laptop-with-ipad-and-pen-editorial-1024x683-1.jpg

Hum BhojpuriaMay 3, 20211min5340

समै के शब्द-चित्र खींच रहल बा कोरोना विशेषांक

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।

लोकसङ्ग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥

कर्म के महत्ता बतावत एह श्लोक के अंतर्निहित महीनी जदी बूझल जाव त मालूम होखी जे जनक जइसन निर्लिप्त, निर्विकार कर्मयोगी अगर परम सिद्ध भइले आ कहइले, त अपना कर्म में निरत भइला में बिचार के लगातार होत उच्चता के कारन। लोक भा जन-मानस के उदारता से जोरला के भाव लोक-संग्रह कहाला। लोक-संग्रह खलसा लोकवे के ना, बलुक लोक के कइल्को के जोगावल आ ओकरा सइँत के राखल सुगढ़ संग्रह के मान होला।

अपना कइल्का के दोहरियावल बाउरो हो सकेला, त ऊ कर्म-संकलन के एगो अन्यतम उदाहरन के तौर प होखो त आवे वाला समय में आजु के कइल्का के थाती ले हो सकेला। लोक-संग्रह हऽ, लोगन के जोरल, लोगन के कइल्का के सँजोवल, लोगन के कइल्का के मानल आ ओकरा अपेक्षा के अनुरूप भाव दीहल। ई प्रक्रम खलसा आत्मप्रशंसा के उतजोग ना, बाकिर सगरे फइलल-पटाइल कूल्हि कइल्का के निकहा क्रम बनावत ओकरा इतिहास के कोरा में रखला के काम हऽ।

पर साल के महा भारी छुआछूत फइलल। तन से दूरी बनाइ के रखला के भरपूर प्रोत्साहन दियाइल। अपना समाजे ले ना बलुक परिवार-कुटुम्ब के लोगन से मिलल-जुलल, आइल-गइल, मेल-मुलाकात कइल, भेंट कइल सभ प पाबंदी लागि गइल। लोगन के आपसी बर्ताव-बेवहार में भारी बदलाव हो गइल। कारन रहे, चीन से उठल, भा उठावल, नोबल-कोरोना-19 नाँव के वाइरस जवन गाँवहीं सूबा भर में ना पटाइल, देस-बिदेस में पटात अबादी के अबादी चाटत गइल। अपना देस में लॉकडाउन के लमहर काल चलल। सउँसे संसार में लोग छोड़ीं, परिवार के परिवार, मोहल्ला के मोहल्ला लोगन के प्रान निकलल, जान गइल। देसन के आर्थिक दसा बिगड़ गइल। देसन के नतीजा निकल गइल।

लोक आ समाज से साहित्य के बड़ा गहीर रिश्ता होला। साहित्य लोक के सत्ता के माने बुझवावेले। साहित्य समाज में घटल आ घटल रहल दसा के लेके चर्चा करवावेले। भोजपुरिया समाज के लोग देसे ना बिदेसन में आपन मौजूदगी से उन्नती के गाथा लिखे में माहिर रहल बाड़े। कोरोनाकाल के दसा-दुर्दसा के सोझ प्रभाव एह लोगन प परल बा। पर साल के भोजपुरी जंक्शन के अंकन में कोरोना के लेके लगातार कुछ ना कुछ छपत रहल। कोरोना के रौद्र रूप घटत-बढ़त रहल, आ सङहीं अंक में संपादकीय, आलेख, कहानी, कविता, छंद, गजल के विधा में लोक-भावना शब्द-रूप में जगहि पावत रहल। ओही सभ रचनन के गद्य आ पद्य प्रारूप के संकलन भा संग्रह सोझा आइल बा भोजपुरी जंक्शन का ओर से। 1 से 15 फरौरी’21 के अंक गद्य रचनन के संग्रह बा, त 1 से 15 मार्च’21 के अंक में पद्य रचनन के संग्रह हऽ। कहे के ना, ई दूनो अंक संग्रहनीय बन गइल बाड़न स।

गद्य रचनन के संग्रह के अंक के संपादकीय में भाई मनोज भावुक ओह काल के इयादे नइखन पारत, बलुक ओह समै के शब्द-चित्र खींच रहल बाड़न – पिछला साल मार्चे में कोरोना के चलते लॉकडाउन के सिलसिला शुरू भइल। आदमी जे सोशल रहे, सोशल डिस्टेंसिंग बनावे लागल। लोग कंगारू लेखा लइका-बच्चा के करेजा से सटले

मुम्बई-दिल्ली से पैदल गाँवे भागे लागल। मुँह प जाबी (मास्क) लगा के जरूरतमंद के पूड़ी-तरकारी बँटाये लागल। जे जहाँ फँसल ओहिजे भगवान के गोहरावे लागल। गाय अलगे हँकरऽतिया, बछरू अलगे। रोजी-रोजगार गइल। चैन-सुख गइल। सगरो दहशत पसरे लागल। एही अंक में जहँवाँ ’सुनी सभे’ के कालम के पहिला भाग में श्री रवींद्र

