रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव।

रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव।

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Posted: May 6, 2022
Category: आलेख
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राजेश पाण्डेय

"मन धक् से हो गल बा युद्ध के नाम सुनते
कब ले चली दुनिया में ये आपसी वर्चस्व के लड़ाई"

रूस यूक्रेन युद्ध के कई गो आयाम बा। इ युद्ध बाघ बकरी के बीच होत बा। एक ओर महाशक्ति तऽ दूसरा ओर यूक्रेन जइसन नवहीं देश बा, फेर युद्ध काहे भइल। एकरा पर विचार करे के परी कि रूस-अमेरिका-यूक्रेन-भारत अउर पूरा संसार एकरा से प्रभावित बा।

बाकिर प्रसिद्ध गीतकार साहिर लुधियानवी कहले बाड़े कि "ए शरीफ इंसानों जंग टलती रहे तो बेहतर है"। जंग किसी मसले का हल नहीं क्योंकि जंग खुद में एक मसला है। हमनी के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई कहले बानी कि मित्र बदलल जा सकऽता बाकीर पड़ोसी नइखे बदलल जा सकत। एह बात के यूक्रेन अउर रूस दूनो देश के समझे के परी।

कोरोना के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध पूरा विश्व के एक बार फेर दर्द, पीड़ा देले बा। यूक्रेन यूरोप के दूसरा सबसे बड़ा देश बा, एकर क्षेत्रफल छह लाख बीस हजार किलोमीटर बा। एकर राजधानी कीव शहर हऽ। इहाँ के जनसंख्या चार करोड सत्तर लाख बा। इहां के लोग बड़ा भावुक अउर दयालु होला। इहां खेती खूब कइल जाला इहे कारण बा कि पूरा यूरोप के ई गेंहू के आपूर्ति करेला। यूक्रेन के ब्रेड के टोकरी कहल जाला। सूरजमुखी खाद्य तेल के बहुत बड़ा निर्यातक देश हवे। कई गो देशन के हजारों छात्र इहां पढ़ाई करेले। प्राकृतिक रूप से बहुत सुन्दर देश बा।

रूस काहे आक्रमण कलस

रूस के एह बात के डर बा कि हमरा पड़ोस में अमेरिका आ नाटो सैनिक संगठन आ के बइठ जाई। बाकिर एह युद्ध के सान-गुमान ढेर समय पहिले से बा। 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन में ढेर परमाणु हथियार के जखीरा रहे, जेकरा के रूस-अमेरिका, ब्रिटेन कूटनीति से नष्ट करवा देहले अउर वादा कइले कि यूक्रेन के हमनी रक्षा करब।

सोवियत रूस के विघटन के बाद नवहीं देशन में संघर्ष आंदोलन से कौनो नेता ना उपजले। इ नेता लोग प्रशासनिक अधिकारी रहल बा। इ देश संप्रभुता, लोकतंत्र, राष्ट्रीयता, अंतर्राष्ट्रीय संबंध आ  कूटनीति समझले बिना ही स्वतंत्र देश बन गइल बा। यूक्रेन पर रूस के हमला 2014 में क्रीमिया पर हमला के विस्तार बा। बाकिर ओकरा से पहिले चलल जाव तऽ 2008 में बुखारेस्ट सम्मेलन में कई गो कारण से जॉर्जिया पर हमला भइल। जॉर्जिया के खंडित करे के साथे रूसी राष्ट्रपति पुतिन स्पष्ट कर देले कि रूस नाटो के घेराबंदी बर्दाश्त ना करीऽ।

दूसरा विश्व युद्ध के बाद संसार अमेरिका अउर सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध में फस गइल। एह समय अमेरिका सोवियत संघ के घेरे खातिर नाटो नाम से सैन्य-संगठन बनवलस। एकरा जवाब में सोवियत संघ वारसा पैक्ट बनवलस। सोवियत संघ के टूटला के बाद वारसा पैक्ट समाप्त हो गइल जबकि नाटो के विस्तार लगातार होत गइल। नाटो के ई घेराबंदी के विरोध रूस 1997 से ही लगातार विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच पर करत बा।

