अमेरिका आ नाटो ग्रुप के लिहो-लिहो कइला से भइल बा ई हाल

अमेरिका आ नाटो ग्रुप के लिहो-लिहो कइला से भइल बा ई हाल

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Posted: May 6, 2022
Category: आवरण कथा
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अजय कुमार पांडेय

लइकाई में हमनी के गोल में जौन सबसे खुराफाती लइका रहे, ओकर काम रहे कौनो के कौनो के  लड़ा-भिड़ा के अपने अलगा हो के मजा लेहल। हमरा ईयाद बा, हमरा गांव में एगो नउआ, नौमी ठाकुर रलें। बोली में बड़ी मीठ, बाकिर रलें भारी बिसखोपड़ा। गांव में जेतना लड़ाई-झगड़ा आ बवाल होखे, अधिकांश उनकरे बोवल होखे।

कोर्ट-कचहरी में भी जेतना केस-मुकदमा होला ओकरा पाछे भी लगावे-बझावे आ चढ़ावे-भिड़ावे वाला लोग होला। सुलझत मामला के भी ई चढ़ावे-बढ़ावे वाला फ़रिआवे ना देलsस।

रूस-यूक्रेन विवाद कबो विनाशकारी युद्ध के रूप ना लित, यदि अमेरिका आ नाटो ग्रुप यूक्रेन के लिहो-लिहो ना करीत आ रूस के ना उकसाइत। अमेरिका के हमेशा ई नीति रहल बा कि युद्ध जइसन हालात बनल रहो आ ओकर हथियार आ गोला-बारूद बिकात रहो। आपन ई नकारात्मक नीति में उ बहुत हद तक सफल भी रहेला आ पड़ोसी मुल्कन के कबो शांति से रहे ना देवेला। भारत के खिलाफ़ पाकिस्तान के चढ़ावत-चढ़ावत ओकरा के कंगाल आ भिखारी बना देलस आ विश्व के बहुत से देशन में अमेरिका के इहे लड़ावे-भिड़ावे के नीति चल रहल बा। अमेरिका के वजह से आज यूक्रेन पूरी तरह से तबाह आ नेस्तानाबूद हो गइल बा आ अभी भी युद्ध खतम होखे के आसार नजर नइखे आवत।  युद्ध खतम भइला के बाद वर्षों लाग जाई यूक्रेन के खड़ा होखे में।

अइसन बात नइखे कि ई युद्ध से केवल उहे दुनु देश प्रभावित बा, दुनिया भर के देश ई युद्ध के आंच महसूस कर रहल बा। जइसे कौनो भी शहर के कौनो एक सड़क पर जाम के असर अउर  दोसरो सड़क आ क्षेत्र पर दिखे लागेला, ओइसहीं यूक्रेन के समस्या से कौनो ना कौनो तरह अन्य देश भी प्रभावित बा। भगवान ना करें एमें यदि अमेरिका या कोई भी नाटो देश सीधे शामिल हो गइल त स्थिति बहुत भयावह हो सकsता। यूएनओ जइसन वैश्विक संस्था बिना कारतूस के बंदूक हो गइल बा जेकर कौनो भी प्रस्ताव के कौनो महत्व अमेरिका, रूस, चाइना आ कौनो नाटो देश ना देला। यूक्रेन के जब केहू ना लउकत रहे त उ भारत से मदद के गुहार लगवले रहे बाकिर भारत  परम्परागत मित्र रूस के सीधे तौर पर खिलाफ़त ना कर सकत रहे। एही से यूएनओ में रूस के खिलाफ पारित प्रस्ताव में तटस्थ के भूमिका निभवलस।

भारत भी रूस-यूक्रेन युद्ध के आंच से अप्रभावित नइखे आ आर्थिक-राजनीतिक समस्या से दो-चार होखे के पड़ल बा। तेल के मूल्य होखे भा शेयर बाजार के भारी उतार-चढ़ाव, भारत के भी झेले के पड़ल बा। भारत के सबसे बड़ा चिंता के विषय युद्ध ग्रस्त यूक्रेन से आपन नागरिक आ मेडिकल के पढ़ाई खातिर उहां गइल लइकन के सुरक्षित आपन देश वापस लावल रहे जे " ऑपरेशन गंगा " के वजह से संभव हो सकल। एमे भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आ उनकर सुलझल आ सकारात्मक विदेश- नीति बहुत कामे आइल।