किशोर सिन्हा के कलम सार्क देसन के समूह का ओर से भारत के मुँह जोहला के कारन बता रहल बाड़न, त ’सेहत’ कॉलम के तहत डाँ० राजीव कुमार सिंह ’कइसे जान बाँची कोरोना से’ सभ का सोझा ले आइल बाड़न। एही अंक के ’सुनी सभे’ कॉलम के दोसरा भाग में रवींद्र किशोर सिन्हा में कोरोना के लेइ के चीन के धुर्तई उजागर कऽ

रहल बाड़न। त एही कॉलम के तीसर भाग में उहाँ का तब्लीगी जमात के घोर लापरवाही प आपन चर्चा रखले बानीं। तब्लीगी जमात के भर संसार से बिटुराइल सदस्यन के खतरनाक लापरवाही कतना कस के कोरोना-रोगी के आँकड़ा बढ़ा दिहलस, एह बिन्दुअन प खुल के चर्चा कइल जरूरी बा। रवींद्र किशोर जी के ’सुनी सभे’ कॉलम से आगा

दूगो अउरी आलेख संकलित भइल बाड़न स। ई पाँचो आलेख कोरोना आ एकरा भइला आ फइलला के कारन प बिना ढेर लाज-लिहाज कइले चर्चा क रहल बा। आगा संपादकीय के कड़ियन में कोरोना के कारन आ निवारन गहिराह चर्चा भइल बा। एह कड़ियन का बाद से आलेख सभ के प्रकाशन भइल बा।

 

’अपना आलेख में डॉ० ब्रजभूषण मिश्र जी कोरोना के वैश्विक महामारी बतावत भारतीय सनातन परंपरा सभ के अर्थ बतौले बाड़न – जहाँ तक भारतीय आचार-बेवहार के बात बा, रोजनामचा में शारीरिक शुचिता बनवले रखला के प्रावधान रहल बा। कहीं से अइला-गइला प हाथ-गोड़-मुँह धोवल, जूता-चप्पल बहरी छोड़ल, हाथ ना मिलाके कर जोर परनामा-पाती, जूठ ना खाइल आ ना केहू के खिआवल, अनजान जगह पर सूते बइठे में आपन आसनी, गमछा के उपयोग कइल, माँसाहार से परहेज आदि छुत-छात से बचावत रहल हऽ। एह आलेख में ब्रजभूषण मिश्रजी कोरोना के रोशनी में सनातन परंपरा के वैज्ञानिकता का ओर इशारा कइले बाड़े

कहे के माने ई, जे अंक के आलेखन के माध्यम से कोरोना-काल में आदमी के एगो जाती के तौर प ओकर जिजीविषा के रूप समुझल जा सकेला। आदमी आपदा में जवना ढंग से अपना जीये के अवसर निकाल लेला, ओकर दस्तावेज बा ई गद्य रचनन के अद्भुत संग्रह। एही कड़ी में ’वर्क फ्रॉम होम’ प एगो हमरो आलेख सम्मिलित भइल बा। ई आपदा में अवसर खोजला के भाव त कहिये रहल बा। तवना प ’माई’ के माध्यम से मनोज भावुक परंपरा के निबाहत औरतन के निकहा दर्द समुझे के गेट-वे प्रस्तुत कइले बाड़न – गँउवाँ में त लइकी ससुरा जाते लॉकडाउन में आअ जाली स ! भारतीय समाज में ठोपे-ठोपे चुआवल आ बसावल मूल्यहीनता के बूझे के नमूना बा ’माई’।

एही लगले कोरोना-काल में भोजपुरी जंक्शन के अंक सभ में कविता हर तरह के विधा में छपल। हालाँकि, गीतन प रचनाकार लोगन के अधिके जोर बनल बा। भोजपुरिये ना भारत के हर समाज के श्रमजीवी समाज के स्वर गीत रहल बाड़न स। एह अंक के संपादकीय में मनोज भावुक जी खुल के सँकारत सोझा आ रहल बाड़न – कोरोना कवितावली खातिर हम कविता के शिल्प के लेके बहुत लचीला रुख अख्तियार कइनीं। हालाँकि, भोजपुरी भासा के रचनाकारन में गीत-कविता के लेके उत्साह तनिका अधिके रहेला। बाकिर आउर भारतीय भासा के पद्य-रचना प जवना अस्तर से काम होला, शिल्प के मूलभूत विधान के आलोक में जवना ढंग से रचनाकर्म होला, ओह हिसाब से भोजपुरी के रचनाकारन लोग के ढेर सीखे के होई। तबहूँ एह अंक के सम्मिलित भइल रचनन में कोरोना के जियल-भोगल, जानल-जुटाअवल हर पहलू के जगहि मिलल बा। एह अंक में कविता के आत्मा के आजु के समै से जोरे के प्रयास भइल बा। कुल मिला के कविकर्म में रत अड़लालिस लोगन के रचना के अस्थान मिलल बा।

ई दूनो बिसेस अंक आवे वाला समै, जब कोरोना सचकी ना रहि जाई, में बेर-बेर पढ़ल जाई। लोग अपना घर-आङन के लइकन से काथा कहिहें – ’एगो कोरोना रहे… ’

****

सौरभ पाण्डेय

‘ भोजपुरी जंक्शन ‘ के हर अंक विशेष अंक बा

देखल जाय त भोजपुरी जंक्शन ( पहिले के ‘ हम भोजपुरिआ ‘ )  के हर एक अंक , अपने आप में विशेष अंक बा आ संग्रहणीय बा । काहे से कि ई कवनो ना कवनो विषय पर केन्द्रित बा ।