रूसी क्रांति के जनक लेनिन पहिले कहले रहले कि रूस खातिर यूक्रेन के गंवावल ठीक ओइसने बा जइसे शरीर से एगो हिस्सा के अलग कऽ दिहल जाव। कई तरह से प्राकृतिक संसाधन के अधिकता से यूक्रेन रूस खातिर काफी महत्वपूर्ण बा। यदि यूक्रेन नाटो के सदस्य हो जाई तऽ रूस पूरा तरीका से विरोधी ताकतन से घेरा जाई, अउर यूक्रेन से मास्को के दूरी 600 किलोमीटर रह जाई।

केहू के संपत्ति गल केहू के पढ़ाई गइल
गजबे के फैसला रूस-यूक्रेन अमेरिका के बीच भ
1991 के बाद ऊ लवटल बा ओकरा का मालूम कि दुनिया के केतना लोर समुंदर में जियान भइल

रूस में बसल मूल रूप से सीवान,बिहार के रहे वाला डॉ अभय कुमार सिंह के कहनाम बा कि रूस के संप्रभुता खातिर यूक्रेन के धरती के दुरुपयोग हो ताऽ, एकरा के रूस कबो बर्दास्त ना करी। यूक्रेन के उकसावे, भड़कावे के पीछे अमेरिका आ कुछ यूरोपीय देशन के हाथ बा जवन ठीक नइखे, रूस आपन सुरक्षा खातिर कवनो कीमत चुकावे के तैयार बा।

रूस-भारत-यूक्रेन संबंध

संयुक्त राष्ट्र अमेरिकी तंत्र के छाता ओढ़ले बा ।
असलियत के सीत घाम से मुंह चुरवले बा।।

1991 के बाद यूक्रेन के स्वतंत्र राष्ट्र बनला पर भारत उ पहिला देश रहे जवन उहाँ आपन दूतावास खोललस। बाकिर यूक्रेन अंतरराष्ट्रीय मंच पर कबो भारत के साथ ना देहलस, चाहे उ कश्मीर के मामला हो, परमाणु परीक्षण के हो आ सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के बात हो। तबो भारत के कहना बा कि हम वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास करे वाला राष्ट्र बानी, सर्वे भवन्तु सुखिनः हमनी के ध्येय हऽ।

भारत हमेशा से कहत रहल बा कि युद्ध से समस्या के समाधान ना होई, बलूक आपसी बातचीत से समस्या के समाधान होई। ओही जा भारत आपन सैन्य संगठन के आधा हिस्सा रूस से प्राप्त करेला। रूस भारत के एगो भरोसेमंद सहयोगी हवे। हमनी के 1971 के लड़ाई में रूस खूब मदद कइले रहे, आपन सातवां बेड़ा सहायता में भेजले रहे। रूस हमेशा से भारत के कश्मीर नीति, आतंकवाद विरोधी नीति समेत कई गो मसला पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग व समर्थन करेला। हमनी के ईहो ना भुलाए के चाहीं कि जब सोवियत संघ 1956 में हंगरी पर हमला कइलस तब संयुक्त राष्ट्र में नेहरू जी तटस्थ रहनी।

भारत अगर रूस के विरोध करता त अपना पड़ोस में चीन-पाकिस्तान- रूस के गठबंधन मजबूत होत देखे के परी, अउर पाकिस्तान आ चीन भारत विरोधी काम करीहे सन। हमनी के अपील करते रहे के बा कि युद्ध खत्म होखे के चाही। भारत संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ आइल प्रस्ताव पर मतदान के समय तटस्थ रहल बा।

याद रहे के चाहीं कि जब सोवियत संघ के विघटन भइल तब अमेरिकी मीडिया कहले रहे कि  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत अनाथ हो गइल।

अमेरिका लगातार पिछला 50 वर्ष से पाकिस्तान के सैन्य-संसाधन से मदद करत रहल बा। जब अमेरिका में 2001 में 9/11 के घटना भइल तब उ भारत के बात पर ध्यान देबे लागल। रूस यूक्रेन संकट में रूस से चीन के नजदीकी हमार चिंता के विषय बा। रूस के चीन पर बहुत आर्थिक निर्भरता चीन के बरियार बनावत बा। एह समय में भारत के रूस से पुराना दोस्ती के याद दिलावत रहे के बा।