पृष्ठभूमि 

रूस-यूक्रेन के मौजूदा विवाद के नींव तबे पड़ गइल रहे जब 2013 में रूस समर्थक यूक्रेनी राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच यूरोपीय यूनियन से चल रहल एगो महत्वपूर्ण राजनीतिक आ कारोबारी डील पर आपन सहमति ना देहलें आ उ डील पर रोक लगा देहलें। एकरा विरोध में यूक्रेन में कई हफ्ता हिंसक विरोध-प्रदर्शन भइल। मार्च ' 2014 में रूस क्रीमिया पर नियंत्रण क लिहलस। एकरा कुछ हीं समय बाद यूक्रेन के डोनेतस्क आ लुहान्सक में जहां रूस समर्थक लोग के संख्या ज्यादा रहे, के रूसी अलगाववादी ई क्षेत्रन के स्वायत घोसित क देहलन स। 2014 से यूक्रेन के रूस समर्थक क्षेत्र में छिटफुट लड़ाई जारी रहल आ यूएनओ के मुताबिक मार्च ' 2014 से अब तक लगभग 3000 से ज्यादा नागरिकन के मौत हो चुकल बा।

हथियार, प्रशिक्षण आ सैनिक के रूप में यूक्रेन के लागातार मिल रहल सहायता के रूस अपना ला खतरा मानेला। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अइसन समझौता चाहताड़े जेमे ई बात के गारंटी होखे कि यूक्रेन नाटो में शामिल ना होई आ नाटो रूस के तरफ अब ज्यादा विस्तार ना करी। रूस के स्पस्ट  रुख बा कि यदि अमेरिका आ नाटो यूक्रेन के मामले में आपन रवैया ना बदली त रूस आपन सुरक्षा खातिर कौनो भी कदम उठावे के स्वतंत्र बा। दोसरा तरफ यूक्रेन के आपन मामला में रूस के दखलंदाजी पसन्द नइखे आ अमेरिका आ नाटो से आपन गठजोड़ बढ़ावे के पक्षधर बा।

रूस के चिंता भी गैर वाजिब नइखे।  रूस के अमेरिका आ नाटो पर तनिको भरोषा नइखे, काहे कि ऊ कई बार धोखा खा चुकल बा।

1991 में सोवियत संघ के 15 स्वतंत्र राष्ट्र में विघटन के बाद रूस पूर्व सोवियत संघ के उत्तराधिकारी देश के रुप में स्थान पवलस। सोवियत संघ के विघटन के बाद अपेक्षाकृत कमजोर हो चुकल रूस अमेरिका से बेहतर संबंध बनावे के बहुत प्रयास कइलस लेकिन अमेरिका ए बात के बहुत तजब्बो ना देहलस। उदाहरण के तौर पर 1989 में अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री रूस के ओ समय के राष्ट्रपति मिखाइल गार्बाच्योब के ई भरोसा देहलें कि नाटो के विस्तार रूस के तरफ ना होई, जबकि अइसन भइल ना आ अब तक रूस के सीमा के करीब 14 देश नाटो के सदस्य हो चुकल बाड़ें। ई देशन में या त नाटो के सैन्य अड्डा बन गइल बा या बने वाला बा। अब यूक्रेन भी नाटो में सम्मिलित होखे के कमर कसले रहे त रूस के चिन्ता बढ़ गइल रहे। रूस के ई बात कौनो भी हालत में स्वीकार्य ना रहे कि ओकरा छाती पर खड़ा होके अमेरिका आ नाटो देश रूस के संप्रभुता पर खतरा उत्पन्न कर दे।

" नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन ", विवाद के दोसर मुद्दा 