‘ हम भोजपुरिआ ‘  से ले के  ‘ भोजपुरी जंक्शन ‘  के 11वाँ अंक तक में छपल एह  अड़तालिस कवियन के कवितन के एक साथ 13वाँ अंक में एक साथ संकलित करके रउरा बड़हन काम कइले बानी । एह में कुछ सिद्धहस्त कवियन के सङे – सङे

कुछ नयो लोग के रचना छपले बानी ।

ई अच्छा कदम बा । एह से ई त जरूर पता चलत बा कि पुरनकी पीढ़ी के सोच में आ नयकी पीढ़ी के सोच समझ में का साम्य आ वैषम्य बा ।

कविता खाली मनोरंजन के चीज ना ह , ई औजार ह , जे आदमी के विचार बदल देवेला , ओकरा के संबल देवेला , दुख आ सुख बाँटेला । राउर संपादकीय जे कवितात्मके बा , एह बात के नीके रेखांकित करत बा – ” कविता से कोरोना भागी ना , ई सभका पता बा बाकिर कविता से आदमी जागी , जागेला एकर इतिहास साक्षी बा । देश आ दुनिया पर जब – जब संकट आइल बा , कविता आदमी के जगवले बा । दर असल कविता आदमी के आदमी बनावेला । आदमी के अंदर के सूतल आदमी के जगावेला । सचेत करेला । ” साँचहू कोरोना केन्द्रित सब कविता ओकरा कारण , निवारण आ भविष्य में ओकर पड़ेवाला प्रभाव के रेखांकित करत बा । कोरोना के इतिहास ,भूगोल के सङे – सङे , व्याप्त भय , भय के निवारण आ भयातुर के भय भगावत हास्य – व्यंग्य परोसत कविता सोझा आइल बाड़ी स । एह खातिर राउर संपादकीय सोच साधुवाद के पात्र बा । राउर संपादकीय के शीर्षक – ‘ एगो कोरोना रहे ‘ । बड़ा लाजवाब बा । लोककथा अइसहीं नू कहाले । कोरोना कथा कहाई आ कहे खातिर भोजपुरी जंक्शन पत्रिका के सहारा लिआई ।

हम एह चिट्ठी के सहारे ओह सब लोग के जे भोजपुरी पढ़े पढ़ावे आ शोध करे करावै से जुड़ल लागल बा , ई सलाह देवे के चाहत बानी कि पत्रिका

के अंकन के अपना पास जोगावे , भविष्य में ओकरा कामे आई ।

एगो धरोहर अंक खातिर रउरा

के साधुवाद ।

– ब्रजभूषण

 


Nirahua-Khesari.jpg

Hum BhojpuriaMay 3, 20211min7700

लेखक- मनोज भावुक

फिल्म जगत में फेस्टिवल पर फिल्म रिलीज करे के फैशन बा। ओकर सम्बन्ध बिजनेश से भी बा। अबकी होली पर खेसारीलाल यादव आ दिनेश लाल यादव निरहुआ के फिल्म रिलीज भइल ह। आईं एह दूनू फिल्मन पर बात कइल जाय।

 

खेसारीलाल यादव के फिल्म सइयां अरब गइले ना

कुछ कर गुजर ऐसा कि दुनिया तमाम हो जाए, आशिकों के जुबान पर तेरा भी नाम हो जाए

इहे शे’र फिल्म के हीरो बोलत बा। अइसन एगो अउर शेर बा,

कसम है तेरे इंतज़ार का, एतबार तेरा टूटने नहीं दूंगा

रिश्ता तुझसे जनम जनम का है, साथ तुझसे छूटने नहीं दूंगा

इ दुनू शेर पढ़ के पता त चलिए गइल होई कि फिल्म के कहानी एगो लव स्टोरी बा आ प्रेमी अपना प्रेमिका के पावे खातिर कुछओ करे के तइयार बा। प्रेमिका के अपना हीरो पर ऐतबार बा। फिल्म के नाम ह ‘सइयाँ अरब गइले ना’ आ प्रेमी के भूमिका में बाड़ें खेसारीलाल यादव अउरी प्रेमिका के भूमिका में बाड़ी काजल राघवानी। इ फिल्म भोजपुरी में बनल बा आ होली के त्योहार पर यूपी बिहार के सिनेमाघर में रिलीज भइल ह। हालांकि कोरोना के बढ़त प्रकोप के चलते सिनेमाघर में ऑक्यूपेन्सी कम बा। त अब आवे वाला सप्ताह निर्धारित करी कि भोजपुरिया क्षेत्र में काफी लोकप्रिय खेसारी लाल के इ फिल्म केतना लोग देखलस।

