राउर पाती

राउर पाती

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Posted: March 21, 2022
Category: राउर पाती
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सामग्री संकलनीय बा

'भोजपुरी जंक्शन' पत्रिका बहुत अच्छा निकल रहल बिआ। आरोही जी पर संस्मरण बहुत विस्तृत आ सटीक लागल। भोजपुरी साहित्यकारन के बारे में लिखल सामग्री संकलनीय बा। संपादक दल के बहुत-बहुत बधाई ।

अंकुश्री, पटना


सकारात्मक संपादन आ समाज-उन्मुख पत्रकारिता के ई निकहा उदाहरन बा

एह संपादकीय के कथ्य समस्या गिनावत खलसा हाहाकारी बवलवे नइखे मचावत, जवन आजुके पत्रकारन के एगो गोल के लत भ गइल बा, बलुक सोझ ठाढ़ समस्यवन के समाधनओ पर अपना रङे चरचा क रहल बा। सकारात्मक संपादन आ एही लगले समाज-उन्मुख पत्रकारिता के ई निकहा उदाहरन अस सोझा आइल बा। अंक के एकवटिये देख गइनीं। भोजपुरी-संसार ब्रजभूषण भइया के समहुत जोगदान के पीढ़ियन माथे लगाई। अंक के कथ्य आ कलेवर खातिर एक हाली फेर से बधाई।

सौरभ पांडेय, प्रयागराज


 

नया इतिहास गढ़त भोजपुरी जंक्शन

वाह!

डॉ. ब्रजभूषण मिश्र जी 'भोजपुरी जंक्शन' के यशस्वी सम्पादक मनोज भावुक जी सहित पत्रिका परिवार आ संकलन-प्रकाशन में सहयोग करे वाला अन्वेषी जन के हार्दिक बधाई।

बढ़त भोजपुरी

चढ़त भोजपुरी

रोजे नया इतिहास

गढ़त भोजपुरी

मनोज भावुक खातिर असीम मंगलकामना।

डॉ. जयकांत सिंह जय, मुजफ्फरपुर


 

जन उपयोगी पत्रिका बा

गजब! बहुत हीं असरदार संपादकीय बा। एक-एक पंक्ति प्रभावकारी बा। ‘’ जीहीं अइसे कि मुअला के बादो जीहीं ‘’ ..  बेहरतीन संपादकीय बा। बहुत-बहुत बधाई आ हार्दिक शुभकामना।

सम्पादकीय के साथ-साथ दिवंगत भोजपुरी साहित्य सेवी आ हिंदी अउर भोजपुरी सिनेमा पर राउर दृष्टिकोण बहुत हीं सरहानीय बा। ई वास्तव में जन उपयोगी पत्रिका बा।

बहुत बहुत शुभकामना आ बधाई।

अखिलेश्वर मिश्र, बेतिया


 

 

 

बहुते नीमन बाटे भोजपुरी जंक्शन के फंक्शन

भोजपुरी जंक्शन के फंक्शन,

बहुते नीमन बाटे।

ई जिनगी ह संभावना,

अटल कथन ई बाटे।

अमर हो गइल जे साहित्य में,

ओकर लिहनी नाम।

हे भावुक जी! बहुते सुन्दर,

बाटे राउर काम।।

माहिर विचित्र, देवरिया


 

बसंत के रूप लेले भोजपुरी जंक्शन

आरोही रंग में रंगल , गावे गहमरी गीत

गजब के संपादकीय, भोज भावुक के प्रीत

मास्टर साहब के स्मृति, भय भगवान आलेख

एक सौ एक पुरोधा के, संकलन वर्णातीत।

 

भोजपुरी जंक्शन सदा, लिए बसंत के रूप

नया-नया प्रतिमान से, बदले आपन स्वरूप

हम भोजपुरिया के आँगन, नया नया साहित्य

भरत चले भंडार रोज, हरसत मन देखी रूप।

 

समर्पण देखि भावुक के, भोजपुरी अगराय

मातृभाषा के प्रेमी बन, हृदय गाँव बसाय

भोजपुरी सुगंध फैलावत, चलत देस विदेस

देखी उनकर गुण के,  हमरो मन हरसाय।

कनक किशोर, राँची

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भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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