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Hum BhojpuriaMay 2, 20221min1140

यशेन्द्र प्रसाद

भगवान् बुद्ध कहले –

“तथागत सिखावेले कि हर युद्ध, जेकरा में एक मानुस दोसरा मानुस के बध करेला, शोचनीय ह। लेकिन तथागत ई कबो ना सिखावेले के शांति बनावल रखे के हरसंभव परयास जब बिफल हो जाओ त न्यायसंत युद्ध करे वाला के निंदा होखो। जे युद्ध के कारण पैदा करेला ऊ अवश्य दोषी होला।” (17)

” तथागत स्वार्थ के पूर्ण समर्पण करे के अवश्य सिखावेले। लेकिन तथागत गलत शक्ति के सामने कवनो चीज के समर्पण करे के शिक्षा ना देले, चाहे ऊ शक्ति मानुस हो, देवता हो भा प्राकृतिक तत्त्व होखो। संघर्ष त रही, काहे कि समूचा जीवने कवनो ना कवनो तरह के संघर्षे ह, लेकिन संघर्ष करे वाला कहीं ऊ सत्य आ सदाचार के खिलाफ त स्वार्थ के संघर्ष नइखे करत !” (18)

“हे सिंह!जे युद्ध में न्यायसंगत उद्देश्य खातिर जाता ओकरा शत्रुअन के बध करे खातिर तैयार रहे के चाहीं। काहे कि योद्धा लोगन के इहे नियति ह, आ अगर ओकर नियति ओकरा के धर लेले बा तब शिकायत करे के कवनो कारणे नइखे।” (22)

“जे न्याय अउर सदाचार के पक्ष में बाटे ऊ कबो असफल ना होला, बलुक आपन उद्यम में सफल होला आ ऊ सफलता टिकाऊ भी होला।” (28)

” हे सेनापति ! ई सब समझ के तू युद्ध करs, आपन युद्ध शूरता से लड़s, लेकिन सत्य के योद्धा बन के ! तबे तथागत तहरा के असिरवाद दीहें !” (30)
( ‘धम्मपद‘ से )

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यूक्रेन युद्ध के एक से एक दर्दनाक वीडियो आ फोटो के बमबारी हमनी सभ पर टीवी आ इंटरनेट के माध्यम से हो रहल बा। भारत के टीवी चैनल सब ‘ वॉर रूम’ खोल लेले बाड़े सन आ देखला से त बुझाता कि इहे लोग के लगे युद्ध के सब कंट्रोल बा। चिल्ला-चिल्ला के मिसाईल दगवावत बाड़े सन आ हवाई हमला त लगातार चलवावत बाड़े सन सुरुये से। रिपोर्टर सब घबड़ा -घबड़ा एतना जोर से चिचियाले सन जे जिउ धक् से हो जाला कि कहीं पुतिन बाबू उनके माथा पर बम त ना फोड़ देले !

भइल ई बा कि भारत सहित दुनिया के अधिकतर मीडिया पच्छिम माने अमेरिकी आ यूरोपियन परभाव में बा आ खाली एकतरफा ओपिनियन के परचार करs ता। रूस के विलेन बना दीहल गइल बा आ रूस के दृष्टिकोण का बा ई दियरी लेके खोजे के पड़s ता। रूस कियोर से आवत खबर बड़ी मुश्किल से मिलs ता।

एकर कारन बा कि आज इंटरनेट के जुग में इंटरनेट, गूगल, फेसबुक, ट्विटर, यू ट्यूब सबके हथियार बना के अमेरिका आ यूरोप के देस यूज करs तारे सन। बैंक सिस्टम, क्रेडिट कार्ड, रेस्टोरेंट आ खाये-पिये के आ आउरो सामान के भी अस्त्र-शस्त्र बना दीहल गइल बा। सूचना, खबर, जानकारी, समाचार सभन के हथियार बना के परजोग होता। सुपरपावर सब राउर सोच के, राउर विचार आ ओपिनियन के अपना लाभ खातिर कंट्रोल करे के चाहs तारे सन, राउर पसंद-नापसंद के, राउर अवचेतन मन के अपना फायदा खातिर ढाले में लागल बाड़े सन।

एहीसे यूक्रेन समस्या के ठीक से बूझल जरूरी बा।

रूस आ यूक्रेन दूनो में एक race ( जाति) के लोग रहेला जेकरा के स्लाव नाम से जानल जाला। स्लाव के दू गो धारा बा– पूर्वी आ पश्चिमी। रूस आ यूक्रेन के लोग पूर्वी स्लाव ह लोग। पोलैंड के विस्तुला नदी के पूरब में पूर्वी स्लाव आ पच्छिम में पश्चिमी स्लाव। विस्तुला ( उच्चारण – विश्वा) शब्द के उत्पत्ति संस्कृत के ‘अवेषन्’ से मानल जाला जेकर अर्थ ह ‘धीरे-धीरे बहत’। ऋग्वेद  10.114.1 में उदाहरण देखल जा सकेला। एह ऋचा में वैदिक देवता मातरिश्वा के भी उल्लेख बा। स्लाव लोग एक देवी के नाम ह ‘मदर स्वा’ जे मातृ स्वा अथवा मातर स्वा ही भइल। जैसे वैदिक वांग्मय में मातरिश्वा के गरुड़ जइसन पक्षी रूप में उल्लेख बा ओइसहीं स्लाव लोग भी मदर स्वा के पक्षी रूपी देवी मानेला। अंग्रेज़ी के स्वान शब्द (हंस) आ स्वीडन देश के नाम भी एकरे अभिव्यक्ति ह। स्वीडन पश्चिमी स्लाव लोग के एक देश ह।

स्लाव के लोग के पूर्वज वेनेति समुदाय से ह जे लोग विस्तुला ( विश्वा) नदी के उत्तर में रहे। वेनेति शब्द के वैनतेय (गरुड़) से संबंध के बारे में कुछो कहल सम्भव नइखे। लेकिन वेनेति शब्द के कई गो अर्थ बा जइसे प्रिय, मित्रतापूर्ण, यौन संवेग आ एकरा के वीनस ( शुक्र) ग्रह से भी जोड़ के देखल जाला जिनकर सम्बंध प्रेम आ यौन संवेग से बाटे। ‘उत्तर’ दिशा के अर्थ भी वेनेति से निकलेला आ गाथा ई बा कि पुरा काल में ई लोग उत्तर के स्कन्द क्षेत्र ( स्कैंडिनेविया) से एने काऊर आइल रहे। कुछ इहे सब कारण बा कि आर्य जाति से स्लाव जाति के घनिष्ठ संबंध देखल जाला। एह तरीका से स्लाव लोग आर्य जाति के ही एक धारा ह। वैदिक संस्कृत आ वैदिक देवी-देवता से स्लाव भाषा समूह आ स्लाव संस्कृति के आश्चर्यजनक मेल बा। रूस, यूक्रेन, स्वीडन, पोलैंड, साइबेरिया, नॉर्वे आ स्लाव के सब उप-धारा सभन में ई बहुते स्पष्ट बा। रूस के प्रसिद्ध वोदका संस्कृत के ‘उदक’ ह जेकर माने होला पानी/ द्रव्य। रूस के वल्गा नदी प्रसिद्ध ह त अथर्ववेद में वल्गा-स्तोत्र बा। वल्गा देवी बगलामुखी के नाम से मशहूर बाड़ी। दुनिया के सबसे पुरान ‘स्वस्तिक’ चिन्ह यूक्रेन में ही मिलल बा। स्लाव में भगवान के ‘भग’ शब्द ‘बग’ बन जाला। दूनो जगह अर्थ एके ह- ऐश्वर्य।

ई सब बातन के चर्चा एहसे जरूरी बा काहे कि बिना मूल में गइले ओकर विस्तार आ बाद के रूपांतरण समझ ना आवे।

ई सब जानकारी से ई पता चलs ता कि रूस, यूक्रेन आदि स्लाव समुदाय आ हमनी के आर्य पूर्वज लोग एक्के रहे। कालांतर में अलग-अलग दिशा में बँटत गइल लोग आ भिन्न रक्त के संपर्क में आवत एके संस्कृति के कई-कई गो रूप होत चल गइल।

आज के यूक्रेन के कीव रूस क्षेत्र से ही ‘रूस’ नाम धराइल काहे कि कीव रूस ही पूर्वी स्लाव लोगन के पहिलका राज्य बनल रहे। ई बात बहुत माने राखs ता कि जवन कीव शहर खातिर आज पूर्वी स्लाव के दू वर्ग में घमासान मचल बा उहे रूसी सांस्कृतिक राष्ट्र के हिरदय ह।

दसवीं से बारहवीं शताब्दी के समय कीव रूस एक बहुते शक्तिशाली देश रहल। सन् 980 से 1015 के कालखण्ड के कीव रूस के स्वर्ण युग कहल जाला जब व्लादिमीर महान् के शासन रहल। लेकिन तेरहवीं सदी में भयंकर मंगोल आक्रमण कीव रूस के तहस-नहस कर देलस।

फेर हेन्ने-होन्ने से संपर्क होत रूस के तीन उप-क्षेत्र भइल– पूरब में मस्कोवा नदी क्षेत्र में मस्कोवा रूस, कीव रूस आ बेलाउ रूस (बेलारुस)। मस्कोवा रूस के प्रभुत्व बढ़ल त मस्कोवा के महत्व बढ़ल आ कीव शहर के घटत चल गइल। मस्कोवा माने मॉस्को राजधानी बनल आ रूस एक विशाल देश के रूप में विकसित भइल। यूक्रेन शब्द के माने ह — ‘सिवान पर’ माने सीमा पर। ई क्षेत्र रूस के एगो सीमांत प्रदेश ह।

रूसी सम्राट ज़ार निकोलस द्वितीय के 1917 के खूनी रूसी क्रांति में तख्तापलट आ हत्या कर के वामपंथी लेनिन सोवियत संघ नाम से वामपंथी देश के गठन कइले।