फिल्म के टाइटल खेसारी के ही एगो हिट गाना ‘सइयाँ अरब गइले ना’ से लिहल बा। इ गाना खेसारी के करियर के एगो माइलस्टोन गाना कहल जा सकेला काहें कि एकरा बाद खेसारी के लोकप्रियता तेजी से बढ़ल। एमें उनकर लौंडा नाच के लोग चाव से देखल आ बाद में ई खेसारी के सिग्नेचर स्टाइल बन गइल जेकरा के अभियो खेसारी भुनावत रहेलें। फिल्म के नाम उनके हिट गाना पर रखला के पीछे के रणनीति भी इहे बा कि दर्शक के लुभावल जा सके। बाकिर फिल्म लोगन के केतना लुभाई ई त बाद में पता चली।

फिल्म के निर्माण यशी फिल्म्स कइले बा बाकिर एह में तीन गो निर्माता बाड़ें, अभय सिन्हा, प्रशांत जम्मूवाला आ अपर्णा शाह। फिल्म के शूटिंग दुबई के सुंदर लोकेशन पर भी भइल बा। फिल्म के लेखक भोजपुरी सिनेमा खातिर लगभग 80 गो फिल्म लिख चुकल मनोज के। कुशवाहा बाड़ें। एकर निर्देशक प्रेमांशु सिंह बाड़ें जे भोजपुरी के कई गो सफल फिल्म दे चुकल बाड़ें। फिल्म के संगीत ओम झा के बा।

 

कहानी:

हीरो एगो साधारण परिवार से बा। एक बेर साइकिलिंग करत में ओकर टक्कर हिरोइन से अचके हो जाता आ टकरइला के बाद का होला, रउरा जानते बानी। धीरे-धीरे अंखलड़उअल से शुरू होके दिल लगउअल तक बात पहुँचता बाकिर मुश्किल ई बा कि हिरोइन अमीर बाप के दुलरी बेटी बाड़ी आ हीरो गरीब त दुनू के क्लास में काफी अंतर पड़ जाता। हिरोइन के मामा जवन फिलिम में कॉमिक रिलीफ़ खातिर रखल गइल बाड़ें (ई आजमावल फार्मूला बा कि मुख्य विलेन के साला जरूर मसखरा होला जे गंभीर दृश्यन में भी कॉमेडी लिआवत रही), उ अपना भगिनी के हीरो के साथे देख लेतारें अउर घर पs बता देतारें। बाप बेटी खातिर बहुत फिक्रमंद रहता, जाहिर बा उ बेचैन हो जाता। लेकिन, जब ओकरा पता चलता कि दुनू एक दोसरा के बहुत प्यार करेलें त उ हीरो से डील करsता। डील होता कि हीरो 15 दिन में 15 लाख रुपया कमा के लिआई त बाप हिरोइन के बियाह ओकरा से कर दी। हीरो बड़ा फेर में पड़sता। बाकिर कसहूँ जोगाड़-तोगाड़ कs के दुबई कमाए चल जाता। उहाँ जाता त ओकरा कवनो कामे नइखे मिलत। तले ओकरा जिनगी में एगो अमीर लइकी आवत बिया आ ओकरा के बड़ बड़ जगह के सैर करावत बिया। दरअसल उ लइकी हीरो के फाँसे आइल बिया जवन बाद में पता चलत बा। हीरोइन के बाप असल में हीरो से अपना लइकी के बियाह नइखे करे के चाहत, एही से झूठमूठ के डील करके ओकरा के रास्ता से हटावत बा आ एने लइकी के बियाह कहीं और करे के तइयारी करत बा। हीरो दुबई में फंस गइला के बाद कइसे अपना वतन वापस लवटत बा, कइसे उ अपना प्रेमिका के पावत बा आ कइसे ओकरा बाप के प्रपंच के जवाब देता आ ओकर विचार बदलत बा, इहे फिल्म में आगे देखावल बा। ई देखे खातिर दर्शक के सिनेमा घर में जाए के पड़ी।

संगीत:

फिल्म के संगीत ओम झा के बा आ गीत कई गो गीतकार लोग लिखले बा। गीत कवनो जुबान पर चढ़े वाला नइखे। हाँ कुछ समय तक थिरका जरूर सकेला। फिल्म के एगो गाना ‘जब पटना वाली ने दिल तोड़ा तो पटाया गुजरात वाली को’ बड़ा वायरल होता अउरी विवाद के कारण भी बनल बा।

निर्देशन और अभिनय:

फिल्म के निर्देशन प्रेमांशु सिंह के बा जे खेसारी के साथ लगभग आधा दर्जन फिल्म कर चुकल बाड़ें। उनकर खेसारी के साथे एगो फिल्म बलम जी आई लव यू काफी सफल फिल्म रहल। निर्देशक रोमांटिक कॉमेडी के साथे एक्शन के छंवक वाला फिल्म बनावेले आ एह फिल्म में भी उनके उहे अंदाज लउकल बा। खेसारी के जवन टिपिकल कॉमेडी स्टाइल होला ओकरा से इतर दृश्य के बनावल गइल बा। फिल्म में अभिनय जेकर सराहे वाला बा उ हिरोइन के बाप के बा बाकिर शुभी शर्मा भी ठीक लागत बाड़ी। काजल आ खेसारी जइसन करेला लोग ओइसने कइले बा लोग। फिल्म के नायक-नायिका के केमिस्ट्री कुछ खास जमल नइखे जबकि दुनू जाना के जोड़ी के लगभग दू दर्जन से ऊपर फिल्म आ चुकल बा।

