यूक्रेन-एक अन्य परिपेक्ष

Hum BhojpuriaMay 6, 2022174

हरेन्द्र कुमार पाण्डेय

3 मार्च, 2022 के बिहार के मुख्यमंत्री के एगो बयान खूब चर्चा में आइल। उ साफतौर पर कहले जे उनका मालूम ना रहल ह कि भारत के हजारो-हजार पढुआ यूक्रेन जइसन देश में पढ़े गइल बाड़न। ए से नितीश कुमार के ईमानदारी त झलकता, साथही ईहो जाहिर होता कि भारत के भाग्य बिधाता लोग ईहाँ के जमीनी हालत से कतना अनभिज्ञ बा। शिक्षा जगत में फइलल अराजकता आ माफियागिरि राजनीति खातिर एगो बड़ा हथियार जइसन उपयोग होत रहल बा।

खैर ई बिषयान्तर समझ के आगे बढ़ल जाव। अपना देश में चूँकि शिक्षा के बुनियाद अंग्रेजी पद्धति पर आधारित बा हमनी के ना केवल जानकारी के बल्कि सोचे के भी जड़ ब्रिटेन आ अमेरिका जइसन बा। भारत के अखबार आ टी.वी. पश्चिम के कब्जा में बा जवना कारण हमनी के सोच आ समझ ओकरे विचार से अवगत बा। रूस-यूक्रेन युद्ध के पीछे के इतिहास जानल जरूरी बा। द्वितीय विश्वयुद्ध में रूस विजेता के तरह उभरल आ सबके मालूम बा कि दुनिया के राजनीतिक ध्रुवीकरण भइल। पूर्वी यूरोप पर रूस के आधिपत्त्य हो गईल- इहाँ तक कि जर्मनी के दू हिस्सा हो गइल। 1953 में स्टालीन के मृत्यु के बाद खुरस्चेव के शासनकाल में रूस तेजी से औद्योगीकरण के ओर बढ़ल आ साथ-साथ ओकरा क्षमता में भी वृद्धि भइल। लेकिन 80 के दशक में उदारीकरण के बयार के साथ ही वैश्वीक बाजार के आँधी में सोवियत पिछड़ गइल। अन्ततोगत्त्वा, सोवियत संघ 15 देश में विभक्त हो गइल—रूस, यूक्रेन, जौर्जिया, बेलारूस, उजबेकिस्तान, अर्मेनिया, अजेरबिजान, कजारिस्तान, कैरिस्तान, माल्डोवा, तुर्केनि, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तम आ लाटिवा। इहाँ जानल जरूरी बा जे रूस एशिया आ यूरोप दुनो महादेश में फइलल बा लेकिन ओकर आत्मा यूरोप में ही बसेला। आ इहे कारण बा कि रूस के दुश्मनी यूरोपीय देशन से हमेशा रहल बा।

अब एक नजर यूक्रेन के स्थिति पर डाल लीहल जाव। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 19 मार्च, 1918 में यूक्रेनियन कांग्रेस आ सोवियत रूसी सोवियत के बीच समझौता भइल। एकरे बाद यूक्रेन हो गइल यूक्रेनियम सोवियत गणतन्त्र। रूस आ यूक्रेन मिलके सोवियत संघ गणराज्य के स्थापना कइले रहे। संक्षेप में यूक्रेन सामाजिक आ राजनैतिक रूप से रूस के नजदीक रहल बा। सोवियत संघ के विघटन के बाद भी दूनो में संबंध में खास गिरावट ना देखल गइल रहे। तब बर्तमान युद्ध के कारण का बा?

दिसम्बर, 2013 में अमेरिका के दूनो मुख्य राजनीतिक दल के सदस्य जॉन मैकॉन (रिपब्लिक पार्टी) आ क्राईस मर्फी (डेमोक्रेटिक पार्टी) यूक्रेन में आइल रहस। भीड़ के संबोधित करे के क्रम में वो सब के बक्तव्य रहे—यूक्रेन यूरोप के बेहतर बना सकता आ यूरोप यूक्रेन के। यूक्रेन के आपन बेहतर भविष्य खातिर यूक्रेन स्वाधीन आ स्वतंत्र बा। हमनी एजा ई बतावे चाहत बानी कि अमेरिका यूक्रेन के पक्ष में बा।