एगो दोसर ताजा विवाद के मुद्दा " नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन " भी बा। अभी रूस से यूरोप तेल के आपूर्ति करेवाला पाइपलाइन यूक्रेन से होते गुजरेला लेकिन ई नया करीब-करीब बन के तैयार पाइपलाइन यूक्रेन से हो के ना जाई आ समुद्र के नीचे-नीचे सीधा जर्मनी चल जाई। यूक्रेन से गुजरे वाला वर्तमान पाइपलाइन के यूक्रेन आपन सुरक्षा के गारंटी मानेला आ बहुत बड़ा राशि रूस से किराया के रूप में भी पावेला। नया पाइपलाइन के यूक्रेन अपना खातिर खतरा के बहुत बड़ा कारण मानता  आ एसे भी आपन सुरक्षा खातिर नाटो के सदस्य बने ला बेचैन बा। रूस ई बात ला कौनो भी हालत में तैयार नइखे कि यूक्रेन नाटो के  सदस्यता ग्रहण करे आ वर्तमान गतिरोध आ संकट के ई भी बहुत बड़ा कारण बा।

उल्लेखनीय बा कि रूस विश्व के लगभग 13 प्रतिशत पेट्रोलियम आ 17 प्रतिशत प्राकृतिक गैस के उत्पादन करेला। दुनिया के कुल तेल आपूर्ति के 10 % रूस करेला। यूरोप के  40% प्राकृतिक गैस रूस हीं देला। अमेरिका आ सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया के तीसरा सबसे बड़ तेल उत्पादक देश ह ।

रूस के यूक्रेन से होके गुजरे वाला पाइपलाइन रूस पर दबाव बनावे के हथियार के रूप में यूक्रेन के इस्तेमाल करके मंशा रहल ह। रूस ई दबाव में पड़े के तैयार ना रहे या एही से उ " नोर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन " परियोजना युद्ध स्तर पर चालू कइलस जे रेकार्ड समय में पूरा भी हो गइल। अब रूस यूक्रेन पर सख्ती करे ला और भी स्वतंत्र हो गइल आ यूक्रेन के नाटो में सम्मिलित होखे से रोके खातिर कौनो भी हद तक जाए के तैयार हो गइल बा।

चढ़ जा बेटा सूली पर 

रूस पूरी तैयारी आ रणनीति के साथ रूस-यूक्रेन के सीमा पर सेना के जमावड़ा शुरू क देले रहे। अमेरिका ई बात पर लागातार चेतावनी भी देत रहे कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकsता आ रूस के धमकावल भी शुरू क देले रहे कि यदि यूक्रेन पर हमला भइल त रूस के एकर गंभीर परिणाम भुगते के पड़ी। रूस पर ई धमकी के कौनो असर ना पड़ल आ उ बदस्तूर आपन सेना द्वारा यूक्रेन के घेराबंदी जारी रखलस।

युक्रेन  ई बात के मुगालता में रहे कि रूस केवल डेरवावता, हमला ना करी लेकिन जब तक उ सच्चाई से वाकिफ़ होइत, बहुत देर हो चुकल रहे। 24 फरवरी 2022 के रूस, यूक्रेन पर हमला क देलस। यूक्रेन के अमेरिका आ नाटो देशन के भरोसा रहे कि ऊ मदद करीहन स, लेकिन एतहिये यूक्रेन से चूक हो गइल। अमेरिका आ नाटो यूक्रेन के चढा-बढ़ा के युद्ध में अकेले लड़े के छोड़ देहलें आ स्पस्ट रूप से घोषणा क देहलें कि यूक्रेन में उ आपन सेना ना भेजिहें आ लड़ाई में शामिल ना होइहें। यद्यपि अब जबकि युद्ध लंबा खींच गइल बा अमेरिका आ नाटो देश अघोषित रूप से यूक्रेन के सैन्य सहायता कर रहल बाड़ें आ रूस के यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमला जारी बा। रूसी हवाई हमला से बचे ला नीदरलैंड्स रॉकेट लांचर, एस्टोनियाई देश एन्टी टैंक मिसाइल, पोलैंड आ लातविया सतह से हवा में मार करेवाला मिसाइल, चेक गणराज्य मशीन गन, स्नाइपर राइफल, पिस्तौल आ अन्य हथियार भेज रहल बाड़न। ईहां तक कि औपचारिक रूप से तटस्थ स्वीडन आ फिनलैंड भी हथियार भेज रहल बा।