फिल्म कुछ खास कमाल नइखे देखवले बाकिर दुबई के लोकेशन बड़ा सुंदरता से देखावल गइल बा जवना खातिर छायाकार सरफराज खान के सराहे के चाहीं। फिल्म खेसारी के फैन सब के ध्यान में रख के   बनावल गइल बा।

 

निरहुआ के फिल्म रोमियो राजा शिक्षा माफिया के वर्चस्व पर सवाल कर रहल बा

कवनो भी देश में ओकरा नागरिक खातिर शिक्षा आ स्वास्थ्य के बड़ा महत्व बा आ अधिकांश देश एकरा के कर निशुल्क यानी कि टैक्स फ्री रखले बा काहें कि ई उद्योग ना बल्कि सेवा ह आ एहसे धन ना बल्कि पुण्य कमाइल जाला। बाकिर भारत में ई दुनू निशुल्क होखला के बावजूदो उद्योग के बड़ साधन बन गइल बा। भारत में अधिकांश लोग अपना लइका-बच्चा के प्राइवेट स्कूल-कॉलेज में पढ़ावत बा आ आपन इलाज प्राइवेट अस्पताल में करावत बा। सरकारी में उहे जाता जेकरा लगे प्राइवेट में जाए के बूता नइखे। हालांकि एकरा पीछे कई गो कारण बा आ एही सब के मुद्दा बना के एगो भोजपुरी फिल्म बनल बा, रोमियो राजा। नाम से फिल्म कॉमर्शियल लागत बा आ बटलो बा बाकिर निर्माता निर्देशक एतना महत्वपूर्ण विषय लेके फिल्म बनावे के हिम्मत कइले बा लोग, ई कम बात नइखे।

‘तोहर डिजिटल जवानी, इंटरनेशनल बा रानी’ गावत निरहुआ के ई फिल्म एह होली पर रिलीज भइल बा। बतइबे कइनी ह फिल्म के नाम बा ‘रोमियो राजा’। जस नाम बा तस टाइटल रोल निभावत निरहुआ के चरित्र भी बा। स्टाइलिश लुक अउरी चटख रंग के कपड़ा पहिन के घूमे वाला लइका आ एगो तेज तर्रार, केहू से ना डेराये वाली, अपना हक खातिर लड़-भिड़ जाए वाली लइकी के बीच रचल-बसल  कहानी बा, रोमियो राजा।

सोहम फिल्म्स के बैनर तले बनल ई फिल्म के ट्रेलर पिछले साल रिलीज भइल आ एकर प्रदर्शन भी पिछला साल होखे वाला रहे बाकिर कोरोना के बढ़त प्रभाव फिल्म के रिलीजिंग रोक देलस। अबकी होली पर एकरा के रिलीज त कइल गइल ह बाकिर एह बेरी भी कोरोना के मार फेर बढ़ रहल बा आ सिनेमाहॉल पर एकर असर बा। हालांकि निरहुआ के फैन फॉलोइंग बहुत बा त एह से आशा बा कि फिल्म कलेक्शन कर पाई। भोजपुरी फिल्म अभी तक मल्टीप्लेक्स में रिलीज ना होला, ऊ सिंगल स्क्रीन तक ही सीमित रहि जाला। सिंगल स्क्रीन के संख्या भी कम हो रहल बा। एह से भोजपुरी फिल्मन के कलेक्शन पर बड़ प्रभाव एकरो पड़ेला। एही से अक्सर भोजपुरी फिल्म के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ही बिजनेस हो पावेला आ एह में निरहुआ के धाक बा। उनकर कई गो फिल्मन के व्यूज कई सौ मिलियन में बा।

 

फिल्म ‘रोमियो राजा’ के लेखक-निर्देशक मनोज नारायण बाड़ें जे एकरा से पहिले भी निरहुआ के साथे ‘शेर-ए-हिंदुस्तान’ बना चुकल बाड़ें। इ फिल्म होली 2019 में रिलीज भइल रहे आ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कइले रहे। उ फिल्म भी भारत नेपाल के राजनीतिक सामाजिक रिश्ता पर बनल रहे आ भोजपुरी खातिर नया विषय रहे। ‘शेर-ए-हिंदुस्तान’ भी भोजपुरी में ढर्रा पर बन रहल फिल्मन से हट के बनल बा।

 

कहानी:

फिल्म के कहानी नायक नायिका के बीच द्वन्द्व के आस पास बुनल गइल बा। नायक रोमियो राजा एगो अनपढ़, नकचढ़ल, अमीर बाप के औलाद बा जवन अपना बाप के पइसा आ ठाट पर गुमान करsता आ पूरा दुनिया के आपन बपौती समझत बा। हीरो के बाप बिहारी सिंह शिक्षा माफिया बाड़ें। ई किरदार दिनेश लाल यादव निरहुआ निभवले बाड़ें। फिल्म के हिरोइन एगो सरकारी हेडमास्टर के बेटी बिया जवन ना केहू से डेरात बिया आ ना अपना अधिकार से समझौता करत बिया। इ भूमिका आम्रपाली दुबे निभवले बाड़ी।

