भारत-जापान मैत्री के वास्ते खास बा 2022
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भारत-जापान मैत्री के वास्ते खास बा 2022

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Posted: February 15, 2022
Category: सुनीं सभे
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आर.के. सिन्हा

भारत-जापान संबंध खातिर मौजूदा साल 2022 मील के पत्थर बा। दरअसल दूनू देशन के बीच 1950 में ही सकारात्मक राजनयिक संबंध के श्रीगणेश हो गइल रहे। दूनू देशन के भगवान बुद्ध के अलावा शांति, अहिंसा अउर भाईचारा के संदेश ही करीब ले आइल रहे। बौद्ध धर्म के अलावा जापान में गुरुदेव रविन्द्रनाथ टेगौर के भी बहुत सम्मान कइल जाला। एकरा साथ ही टोक्यो यूनिवर्सिटी में हिन्दी के अध्यापन साल 1908 से ही चालू हो गइल रहे। भारत से बाहर सबसे पहिले हिन्दी के टोक्यो यूनिवर्सिटी में ही पढ़ाई चालू भइल रहे। भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष के दौरान भी जापान के शाही सेना सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिन्द फौज के सहायता प्रदान कइले रहे। त ये तरे से भारत अउर जापान के कई बिन्दु करीब ले आवेला।

दरअसल जापान ओ देशन में से नइखे जे कवनों भी व्यापारिक संबंध बनावे में अन्य देश के शोषण करे के संबंध में सोचत होखे। जापान भारत के विगत सत्तर साल के दौरान विभिन्न परियोजना के धन उपलब्ध करावे में खुले हाथ मदद कइले बा। अब जापान के मदद से ही भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आ रहल बा। जापान दोसरा देशन के जवना दर पर ऋण देला, ओसे काफी कम दर पर भारत के मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना खातिर जरूरी राशि मुहैया करा रहल बा। ऋण वापसी के मियाद भी 25 बरिस के जगह 50 बरिस राखल गइल बा। आर्थिक दिक्कत से जूझ रहल दिल्ली मेट्रो रेल निगम के चउथा फेज के निर्माण में तेजी ले आवे खातिर जापानी कंपनी जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी मदद के हाथ बढ़वले बा। ई कंपनी चउथा चरण के ट्रैक के निर्माण के वास्ते आर्थिक मदद देवे खातिर तइयार हो गइल बा। ये बाबत जरूरी प्रक्रिया भी शुरू हो गइल बा। मानल जा रहल बा कि आर्थिक मदद मिलते ही दिल्ली मेट्रो के चउथा चरण के निर्माण कार्य में अउर तेजी आई। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते 22 मार्च 2020 से अचानक बंद भइल दिल्ली मेट्रो फेर 7 सितंबर से शुरू हो गइल, लेकिन ये बीच ओकरा 1500 करोड़ रूपया के आसपास घाटा हो गइल। अइसना में नया प्रोजेक्ट खातिर आर्थिक दिक्कत आवत रहे।

भारत में जापान के दर्जनों कम्पनी अरबों रुपया के निवेश कइले बा। लेकिन ओ लोग पर केहू कवनों ये तरे के आरोप ना लगा सकल बा, जवना से केहू उनके मंशा पर सवाल खड़ा करत होखे। दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा वगैह में हजारों जापानी नागरिक भारत के विकास में आपन योगदान दे रहल बा। भारत में रहे वाला जापानी नागरिक भारत के उज्जवल भविष्य के ले के बेहद आशावादी बाड़े। ई जापानी होंडा सिएल कार, होंडा मोटरसाइकिल, मारुति, फुजी फोटो फिल्मस, डेंसो सेल्ज लिमिटेड, डाइकिन श्रीराम एयरकंडशिंनिंग, डेंसो इंडिया लिमिटेड समेत लगभग दू दर्जन जापानी कंपनियन के भारत के विभिन्न भाग में स्थित दफ्तरन अउर फैक्ट्रियन में काम करेले। ई लो भगवान बुद्ध के अनुयायी त हइले ह। ई लो भारतभूमि के गौतम बुद्ध के भूमि होखे के कारण ही पूजनीय माने ला। ई लो मानेला कि भगवान बुद्ध के जीवन समाज से अन्याय के दूर करे खातिर समर्पित रहे। उनके करुणा भावना ही उनका के विश्व भर के करोड़न लोगन के हृदय तक पहुँचवलस। ये जापानी लोग में भी भारतीय संस्कार ही बा। ई लोग आदतन मितव्ययी होले। ई लो भी भारतीय के तरह ही संयुक्त परिवार के संस्था के महत्व देलें। अगर कुछ जापानी एक-दोसरा के करीब रहेलें, तब ई लोग कार पूल करके ही दफ्तर गइल पसंद करेलें। त ई कहल जा सकता कि आमतौर पर दूनू देशन के नैतिकता मिलत-जुलत बा।