एगो रोचक तथ्य ई बा कि पहिलका विश्व युद्ध में रूस के सम्राट ज़ार निकोलस द्वितीय, इंग्लैंड के सम्राट जॉर्ज पंचम आ जर्मनी के चांसलर कैज़र विल्हेम द्वितीय ई तीनो लोग आपस में भाई रहे लोग ! विल्हेम जॉर्ज के फुफेरा भाई रहले आ निकोलस आ जॉर्ज मौसेरा भाई रहे लोग ! यूरोप के शाही रजवाड़ा में आपस में शादी-बिआह होखला से अइसन भइल रहे। तीनो जन लइकाई में संगे खेललो रहे लोग। बाकी जब दुस्मनी ठनल त विश्व युद्ध करा दीहल लोग। जॉर्ज आ निकोलस एके पच्छ से लड़ल लोग बाकी जब रूसी क्रांति में निकोलस जान बचावे खातिर जॉर्ज से शरण मंगले त जॉर्ज नकार देहले आ निकोलस के सपरिवार जघन्य हत्या हो गइल।

गाँव-जवार में पटीदार लोग दू धूर खातिर जइसे लठ्ठम-लाठी से लेके खून-खराबा ले कर देला ठीक ओइसहीं मारापीटी विश्व-स्तर पर भी होला। खाली अस्त्र-शस्त्र के लेभेल ऊँच हो जाला। पर असली लड़ाई उहे स्वार्थ के संघर्ष भा न्याय-अन्याय के संघर्ष रहेला। मानुस जबले रही तबले संघर्ष रही। मानुस के भीतरी जगत में भी आ बाहर एक-दोसरा से भी। इहे बात के भगवान् बुद्ध उल्लेख कर के कहले कि संघर्ष त हमेशा रहबे करी, बेकति के देखे के ई बा कि उ सत्य आ न्याय के पच्छ में बा कि विरोध में ! युद्ध के सुरु करs ता एकरा से गलत-सही ना तय होला। तय एकरा से होई कि न्याय आ सत्य में बाधा के डलले बा ? युद्ध के दोषी उहे मानल जाई। युद्ध में भइल समस्त नरसंहार आ बर्बादी के दोष ओकरे माथे जाई। एही कारन भगवान् बुद्ध न्याय आ सत्य के स्थापना खातिर युद्ध से पीछे हटे के मना करत बाड़न। उहॉं के कह तानी कि देवते लोग काहे ना होखो, भा क़ुदरते होखो भा मानुस, केहू अगर अन्याय चाहे असत्य करत बा त ओकरा सामने तनिको समझौता नइखे करे के।

ब्लादिमीर जेलेन्सकी आ ब्लादिमीर पुतिन आमने-सामने बा लोग। ब्लादि माने होला विश्व, आ मीर माने शासक। काहे कि अब यूक्रेन अलग देश बा आ रूस अलग। वामपंथ के दुर्भोग भोगला पर रूस के बड़ी हानि भइल। भीतरे-भीतर हालत खस्ता होत चलत गइल। आ बाहिर से अमेरिका से शीत युद्ध चलते रहे। रूस के ख़िलाक अमेरिका नाटो नाम से युद्धक संघ बनवले रहे। अमेरिका आ नाटो हर समय इहे फिराक में रहत रहे कि कइसे रूस के टुकड़ा-टुकड़ा क के बर्बाद कर दिहल जाव। अंदर-बाहर दूनो ओरिया से पड़त मार के आगा सोवियत संघ ना ठठ पावल आ बिखर गइल। 1992 में यूक्रेन, जॉर्जिया जइसन कई गो अलग देश के रूप ले लेलस। सोवियत संघ टुकड़ा-टुकड़ा हो गइल।

सोवियत संघ नाटो के ख़िलाफ़ कुछ देशन के संगे मिल के जौन वार्सा-सन्धि कइले रहे ओकर अस्तित्व ही खत्म हो गइल। लेकिन अमेरिका आ इंग्लैंड लोग नाटो के खत्म ना कइल जौन खाली रूस के मुकाबला करे ख़ातिर बनल रहे ! एकर कारन तलासे जाएब सन त नज़र आई कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सगरी दुनिया के तीन गो माफिया मिल के चलावत बाड़े सन — हथियार माफिया, तेल माफिया आ दवाई माने फार्मास्युटिकल माफिया। अब हथियार माफिया के कमाई आ लूट हथियार बेच के होला आ कवनो देश ज़ादे से जादे हथियार तबे कीनी जब ओकरा कवनो देश से डर होई, आ एकरा खातिर दुनिया में कवनो विलेन होखे के चाहीं। से अमेरिकी आ पश्चिमी माफिया खातिर जरूरी रहे कि रूस विलेन बनल रहो। बड़का विलेन बने खातिर भी कैनो सुपरपावर चाही। सद्दाम हुसैन आ गद्दाफ़ी, ईरान, सर्बिया, कोसोवो जइसन छोट-मोट विलेन ढेर दिन ना चल पावे।

1991 में यूक्रेन के अलग देश के रूप में मान्यता मिलल। सोवियत संघ इतिहास हो गइल। करीब-करीब ओइसहीं जइसन 1947 में भारत के टुकड़ा-टुकड़ा हो गइल रहे।

अलग भइला पर भी यूक्रेन तटस्थ रहल आ रूस से करीबी संबंध बनवले रहल। बाकी ओकर नीति रहे कि सबसे दोस्ती कर के चले के बा। एही चलते यूक्रेन 1996 से 2001 तक ले आपन सब न्यूक्लियर हथियार भी रूस के लौटा दिहलस जवन विभाजन के समय ओकरा खाता में आइल रहे। एकरा खातिर अमेरिका, इंग्लैंड, रूस आ यूक्रेन में एगो अंतर्राष्ट्रीय समझौता भइल आ यूक्रेन के सभ केहू मिल के सुरक्षा के गारण्टी दीहल। यूरोपियन यूनियन से भी यूक्रेन के बढ़िया सम्बन्ध बनल।

लेकिन अमेरिका आ नाटो ई चक्कर में रहल कि कइसे कर के रूस से अलग भइल छोट-छोट देशन के अपना पाले क लिहल जाव ताकि रूस फेर से पहिले जइसन एकीकृत आ शक्तिशाली ना होखे पावे।

अगर पिछला सदी से देखल जाव त नज़र आई कि दुनिया के दर्जनों देश में अमेरिका आ इंग्लैंड नाटो के संगे ले के कवनो ना कवनो बहाना से सैन्य कारवाई कइले बा। 1945 में अमेरिका हिरोशिमा आ नागासाकी पर एटम बम गिरा के अइसन नेस्तनाबूद कइलस जे आपन परभाव-क्षेत्र में कई पीढ़ीयन ले अपंग आ विकृत मानुस पैदा करत जात बा। फेर क्यूबा, ग्वाटेमाला, ईराक, निकारागुआ, ईरान, लीबिया, सीरिया पर हमला, यूगोस्लाविया के दू टुकड़ा कोसोवो आ सर्बिया आ फेर विध्वंसक शस्त्र जमा करे के झुठ्ठा बहाना बना के ईराक के तहस-नहस कर देलस। दोसर इयोर अगर रूस के इतिहास पर नज़र डालल जाव त आपन बृहद रूस क्षेत्र के एकीकृत करे के अलावे रूस कवनो दोसरा देस पर बहुते कम हमला कइले बा। अफ़ग़ानिस्तान में हस्तक्षेप रूस के बहुत भारी पड़ल रहे। लेकिन तुलना कइला से रूस आ अमेरिका-गुट के सोभाव में मौलिक अंतर नजर आई। ई अंतर एकरा में बा कि दोसरा के नष्ट कर के आपन कल्याण होई ई नीति रूस के नइखे रहल। ई त अमेरिका के नीति ह। ना जाने का बात रहेला कि अमेरिका आपन सुरक्षा के ले के हमेशा घबराइले रहेला। एगो सुपरपावर से केहू अइसन बेवहार के आसा ना करे।

अब नाटो रूस काऊर गोड़ पसारे के चक्कर में यूक्रेन पर डोरा डाले लागल। एन्ने यूक्रेन में 2010 में यानुकोविच राष्ट्रपति के पद संभलले। इनकर नीति भइल कि आपन मूल देस रूस से घनिष्ठता बना के रहे के काहे कि बृहद रूस के टुकड़न सब एके संयुक्त परिवार के हिस्सा ह से सब मिलजुल के शांति से रहे। इहे बात अमेरिका के अखर गइल। अमेरिका आपन खेला अउर तेज क दिहलस।

होने काऊर स्थिति ई भइल कि भले बाप-दादा पूर्वज लोग एक्के रहे पर ई बात के त हजारन साल गुजर गइल बाटे। जब एक्के परिवार में लठ्ठ चल जाता त पूर्वज के के पूछे जाई !! अपना-अपना के भिन्न डिक्लेयर क के लाठी तना गइल। युक्रेनियन लोग अपना के रूसी लोग से अलग राष्ट्र कहे लागल। अब यूक्रेन में बहुतायत यूक्रेनियन के बा जेकरा में तुर्क, मंगोल आदि के रक्त मिश्रण भइल बा, आ रूसी भासा के लोग पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क आ लुहांस्क क्षेत्र में बहुसंख्यक बा। ई दूनो समुदाय में भिड़न्त हो गइल।

2014 में दोनेत्स्क आ लुहांस्क के रूसी भाषी आ यूक्रेनियन समुदाय में जबरदस्त लड़ाई सुरु भइल आ बहुत लोग मरे लागल। एक इयोर से अमेरिका के खेला आ दोसर इयोर से राष्ट्रपति पुतिन रूसी भाषी के समर्थन में। वर्चस्व के लड़ाई जमीन पर उतर आइल।

पुतिन के सोझा कहल रहल कि यूक्रेन के नाटो के मेम्बर ना बने के होई आ तटस्थ देश के रूप में बनल रहे के होई। काहे कि अगर नाटो आपन लाव-लश्कर आ न्यूक्लियर हथियार लेके यूक्रेन में आ जाई त ई रूस के अस्तित्व पर बहुत बड़ा खतरा हो जाई, आ रूस एकरा के कवनो कीमत पर ना होखे दी। एकरा के लेके रूस, अमेरिका, इंग्लैंड, नाटो, यूक्रेन में कई बेर बातचीत भइल पर ढाक के उहे तीन पात ! यूक्रेन के तटस्थता के गारण्टी पुतिन लिखित मंगले कि हमरा के बस ई लिख के दे द लोनी कि यूक्रेन नाटो में शामिल ना होई। पर यूक्रेन आ अमेरिका दूनो एकरा से कन्नी काटत चल गइल।