हीरो के बाप बिहारी सिंह (अवधेश मिश्रा) चाहत बा कि पैसा से, धमकी से, भ्रष्टाचार से, कइसहूँ आपन साम्राज्य बड़ा कइल जाव, नया-नया स्कूल खोलल जाव, अमीर के साथे गरीब के भी बहका के, मजबूर करके लूटल जाव। एह में ओकर साथ देता ओकर लइका माने कि फिल्म के हीरो। फिल्म के हिरोइन मानवता आ सेवा धर्म में भरोसा करत बिया। ऊ अपना पिता के सिखावल मूल्यन पर चलत बिया। बिहारी सिंह सरकारी स्कूल बंद करवावल चाहsतारें, रोमियो ओकरा साथे बा, हीरोइन बीच में दीवार बनके खाड़ा हो जात बिया। एही दरम्यान हीरो के हिरोइन से प्यार हो जाता आ ऊ ओकरा से बियाह करे के जिद कर लेत बा। फेर कइसे कइसे सरकारी स्कूल के खतम करे के प्रपंच होता आ हिरोइन अपना सूझ बूझ आ हिम्मत से बाप बेटा के सामना कर बिया। बिहारी सिंह अउर रोमियो के होश ठिकाने लिआवत बिया आ दिल में मानवता जगावत बिया, इहे फिल्म के कहानी बा। फिल्म के कथा बड़ा सुंदर बा आ एकरा के देखे खातिर सिनेमाहॉल में जाए के चाहीं।

 

निर्देशन और अभिनय:

फिल्म के लेखन-निर्देशन मनोज नारायण के बा जे अलग हट के विषयन पर फिल्म बनवेलें। उ एकरा से पहिले रानी चटर्जी अउरी विराज भट्ट के लेके कईगो हिट फिल्म दे चुकल बाड़ें। मनोज के निरहुआ के साथे ई दुसरका फिल्म ह बाकिर अउर दु गो फिल्म ई जोड़ी निकट भविष्य में ले आई। फिल्म में कथा आ निर्देशन सराहनीय बा आ लीक से हटके काम करे के कोशिश भइल बा।

अभिनय के मामले में अवधेश मिश्रा आ आम्रपाली के काम सराहनीय बा। निरहुआ भी आपन चरित्र के बढ़िया से निभवले बाड़ें आ उनके नेगटिव अउरी पाज़िटिव शेड दुनू जमल बा। संजय महानंद, प्रकाश जैस आ मनोज टाइगर सरकारी टीचर के भूमिका में बा लोग जे खात त बा सरकार के बाकिर गुण बोर्डिंग स्कूल के गावत बा लोग। ई लोग भी अपना किरदार से न्याय कइले बा लोग।

संगीत:

फिल्म के संगीत मधुकर आनंद के बा। फिल्म के एगो गाना ‘डिजिटल जवानी’ बड़ा लोकप्रिय भइल बा आ एह के विडिओ के कोरियोग्राफी भी बढ़िया भइल बा। फिल्म में एगो गाना संजय महानंद पर फिल्मावल बा जवन थोड़ा आश्चर्य भरल बा काहें कि अक्सर कॉमेडियन के खाली कॉमिक रिलीफ़ तक ही सीमित रखल जाला। गाना भी अच्छा बा आ बढ़िया से पिक्चराइज कइल बा।

रोमियो राजा एगो लीक से हट के विषय पर बनल एक सार्थक फिल्म बा आ एकरा के देखे सिनेमाहॉल में जाए के चाहीं। ताकि एह तरह के फिल्मन के आमद भोजपुरी में भी बढ़े आ सिनेमा के उद्धार हो सके।

 

 


ratan-tata-img.jpg

Hum BhojpuriaApril 19, 20211min8030

आर.के. सिन्हा

रतन टाटा के भारत-रत्न देवे के हाल में सोशल मीडिया में चलल कैंपेन अपने आप में अइसे त कतई गलत ना रहे। पर जे देश भर के रत्न होखे ओकरा भारत रत्न चाहे कोई दोसर पुरस्कार मिले या ना मिले, ओसे का फर्क पड़ता। उ त देश के नायक पहिलहीं से ही बाड़े। उनका के रउआ नायकन के नायक कह सकsतानी। जब रतन टाटा के भारत रत्न से सम्मानित करे के मांग जोर पकड़ल त रतन टाटा के खुद ही कहे के पड़ल कि ‘ऊ अपना प्रशंसक सबके भावना के कद्र करsतारे लेकिन अइसन कैंपेन के बंद करे के चाहीं। हम भारतीय भइला आ भारत के ग्रोथ अउर समृद्धि में योगदान करे में खुद के भाग्यशाली मानsतानी। जाहिर बा, ये तरह के बात कवनों शिखर शख्सियत ही कर सकsता। सामान्य कद के इंसान रतन टाटा के तरह के स्टैंड त नाहिंये ली। के ना जानेला कि बहुत से सफेदपोश हस्ती भी पद्म पुरस्कार पावे खातिर अनेक तरह के लाबिंग अउर कई समझौता करेला।