एही बीच यूरोपियन यूनियन के स्थापना भइल आ समस्त यूरोप में एक मुद्रा  “यूरो“ के चलन शुरू हो गइल। बतावे के जरूरत नइखे कि विश्व व्यापार अमेरिकन डॉलर आ यूरोपियन यूरो से ही चलेला। आर्थिक वैश्वीकरण के बाजार यूक्रेन के प्रभावित कइलस। लेकिन नवम्बर में यूक्रेन के जनता भी दू भाग में बँट गइल। एक त नया हवा के पक्ष में जहाँ सबकुछ चकाचौंध करत रहे जेकरा के आधुनिक तकनीक इंटरनेट, मोबाईल हवा देत रहे। दोसर जवना के जड़ सोवियत समाजतंत्र में रहे। नतिजन सोच त बदल गइल लेकिन यूक्रेन के आधारभूत ढाँचा रसियन रह गइल। इहाँ तक कि यूक्रेन अपना परमाणु संयंत्र जवन चर्नोबाइल में बा खातिर नाभिकीय इंधन रूस से ही लेला।

यूक्रेन से रूस के संबंध खुला तौर पर सामने आइल जब रूस क्रिमीया राज्य के अपना में मिला लीहलस आ पश्चिमी प्रभाव में यूक्रेन, नाटो के सदस्यता के ओर बढ़े लागल। अमेरिका कवनो ना कवनो बहाना से यूक्रेन के फंड देबे लागल।

फरवरी 2012 में पुतीन के राष्ट्रपति पद संभलला के बाद रूस भी अपना पुराना गौरव प्राप्त करे के दिशा में पुरजोर कोशिश करे लागल। यूक्रेन जवन सोवियत संघ के प्रमुख हिस्सा रहे ओकरा के अमेरिकन ब्लॉक में जात उ कइसे सहे। एकरा के घेरे खातिर उ आपन तैयारी बहुत दिन से करे लागल रहे। लेकिन पश्चिमी मिडिया ओह चीज के प्रचार ना कइल। इहाँ तक कि जब रूस अपना सेना में यूक्रेन के तीनों ओर से घेराबंदी करत रहे त अमेरिका का ओकर पिछलग्गू यूरोपीय देश यूक्रेन के पीठ थपथपावत रहे।

इहाँ हम प्रसंग से बाहर आवेके अनुमति ले तानी। इंटरनेट का युग में एगो धारण जन्मल बा कि हम सब जानतानी। आ हमरा जानकारी के अलावा बाहर कुछ होईए ना सके। अमेरिका एह सोच आ समझ के पुरोधा बा। कुछे दिन पहिले अफगानिस्तान में जवन घटल ओकरा से कवनो शिक्षा ना मिलल। टी.वी. में रोज दिखावल जाय जे तालिबानी विद्रोही के काबुल आवे में कम-से-कम 40 दिन लागी। लेकिन एक हफ्ता के अंदर ही तालिबन काबुल पर दखल कर लिहलस।

ठीक एही तरह पश्चिमी दुनिया आराम से रहे रूस गीदड़ भड़की देता। ओकरा युद्ध करे लायक सामर्थ नइखे। ओने रूस आपन सेना बेलारूस होके यूक्रेन में ढूकावे लागल। यूक्रेन के राष्ट्रपति सबका से गुहार लगावे लगलन। अब सब लोग रूस से ओके बचावे मे ब्रिटेन, फ्रान्स, अमेरिका जइसन देश फुफकारे लगलन। रूस से व्यापार बंद करे के एक पर एक घोषणा होखे लागल। सभे चिल्लात रहल जे रूस से लड़ाई मे हमनी यूक्रेन के साथ बानी लेकिन केहू लड़े ना आइल।

लड़ाई बंद करे के एके गो शर्त पुतिन बतवले-यूक्रेन आ पश्चिमी देश ई शर्त मानलेव कि उ नाटो के सदस्य ना बनी। नाटो माने नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी अर्गरनाइजेसन जवना में अमेरिका सहित यूरोप के करीब-करीब सब देश बा। एकर, महत्वपूर्ण उद्देश्य बा जे कवनो सदस्य देश पर आक्रमण पूरा नाटो बिरादरी पर आक्रमण समझल जाई। अब एही बात के बहाना के तरह इस्तेमाल करत अमेरिका कहता यूक्रेन चूँकि नाटो के सदस्य नइखे ओकरा खातिर हमनी का लड़ ना सकीला। लेकिन युद्ध के सामान के आपूर्ति करब। पूरा प्रदर्शन के सुयोग आ गइल बा। खैर ई सूजोग रूस के पक्ष में भी ओतने बा। लड़ाई अभी चल रहल बा।