भारत-यूक्रेन संबंध 

यूक्रेन के स्वतंत्र देश बनला के बाद भारत हीं उ पहिलका देश रहे जे उंहा आपन दूतावास  खोललस। लेकिन यूक्रेन कभी भी भारत के प्रति सकारात्मक ना रहल। चाहे काश्मीर के मामला हो चाहे परमाणु-परीक्षण के, यूक्रेन कबो भारत के साथ ना देहलस। उ पाकिस्तान के सैन्य आपूर्ति भी करत रहल। एकरा बावजूद भले हीं संयुक्त राष्ट्र संघ में  रूस के खिलाफ आइल प्रस्ताव पर भारत तटस्थ रहल उ कभी भी यूक्रेन के संप्रभुता के हनन के सही ना ठहरवलस।

भारत के साथे दिक्कत ई बा कि ओकरा रूस जइसन मित्र कोई दिखाई नइखे पड़त। उल्लेखनीय बा कि जब सोवियत संघ के विघटन भइल त अमरीकी मीडिया में बहुत चटखारा ले के ई बात के चर्चा चलल कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत अनाथ हो गइल। ई बात बहुत हद तक सही भी रहे आ रूस विरोधी रहला के कारण यूक्रेन भी भारत के विरोध में हीं रहल। यूक्रेन ई बात के भी ख्याल ना रख सकल कि करीब 20 हजार भारतीय छात्र के ऊंहा मेडिकल के पढ़ाई कइला से यूक्रेन भारी विदेशी मुद्रा अर्जित करत बा।

यूक्रेन- एक संक्षिप्त परिचय

यूक्रेन के सीमा से सटल, बेलारूस, रूस, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया आ पोलैंड बा । एकरा उत्तरी छोर पर काला सागर आ जार्जिया बा। यूक्रेन के राजधानी कीव ह। रूस आ बेलारूस के सीमावर्ती उत्तरी शहर, चेर्निहिव, सूमी आ खारकीव जबकी दक्षिण में काला सागर के तटवर्ती शहर, रोस्तोव, मारियोपोल आ माइकोलेव बा।

यूक्रेन के राजधानी कीव रूसी हमला के पहिले तक एगो समृद्ध आ सुंदर शहर रहल ह जे आपन मेडिकल के पढ़ाई खातिर भी जानल जात रलs।

रूसी हमला में अपुष्ट जानकारी के अनुसार एक हजार से ज्यादा लोग मारल जा चुकल बा आ कई हजार लोग बेघर हो गइल बा। 300 से ज्यादा स्कूल-कालेज, 50 के आसपास हस्पताल आ 2000 से अधिक मकान अब तक ध्वस्त हो चुकल बा। नागरिकन के सुरक्षित जगह पलायन जारी बा आ लोग दिनचर्या के जरूरी सामान आ भोजन ला परेशान बा।

लड़ाई अभी रुके के संभावना नइखे बुझात आ रूस के ताबड़-तोड़ हमला जारी बा।

ऑपरेशन गंगा

रूस में करीब 20 हजार भारतीय छात्र आ नागरिक फंसल रलें। युद्धग्रस्त यूक्रेन से बम-बारुद के बीच से भारतीयन के  निकालल भारत सरकार ला  बड़ा टास्क रहे। खासतौर पर खारकीव आ सूमी के खौफनाक हालात से भारतीय छात्रन के सुरक्षित सीमा तक पहुँचावल बहुत जोखिम के काम रहे। एकरा पहिले भी कुवैत, अफगानिस्तान आ कुछ अन्य देश से भारत सरकार भारतीय नागरिक के सुरक्षित निष्कासन कर चुकल रहे, लेकिन ई पहिला बार  रहे जब मिसाइल हमला, गोलाबारी टैंक आ सैनिकन के सामने से भारतीय छात्र आ नागरिकन के सुरक्षित निकासी भइल।

