कहाँ जाके रुकी ई युद्ध

कहाँ जाके रुकी ई युद्ध

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Posted: May 2, 2022
Category: आवरण कथा
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बद्रीनाथ वर्मा

यूक्रेन पर धुआंधार मिसाइल बरसा के रूस के लागल कि बस दु चार दिन में यूक्रेन घुटना के बल आ जाई लेकिन ई ओकर गलतफहमी साबित भइल। लड़ाई लगातार लंबा खिंचात जात बा। कब खतम होई आज के तारीख में केहू भी बतावे में समर्थ नइखे। उल्लेखनीय बा कि यूक्रेन के दुगो प्रांत के स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दिहला के अगिला ही दिन रूस ओजहां आपन सेना भेज दीहलस आ एही के साथे दुनों देशन के बीच बाकायदा युद्ध शुरू हो गइल। एकरा साथ ही यूक्रेन पर रूस के हमला, जेकरा बारे में खुद पुतिन एगो सीमित सैन्य कार्रवाई बतावत रहलन उ एगो अइसन युद्ध के रूप में देखल जाये लागल बा जेकर प्रभाव के व्यापकता केहू के काबू में नइखे रह गइल।

अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन परमाणु हथियार के इस्तेमाल के संभावना क जिक्र करके अचानक सबका के सकता में डाल देले बाड़न। दुनिया शीत युद्ध के दौरान ये तरह के परिस्थिति के गवाह रहल बा। अमेरिका आ ओकर सहयोगी देशन के पास भी एकरा जवाब में अपना सेना के परमाणु हमला खातिर तैयार रहे के आदेश देबे क ऑप्शन रहे, लेकिन ऊ लोग अइसन ना कइल। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत सुरक्षा परिषद के भरोसा दिहलन कि रूस पर उनका ओर से कवनो खतरा नइखे। ऊ ई भी कहलन कि पुतिन क ई कदम गैरजरूरी बा आ एसे सबका सुरक्षा के खतरा हो सकेला। वाइट हाउस के तरफ से भी स्पष्ट कइल गइल कि ओकरा ओर से अलर्ट के स्टेटस में कवनो बदलाव नइखे कइल गइल। एकरा बावजूद पुतिन के बयान के बाद परमाणु युद्ध के आशंका दुनिया के सामने एगो वास्तविक खतरा के रूप में मुंह बा के खड़ा हो गइल बा।

सवाल बा कि हमला के बाद के समय में आखिर अइसन का हो गइल कि खुद पुतिन अपना शुरुआती दावा के उलट संकेत देबे के मजबूर हो गइल बाड़न। जवाब चाहे जो भी हो, एसे एतना त स्पष्ट हो ही जाता कि यूक्रेन के खिलाफ शुरू उनकर सैन्य कार्रवाई ओतना आसान साबित ना भइल जेतना उनके लागत रहे। पुतिन के आह्वान के बावजूद यूक्रेनी सेना में फूट, विभाजन या बगावत के कवनो संकेत अभी तक नइखे लउकत बल्कि आम यूक्रेनवासियन में ये हमला के खिलाफ जवना तरह के जज्बा देखात बा ओसे लागत नइखे कि आगे के राह भी रूसी सेना खातिर आसान रहे वाला बा। येह बीच नाटो देश यूक्रेन के पक्ष में सेना भले नइखे भेजले लेकिन हथियार के सप्लाई में कमी नइखे रखले लोग। यूरोपियन यूनियन इतिहास में पहिला बार कवनो युद्धरत देश के हथियार के आपूर्ति करे के फैसला कइले बा। लेकिन रूस खातिर एसे ज्यादा चिंताजनक बा आर्थिक प्रतिबंध के एलान।