पुतिन जब देखले कि अमेरिका आ यूक्रेन उनकर बात के महटियावे में लागल बा त दोनेत्स्क आ लुहांस्क के रूसी लोगन के लड़ाई में सहयोग देबे लगले। यूक्रेन के दक्षिण भाग में क्रीमिया प्रायद्वीप आ सेवस्तोपोल नगर क्षेत्र में भी रूसी लोग बहुसंख्यक बा। उ लोग के पोटिया के पुतिन जी 18 मार्च 2014 के गते से क्रीमिया आ सेवस्तोपोल के रूस में मिला लेहले। अमेरिका आ यूरोप में बड़ी चिचियाहट मचल लेकिन पुतिन उ लोग के बात एक कान से सुनके दोसरा कान से निकाल देले।

होने जब राष्ट्रपति यानुकोविच रूस का इयोर झुके के संकेत करे लगले त यूक्रेनियन समुदाय उनका पर खिसिया गइल आ जबरदस्त फेर बदल में मई 2014 में पेट्रो पोरोशेन्को राष्ट्रपति बनले।

पोरोशेन्को मेहनत करे लगले कि सब विवाद हल कइल जाव, दोनेत्स्क आ लुहांस्क के विद्रोह शांत होखो आ रूस से सम्बंध के भी सुधारल जाव। लेकिन उनकर झुकाव स्पष्ट रूप से यूरोपियन यूनियन में मिल के नाटो के मेम्बर बने के रहे।

एही सब के बीच 2019 के चुनाव में पोरोशेन्को के हार हो गइल जेलेन्सकी से। जेलेन्सकी एगो कॉमेडियन रहले आ एगो टीवी सीरियल में राष्ट्रपति के भूमिका खूब बढ़िया निभवले रहले। जनता में बड़ा लोकप्रियता मिलल त चुनाव जीत के राष्ट्रपति हो गइले। एकरे के कहल जाला भाग के खेल !जेलेन्सकी यहूदी हउएँ। शायद उनका के पश्चिमी शक्ति सब गुप्त रूप से सपोर्ट कइल चुनाव में।

जेलेन्सकी के नाटो के मेम्बर बने के बड़ी जोर के बोखार चढ़ल रहे। होने पुतिन लगातार बोलत जास कि यूक्रेन ई गलती कबो मत करे आ तटस्थ रहे। आपन बात के असर ना होत देख के पुतिन रूसी सेना के यूक्रेन सीमा काऊर बढ़ावे लगले। ई बात से दुनिया में हल्ला मचे लागल।

दोनेत्स्क आ लुहांस्क के नेता लोग अपना-अपना राज्य के स्वतंत्र देश घोषित कर दीहल आ रूस के लिखित चिठ्ठी भेजल कि यूक्रेन के सेना ओजा बहुते अत्याचार करत जात बा से सेना भेज के मदद चाहीं। पुतिन उ दूनो के स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दे देहले आ 22 फरवरी 2022 के विशेष सैन्य हस्तक्षेप के रूप में आपन फौज के पहिले दोनेत्स्क आ लुहांस्क में आ बाद में बेलारुस काऊर से यूक्रेन में ढुका देहले।

पुतिन कहले कि यूक्रेन पर उ कवनो आक्रमण नइखन करत। उनकर उद्देश्य खाली दोनेत्स्क आ लुहांस्क के यूक्रेन के अत्याचार से बचावे के, यूक्रेन सेना के शस्त्रहीन करे के आ यूक्रेन से नाटो में शामिल ना होखे के लिखित गारण्टी लेबे के बा। एकरे खातिर उ संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्टिकल 51 के हवाला देत कहले कि आर्टिकल 51 के तहत कवनो देश उनका से सैन्य सहायता माँगs ता त विशेष सैन्य हस्तक्षेप करे के उनकर अधिकार बा।

अमेरिका इहे आर्टिकल 51 के दर्जनों बार दुरुपयोग कर के दुनिया भर में हस्तक्षेप करत रहल बा बाकि एह बेर उहे फँस गइल बा एकरा में।

अब कुल मिला के देखल जाव त असली युद्ध होत बाटे नाटो आ रूस के बीच में। मूलतः अमेरिका आ रूस के बीच में। इंग्लैंड के भूमिका अमेरिका के खलासी के बाटे। बाइडेन के त उमर हो गइल बा त उनकर बोलियो कँपकँपात निकलेला, बाकी बोरिस जॉनसन आपन केस में बिना ककही कइले खूब गरजेले। जर्मनी के तनिको मन ना रहल ह रूस से भिड़े में पर बात उठ गइल बा नाटो के सम्मिलात के। फ़्रांस के भी मोटा-मोटी इहे हालात बा।

(यशेन्द्र प्रसाद: अन्वेषक आ लेखक, फिल्मकार आ भू।पू। लेक्चरर (भूगोल))


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Hum BhojpuriaMay 2, 20221min1220

ज्योत्स्ना प्रसाद

हमनी के पीढ़ियन से ई बात सुनत चलल आवतानी सन कि कवनों भी बड़ लड़ाई के मूल में- ज़र,जोरू आ ज़मीन एही तीनों चीज़न में से कवनों ना कवनों के प्रधानता रहेला। आजो कमोबेश ज़र आ ज़मीन ही युद्घ के मूल रूप से कारण रहेला। एकरा साथ ही समय के एह दौर में ‘ज़र’ के अर्थ में अगर हम तनि विस्तार करके देखीं त ओकरा में आज के परिस्थिति के अनुसार कुछ आउर बिन्दु भी बहुत आसानी से जोड़ल जा सकेला। जवना में हमरा हिसाब से परस्पर प्रतिस्पर्धी आ विरोधी देशन के आपन स्वार्थ, आपन व्यापार, आपन वर्चस्व, आपन अहंकार के हम बहुत आसानी से जोड़ सकेंनी।

अब बात रहल कभी युद्ध के कारण बनल ‘जोरू’ शब्द के। समय के एह दौर में कई देशन में गृहयुद्ध त होता, चाहे ओकर संभावना भी बनता। बाकिर देशी राज्यन के युग खत्म हो गइला से एकेगो देश में अपना अलग-अलग ध्वज के साथे आपन अलग-अलग अस्तित्व के एहसास करावत राजा लोगन के भी युग खत्म हो गइल बा। आज विश्व के ज्यादातर देशन में राजतंत्र के भी कब्र खोदा गइल बा। एह से ‘जोरू’ के वज़ह से कवनों दू देशन के बीच में लड़ाई के संभावना भी दूर-दूर तक लउकत नइखे। चूँकि एह काल-खण्ड में ‘जोरू’ कवनों भी युद्ध के कारण नइखे बनत। एह से ई भाव भी अब इतिहास-पुराण में ही सिमट के रह गइल बा।

अब चलीं अपना असली मुद्दा पर। यानी रूस-यूक्रेन युद्ध पर। यूक्रेन आ रूस दूनू ही देश पहिले सोवियत संघ के अंग रहे। सोवियत संघ के पूरा नाम रहे ‘सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ’ जेकरा के संक्षेप में USSR कहल जात रहे। ‘सोवियत’ शब्द श्रमिकन के परिषद के नाम से आइल बा आ लाल झंडा पर हथौड़ा आ दरांती प्रतीकात्मक रूप से देश के श्रमिकन के श्रम के प्रतिनिधित्व करेला।

कभी एह सोवियत संघ के दुनिया पर बहुत प्रभाव रहे। एकरा स्थापना के दशक के साथे अनेक देशन में महत्त्वपूर्ण सरकार उभरल। जवना में चीन, क्यूबा आ उत्तर कोरिया जइसन कई देशन में आजो अइसन सरकार मौजूद बा।

रूस USSR के सबसे प्रमुख गणराज्य रहे। ओकरा बाद के ओह महाद्वीप के दोसर बड़ देश रहे यूक्रेन। सोवियत संघ (USSR) विश्व के पहिला साम्यवादी देश रहे। एकर स्थापना रूस के ही एगो गृहयुद्ध के बाद भइल, जे सन् 1917- 1921 तक चलल। सोवियत संघ एक विशाल क्षेत्र के नियंत्रित कइलस आ शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथे प्रतिस्पर्धा भी कइलस। जवना कारण कई बार त ई बुझाव कि दुनिया अब एक परमाणु युद्ध के कगार पर आके खड़ा हो गइल बा।

ई बात अब जरूर बा कि सोवियत संघ के पतन के बाद से रूस में कम्युनिस्ट सरकार नइखे। हालाँकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोवियत संघ के पतन के 20 वीं शताब्दी के सबसे बड़ा भू-राजनीतिक तबाही मानेलन।

यूक्रेन 1918-20 में स्वतंत्र रहे। बाकिर दूगो विश्व युद्ध के बीच के अवधि में पश्चिमी यूक्रेन के कुछ हिस्सा पर पोलैण्ड, रोमानिया आ चेकोस्लोवाकिया के अधिकार हो गइल। बाद में यूक्रेन, यूक्रेनी सोवियत समाजवादी के रूप में सोवियत संघ के हिस्सा बन गइल।

रूस के सीमा एक दर्जन से अधिक देशन से मिलेला, जवना में अनेक देश पहिले सोवियत संघ के ही हिस्सा रहे। बाकिर आज ऊ सब देश ‘उत्तर अटलांटिक संधि संगठन’ यानी नाटो के सदस्य बन गइल बा।