जनवरी में हीं भारत सरकार के तरफ से अपना नागरिक लोग के ई नोटिस दिया गइल कि जे जहां बा उहें से आपन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर दें कि सरकार उ लोग के निकाले के व्यवस्था कर सकें। पहिले ई बुझात रहे कि युद्ध ना होई लेकिन जब युद्ध होखे के संभावना बढ़ गइल त 15 जनवरी के भारत सरकार आपन पहिला ' एडवाइजरी ' जारी करके नागरिकन के निकले के कहलस। अगिला ' एडवाइजरी ' 20 आ 22 जनवरी के जारी कइल गइल। ' एडवाइजरी ' के बाद चार हजार छात्र व्यवसायिक उड़ान से निकललें। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमिर जेलेन्सकी सर्कुलर जारी करवले कि हालात सामान्य बा आ छात्र लोग के परेशान भइला के जरूरत नइखे। ये बीच विमानन के किराया 50 से 70 हजार के बीच हो गइल आ करीब सोलह हजार छात्र बहुत मुश्किल हालात में उहाँ फंस चुकल रलें।

अब भारतीय प्रधानमंत्री एक्शन में अइलें आ कई राउंड उच्चस्तरीय बैठक कइलें। एयर इंडिया आ वायुसेना के विमान 87 से ज्यादा उड़ान भरलें। 300 से ज्यादा घंटा लगल। भारतीय प्रधानमंत्री युद्धग्रस्त राष्ट्राध्यक्षन से पांच बार सीधे बातचीत कइलें। चार केंद्रीय मंत्री स्लोवाकिया, हंगरी, पोलैंड आ रोमानिया में डेरा जमवलें। भारतीय अधिकारी गोलाबारी आ बमबारी के बीच युद्धग्रस्त क्षेत्रन में गइलें। हंगरी स्थित भारतीय दूतावास बुडापेस्ट में एगो कंट्रोल रूम बनवलस। एकर कमान भारतीय विदेश सेवा के 30 युवा अधिकारियन के हाथ में दिआइल। बुडापेस्ट में होटल के एगो छोट कमरा में बनावल ई कंट्रोल रूम में 30 युवा आईएफएस अधिकारी 150 से ज्यादा स्वयंसेवक आ टेक्निकल टीम के साथ रात-दिन काम में लागल रहलें।

निकासी अभियान के सुविधा ला चार टीम बना के अलग-अलग जिम्मेवारी सौपल गइल।  एक टीम सीमा पर अलग-अलग साधन से पहुचे वाला लोग पर नजर रखले रहे आ उनका के निकटवर्ती सुरक्षित स्थान पर पहुँचावे के काम कइलस। दुसरका टीम लोग के ठहरावे के व्यवस्था में रहे। तिसरका टीम सबका ला भोजन-पानी के व्यवस्था करे में रहे या चउथा टीम के ड्यूटी एयरपोर्ट पर रहे।

एतना पुख्ता आ चाक चौबंद व्यवस्था के बाद भारतीय छात्र आ नागरिक सुरक्षित भारत लौट सकलें। देखला आ पढ़ला पर ई सब फिल्मी कहानी जइसन लागता जेमें देशभक्ति, परिवार, आंसू, खुशी आ एक्शन बा, लेकिन ई हकीकत बा कि घोर युद्धग्रस्त क्षेत्र से भारतीय सुरक्षित आपन- आपन घरे, परिवार, माई-बाबूजी के लगे पहुँच गइलें।

ई सब के बीच एगो दुखद पहलू ई भी रहल कि युद्धग्रस्त यूक्रेन के खारकीव शहर में भारी गोलाबारी के बीच भारत के कर्नाटक राज्य के एक मेडिकल छात्र नवीन शेखरप्पा के खाना खातिर लाइन में लगला के दौरान गोलीबारी में मौत हो गइल। पंजाब के बरनाला निवासी मेडिकल छात्र चंदन जिंदल के ब्रेन हेमरेज के कारण मृत्यु हो गइल।

युद्ध के दौरान भारत के तिरंगा के महत्व दिखल जब कई दूसरा देश के नागरिक आ छात्र सुरक्षित निकले खातिर तिरंगा के सहारा लिहलें आ तिरंगा के साथे सुरक्षित बाहर निकल गइलें।

" सर्वेंट ऑफ पीपल "

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेन्सकी राजनीति में आवे से पहिले टीवी कलाकार आ कॉमेडियन रलें। ई यूक्रेन के छठा राष्ट्रपति हउवें। जेलेन्सकी करीब 45 वर्ष के बाड़न आ  ईनकर पत्नी के नाम ओलेना जेलेन्सकी ह। इनका दु गो संतान बा आ आकर्षक छवि के मालिक बाड़न।

