रह के लौट गइल लोग। ओह साल अम्मा-बाबूजी एक साल मुंबई में रह गइनी। ओह बीच में उँहा के सेवा करे के मौका मिलल आ बहुत कुछ सीखे के भी मिलल। ओही समय बाबूजी हमरा के एक अनमोल उपहार दिहनी जे उहाँ के हस्त लिखित रहे। हम ओकरा के साझा कर रहल बानी।

2017 के बात ह, हमार बेटा अनुराग बंधु के शादी उपासना के साथ तय भइला के बाद हमनी के इंगेजमेंट के रस्म पूरा कर लेहनी। अम्मा-बाबूजी लोग बहुत ख़ुश रहे। मुंबई आवे के उत्साह में रहे लोग। बाबूजी कहनी कि शादी के समय हमार देख भाल के करी काहे कि तू लोग के त शादी के इंतजाम आदि में बहुत व्यस्तता रही आ अंबुजा चाहे आउर दोसर लोग शादी के रस्म रिवाज़ में लागल रही। बारात में हमरा साथे के रही? ऐ बात के हमरा भी चिंता रहे। हम मनोज भावुक जी के अनुराग के शादी के बारे में बतवनी। उनका के शादी में आवे खातिर आग्रह कइनी आ कहनी कि शादी के दरम्यान बाबूजी के देख रेख तोहरे जिम्मे रही। मनोज जी कहनी कि इ त हमार सौभाग्य होई कि बाबा के साथे रह के उनकर सेवा करे के मिली। इ जान के कि मनोज जी बाबूजी के साथे रहेब, बाबूजी बहुत खुश भइनी आ चिंता मुक्त हो गइनी। बाकि विधाता के लेख कुछ दूसरे रहे। 17 अक्टूबर, धनतेरस के दिन रात नौ बजे बाबूजी अपना कमरा में गिर गइनी जेसे उनकर एक पैर के हड्डी टूट गइलl एकर सूचना हमार दीदी विहान होत देली। 19 तारीख के दिवाली के पूजा करके अपना पति के साथ 20 तारीख के हमनी के पटना पहुंच गइनी। 25 तारीख के बाबूजी के पैर के ऑपरेशन भइल आ 27 के हमार पति मुंबई वापस आ गइनी काहे कि 3 दिसंबर के बेटा के शादी के तइयारी करे के रहे। बाकि हम पटने में रुक गइनी। जब बाबूजी हॉस्पिटल में रहीं, आ जब भेंट होखे तव कहीं कि तू इहंवा रहबू त शादी के तैयारी कइसे होइ। 1 नवम्बर के जब बाबूजी हॉस्पिटल से घर आ गइनी तब हम ओही दिन मुंबई आ गइनी। 2 नवम्बर के शाम 4 बजे बाबूजी एह दुनिया के छोड़ परलोक सिधार गइनी। हमार दीदी फोन करके इ दुःखद समाचार दिहली। हमनी के सुबह सबेरे के फ्लाइट से पटना पहुँच गइनी। हमार बेटा अनुराग भी आगरा से पटना पहुँच गइलन। हमार पूरा परिवार भी पटना पहुँच गइल लोग। इ समाचार सुन के बाबूजी के कुछ साहित्यिक मित्र भी पहुँच गइलन। मनोज भावुक भी भागल पटना पहुँचले जबकि एक दिन पहिले 1 नवंबर के उनका ससुर जी के देहांत भइल रहे बीचयू, बनारस में।

श्राद्ध कर्म निपटला के बाद हमनी के मुंबई वापस आ गइनी। वक्त के सामने आदमी केतना लाचार हो जाला, ई हमरा ओह घड़ी बुझाइल। दिल में एक तरफ बेटा के शादी के ख़ुशी रहे त दोसरा तरफ बाबूजी के मरला के गम। शादी के कार्य क्रम चलत रहे, हम खुश रहीं बाकि बाबूजी के इयाद सतावत रहे। हम खुल के रो भी ना सकत रहीं।

एकरा बाद हम छः सात महिना पर अम्मा से मिले खातिर पटना जरुरे जात रहीं। 2019 के जुलाई में हमनी के पटना गइल रहीं। ओकरा बाद 22 मार्च 2020 के हमनी के पटना जाये के टिकट कटल रहे। कोरोना महामारी के कारण 22 मार्च से लॉक डाउन भइला के कारण हमनी के पटना ना जा सकनी। कोरोना के चलते अम्मा से भेंट भइला डेढ़ साल हो गइल रहे। अब अम्मा फोन पर जनवरी से रोज कहत रही कि बहुत दिन हो गइल भेंट भइला। अबकी बार होली में जरूर आव। अइह त कुछ दिन हमरा लगे रहे के सोच के अइह। 2021 के 22 मार्च के अपना पति के साथे हम पटना पहुँच गइनी। होली खूब धूम धाम आ उत्साह से पूरा परिवार के साथे मानवल गइल। अम्मा तथा दीदी जीजाजी के साथे 20 दिन कइसे गुजरल, पता ना चलल। रात के एगारह बारह बजे तक बइठका लागे आ गप्प सप्प चलत रहे। 6 अप्रैल के शाम के फ्लाइट से हमनी पटना से मुंबई आ गइ नी। 7 अप्रैल के सुबह उठनी त हमरा कुछ बुखार आ गइल रहे। पहिले त बुझाइल कि रास्ता के थकान ह। बिहान भइला बुखार बढे लागल आ बंधुजी के भी बुखार आ गइल। कोरोना के जांच में दुनू लोग पॉजिटिव निकलल ओकरा बाद हमनी के हॉस्पिटल में भर्ती हो गइनी। हमार हालत बहुते ख़राब रहे। ई सुन के हमार बेटा अनुराग दिल्ली से मुंबई आ गइले आ डेढ़ दू महिना तक मुंबई में हीं रहले जब तक कि हमनी के पूरा ठीक ना हो गइनी। पटना में हमार दीदी जीजाजी के भी कोरोना हो गइल रहे। एही क्रम में हमार जीजाजी 15 अप्रैल के आ अम्मा 19 अप्रैल के स्वर्ग सिधार गइली। हमार हालत ख़राब देख के हमरा से ई सब ना बतावल गइल। कुछ दिन बाद हमरा के धीरे-धीरे बतावल गइल। आज भी अम्मा के साथ बितावाल पल ईयाद आवेला त आँख लोरा जाला।

इत्र की शीशी खाली हुइ , खुशबू नहीं गइ ।

माँ तू स्वर्ग चली गइ , तेरी याद नहीं गइ ।।

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