यूक्रेन के सीमा पश्चिम में यूरोपियन देशन से आ पूरब में रूस के साथे लागल बा। हालाँकि यूक्रेन सोवियत संघ के सदस्य रह चुकल बा आ आजो यूक्रेन के आबादी के करीब छट्ठा हिस्सा रूसी मूल के भइला के कारण यूक्रेन के रूस के साथे गहरा सामाजिक आ सांस्कृतिक जुड़ाव भी बा। एकरा साथ ही रूस सन् 19 94 में एगो समझौता पर हस्ताक्षर करके यूक्रेन के स्वतंत्रता आ संप्रभुता के सम्मान देबे पर आपन सहमति जता भी चुकल बा। बावजूद एकरा सन् 2014 में यूक्रेन के लोग रूस समर्थक अपना राष्ट्रपति के ओकरा पद से च्युत क देहलस। जवना के चलते रूस यूक्रेन से नाराज हो गइल आ ऊ दक्षिणी यूक्रेन के क्राइमिया प्रायद्वीप के अपना क़ब्ज़ा में ले लेहलस। एकरा साथ ही रूस यूक्रेन के अलगाववादीयन के आपन समर्थन भी देहलस। जवना के चलते ऊ लोग पूर्वी यूक्रेन के एगो बड़ा हिस्सा पर आपन क़ब्ज़ा क लेहलस। तब से रूस समर्थक विद्रोहियन आ यूक्रेन के सेना के बीच चलत लड़ाई में अबले 14 हज़ार से अधिक लोग मरा चुकल बा।

रूस यूक्रेन के क्राइमिया पर सन् 2014 में ई कहत क़ब्ज़ा क लेहलस कि ओह प्रायद्वीप पर रूस के ऐतिहासिक दावा रहल बा। काहेकि यूक्रेन सोवियत संघ के हिस्सा रह चुकल बा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कहनाम बा कि चूँकि यूक्रेन के गठन ही कम्युनिस्ट रूस कइले रहे। एह से सन् 1991 में सोवियत संघ के विघटन के अर्थ ऐतिहासिक ‘रूस’ के टूटला जइसन ही भइल। हमरा कहे के तात्पर्य ई बा कि सोवियत संघ के अंग के रूस आजो अपना ही देश के अंग समझेला।

यूक्रेन के वर्तमान राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के झुकाव पश्चिमी देशन के ओर रहल ह। एह से रूस के अपना सुरक्षा खातिर चिंतित भइल वाजिब बा। रूस के ई लागता कि ओकरा सुरक्षा-संबंधी चिंता के पश्चिमी देश आ विशेष रूप से अमेरिका द्वारा नज़र अंदाज़ कइल जाता। संभवतः अमेरिका आ पश्चिमी देशन के भी ई बुझात रहल ह कि अब रूस ओतना शक्तिशाली नइखे कि ऊ नाटो के साथे अमेरिका के जब सहयोग रही तब ऊ कवनों तरह के कोई कड़ा विरोध कर पायी। एह से अमेरिका के सह पर जइसे नाटो सन् 1994 में एक-एक करके हंगरी, रोमानिया, स्लोवाकिया, लातविया, लिथुवानिया जइसन देशन के धीरे-धीरे करके नाटो के सदस्य बना लेहलस। ओइसही यूक्रेन के भी नाटो में ऊ शामिल क ली।

अब जब कवनों तरह से यूक्रेन नाटो के सदस्य बन जाई तब नाटो बहुत आसानी से यूक्रेन के मदद से अपना सेना के रूस के मुहाने पर खड़ा क दी। एह तरह से नाटो के रूस पर आक्रमण कइल आसान हो जाई। ई सब सोच के रूस चिंतित बा। हालाँकि यूक्रेन के रूस के ई चिंता समझे के चाहीं। काहेकि कभी दूनू देश सोवियत संघ के हिस्सा भी रह चुकल बा। बाकिर यूक्रेन अमेरिका आ पश्चिमी देशन के बहकावा में आके रूस के ई चिंता ना समझ सकलस आ आज ओकर परिणाम भुगतत अपना पूरा देश के युद्ध के आग में झोंक देले बा।

रूस चाहता कि यूक्रेन नाटो के सदस्य ना बने। एकरे साथ ही ऊ कवनों यूरोपियन संस्था से भी ना जुड़े। नाटो के सेना सन् 1997 के पहिले के स्थित में लौट जाय आ पूरब में सेना के ना ही कवनों विस्तार होखो आ ना ही पूर्वी यूरोप में ओकर कोई सैन्य गतिविधि ही होखे। एकरा खातिर रूस क़ानून के पुख़्ता भरोसा चाहता।

फिलहाल नाटो के 30 देशन के सदस्यता बा। बाकिर ओकर नीति ह-“हर केहू खातिर दरवाज़ा खुला रखे के”। नाटो अपना एह नीति से पीछे हटे के तइयार नइखे। रूस-यूक्रेन युद्ध के हमरा अनुसार इहे असली कारण बा। काहेकि नाटो के एही नीति से यूक्रेन के आस रहे कि ऊ बहुत आसानी से नाटो के सदस्य बन जाई।

यूक्रेन के वर्तमान राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेस्की यूक्रेन के नाटो में शामिल करे खातिर बेचैन बाड़न। एह से ऊ यूक्रेन के नाटो में शामिल होखे खातिर एगो तय समय-सीमा आ संभावना स्पष्ट करे के माँग करत रहल बाड़ें। बाकिर जर्मनी के चांसलर द्वारा निकट भविष्य में एह तरह के संभावना से साफ इनकार कइल जात रहल बा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेस्की के एह युद्ध के पहिले उनका अपना देश में भी ओतना लोकप्रियता ना रहे। बाकिर एह युद्ध के समय स्वाभाविक रूप से अपना देश से प्रेम रखे वाला लोगन के नज़र में उनकर महत्त्व बढ़ गइल बा। चूँकि ऊ यूक्रेन के कमाण्डर इन चीफ भी हउअन, एह से ओह दृष्टि से भी रूस-यूक्रेन युद्ध में उनकर काम सराहनीय रहल बा। ऊ एक ओर जहाँ अपना सेना के मोराल बढ़ावे में कामयाब होत दिखाई दे तारन उहईं दोसरा ओर अमेरिका आ नाटो से अपना तरह से मदद के गुहार भी लगावतारन।

24 फरवरी से रूस-यूक्रेन के बीच लड़ाई शुरू भइल। ऊ लड़ाई बा दस्तूर आज यानी 12 मार्च आ युद्ध के 17 वाँ दिन भी ज़ारी बा। एह दूनू देशन के बीच कई दौर के बातचीत भी भइल बाकिर कवनों ठोस नतीजा अभी ले ना निकल। कबो-कबो त हमरा ई बुझाता कि रूस-यूक्रेन के बीच जवन वार्ता जहाँ से शुरू भइल रहल ह ऊ वार्ता घुम फिर के ओही जगह पर जा पहुँचता। ह, ई बात जरूर कहल जा सकेला कि कई दौर के वार्ता के बाद भी जे ज़ेलेस्की के तेवर कड़ा लउकत रहल ह, ऊ अब तनिमनी नरम पड़ल बा। ऊ अब यूक्रेन के नाटो आ रूस के बीच तटस्थ रहे के बात भी करतारन।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेस्की नाटो के सदस्य देशन से भी बहुत खुश नइखन लउकत। काहेकि ऊ यूक्रेन के मदद जवना तरह से नाटो के सदस्य देशन से चाहत रहले ह ओह तरह से उनका नइखे मिलत। ऊ रूस खातिर नाटो के सदस्य देशन से ‘नो फ्लाई जोन’ के घोषणा चाहत रहले ह। बाकिर यूक्रेन खातिर कवनों देश रूस जइसन शक्तिशाली देश से दुश्मनी मोल लेबे के तइयार नइखे ।

जर्मनी ई घोषणा त कइये चुकल बा कि ऊ रूस से गैस, तेल के आयात पर रोक ना लगाई। बाकिर यूके रूस पर प्रतिबंध लगावे के घोषणा कइले बा। एह घोषणा के अर्थ हो गइल कि एह मद में ओकरा अपना बजट के आठ गुना खर्च बढ़ावे के पड़ी।

अमेरिका भी पहिले कहले रहे कि यूक्रेन के संप्रभुता सुरक्षित करे खातिर ऊ प्रतिबद्ध बा। बाकिर यूक्रेन पर आक्रमण भइला के बाद ऊ रूस पर प्रतिबंध लगावे, यूक्रेन तक हथियार पहुँचावे जइसन मदद ही करता। बाकिर यूक्रेन के मदद में आपन सेना नइखे उतारत। पोलैण्ड यूक्रेन के हथियार देबे के एवज़ में अमेरिका से सौदाबाजी करे के चाहता।

रूस-यूक्रेन युद्ध विश्व के ई बता देहले बा कि अपना देश के हर परिस्थिति से जूझे खातिर सबसे पहिले अपना देश के ही मजबूत आ आत्मनिर्भर बनावल जरूरी बा। दोसर जरूरी बात ई कि कवनों लड़ाई अपने बूते पर ही लड़े के चाहीं। दोसरा के भरोसा पर कवनों युद्ध ना लड़ले जा सकेला आ ना जीतले जा सकेला। एह बात के समझ अब यूक्रेन के भी हो गइल बा कि अभी ओकर हैसियत अइसन नइखे कि ऊ रूस जइसन महाशक्ति से युद्ध खुल के लड़ या जीत सके।

हमरा डर बा कि अपना ज़िद्द में आके ज़ेलेंस्की अपना हरा-भरा देश के खण्डहर में तबदील ना कर देस। वैसे रूस चाहित त ई युद्ध कबे समाप्त हो गइल रहित। बाकिर उहो अपना रणनीति के तहत यूक्रेन के खेला रहल बा। रूस के रणनीति के ई हिस्सा रहल बा कि ऊ पहिले चारो ओर से घेरेला तब ओकरा पर आपन चाँप चढ़ावेला। कीव के साथ आज ऊहे हो रहल बा। वैसे पुतिन के तरफ़ से ई बात निकल के आइल ह कि यूक्रेन के टार्गेट पूरा हो गइल। पुतिन के वक्तव्य बा कि उनका यूक्रेन के सत्ता बदले में रुचि नइखे। ऊ सिर्फ रूस के सुरक्षा के लेके चिन्तित बाड़न। बाकिर हमरा बुझाता कि युद्ध के आग अभी आउर धधकी। एकरा लपेट में कुछ आउर देश आई। बाकिर कब आ कइसे ई समय बतायी।

रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव

  • पूरब में नाटो के विस्तार-योजना अब खटाई में पड़ गइल। अइसे त नाटो के सदस्य बने खातिर ज्यादातर देशन के आकर्षण आ लालच रहेला कि ओकरा देश पर अगर कवनों देश आक्रमण कइलस तब ओह आक्रमण के समय ओह सदस्य देश के मदद खातिर नाटो के सदस्य देशन के सामूहिक कार्यवाई होई। बाकिर नाटो के अनुच्छेद पाँच के तहत सामूहिक कार्यवाई खातिर गठबंधन के सब सदस्यन के कवनों सामूहिक कार्यवाई खातिर सहमत भइल जरूरी बा। बाकिर नाटो के 71 साल के इतिहास में अनुच्छेद पाँच के प्रयोग सिर्फ एक बार ही 9/11 के समय भइल बा। जब अमेरिका में आतंकी हमला भइल रहे।

2- यूक्रेन के रूस से युद्ध ठान के जे ओकर स्थिति भइल बा ओकरा के देखत आ साथ ही अमेरिका आ यूरोपीय देशन के समर्थन के आश्वासन पर अब ओह इलाका के कोई भी देश हाल-फिलहाल में मास्को से बैर मोले के हिम्मत ना करी। अमेरिका आ पश्चिमी देशन के बहकावा में आके यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेस्की के बोली के जे तेवर रहल ह ओहमे अब तनि नरमी आइल बा। ऊ कहतारन – “हम अपने देश के लिए सुरक्षा गारंटी जैसे अन्य मुद्दों पर रूस से चर्चा करने से नहीं डरते। हमें तटस्थ स्थिति के बारे में बातचीत करने से भी कोई भय नहीं है।” ऊ इहो कहतारन कि नाटो यूक्रेन के सुरक्षा-गारण्टी आ सदस्यता देबे के अभी तइयार नइखे। ज़ेलेंस्की के कहनाम बा- “मैंने आज 27 यूरोपियन नेताओं से पूछा कि क्या यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जायेगा— उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।”

3- द्वितीय विश्वयुद्ध के खत्म भइला पर अमेरिका आ सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के शुरुआत होत रहे। ओही बीच सन् 1949 में नाटो के गठन भइल। शुरुआत में एह संगठन में 12 देश शामिल भइल। बाकिर धीरे-धीरे नाटो के सदस्य देशन से संख्या बढ़े लागल। अब एकर संख्या 30 हो चुकल बा। एहमें से कइगो देश सन् 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो में शामिल भइल। सबसे अंत में नार्थ मैसेडोनिया गणराज्य मार्च 2020 में नाटो में शामिल भइल। एह सबसे प्रेरणा लेते कुछ आउर देश जइसे बोस्निया, हर्जेगाविना, जार्जिया आ यूक्रेन भी नाटो में शामिल होखे के इच्छा जतवलस। हालाँकि एह देशन के नाटो के ओर से अभी तक कोई समय-सीमा नइखे देहल गइल। बाकिर यूक्रेन के साथे जवन भइल ओकरा के देखत रूस के प्रभाव आ दायरा वाला क्षेत्र से कवनों देश के फिलहाल नाटो के सदस्यन में शामिल होखे के कवनों संभावना नइखे दीखत।

4- नाटो में शामिल होखे के पीछे सबसे बड़ा लोभ ई बा कि सदस्य देशन के ई विश्वास रहेला कि अगर ओकरा देश पर हमला भइल तब गठबंधन में शामिल देशन के सेना ओकरा मदद खातिर आगे आई। बाकिर नाटो के वास्तविकता त ई बा कि अपना कवनों सदस्य देश के अनुरोध पर शायद ही कभी नाटो ओकरा के ओह तरह से मदद कइले होखे। नाटो यूक्रेन के भी मदद ना कइलस। यूक्रेन के बारे में त ई सोचल जा सकेला कि अभी नाटो के सदस्य नइखे। बाकिर नाटो त तुर्की के मदद के अनुरोध के भी ठुकरवले रहे। जबकि ऊ सन् 1952 से ही नाटो के सदस्य बा। नाटो चार्टर के अनुच्छेद पाँच ई गारंटी देता कि अगर कवनों सदस्य देश पर हमला होई तब ऊ आपन सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया तंत्र के सक्रिय कर दी। बाकिर फरवरी 2020 में जब सीरिया के इदलिव प्रांत में रूस के वायु शक्ति से लैस सीरिया के सरकारी जवान तुर्की के 34 सैनिकन के मार देहलस। ओह घड़ी नाटो ओकरा के समर्थन ना कइलस।

रूस-यूक्रेन युद्ध के तात्कालिक आ दूरगामी परिणाम

कवनों भी युद्ध के तात्कालिक आ दूरगामी दूनू परिणाम निकलेला आ ऊ दुनिया पर आपन असर भी डालेला। कारण विज्ञान आ तकनीकि के प्रभाव से आज समूचा दुनिया एक वैश्विक गाँव में बदल गइल बा। जवना के चलते कवनों जगह के वास्तविक दूरी अब कवनों मायने नइखे रखत। आज हम ई देखतानी कि पूरा संसार के व्यवस्था, आर्थिक आ व्यापारिक आधार पर ध्रुवीकरण आ पुनर्संघटन के प्रक्रिया से गुज़र रहल बा। एह से विश्व के कोई भू-खण्ड के घटना दोसरा भू-खण्ड के प्रभावित कइला बिना रह ना सकेला। एह से विश्व के कवनों कोना में अगर युद्ध होला त ओकर तात्कालिक प्रभाव त पड़बे करेला, ओकरा साथ ही ओकर दूरगामी प्रभाव भी पड़ेला। एही बात के प्रसिद्ध अर्थ शास्त्री प्रो. अरूण कुमार एह तरह से कहतारन कि वैश्वीकरण के कारण कवनों भी जंग के दुनिया के हर हिस्सा पर प्रभाव त पड़बे करेला ऊ युद्ध खाड़ी देशन में होखे चाहे अफ्रीका में। बाकिर रूस-यूक्रेन के युद्ध दू देशन के सामान्य युद्धन से अलग बा। काहेकि ई युद्ध दो देशन के बीच के साधारण युद्ध ना ह बल्कि विश्व के दू महाशक्तियन के बीच के टकराहट ह। एक ओर त प्रत्यक्ष रूप से रूस के सेना दिखाई देता। बाकिर दोसरा ओर अमेरिका आ नाटो द्वारा परोक्ष रूप से समर्थित यूक्रेन के सेना बा। जवना में तनातनी अपना देश पर भी प्रभाव छोड़ सकेला।

तत्कालिक रूप से वैश्विक कारोबार, पूँजी प्रवाह, वित्तीय बाज़ार आ तकनीकी पर भी प्रभाव पड़ी। कारण रूस के यूक्रेन पर हमला के कारण रूस पर प्रतिबंध लागू हो गइल बा।

फिलहाल दुनियाभर में रूस गैस, तेल के बहुत बड़ा आपूर्तिकर्ता ह। एह से रूस पर प्रतिबंध लगावे से एह सब चीजन के दुनिया में बेतहाशा कीमत में बढ़ोतरी होई। यूक्रेन भी कवनों कमज़ोर देश ना रहल ह। ऊ विश्व के गेहूँ आ खाद्य तेलन के बड़हन निर्यातकन में से एगो ह।

जब प्रत्यक्ष चाहे परोक्ष रूप से दो ताकतवर देशन के बीच संघर्ष होई तब एक अलग तरह के बाजार में अनिश्चितता के दौर आ जाई। जवना के चलते आपन पूँजी कहीं डूब ना जाय एह डर से विदेशी निवेशक बाज़ार से आपन पूँजी वापस निकाले लागेलें। जवना के चलते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफ.डी.आई. आ विदेशी संस्थागत निवेश यानी एफ.आई.आई. के कवनों देश में आवल कम हो जाई। युद्ध के स्थिति में कोई भी निवेशक अपना पूँजी के अपने ही देश में निवेश करे के चाहेला। ताकि ओकरा देश के अर्थ व्यवस्था में मजबूती बनल रहो।

रूस-यूक्रेन युद्ध आज सतरहवॉं दिन में प्रवेश कर गइल। युद्ध आज ना काल खत्मे हो जाई। बाकिर शीत युद्ध थमे वाला नइखे। काहेकि ई लड़ाई वैचारिक लड़ाई ना ह। ई लड़ाई त दू महाशक्तियन के बीच के वर्चस्व के लड़ाई ह। एह से एह युद्ध से नतीजा सिर्फ दुइयेगो देश ना भुगती बल्कि दुनियाभर में मंदी आ महँगाई आपन रंग देखावे लागी। रूस के कंपनियन पर प्रतिबंध लगला से वैश्विक कारोबार प्रभावित होई। हालाँकि पश्चिमी देश एह कोशिश में बा कि पेट्रो उत्पादक आपन उत्पाद बढ़ा देव। ओपेक (OPEC) देशन से भी ई अनुरोध कइल जा सकेला। बावजूद एकरा पेट्रो उत्पादन के घरेलू कीमत बढ़ल तय बा। पेट्रो के दाम बढ़ला से स्वाभाविक रूप से सब चीजन के दाम बढ़ जाई।

रूस-यूक्रेन युद्ध के भारत पर प्रभाव

रूस-यूक्रेन युद्ध के जे प्रभाव अन्य देशन पर पड़ी ऊ सब कमोबेश भारत पर भी पड़ी। बाकिर भारत खातिर तत्काल प्राथमिकता बा यूक्रेन में फँसल भारतीय छात्रन के सकुशल देश वापस ले आवल। अभी तक 15-16 हजार छात्र मिशन गंगा के तहत अपना देश वापस आ चुकल बाड़ें। कुछ पड़ोसी देशन के लोग के भी मदद कइल गइल बा। बाकिर जले ले भारत के एक भी छात्र यूक्रेन में फँसल रहीहे ई मिशन चलत रही। एकरा साथ ही ओह छात्रन के भविष्य के भी चिंता भारत सरकार के करे के पड़ी जेकरा युद्ध के कारण अपना पढ़ाई के मझधार में ही छोड़ के अपना देश लौटे के पड़ल बा।