आज पूरा विश्व में रूस जइसन शक्तिशाली देश से बहादुरी से टक्कर लेवे खातिर चर्चा में बाड़न। जेलेन्सकी के पार्टी के नाम " सर्वेंट ऑफ पीपल " ह आ पार्टी के ई नाम जेलेन्सकी द्वारा अभिनीत उ लोकप्रिय टीवी धारावाहिक के नाम ह जेमें उ एगो हाई स्कूल शिक्षक के भूमिका कइले बाड़े जे बाद में यूक्रेन के राष्ट्रपति बन जाता। 2015 से 2019 तक चलल ई धारावाहिक बहुत लोकप्रिय रहे।

टीवी आ सोसल प्लेटफॉर्म के लोकप्रियता से जेलेन्सकी राष्ट्रपति के चुनाव लड़े के मन बनवले आ आज सचमुच यूक्रेन के चर्चित राष्ट्रपति बाड़न।

भारतीय मेडिकल छात्र और उनका भविष्य

यूक्रेन संकट से विश्व के अलग-अलग देश अलग-अलग तरह के मुद्दा से जूझ रहल बाड़े। यूक्रेन में चल रहल युद्ध के साथहीं भारत में मेडिकल शिक्षा के कमजोर आ मध्यम वर्ग के पहुँच से दूर व्यवस्था पर सवाल उठे लागल बा। भारत के आबादी आ आबादी के हिसाब से कम आ महंगा मेडिकल पढ़ाई, चर्चा के विषय बन गइल बा। देश के आजादी के बाद से बढ़त आबादी के हिसाब से मेडिकल शिक्षा के मुद्दा पर कभी भी गंभीरता से विचार ना भइल।

आज देश में कुल 586 मेडिकल कॉलेज बा जेमें 276 निजी मेडिकल कॉलेज बाड़न स। जहां कम सीट भइला के वजह से सामान्य विद्यार्थी 500 से 600 के बीच अंक अइला के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नइखन पावत उहें निजी मेडिकल कॉलेजन के करोड़ रुपया फीस जुटावल उनका ला आकाश-कुसुम बा। एही से बड़ी संख्या में छात्र यूक्रेन, रूस, फिलीपींस, चीन, तजाकिस्तान आ इहां तक कि नेपाल आ बांग्लादेश भी जा रहल बाड़ें। ई देशन में बिना नीट परीक्षा पास कइले भी सीधे प्रवेश मिल जाला। ई देशन में 20 से 25 लाख में मेडिकल के पूरा पढ़ाई हो जाला। एही वजह से करीब 40 हजार छात्र हर साल मेडिकल के पढ़ाई खातिर विदेश जालें।

अबकी ई समस्या पर मोदी सरकार के ध्यान गइल बा आ ई निर्णय भईल बा कि निजी मेडिकल कॉलेजन के आधा सीट पर सरकारी मेडिकल कॉलेज के बराबर हीं फीस लिआई। निर्णय त हो गइल लेकिन एकर अनुपालन कइल आ करावल आसान नइखे। निजी मेडिकल कॉलेज चलावे वाला लोग छोट-मोट लोग नइखे। ई कॉलेज बड़ा-बड़ा नेता, नौकरशाह आ पूँजीपतियन के गंठजोड़ चलावे ला जे पूरा सरकारी तंत्र आ निर्णय के प्रभावित करेके ताकत रखsता। अब अइसन स्थिति में ई समस्या के समाधान आसान काम नइखे।

दोसर बड़का समस्या बा आधा-अधूरा पढ़ाई छोड़ के आइल मेडिकल छात्रन में भविष्य के ले के चिंता। यदि युद्ध आज ख़तम भी हो जाता त यूक्रेन के फिर से खड़ा होखे में बहुत समय लग जाई। अब समस्या  लइकन के बाकी पढ़ाई आ ओमें लागल पैसा के भी बा।  मध्यम वर्ग के विद्यार्थी खातिर 20-25 लाख के व्यवस्था भी के तरे भइल होई ई उ परिवारे जानत होई। सरकार भी ई बात पर मंथन कर रहल बा, बाकिर ई समस्या के कौनो ठोस समाधान के रास्ता फिलहाल नइखे लउकत।

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