बहरहाल, ई युद्ध यूक्रेन समेत पूरी दुनिया खातिर चाहे जेतना भी परेशानी ला रहल बा, खुद रूस खातिर भी कम बड़ आफत नइखे साबित हो रहल। यूक्रेन के अंदर जवना तरह के प्रतिरोध रूसी सेना के झेले के पड़ रहल बा, ऊ त अप्रत्याशित बटले बा लेकिन ओसे भी बड़ मुसीबत बा आर्थिक प्रतिबंध। अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान आदि के साझा मोर्चाबंदी आर्थिक मोर्चा पर रूस के सामने मुश्किलन के पहाड़ खड़ा कर दिहले बा। पूरा विश्व जनमत रूस के खिलाफ बा आ रूस बिल्कुल अकेला पड़ गइल बा। जहां तक बात भारत के बा त ऊ तटस्थ बा। न केहू के समर्थन ना केहू के विरोध। हं युद्ध रुक जाव भारत ई जरूर चाहत बा।

ए संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन के बीच भइल बातचीत भी मायने रखत बा। बातचीत में पूतिन प्रधानमंत्री मोदी के ताजा स्थिति के बारे में जानकारी दिहले त प्रधानमंत्री पूतिन से तत्काल युद्धविराम करे आ बातचीत के जरिए विवाद सुलझावे के अपील कइलन। असल में ई पूरा मामला में भारत बेहद जटिल स्थिति में बा। एक तरफ ऊ अमेरिका के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र खातिर बनल क्वाड जइसन संगठन का अहम मेंबर बा। ई संगठन चीन के विस्तारवादी नीति के रोके के मकसद से बनावल गइल बा। वास्तविक नियंत्रण रेखा के लेके चीन भारत के खिलाफ आक्रामक रूख अख्तियार कइले बा। भारत के लागत बा कि चीन के रोके में क्वाड से मदद मिली। दूसरा तरफ रूस जानल परखल दोस्त ह। भारत के हर मुश्किल में रूस साथ दिहले बा। सामरिक तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण सहयोगी ह। भारत के 60 फीसदी हथियार के आपूर्ति रूस से ही होला। अइसन स्थिति में अमेरिका, फ्रांस आ दूसरा यूरोपीय सहयोगियन के साथ रूस के भी जरूरत बा। भलही अमेरिका आ यूरोपियन देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगवले बा लेकिन भारत रूस से तेल क निर्यात करे जात बा। ई भारत के मजबूत विदेश नीति के प्रमाण बा कि रूस से तेल के निर्यात के निर्णय के बावजूद अमेरिका या अन्य यूरोपीय देश के तरफ से कवनो विरोध के स्वर ना उठल। वैश्विक समुदाय के बीच भारत के आज का हैसियत बा इ बात एके भी प्रमाणित करत बा।

बहरहाल, यूरोपियन यूनियन कमिशन आ अमेरिका के ओर से रूसी केंद्रीय बैंक पर प्रतिबंध आ रूस के स्विफ्ट सिस्टम से आंशिक तौर पर निकाले के फैसला बेहद गंभीर बा। स्विफ्ट एगो मेसेजिंग प्लैटफॉर्म ह जेकरा जरिए तमाम देश वित्तीय लेन देन के निर्देश देवेलन आ एसे 11 हजार बैंकिंग आ वित्तीय संस्थान जुड़ल बा। प्रतिबंध से रूस खातिर आयात-निर्यात बिल के भुगतान त मुश्किल हो ही सकेला ओकर पूरा वित्तीय व्यवस्था के बइठ जाये के भी नौबत आ सकत बा। एही से रूस ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी के साथ कैपिटल कंट्रोल जइसन कदम उठवले बा। इ सब घटना एक बार फिर साबित कर रहल बा कि आज के दौर में युद्ध केहू खातिर भी आसान विकल्प ना होला। हालांकि ई संकेत दुनों पक्ष के युद्ध विराम के ओर ले जाके शांति क कवनो सम्मानजनक राह ढूंढ़े के प्रेरित करी? मौजूदा स्थिति में हमनी के बस एकर उम्मीद ही कर सकीला जा।

 

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