बाज़ार में अभी ओतना पूँजी नइखे एह से महँगाई आपन रंग देखइबे करी। आयात अधिक आ निर्यात कम भइला से भुगतान में संतुलन बिगड़े के अधिक संभावना रहेला। विदेशी निवेशक के बिकवाली के दबाव से बाज़ार कमज़ोर होई। एह से लोग अभी से ही अपना पइसा के सोना में निवेश करे लागल बा। जब सोना के माँग भारतीय बाजार में बढ़ी तब सोना के अधिक से अधिक आयात होई। सोना के माँग अधिक भइला से अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में सोना महँगा होई आ रूपिया टूटी। स्थानीय बाज़ार में सोना महँगा होई। जवना के चलते अपना देश के ही ना दुनिया भर के बजट बिगड़ी। एकर नतिजा ई होई कि देश के वास्तविक विकास में तुलनात्मक कमी आई। युद्ध के आशंका से सेना आ हथियार पर अधिक पइसा खर्च होई। राजस्व में भारी कमी आई। जवना के चलते राजस्व घाटा बढ़ी आ तब सरकार सामाजिक क्षेत्र के कामन से आपन हाथ खींचे लागी। जवना से देश के गरीब जनता प्रभावित होई। वैश्वीकरण के अवधारणा से जब विश्व समुदाय पीछे हटे लागी तब एकर सबसे ज्यादा नुकसान भारत जइसन विकासशील देश के ही होई।

भारत बहुत हद तक खाद्य तेल खातिर यूक्रेन पर निर्भर बा। भारत उहाँ से 1.5 विलियम डॉलर के सूरजमुखी के तेल, ऊर्जा, धातु आ खाद्य पदार्थ मँगवावेला।

रक्षा के क्षेत्र में भारत रूस पर निर्भर बा। रूस पर प्रतिबंध लगवला से भारत के कई रक्षा संबंधित सौदा अधर में लटक सकेला। एकरा साथ ही रूस के पेमेण्ट खातिर भारत के नया तरीका खोजे के पड़ी। भारत के लद्दाख पर चीन के गिद्ध दृष्टि के देखत भारत के अपना रक्षा-संबंधी भंडार के बढ़ावल जरूरी हो जाई। जबकि रूस पर CAATSA के तहत पाबंदी लगवला से हथियार के सप्लाई पर बहुत असर पड़ी।

एह तरह से हम समझ सकेनी कि युद्ध विश्व के कवनों खण्ड में काहे ना होखे बाकिर ओकर प्रभाव विश्व के हर देश में कवनों ना कवनों रूप में पड़ेला। एकरा साथ ही ओह क्षेत्र विशेष के आदमी त आदमीए ह युद्ध के प्रभाव उहाँ के जीव-जन्तु, पशु-पक्षी सब पर पड़ेला। चारो ओर त्राहि-त्राहि मच जाला। बसल बसावल घर उखड़ जाला। करोड़ों में खेले वाला लोग शरणार्थी बने खातिर मजबूर हो जाला। बम के धमाका खाली इमारते के खण्डहर में ना बदले बल्कि उहाँ के लोगन के मानसिक स्थिति पर भी असर डालेला। एह से भरसक युद्ध के विभीषिका से बचे के चाहीं।


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Hum BhojpuriaMay 2, 20221min990

बद्रीनाथ वर्मा

यूक्रेन पर धुआंधार मिसाइल बरसा के रूस के लागल कि बस दु चार दिन में यूक्रेन घुटना के बल आ जाई लेकिन ई ओकर गलतफहमी साबित भइल। लड़ाई लगातार लंबा खिंचात जात बा। कब खतम होई आज के तारीख में केहू भी बतावे में समर्थ नइखे। उल्लेखनीय बा कि यूक्रेन के दुगो प्रांत के स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दिहला के अगिला ही दिन रूस ओजहां आपन सेना भेज दीहलस आ एही के साथे दुनों देशन के बीच बाकायदा युद्ध शुरू हो गइल। एकरा साथ ही यूक्रेन पर रूस के हमला, जेकरा बारे में खुद पुतिन एगो सीमित सैन्य कार्रवाई बतावत रहलन उ एगो अइसन युद्ध के रूप में देखल जाये लागल बा जेकर प्रभाव के व्यापकता केहू के काबू में नइखे रह गइल।

अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन परमाणु हथियार के इस्तेमाल के संभावना क जिक्र करके अचानक सबका के सकता में डाल देले बाड़न। दुनिया शीत युद्ध के दौरान ये तरह के परिस्थिति के गवाह रहल बा। अमेरिका आ ओकर सहयोगी देशन के पास भी एकरा जवाब में अपना सेना के परमाणु हमला खातिर तैयार रहे के आदेश देबे क ऑप्शन रहे, लेकिन ऊ लोग अइसन ना कइल। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत सुरक्षा परिषद के भरोसा दिहलन कि रूस पर उनका ओर से कवनो खतरा नइखे। ऊ ई भी कहलन कि पुतिन क ई कदम गैरजरूरी बा आ एसे सबका सुरक्षा के खतरा हो सकेला। वाइट हाउस के तरफ से भी स्पष्ट कइल गइल कि ओकरा ओर से अलर्ट के स्टेटस में कवनो बदलाव नइखे कइल गइल। एकरा बावजूद पुतिन के बयान के बाद परमाणु युद्ध के आशंका दुनिया के सामने एगो वास्तविक खतरा के रूप में मुंह बा के खड़ा हो गइल बा।

सवाल बा कि हमला के बाद के समय में आखिर अइसन का हो गइल कि खुद पुतिन अपना शुरुआती दावा के उलट संकेत देबे के मजबूर हो गइल बाड़न। जवाब चाहे जो भी हो, एसे एतना त स्पष्ट हो ही जाता कि यूक्रेन के खिलाफ शुरू उनकर सैन्य कार्रवाई ओतना आसान साबित ना भइल जेतना उनके लागत रहे। पुतिन के आह्वान के बावजूद यूक्रेनी सेना में फूट, विभाजन या बगावत के कवनो संकेत अभी तक नइखे लउकत बल्कि आम यूक्रेनवासियन में ये हमला के खिलाफ जवना तरह के जज्बा देखात बा ओसे लागत नइखे कि आगे के राह भी रूसी सेना खातिर आसान रहे वाला बा। येह बीच नाटो देश यूक्रेन के पक्ष में सेना भले नइखे भेजले लेकिन हथियार के सप्लाई में कमी नइखे रखले लोग। यूरोपियन यूनियन इतिहास में पहिला बार कवनो युद्धरत देश के हथियार के आपूर्ति करे के फैसला कइले बा। लेकिन रूस खातिर एसे ज्यादा चिंताजनक बा आर्थिक प्रतिबंध के एलान।

बहरहाल, ई युद्ध यूक्रेन समेत पूरी दुनिया खातिर चाहे जेतना भी परेशानी ला रहल बा, खुद रूस खातिर भी कम बड़ आफत नइखे साबित हो रहल। यूक्रेन के अंदर जवना तरह के प्रतिरोध रूसी सेना के झेले के पड़ रहल बा, ऊ त अप्रत्याशित बटले बा लेकिन ओसे भी बड़ मुसीबत बा आर्थिक प्रतिबंध। अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान आदि के साझा मोर्चाबंदी आर्थिक मोर्चा पर रूस के सामने मुश्किलन के पहाड़ खड़ा कर दिहले बा। पूरा विश्व जनमत रूस के खिलाफ बा आ रूस बिल्कुल अकेला पड़ गइल बा। जहां तक बात भारत के बा त ऊ तटस्थ बा। न केहू के समर्थन ना केहू के विरोध। हं युद्ध रुक जाव भारत ई जरूर चाहत बा।

ए संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन के बीच भइल बातचीत भी मायने रखत बा। बातचीत में पूतिन प्रधानमंत्री मोदी के ताजा स्थिति के बारे में जानकारी दिहले त प्रधानमंत्री पूतिन से तत्काल युद्धविराम करे आ बातचीत के जरिए विवाद सुलझावे के अपील कइलन। असल में ई पूरा मामला में भारत बेहद जटिल स्थिति में बा। एक तरफ ऊ अमेरिका के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र खातिर बनल क्वाड जइसन संगठन का अहम मेंबर बा। ई संगठन चीन के विस्तारवादी नीति के रोके के मकसद से बनावल गइल बा। वास्तविक नियंत्रण रेखा के लेके चीन भारत के खिलाफ आक्रामक रूख अख्तियार कइले बा। भारत के लागत बा कि चीन के रोके में क्वाड से मदद मिली। दूसरा तरफ रूस जानल परखल दोस्त ह। भारत के हर मुश्किल में रूस साथ दिहले बा। सामरिक तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण सहयोगी ह। भारत के 60 फीसदी हथियार के आपूर्ति रूस से ही होला। अइसन स्थिति में अमेरिका, फ्रांस आ दूसरा यूरोपीय सहयोगियन के साथ रूस के भी जरूरत बा। भलही अमेरिका आ यूरोपियन देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगवले बा लेकिन भारत रूस से तेल क निर्यात करे जात बा। ई भारत के मजबूत विदेश नीति के प्रमाण बा कि रूस से तेल के निर्यात के निर्णय के बावजूद अमेरिका या अन्य यूरोपीय देश के तरफ से कवनो विरोध के स्वर ना उठल। वैश्विक समुदाय के बीच भारत के आज का हैसियत बा इ बात एके भी प्रमाणित करत बा।

बहरहाल, यूरोपियन यूनियन कमिशन आ अमेरिका के ओर से रूसी केंद्रीय बैंक पर प्रतिबंध आ रूस के स्विफ्ट सिस्टम से आंशिक तौर पर निकाले के फैसला बेहद गंभीर बा। स्विफ्ट एगो मेसेजिंग प्लैटफॉर्म ह जेकरा जरिए तमाम देश वित्तीय लेन देन के निर्देश देवेलन आ एसे 11 हजार बैंकिंग आ वित्तीय संस्थान जुड़ल बा। प्रतिबंध से रूस खातिर आयात-निर्यात बिल के भुगतान त मुश्किल हो ही सकेला ओकर पूरा वित्तीय व्यवस्था के बइठ जाये के भी नौबत आ सकत बा। एही से रूस ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी के साथ कैपिटल कंट्रोल जइसन कदम उठवले बा। इ सब घटना एक बार फिर साबित कर रहल बा कि आज के दौर में युद्ध केहू खातिर भी आसान विकल्प ना होला। हालांकि ई संकेत दुनों पक्ष के युद्ध विराम के ओर ले जाके शांति क कवनो सम्मानजनक राह ढूंढ़े के प्रेरित करी? मौजूदा स्थिति में हमनी के बस एकर उम्मीद ही कर सकीला जा।