ओकरा संगे रहे के परी, बाकिर विश्व के सबसे बड़ा लोकतंत्र भइला से हमरा ऊपर मानवीय जिम्मेदारी बा कि हमनी के युद्ध के कइसे रोकी। बेघर पलायन करत जनता के कइसे बचावल जाव। हमनी के 20000 छात्र मेडिकल के पढ़ाई यूक्रेन में कर रहल बाडे, लइकन के पढ़ाई बीच में लटक गइल बा। भारत के दुविधा के बारे में पूरा संसार समझ रहल बा। बाकिर भारत के भी आपन निर्भरता दूसरा देसन पर जरूर कम करे के चाहीं।

अमेरिका के स्थिति

"संयुक्त राष्ट्र के पोखरा में जलकुंभी छपले बा
देख यूक्रेन ही में परछाई आपन"।

अफगानिस्तान से जब अमेरिकी सेना जात रहे तऽ इ अनुमान लगावल कठिन रहे कि अब विश्व राजनीति में का होई। बाकिर एही बात के रूस के इंतजार रहे अउर रूस यूक्रेन पर हमला करे खातिर अपन तैयारी करे लागल।

पूरा दुनिया के लागल कि जवन महाशक्ति अफगानिस्तान के ना बचवलस ऊ यूक्रेन पर काऽ करी। हमनी के याद रहे के चाहीं कि अमेरिका काहे वियतनाम, इराक, लीबिया पर हमला कइलस। आपन पड़ोसी देश ग्वाटेमाला व होडुरास पर एह खातिर हमला कइलस कि साम्यवाद ओकरा दरवाजा तक पहुंच गइल बा।

यूक्रेन के उकसावा में अमेरिका के हाथ बा काहे कि ओकरा अपना शक्ति के वैश्विक पुनर्स्थापना करे खातिर एगो खलनायक के आवश्यकता रहे, जवन पुतिन के रूप में प्राप्त हो गइल बा जवन एक समय में फिडेल कास्त्रो अउर लादेन में अमेरिका देखत रहे। अमेरिका के अगर यूक्रेन के ना बचावे के रहे त पहिले ही रूस से कवनो समझौता कर लेवे के चाहत रहे, फेर यूक्रेन के बलि के बकरा काहे बनावल गइल। महाशक्तियन के आपसी भय के आशंका में यूक्रेन के बर्बाद कर दिहल गइल।

बाकिर अमेरिका के वैश्विक महत्वाकांक्षा बा जबकि उनकर यूरोपीय दोस्त देश के क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा बा, अइसे में अमेरिका अपना रणनीति के लेके अपने आप में विभाजित बा। ओकर चाहत बा कि हमार दोस्त देश एशिया पेसिफिक राजनीति में भी भाग ले, बाकिर ऊ लोग अइसन नइखे चाहत।

अमेरिका आ यूरोपीय देश रूस पर प्रतिबंध लगवले बाड़े बाकिर पेट्रोलियम पदार्थ पर प्रतिबंध नइखे लागल, काहे कि पूरा यूरोप में 40% तेल की आपूर्ति रूस करेला। अमेरिका फिलहाल शान्त बा, बाकिर उ जरूर कवनो न कवनो रणनीति बनाई अउर एक बार फेर पूरा विश्व के एगो अलग तरह के तनाव देखे के जरूर मिली।

परमाणु हमला आ तीसरा विश्व युद्ध

"गजबे उल्टा भल बा ई दुनिया के सियासत में।
जहां बस चोर एगो बा आ चालीस गो अली बाबा"।।

रूस यूक्रेन युद्ध में एह बात के आशंका बहुत कम बा कि परमाणु हमला होई आ पूरा विश्व दू गो गुट में बंट जाई। काहे कि अमेरिका आ रूस आपन गलतफहमी दूर करे खातिर सैन्य सूचना के आदान प्रदान कर सकऽ ता लोग। एकर प्रयोग सीरिया में 2015 से अमेरिका आ रूस कर रहल बा। बाकिर पुतिन अपना परमाणु हथियार के चौकन्ना कर देले बाड़े। अमेरिका शान्त बा, एसे कम संभावना बा आ नईखे। ज्यादा से ज्यादा ई होई कि पुतीन अपना अभियान में माल्डोवा तक बढ़ सकतऽ बाडे। अउर अच्छी तरह से यूक्रेन के सीमा के तीनों ओर से किलाबंदी कर दिहें।

युद्ध के बाद सभे हो जाई भाई भाई बाकिर करा में जे परी ओकर हो जाई कुटाई

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