अब थोड़ा यूक्रेन के भौगोलिक स्थिति भी देख लिहल जाव। पूर्वी यूरोप में रूस का बाद यूक्रेन के क्षेत्रफल सबसे ज्यादा बा 6,03,623 वर्ग किलोमीटर। अधिकांश जमीन कृषि योग्य बा जवना से ई दुनिया में सबसे अधिक अनाज निर्यात करेवाला देसन में शामिल बा। यूक्रेन में प्राकृतिक संसाधन के भी प्रचुरता बा जेमे लिथियम आ प्राकृतिक गैस जइसन महत्त्वपूर्ण खनिज बा। एकरा पश्चिम में पोलैंड, स्लोवाकिया, उत्तर में बेलारूस, दक्षिण में रोमानिया आ पूर्व में रूस बा। पश्चिम छोड़ के तीन ओर से ई रूस का बंलारूस से घिरल बा।

यूक्रेन के अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित बा। लेकिन कंट्रोल सरकारी कंट्रोल वाला पुरान व्यवस्था से बाहर निकलल ओकरा खातिर कठिन रहल बा। दु शब्द में कहल जाव त यूक्रेन के एक श्रेणी आज भी पुराना सरकारी नियंत्रण वाला व्यवस्था के पक्षपाती बा। आ ई एगो बड़हन कारण बा वर्तमान युद्ध के। समाज के एक श्रेणी आधुनिकीकरण के पक्ष में बा जबकि एक पक्ष पुराना सिस्टम के पक्ष बा। 2000 साल से यूक्रेनियन सरकार आधुनिकीकरण के पक्ष में रहल बा। 2012 में राष्ट्रपति विक्टर यानूकोव यूरोपियन यूनियन से जुड़े वाला समझौता कइले ओकरे बाद रूस आवे वाला दिन में आपन नुकसान के अंदाज लगावे लागल। काहे कि रूस के मुख्य व्यापार के हिस्सेदार यूक्रेन ही रहे।

अब पुराना विचार वाला के सरकार विद्रोही बतावे लागल जबकि रूस ओह ग्रुप के समर्थन करे लागल। ई ग्रुप द्वारा एगो आंदोलन चले लागल जवना के “यूरोमयदान” कहल जाला। संक्षेप में वर्तमान युद्ध के पृष्टभूमि सन 2000 से तैयार होखे लागल रहे। अब जबकि अमेरिकन बर्चस्व के कमजोरी जग जाहिर होखे लागल बा रूस आपन पुराना बर्चस्व हासिल करबे करी। यूक्रेन के युद्ध कवनो आखिरी युद्ध नइखे। ई त शुरूआत बा। भारत खातिर ई बड़का संदेश बा। इहाँ त पहिलहीं से समाज बंटल बा। एकर सुयोग लेवे खातिर कब के मोहरा बन जाई समझल मुश्किल बा। बर्तमान सरकार अपना पुरान गुट निरपेक्ष वाला नीति के अनुशरण कर रहल बा जवना के चिरशत्रु पाकिस्तान भी सराहना कर रहल बा। स्थिति भयंकर बा। ई लड़ाई उन्नत देसन के अंदर उपजत असुरक्षा के भाव बा।  अपना के ऊपर रखे खातिर उ सब कुछ भी करे खातिर तैयार बारन। आज के तारीख मे जबकि ज्ञान पर सबकर अधिकार भइल जाता, उन्नत देसन के कमाई के रास्ता कम भइल जाता। हथियार के बिक्री ओ सबके कमाई के मुख्य स्रोत बा। लड़ाई हथियार बाजार के असल प्रदर्शनी बा। त उक्रेन आ रूस के बीच चले वाला लड़ाई के पीछे उहे मकसद बा।   भारत जइसन देसन खातिर ई बहुत बड़ा शिक्षा बा।  हमनी का जात धर्म से ऊपर उठ के राष्ट्र खातिर सोचे के समय आ गइल बा।  उक्रेन मे मेडिकल पढे खातिर आपन लड़ीकन के ना भेजे के पड़े ओह दिशा मे सोचे के चाही।

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