रूस-युक्रेन युद्ध माने बरबादी के मंजर

रूस-युक्रेन युद्ध माने बरबादी के मंजर

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Posted: May 6, 2022
Category: आवरण कथा
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मंजूश्री

जब कवनो देश के मूढ़ मू़र्ख हठी अनुभवहीन नकलनवीस शासक मिल जाला तब तबाही बरबादी के मंजर देखे के मिलेला। युक्रेन के वर्तमान राष्ट्रपति के भी इहे हाल बा। हालाँकि उ चुनाव से ही आइल बाडे़ लेकिन कवनो राष्ट्र के निर्माण कइसे होला, राजनीति-कूटनीति का होला देसभक्ति के माने का होला, एगो नागरिक के कीमत का होला ई बात कत्तई नइखन जानत। उ युक्रेन आ अपना महादेश के हित नइखन जानत, जानत रहिते त परमाणु युद्ध के खतरा ना उत्पन्न भइल रहित। युक्रेन में जवन तबाही मचल बा उ ना मचल रहित। ओहिजा के सुख शान्ति समृद्धि शिक्षा साधन खेतीबारी नष्ट ना भइल रहित। दुनियाँ में प्रदूषण आ महँगाई भुखमरी के खतरा ना पैदा भइल रहीत ।

आज युद्ध के चौदहवाँ दिन बीत गइल, हालत नाजुक से नाजुक बद से बदतर हो आइल बा, ओहिजा से विदेशी लोग त भागिए आवता ओहुजा के लोग शरणार्थी बने खातिर मजबूर हो गइल बा। शरणार्थी का कहाला, ई बात पचासन बरिस से जे अपना जमीन से उखड़के दर-दर के ठोकर खाता उ जानता। बांग्ला देशी चाहे रोमा बंजारा चाहे हाल ले जमीन के टुकड़ा खातिर लड़त मरत इजरायल होखे। युद्ध के त्रासदी इहे लोग जानता। जे युद्ध में मरा गइल से वीरगति पा लेहल, लेकिन जे घायल हो गइल, हताहत हो गइल, ओपर से परमाणु हथियार के शिकार हो गइल, ओकर त आदो-औलाद गलल पचल पैदा होला, नागासाकी के याद बानू।

ई लडा़ई कवनो एक दिन के खेला ना ह, हमरा लागता ई चुनाव के पहिलहीं गोटी बइठावल बा, आम जनता का सुख के साधन चाही चमक दमक पर ओकर मत बदल जाला। लडा़ई से बिजनेस करे वाला, जान के सौदा क के पेट पाले वाला लोग का विश्वात्मा के दुख से का मतलब। उ त अपना हवस से मजबूर बा।

सोवियत संघ के विघटनो धकड़ईए के लड़ाई रहो, ओहू बेरा रस्साकस्सी चलत रहे दूसरका विश्वयुद्ध के समे मित्र राष्ट्र के संगे सोवियत रूस रहे लेकिन उ समय के जरूरत रहे, लेकिन वास्तव में रूस के प्रकृति आ यूरोपिय देशन के मूल प्रकृति मे ताल मेल के कवनो सवाले ना रहे। आदमी खातिर पूँजी एगो आवश्यक साधन ह लेकिन ओकरा संग्रह आ वितरण में साम्यवादी देश आ पूँजीवादी देश में भारी अंतर होला। पूँजीवादी देश अपना नागरिक के भी धन संग्रह के मौका देला आ साम्यवादी देश निजि धनसंग्रह ना करे देला ओजी सब धन गोपाल के होला माने कमाई देश के नागरिक लेकिन उत्पादन देस के हो जाई। सभका कोटा से भोजन वस्त्र मिली, अपना मने कहीं केहू ना जाई आई ना बोली बतिआई।

सोवियत साम्यवाद में माई बेटा, मरद-मेहरारू भी एक दोसरा पर जासूसी करे लो। लोग खुल के ना जी  सके। दमघोटू वातावरण रहे। कइसे-कइसे लोग जिनगी काटत रहे लेकिन धन देश के विकास में लागे। सोवियतो अपना ढंग से आगे बढत रहे।  इहाँ ले कि धरती से अंतरिक्ष ले ओकर कदम आगे चलत रहे।   ई बात तारीफ के आ इर्ष्या दुनू के रहे।

लेकिन तारीफ केहू ना करेला बाकी इर्ष्या तुरंत करेला। सोवियत संघ के लोग कथित समाजवाद आ सचउकी मार्क्सवादी तानाशाही से वेंटिलेटर पर हाँफत रहे लोग तबे गोर्वाचोव सत्ता में अइले। उ उदारवादी सोच राखत रहले। उ लोग के खुलापन देबे लगले जवना के फल भइल कि सोवियत संघ टूट गइल आ 19 गो देश बन गइल। दुनियाँ में सोवियत संघ के रूस के नाम से जानल जात रहे, उ रूस एगो छोट प्रान्त बराबर रह गइल।