 


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Hum BhojpuriaMay 2, 20221min1200

अनुरंजन झा

रूस आ यूक्रेन के बीच के युद्ध तीसरा हफ्ता में आ गइल बा लेकिन का मजाल कि दूनू देश में कवनो जाने टस से मस हो जाए लो। एतना त तय बा कि हमला करे से पहिले रुस के इ बात के अँदाजा ना रहल होई कि इ लड़ाई एतना लंबा खिंची। खाली उनके काहे, बाकि दुनिया के भी इहे अंदाज रहल होई कि जादे से जादे 48 घंटा में मामला फरिआ जाई लेकिन अइसन ना भइल आ अब तनाव पूरा यूरोप में साफ देखाई दे रहल बा। एतना दिन के लड़ाई में रुस अभी तक कीव माने यूक्रेन के राजधानी पर भी पूरा कब्जा ना क सकल बा। त आखिर ई लड़ाई के नतीजा का होई ? जाहिर बा कि रुस एगो ताकतवर देश बा, महाशक्ति कहल जाला त ओकरा सामने यूक्रेन के फौज के कवनो मोजर नइखे, देर सबेर यूक्रेन के हार मानही के पड़ी लेकिन आखिर ई युद्ध में जीती के ? सांच बात त ई बा कि सही मायने में देखल जाव त पुतिन सैद्धांतिक तौर पर ई लड़ाई हार चुकल बाड़न लेकिन जेलेंस्की के जिद आ पुतिन के साम्राज्यवादी विस्तार नीति के चलते यूक्रेन त्राहिमाम क रहल बा। कई गो शहर में एतना खराब हालत बा कि सड़क पर बिखरल लाश उठावे वाला केहू नइखे। गांव-शहर हर जगह लोग दहशत में बा, लोग के करेजा कांपत बा आ रूस के बमबारी जारी बा। ई युद्ध में कोई जीते, कोई हारे लेकिन यूक्रेन के मासूम जनता जरूर अपन बहुत कुछ हार रहल बा।

बीच में एक बेर लागल कि जेलेंस्की युद्ध खतमावे के चाहत बाड़न जब उनका ओरि से संकेत आइल कि उ नेटो देश में शामिल होखे के अपन विचार त्याग सकेलें साथे साथ उ लुहांस्क आ डोनस्क पर भी बात करे के तैयार बाड़े। ओने रूस भी कहसल कि पुतिन के इरादा यूक्रेन पर कब्जा करे के चाहे उहां के सरकार के बदले के नइखे, माने जे रूस पहिले से कहत रहे कि यूक्रेन नेटो देश में शामिल मत होखो बस ओही बात के गारंटी पर रूस लड़ाई से रुक सकअ ता। इ दूनू के बयान के बाद बुझाइल कि शायद अब इ युद्ध जल्दिए खतम हो जाई। जेलेंस्की के इ बात के चिंता त होखबे करी कि पता ना इतिहास के पन्ना में उनकर नाम के लेखा लिखाई, भले लोग उनका के योद्धा माने बाकिर यूक्रेन के इ नुकसान के जिम्मेदार भी उनका के मानल जाई, बावजूद एकरा उनकर बयान से बुझाइल कि ऊ युद्ध के खतम करे चाहत बाड़ें। लेकिन अइसन अभी तक नइखे भइल। ना ता यूक्रेन पर रूस के हमला रुकल बा और ना ही यूरोपीय संघ आ नेटो देश रुस पर प्रतिबंध लगावे के रफ्तार रोकअ ता। ई अब साफ-साफ बुझा रहल बा कि आवे वाला दिन में इ आर्थिक प्रतिबंध से रूस के हाल गड़बड़ाई, भले दुनिया भर में कुछ लोग इ बात के जाप क रहल बा कि 2014 में भी त रूस पर पाबंदी लागल त ओकर का बिगड़ल ? लेकिन इ बेर स्थिति ओइसन नइखे। लेकिन इ निर्भर करी कि ब्रिटेन आ यूरोपीय संघ के द्वारा लगावल प्रतिबंध के मियाद केतना रहअ ता।

जब से इ लड़ाई हो रहल बा इ साफ-साफ दिखाई दे रहल बा कि ब्रिटेन आ दोसर नेटो देश रूस से सीधे-सीधे लड़ाई के मूड में नइखे काहे कि ओ से तिसर विश्व युद्ध के खतरा बढ़ी, आ तिसर विश्व युद्ध होखी त बिना परमाणु हथियार के ना होखी। ओह हालत में रूस के पास अमेरिका से जादे परमाणु हथियार बा, पूरा यूरोप में जेतना नइखे ओतना परमाणु हथियार रूस के लगे बा, आ इहे सबसे बड़ा कारण बा कि नेटो देश खुलके यूक्रेन के पक्ष में खड़ा नइखे होखत। एही से अमेरिका-ब्रिटेन आ यूरोपीय संघ रूस पर तरह-तरह के पाबंदी लगा रहल बा। ब्रिटेन रूस के बैंक अपना इहां बंद क देहलस, रूस के अमीर लोग जे ब्रिटेन में रहत रहे ओकर संपत्ति जब्त क देहलस। स्विफ्ट, जेकरा जरिए एक देस से दोसर देस में पइसा भेजल जाला ओ सिस्टम से रूस के ज्यादातर बैंक के बाहर क दिआइल बा आ एकर नतीजा ई भइल बा कि रूस के सिस्टम चरमरा गइल बा। उहां के बैंक में पइसा रखे खातिर बैंक दोगूना ब्याज दे रहल बा। अगर ई लड़ाई कुछ दिन में ना खतम होई त ई संकट और बढ़ी आ धीरे-धीरे यूरोप के दोसर देस सब भी प्रभावित होई। यूरोप में सबसे जादे गैस रूस से आवेला काहे कि रूस दुनिया के सबसे बड़ गैस के उत्पादक देस ह। कुल मिलाके ई आर्थिक पाबंदी के असर रूस पर जादे पड़ी लेकिन यूरोप पर भी बड़ी, ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनक त कह भी देले बाड़ें कि आवे वाला समय में ब्रिटेन के लोग के महंगाई के सामना करे खातिर तैयार रहे के होई। साथे साथ जवाब में रूस एगो कानून बना रहल बा जे में ई होई कि जे बिजनेस घराना ( चाहे दुनिया के कवनो देश के होखे, खासकर यूरोप के ) ई लड़ाई के दौरान अपन कामकाज रूस में बंद क पलायन कइल ह लोग उ लोग के संपत्ति जब्त क के सरकारी संपत्ति घोषित क दिआई, दरअसल इ तरीका से पुतिन बड़ा-बड़ा ब्रांड के मन में डर बइठा रहल बाड़ें कि युद्ध खतम भइला पर अगर रूस आ के अपन संपत्ति खोजबअ लोगन त ना मिली।

समस्या खाली एही जा खतम नइखे होखत, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की वीडियो कांफ्रेंसिंग से ब्रिटेन के संसद के संबोधित कइलें आ कहलें कि रूस एगो आतंकवाद देस ह आ दोसर यूरोपीय देस सब भी ओकरा के आतंकवादी देस घोषित करे। साथे साथ उ एगो वीडियो भी बना के सब यूरोपीय देस से ई गुहार लगाव तारेन। ओने रूसी फौज आपन बर्बरता के हद पार कर गइल, मारियुपोल में आम लोगन पर हमला भइल, अस्पताल आ स्कूल पर बम गिरावल गइल, एतने ना एगो अस्पताल के बच्चा वार्ड पर भी बमबारी भइल। ई हमला के दुनिया भर में निंदा हो रहल बा। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतरेस भी एकर निंदा कइलें आ कहलें कि आम लोग के जेकरा ई लड़ाई से कवनो लेना देना नइखे ओकरा के तबाह कइल ठीक नइखे। लेकिन पुतिन के कवनो असर नइखे होत। अभी एतने हो रहल बा कि बीच-बीच में मध्यस्थ देसन के जइसे भारत, इजराइल आ तुर्की के बात पर कुछ समय ला सीजफायर हो जा ता लेकिन फेर कबो सायरन बाज जाता आ युद्ध शुरु हो जाता। अमेरिकी कंपनी मैक्सर टेक्नोलॉजीज कुछ तस्वीर जारी कइसल ह जे मे साफ-साफ दिखाई दे  रहल बा कीव के घेरेला रुसी सेना फेर से संगठित हो रहल बा।

ब्रिटेन के रूस के अगर तुलना करी त बात साफ होता कि बदमासी के क रहल बा। एक तरफ ब्रिटेन अपना नागरिक से कह रहल बा कि युद्ध में सीधे शामिल नइखे होखे के। ओही जां पुतिन खाड़ी देश के उ लड़ाका सब के जेIS के खिलाफ सीरिया में लड़ले रहे, रूस के ओर से लड़े ला बोला रहल बाड़ें। अगर इ रफ्तार रही त इ लड़ाई और लंबा खिंच सकेला।

ऐने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ब्रिटिश जनता से कहलें ह कि अगर उ लोग चाहे त यूक्रेन के शरणार्थी के अपना घर में रख सकेला लोग। संकेत भी मिलल ह कि आवे वाला समय में ओकरा खातिर कुछ आर्थिक पैकेज भी देहल जाई।