निश्चित रूप से जापान भारत के विशेष मित्र के दर्जा देला। ये संबंध के मजबूती देवे में भगवान गौतम बुद्ध के आशीर्वाद भी बा। एही से जापान भारत से अपना के भावनात्मक स्तर पर करीब पावेला। जापान से भारत में हर साल हजारों के संख्या में बुद्ध धर्म के माने वाले तीर्थयात्री आवेलें। ई लोग सामान्यतः बोधगया-राजगृह-सारनाथ-वाराणसी जालें। बोधगया आवे वाले जापानी पर्यटक सारनाथ भी अवश्य जालें। सारनाथ में गौतम बुद्ध बुद्धत्व प्राप्त कइला के बाद आपन पहिला उपदेश देले रहले। बौद्ध अनुयायियन के गौतम बुद्ध के जन्मस्थली भारत के ले के आकर्षण स्वाभाविक बा।

बोधगया-राजगीर-नालंदा सर्किट देश के सबसे खासमखास पर्यटन स्थलन में मानल जाला। राजधानी के इंद्रप्रस्थ पार्क में स्थित विश्व शांति स्तूप के व्यवस्था करेली कात्सू सान। उ मूलतः जापानी हई। उ सन 1956 में ही भारत आ गइल रहली, भारत अउर बुद्ध धर्म के करीब से जाने के इरादे से। एक बार भारत अइला के बाद इहाँ पर उनकर मन ये तरह से लागल कि फेर ऊ इहाँ पर बसे के ही निर्णय ले लिहली। उ भारत के संसार के आध्यात्मिक विश्व गुरु माने ली। कात्सू जी धारा प्रवाह हिन्दी बोले ली। ऊ हिन्दी प्रसिद्ध साहित्यकार काका साहेब कालेकर जी से सीखले रहली। उ राजधानी में सरकार के तरफ से होखे वाला सर्वधर्म प्रार्थना सभा के बीतल दशकन से एक स्थायी अंग बाड़ी। आगामी 30 जनवरी के गांधी जी के बलिदान दिवस पर राजघाट में होखे वाला प्रार्थना सभा में भी ऊ भाग लिहें। उ कहेली कि भारत- जापान मैत्री अटूट बा, काहे कि एकर आधार भगवान बुद्ध बाड़ें जे भारत से बाड़ें।

भारत-जापान संबंध पर बात करत चीनी दृष्टिकोण के नजरअंदाज नइखे कइल जा सकत। जापान के उपप्रधानमंत्री के तौर पर तारो असो 2006 में भारत के दौरा पर आइल रहले। ओ समय उ कहले रहले, अतीत के 1500 साल से भी ज़्यादा समय से इतिहास के अइसन कवनों वाक़या नइखे जब चीन के साथे हमनीं के संबंध ठीकठाक रहल होखे। ये बीचे, भारत अउर चीन के संबंध भी कतई मौत्रीपूर्ण नइखे मानल जा सकत।  चीन भारत के बहुत बड़हन हजारन एकड़ जमीन पर कब्जा जमवले बा। भारत-चीन के बीच सीमा विवाद हल होखे के नाम ही नइखे ले रहल, काहे कि, चीन के नीति कभी पारदर्शी रहले नइखे। उ भारत के शत्रु पाकिस्तान के परम मित्र भी ह। त भारत-जापान के चीन के ले के स्थिति भी लगभग एके बा। एसे दूनू देशन के चीन के भी हर स्तर पर मुकाबला करे के होई।

(लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं। )

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