टाटा समूह के पुराण पुरुष जे.आर.डी. टाटा के 1993 में निधन के बाद रतन टाटा नमक से लेके स्टील अउर कार से लेके ट्रक आ इधर हाल के बरिस में आई टी सेक्टर में भी टाटा समूह के एक शानदार अउर अनुकरणीय नेतृत्व देले बाड़न। रतन टाटा के भारत हीं ना बल्कि सारा संसार के सबसे आदरणीय कॉरपोरेट लीड़रन में से एक मानल जाला। जे.आर.डी टाटा के संसार से विदा भइला के बाद शंका अउर आंशका जाहिर कइल जात रहे कि का उ जे.आर.डी के तरह के उच्चकोटि के नेतृत्व अपना समूह के देवे में सफल रहिहें?  इ सब शंका वाजिब भी रहे, काहे कि जे.आर.डी टाटा के व्यक्तित्व सच में बहुत बड़हन रहे। लेकिन ई त कहे के परी कि रतन टाटा अपने आपके सिद्ध करके दिखा दिहलन I अइसे त सब बिजनेस वैंचर के पहिलका लक्ष्य लाभ कमाइल हीं रहेला। एमे कुछ गलत भी नइखे। पर टाटा समूह के लाभ कमाए के साथ-साथ एक लक्ष्य सामाजिक सरोकार अउर देश के निर्माण में लागल रहल भी बा। ये मोर्चा पर कम से कम भारत के त कवनों भी बिजनेस घराना टाटा समूह के आगे पानी भरेsला। टाटा समूह के सारा देश एही खातिर आदर करेला कि उहाँ पर लाभ कमाइल ही लक्ष्य ना रहेला। रतन टाटा त अब टाटा समूह के चेयरमेन भी नइखन। उ चेयरमेन के पद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के सौंप देले बाड़े। उनका में प्रतिभा के पहचाने के कमाल के कला बा। उ सही पेशेवरन के सही जगह काम पर लगावेले। उनका एकर अभूतपूर्व नतीजा भी मिलेला। रतन टाटा एन. चंद्रशेखरन के बड़हन जिम्मेदारी देते समय ई ना देखलन कि उ कवनों नामवर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल या कॉलेज में नइखन पढ़ले। रतन टाटा ई देखलन कि चंद्रशेखरन के सरपरस्ती में टीसीएस लगातार बुलन्दी के छू रहल बा। एही से उ टाटा समूह के इतिहास में पहिलका बार टाटा समूह के चेयरमैन एक गैर-टाटा परिवार से जुड़ल गैर-पारसी व्यक्ति के बनवलन। ये तरह के फैसला कवनों दूरदृष्टि रखे वाला शख्स ही कर सकsता। चंद्रशेखरन आपन स्कूली शिक्षा अपना मातृभाषा तमिल में ग्रहण कइले रहलन। उ स्कूल के बाद इंजीनियरिंग के डिग्री रीजनल इंजीनयरिंग कालेज (आरईसी), त्रिचि से हासिल कइलन। चंद्रशेखरन के टाटा समूह के चेयरमेन बनला से इहो साफ हो गइल कि तमिल या कवनों भारतीय भाषा से स्कूली शिक्षा लेवे वाला विद्यार्थी भी आगे चल के कॉरपोरेट संसार के शिखर पर जा सकsता। ऊ भी अपना हिस्सा के आसमान छू सकsता।

अगर आज भारत के सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया सबसे खास शक्तियन में से एक मानsता आ भारत के आईटी सेक्टर 190 अरब डॉलर तक पहुंच गइल बा त एकर श्रेय़ कुछ हद तक त रउआ रतन टाटा के भी देवे के होई। रतन टाटा में ई गुण त अदभुत बा कि उ अपना कवनों भी कम्पनी के सीईओ के काम में दखल ना देले। ओ लोग के पूरा आजादी देले कि उ कंपनी के अपना बुद्धि आ विवेक से आगे ले जाय। उ अपने सीईओज के छूट देले काम करे के। हालांकि उनका पर पैनी नजर भी रखस। ओ सबके समय-समय पर सलाह-मशविरा भी देत रहले। ये पॉजिटिव स्थिति में ही उनके समूह के कम्पनी सब दोसरा से आगे निकलेला।

रउआ कह सकsतानी कि जेआरडी टाटा के तरह रतन टाटा पर भी ईश्वरीय कृपा रहे कि उ चुन-चुन के एक से बढ़ के एक मैनेजर के अपना साथे जोड़ सकले। एही खातिर टाटा समूह से एन. चंद्रशेखरन (टीसीएस), अजित केरकर (ताज होटल),  ननी पालकीवाला (एसीसी सीमेंट), रूसी मोदी (टाटा स्टील) वगैरह जुड़ले। ई सब अपने आप में बड़े ब्रांड रहलन। रतन टाटा के पास अगर प्रमोटर के दूरदृष्टि ना रहल रहित आ उ अपना सीईओ पर भरोसा ना करते त फेर बड़हन सफलता के उम्मीद कइल ही व्यर्थ रहे। टाटा अपना सीईओज के आपन विजन बता देले। फिर काम होला सीईओ के कि उ ओ विजन के अमली जामा पहनावस आ ओकरो से भी आगे जाये के सोचे।

