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Bring to the table win-win survival strategies to ensure proactive domination. At the end of the day, going forward, a new normal that has evolved from generation X is on the runway heading towards a streamlined cloud solution.

हम भोजपुरिआ

‘हम भोजपुरिआ’ के माध्यम से हमनी के एगो अइसन सफर क रहल बानी, जवना में रउरा अउर हमनी के सभे सहयात्री बानी जा। ई यात्रा वर्तमान दौर के संघर्ष से उपजल तनाव आ अवसाद से छुटकारा पावे खातिर बा। भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति एकर सबसे बढ़िया उपाय मानल जाला, एह से एकर संरक्षण-संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरिअन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित बा ‘हम भोजपुरिआ’। भोजपुरी के थाती, एकर धरोहर, भूलल- बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्तियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नयका पीढ़ी में भोजपुरी खातिर रुचि पैदा करे के बा। नया-पुरान के बीच सेतु के काम करी ‘हम भोजपुरिआ’। देश-विदेश के भोजपुरिअन के कनेक्ट करी ‘हम भोजपुरिआ’। सांच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह ‘हम भोजपुरिआ’।

रवींद्र किशोर सिन्हा (अध्यक्ष प्रधान संपादक)

श्री रवींद्र किशोर सिन्हा आपन कैरियर के शुरुआत पत्रकार के रूप में कइनी। इहां के खोजी पत्रकार के रूप में प्रसिद्धिओ मिलल। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में इहां के युद्ध संवाददाता के तौर प रिपोर्टिंग कइनी। 1974-75 के लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चलल छात्र आंदोलन में सक्रिय रहनी। फेर अपना अनुभव के आधार प एगो किताब लिखनी-  ‘जनांदोलन’।

एकरा बाद इहां के सुरक्षा के आपन कार्य क्षेत्र बनवनी अउर एगो सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनवनी। इहां के सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज के नींव डलनी, जवन आजु देश-दुनिया में जानल-मानल संस्था बा। इहां के शुरूए से भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय रहनी आ फरवरी 2014 में भाजपा के ओर से बिहार से राज्यसभा में चुन के अइनी। एकरा अलावा इहां के ढेर कुल्ह सामाजिक आ कल्याणकारी संस्था सब के अध्यक्षो बानी। देहरादून में इहां के एगो आवासीय ‘दि इंडियन पब्लिक स्कूल’ के स्थापना कइले बानी। इहां के स्कूल के संस्थापक अध्यक्ष हईं। ‘हम भोजपुरिआ’ पत्रिका के इहां के अध्यक्ष आ प्रधान संपादक हईं।

रामबहादुर राय (समूह संपादक)

रामबहादुर राय जनसत्ता के ओह शुरुआती चुनिंदा सदस्य सब में रहनी, जेकर रपट अखबार के धमक बढ़वलस। 1983-86 आ 1991-2004 के बीच जनसत्ता से संपादक, समाचार सेवा के रूप में संबद्ध रहनी।ओहिजे 1986-91 तक दैनिक नवभारत टाइम्स से विशेष संवाददाता के रूप में जुड़ल रहनी। 2006-10 तक पाक्षिक पत्रिका ‘प्रथम प्रवक्ता’ के संपादक रहनी। वर्तमान में हिंदुस्थान समाचार समूह के समूह संपादक बानी।

मनोज भावुक (संपादक)

मनोज भावुक भोजपुरी साहित्य आ मनोरंजन के दुनिया के जानल मानल नाम हईं। इहां के लेखक, कवि, टेलीविजन प्रस्तोता आ अभिनेता हईं। इहां के कइगो किताबों लिखले बानी। 2006 में इहां के गजल संग्रह ‘तस्वीर जिंदगी के’ भारतीय भाषा परिषद पुरस्कार से सम्मानित भइल बा। इहां के भोजपुरी सिनेमा के इनसाइक्लोपीडिया के रूप में भी जानल जानी। इहां के संपादन में ‘हम भोजपुरिआ’ के नियमित प्रकाशन हो रहल बा।


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भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति  के सरंक्षण, संवर्धन अउर विकास खातिर, देश के दशा अउर दिशा बेहतर बनावे में भोजपुरियन के योगदान खातिर अउर नया प्रतिभा के मंच देवे खातिर समर्पित  बा हम भोजपुरिआ। हम मतलब हमनी के सब। सबकर साथ सबकर विकास।

भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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