मौजूदा हालात में निश्चित तौर पर इ युद्ध के दौरान आम लोगन पर भइल बर्बरता युद्ध अपराध ह लेकिन अंतरराष्ट्रीय अदालत में पुतिन के पहुंचावे खातिर यूक्रेन के इ साबित करे के पड़ी कि पुतिन युद्ध अपराधी बाड़ें। इहां सबसे बड़ा सवाल बा कि ए में यूपोरीय देस चाहे नेटो देस केतना मदद क सकेला। लेकिन मामला एही जा खतम नइखे होखत अब यूरोप के छोट-छोट देस के ई चिंता सता रहल बा कि अगर ई युद्ध यूक्रेन से निकल के आगे बढी त उ देसन ला संकट पैदा हो जाई। खासतौर पर बाल्कन देस ला। कोसोवो के प्रधानमंत्री आ राष्ट्रपति दूनू जाने साफ-साफ कहअ ता लोग कि रूस पश्चिमी बाल्कन के अस्थिर क के पूरा यूरोप के अस्थिर करे के कोशिश करी। निश्चित तौर पर इ समस्या बढ़े के ओर इशारा बा। लेकिन अभी जेलेंस्की के होशियारी एही में बा कि उनका ई लड़ाई से पीछे हटे के चाही आ पुतिन के भी यूक्रेन के आम लोग के तबाह ना करे के चाही लेकिन इ सब आदर्श बात बा। अभी त हालात ई बा कि पुतिन के सनक आ जेलेंस्की के जिद यूक्रेन के तबाह क रहल बा आ तीसर विश्व युद्ध के दरवाजा पर दुनिया के ला के खड़ा क देले बा।


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Hum BhojpuriaMay 2, 20221min750

डॉ० रंजन विकास

युद्ध कवनो नया चीज नइखे। जब से एह धरती प सृष्टि भइल, तबे से युद्ध चलल आ रहल बा। इहो बात सही बा जे देस, काल आ परिस्थिति के हिसाब से समय-समय प ओकर रूप-सरुप बदलत रहेला। युद्ध कवनो समस्या के समाधान ना हऽ। ई बात सभे जानेला आ पहिलहूँ के लोग जानत रहे, तबो केहू बाज ना आवे। कबहूँ धर्म-अधर्म के, वर्चस्व के, स्वाभिमान के, आर्म्स के व्यापार खातिर, आपन-आपन दबदबा खातिर, आत्म-रक्षा में भा आउरो कवनो वजे से युद्ध हमेसा से होत रहल बा, बाक़िर मानवीय संवेदना त हर बेर नज़रअंदाज़ होत आइल बा।

हाल फिलहाल में रूस आ यूक्रेन के बीच युद्ध के जवन तस्वीर आ समाचार उभर के आ रहल बा, ऊ त रउरा सभे देखते-सुनत होखब। कवनो टेलीविज़न चैनेल होखे, सगरो 24×7 एके खबर आवत रहेला, जे पुतिन सेना यूक्रेन पर आक्रमण कऽ देले बा। आज-काल्ह के सगरी अखबारो एही खबर से रंगाइल रहता। सऊँसे दुनिया एकरा के रूसी घुसपैठ मान रहल बा आ अंजाम भोगे के धमकियो कम ना देहलस, बाक़िर एह ममिला में भारत सरकार के भूमिका विवेकपूर्ण रहल बा, जवना के सराहे में कवनो तरे के संकोच नइखे।

अबहीं यूक्रेन के सीमा पश्चिम में यूरोप आ पूरब में रूस से सटल बा। अब सवाल ई उठत बा जे सन् 1991 ले सोवियत संघ के हिस्सा रहल यूक्रेन आ रूस के बीच में अइसन का हो गइल, जवना के चलते आपसी दुसमनी दिन प दिन बढ़त चल गइल ? सन् 1991 में यूक्रेन सोवियत संघ से अलग भइल रहे, ओही घरी क्रीमिया के लेके यूक्रेन आ रूस के बीच बहुते बेर टकराव भइल रहे। बाक़िर अइसन का हो गइल, जे पुतिन के अपना सेना के युद्ध करे के आदेस देबे के पड़ल। एह युद्ध से सऊँसे दुनिया विश्व-युद्ध के मोहान प खड़ा बा। अब देखल जाव कि असली विवाद के जड़ का बा ?

रूस आ यूक्रेन के आपसी तनाव सन् 2013 के नवंबर में ओह समय सुरु भइल रहे, जब यूक्रेन के तत्कालीन राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के कीव में विरोध होखे लागल, जबकि रूस उनकर पुरहर समर्थन करत रहे। विरोध करे वाला प्रदर्शनकारियन के बीच अमेरिका आ ब्रिटेन आग में घीव डाले के काम कइलस, जवना के चलते बगावत माटी के तेल नियर पसर गइल। मामला अतना जादे बढ़ गइल कि फरवरी 2014 में यूक्रेन के राष्ट्रपति यानुकोविच के देश छोड़ के भागे के पड़ल आ आखिर में ऊ रूस में सरन लेहले। एहिजा से विवाद जनम लेहलस। पलटवार करत रूस दक्खिनी यूक्रेन के क्रीमिया पर आपन कब्जा जमा लेलस। बात एहीजा ले ना ओराइल। यूक्रेन के अलगाववादियन के रूसी समर्थन मिले लागल। ई लोग पूर्वी यूक्रेन के बड़हन हिस्सो पर आपन कब्जा जमा लिहल। एजुगियो यूक्रेन सेना आ अलगाववादियन के बीच में तानातानी बढ़त चल गइल। अब सवाल बा जे 2014 से सुलगत विवाद अचानक जंग में कइसे बदल गइल।

अलगाववादियन से निपटे खातिर यूक्रेन एगो रणनीति बना के नाटो से दोस्ती कके खुल्लम-खुल्ला अमेरिका के आँचर थाम लेलस। बात तब बिगड़ल जब यूक्रेन नाटो में सामिल होखे के तइयारी करे लागल। रूस चाहत रहे, जे यूक्रेन नाटो के हिस्सा ना बनो। रूस के अइसन सोच रहे, जे यूक्रेन अगर नाटो के सदस्य बन जाई त रूस बहुते बुरा ढ़ंग से घिर जाई, काहेंकि भविष्य में नाटो देश के मिसाइल यूक्रेन के धरती पर तैनात हो सकेला, जवना से आगे जाके रूस के बड़हन चुनौती के सामना करे के पड़ सकत बा। एही से रूस के आपन अस्तित्व आ संप्रभुता खतरा में लउके लागल।

रूस चाहत रहे, जे नाटो के आउर विस्तार ना होखे। एही मनसा से राष्ट्रपति पुतिन के मांग के दबाव यूक्रेन आ पश्चिमी देसन प रहे। बात बिगड़त देख के रूस यूक्रेन प हमला कऽ देलस। अमेरिका आ सऊँसे यूरोपियन देस रूस के ऊपर बहुते तरे के पाबन्दी लगा देहले सन। ओकरा बादो सगरी पाबन्दी के नज़रअंदाज करत रूस युद्ध में आपन आउर आक्रामक तेवर जारी रखलस। आज स्थिति अइसन बा कि यूक्रेन के बड़हन हिस्सा पर रूस के कब्जा हो गइल बा। अगर अइसन हाल रहल त एह दिन पूरा यूक्रेन रूस के कब्जा में आ जाई। शुरू में अमेरिका समेत नाटो के सगरी यूरोपीय देसन के हर तरह के मदद मिले के भरोसा प यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की धोखा खा गइले। बाद में उहे भइल जे होखे के उम्मीद रहे। अमेरिका समेत नाटो के सगरी यूरोपीय देस आपन-आपन गोड़ घींच लेहले सन। अमेरिका त सोझे आपन आँचर झार देहलस। एतना जन-धन-सम्पति गँववला आ सऊँसे उक्रेन में तबाही के मंजर देखला के बादो यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की अपना जिद्द से बाज नइखन आवत। अखाड़ा के हारल पलवान जस उनकर हाल बा, तबो आपन लंगोटी के धूर झार के रूस से लड़े खातिर तइयार बइठल बाड़े। बुझाता जे युद्ध में उनकर मति हेरा गइल होखे। उनकर मानवीय संवेदना त साफे ख़तम हो गइल बा।

साँच कहल जाव त दोसरका विश्व युद्ध के बाद सऊँसे दुनिया दू फाड़ में बँट गइल – एक ओर अमेरिका आ दोसरका ओर सोवियत संघ। 25 दिसंबर 1991 के सोवियत संघ खण्डे–खण्ड टूट के 15 गो अलग-अलग राज्य बन गइल, जवना में यूक्रेन, आर्मीनिया, अजरबैजान, बेलारूस, इस्टोनिया, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, कीर्गिस्तान, लातविया, लिथुआनिया, मालदोवा, रूस, ताजिकिस्तान,  तुर्कमेनिस्तान आ उज्बेकिस्तान देस बाड़े सन। सोवियत संघ के विघटन के बाद आजाद मुल्कन के मान्यता त मिलल, बाक़िर कई मुल्कन का बीच आज ले सही ढंग से विवाद के समाधान ना हो सकल। सुरुए से यूक्रेन के सामने बड़हन चुनौती बनल रहल, जवना में पूरबी आ पश्चिमी यूक्रेन के लोगन के बीच अलग-अलग विचारधारा भइल, पूरब आ पश्चिम यूक्रेन में भाषा के साथे-साथे राजनीतिक रूझानो एक-दोसरा से साफे अलग-अलग रहल आ यूक्रेन में भीतरे-भीतरे अलगाववाद के चलते बगावत के चिंगारी के सुलगल प्रमुख वजे बा। बस ! रूस एही चिंगारी के आग में बदले के कोशिश कइलस, काहेंकि आपन देस माने सोवियत संघ के विघटन के मलाल त रूस के राष्ट्रपति पुतिन के हमेसा कचोटत रहेला। उनकर तेवर देख के अब यूरोपीय देसन, नाटो भा अमेरिका के होस ठिकाने लागल बा। एह लोग के ई बुझा गइल बा जे रूस के खिलाफ कवनो तरे के सैन्य कार्रवाई कइला प सऊँसे दुनिया तबाह हो सकत बा।

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परिचय: (सेवानिवृत मूल्यांकन पदाधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार। वर्त्तमान में “भोजपुरी साहित्यांगन” में सह-संचालक का रूप में कार्यरत।)

 



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