लेकिन तीसे बरिस में ओइजा के नया विकास भइल।  उन्निसो देश के विकास भइल। विकास के दौर में युक्रेनो विकसित भइल। उ गेंहूँ के बड़हन उत्पादक देश बन गइल आ यूरोपीय देशन के गेंहूँ के आपूर्तिकर्ता ह।  उ खाद्यानन के तेलो बनावेला।  उ एगो बड़हन शिक्षाहब के रूप में भी विकास कइले रहल ह। पच्चीसन हजार छात्र त उहाँ भारतीय रहले हं।  ए घातक जंग के समय ओ लोग के सुरक्षित वापस बोलावल भारत के पहिलका ड्युटि बन गइल ह। आज वैश्विकरण के चलते हर देश के लोग हर देश में बा।  कवनो आपदा के बेरा ओ लोग के सुरक्षा के गम्भीर जिम्मेवारी सरकार पर आ जाला। सोचीं, जहाँ परमाणु ठिकाना पर बम्मवारी होता ओहिजा से सुरक्षित वापसी केतना खतरनाक होई ?

हं युक्रेन के विकास के बात होत रहल ह- उ व्यापारिक कृषि शिक्षा व्यापार आ पारमाणविक विकास में अपना पैर पर खडा़ हो गइल रहल ह, लेकिन दुनियाँ के कुटनीति ए चीज के सीधी सरल नजर से कइसे देखी ?  दुनियाँ में वर्चस्व के अदृश्य लडा़ई चलत रहेला।

ओ लड़ाई के शिकार युक्रेनो हो गइल ह।  विरोधी कुटनीत का एकर मौका चुनाव के बेरा मिल गइल।  प्रचार-प्रसार में चमक-दमक देखा के विदेशी ताकत के बले एगो हास्य अभिनेता ओजा के राष्ट्रपति बन गइल। वोटर के ई एगो बड़हन दोष ह कि उ तत्काल फायदा देखके बदल जाला। मतदाता के ई दोष देशहित ना अनहित क देला। एगो अराजनैतिक राष्ट्राध्यक्ष स्वभाविक बा कि विदेशी कठपुतली बन जाई, उ नॉटो के पीछे दउड़ले ह अमेरिका के भरोसा कइले ह, जबकि इ मूल रूप से सोवियत विरोधी हउवन स। ई बात बेचारा के समझ के बाहर के बा, शत्रु कबो शत्रु होला। जब भी देश टूटो चाहे घर, राष्ट्रदेवता या कुल देवता रोवेला काहे से कि एकता अपना कमजोर स्थल के रक्षा करेला आ टूटला का बाद उ सेंसिटिवप्वाॅइण्ट अपना के पूर्ण इकाई बुझ के उलूलजूलूल काम करे लागेला जवना का ताक में दुश्मन लागल रहेला बस उ घात क देला, इहे हाल युक्रेन के भइल बा।

या चने की खेती या बेटीन के बाढ़।

एतनो पर जो धन ना घटे तो करो बड़न से राड़।।

अभी युद्ध क्लाइमेक्स पर बा एक ओर भयंकर हालत बा दुसरा ओर रोजे युद्ध रोके के वार्ता चलता लेकिन रूके के आसार नइखे।  शस्त्रवार के संगे संगे न्युजवार भी चलता

युक्रेन त तबाह होइए गइल बा रूस भी जंगे दलदल में फँसल बा क्रिया के प्रतिक्रिया होला दोसरा के एक चटकन मारला पर आपनो हाथ झनझनाला। रूस सोचलहुं ना होई भयानक टक्कर होईउ शुरू में सोचले होई गीदड़ भभकी से काम चल जाई पूर्व राष्ट्रपति रूस भाग आइल बाडे़ विदेशमंत्री आ रक्षामंत्री सीज फायर खातिर तत्पर बाडे़ त जेलेंस्की हार मान लिहें लेकिन ना हार आ प्राणभय से त्रस्त जेलेंस्की लड़े खातिर मजबूर बाड़े।

युद्ध के फल कबो शुभ ना होलावर्तमान त तबाह होईए जाला आवे वाला पीढी़ भी ओकर खमिआजा भोगेला। अभी सारा संसार कोरोना से लड़ते रहल ह ओपर से इ लडा़ई विश्वात्मा के पीडा़ पहुँचावे खातिर आ खडा़ भइल बा। हम त इहे कामना करब कि विश्वजनमत एकजूट होखो आ ई लडा़ई जल्दि से जल्दि बंद कइल जाए।

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