अगर रतन टाटा के सम्मान सारा देश करsता त एकरा पीछे उनकर बेदाग शख्सियत बा। इयाद करीं पिछला साल जनवरी में मुंबई में आयोजित एगो कार्यक्रम में रतन टाटा के इंफोसिस समूह के फाउंडर एम. नारायणमूर्ति चरण स्पर्श करके आशीवार्द लेत रहले। रतन टाटा आ नारायणमूर्ति के बीच 9 साल के अंतर बा। मूर्ति टाटा से 9 साल छोट बाड़न, लेकिन नारायणमूर्ति भी माने लन कि उपलब्धियन के स्तर पर रतन टाटा उनका से ढेर आगे बाड़े।

दरअसल रतन टाटा के संबंध भारत के ओ परिवार से बा, जवन आधुनिक भारत में औद्योगीकरण के नींव रखलस। ई मान लीं कि बिल गेट्स आ रतन टाटा जइसन कॉरपोरेट लीडर रोज-रोज ना होखे। ई कवनों भी सम्मान या पुरस्कार के मोहताज नइखन। ये लोग से पीढ़ी प्रेरित होला। इनका सामने कवनों भी पुरस्कार या सम्मान बौना बा। ई सच में भारत के सौभाग्य बा कि रतन टाटा हमार हउअन आ हमरा बीच में अभी भी सक्रिय बाड़े। उनकर हमनीं के बीच रहल ही बहुत सुकून देला।

( लेखक वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार अउर पूर्व सांसद हईं. )


HOLI.jpg

Hum BhojpuriaApril 19, 20211min9130

संपादक- मनोज भावुक

परसाल होली पनछुछुर रहे काहे कि भारत में कोरोना वायरस के मामला रफ़्तार पकड़ल शुरू क देले रहे। लोग डेराइल शुरू क देले रहे।  ओकरा बाद स्कूल-कॉलेज बंद भइल, अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर रोक लागल आ ओकरा बाद त मिललो-जुलला प रोक लाग गइल। लाग गइल लॉकडाउन आ सोशल एनीमल सोशल डिस्टेंसिंग के पालन करे लागल।

केतना राउंड के लॉकडाउन से गुजरत साल गुजरल। नया साल लागते कोरोना के टीका आइल। ख़ुशी के लहर दउड़ल कि मिल गइल संजीवनी बूटी। मिल गइल कवच-कुण्डल। बाकिर, आहि दादा.. कादो, कोरोना के दूसरा लहर चल देले बा। आ गइल बा। होली आवते फेरु आ गइल। कोरोनवा के का जाने होली से कवन बैर बा। होली रंग के त्यौहार ह आ ई रंगे में भंग करsता।

खैर, कई जगह लॉकडाउन लगा दिहल गइल बा। टीकाकरण अभियानो तेजी पकड़ले बा। नाक से नीचे मास्क पहिने आ सट-सट के बतियावे वाला लोग अलर्ट हो गइल बा। सरकारो से अलर्ट पर अलर्ट जारी होता। डॉक्टर लोग कहsता कि हमनी के पुरनका अनुभव से सीखे के चाहीं आ सभा-समारोह में जाके  सुपरस्प्रेडर बने से बचे के चाहीं।

अब लइका-बच्चा, स्कूलिहा-कवलेजिया होली के हुडदंग खातिर जवन योजना बनवले रहलें हं, उ त फेल होइये गइल। जीजो-साली आ देवर-भौजाई के प्लानिंग पर पानी फिरल। चनेसर च्चा बेसिये टेंसनिआइल बाड़े। होली मिले-जुले के त्यौहार ह आ मिललके-जुललका पर रोक बा। पतझड़ के बाद बसंत आवेला आ बसंत के साथे फगुआ बाकिर इहाँ त बसंत के साथे फेर से पतझड़ आ गइल। कोरोना के ई दुसरका लहर सब उत्साह आ उमंग के हरियरी चर गइल बा। बुझाते नइखे कि फगुनाहट ह कि कोरोनाहट। टिभियो पर त फाग से बेसी कोरोना राग सुनाता।

हालाँकि बंगाल में कोरोना राग से बेसी चुनावी राग बा। उहाँ त बुझाता कोरोनवा आत्महत्या कर लेले बा। उहवें ना जहाँ-जहाँ इलेक्शन होला, कोरोना उहाँ ना फटके। त हम कंफ्यूज हो जानी कि कोरोना के भगावे खातिर वैक्सीनेशन जरुरी बा कि इलेक्शन!

खैर, भोजपुरी जंक्शन में पूरा के पूरा फाग राग बा। एह अंक पर कोरोना-सोरोना के कवनो असर नइखे। ई कम्पलीट फगुआ विशेषांक बा। 5 दर्जन कवि लोग के होली गीत, भोजपुरी के साथे ब्रज के भी तड़का, बसंत के अइला से लेके फगुआ के बदलत रूप पर बात, बॉलीवुड आ भोजीवुड के फगुआ के गीत-संगीत पर चर्चा, होली-रस आ होलियाना संस्मरण के साथे अंत में इहो कि ‘’ भउजी देह अंइठली अउरी फागुन आय गइल ‘’ तक सब रस, सब रंग मतलब होली के फुल पैकेज। अब कोरोना काल में पढ़े पर त रोक बा ना, पढ़ीं आ आनंद लीं। इहो होली खातिर दस्तावेजे बा।



About us

भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


Contact us



Newsletter

Your Name (required)

Your Email (required)

Subject

Your Message