मानवता खातिर युद्ध न शांति जरूरी बा

Hum BhojpuriaMay 6, 2022152

संतोष कुमार सिंह 

विश्व में मानवता के बचावे खातिर युद्ध ना, शान्ति के पहल पर शक्तिशाली देशनों के जोर देवे केआवश्यकता बा। पूरा विश्व अभी कोरोना के कहर से संभललो नइखे कि रूस आ यूक्रेन के टकराहट से पूरा विश्व के मानवजाति पर खतरा मंडराय लागल बा। एह बार खतरा कोरोना से नइखे बल्कि वर्चस्व खातिर हो रहल यूक्रेन आ रूस से हो रहल महायुद्ध से बा। हालत अइसन बन रहल बा कि अगर समय रहते शांति समझौता ना भइल त देखत-देखत पूरा संसार ई युद्ध के आग में लहक जाई। हालात एह क़द्दर गंभीर होत जाता कि रुस के राष्ट्रपति परमाणु हथियार के धमकी पर उतारू हो गइल बाड़न अउर अपना सेना के परमाणु बम के इस्तेमाल करे खातिर तैयार रहे के आदेश दे दिहले बाड़न जेकरा बाद से पूरा विश्व में हलचल मचल बा,  जेकरा बाद से तीसरा विश्वयुद्ध के आशंका बढ़त जा रहल बा।

सवाल ई नइखे की दु गो देशन के बीच युद्ध हो रहल बा। सवाल ई बा कि एतना ताकतवर, एतना विकसित अत्यंत आधुनिक हथियार के का महत्व बा या रह जाई जब मानव जाति ही समाप्ति के कगार पर चल जाई।

एकरा विपरीत कवनों भी विवेकशील व्यक्ति के युद्ध के खबर आनंदित ना करी, बल्कि तबाही के गहरा टीस भीतर ले छोड़ जाई। युद्ध के विनाश लीला से बर्बाद होखे वाला मुल्क के फिर से अपना पैर पर खड़ा होखे में दशकों लाग जाला, जब सरफिरा नेता अपना समझदारी के ताख पर रख के अपना घमंड में युद्ध छेड़ के मानवता के कुचल डालेलन।

युद्ध जब होला त नुकसान दुनो पक्ष के उठावे के पड़ेला। युद्ध छेडल आसान बा लेकिन शांति स्थापित कइल बेहद कठिन। अत्यंत घातक परमाणु हथियार से लैस रूस अउर अमेरिका के भिड़े के संभावना भी बढ़ रहल बा। मिलाजुला के ई कहल जा सकेला कि समय रहते शांति के उपाय ना कइल गइल त परिणाम बडा गंभीर देखे के मिली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जानबूझके आग से खेल रहल बाड़न। युद्ध में बढियां-बढ़िया देश के कमर टूट जाला।

लेकिन एह बीच एगो बढ़िया बात ई बा कि भारत आपन परचम लहरावत सभे भारतीयन के सकुशल वापसी करावें में सफल रहल बा। त ओहिजे एह संकटकाल में विश्व के निगाह फिर से भारत पर टिकल बिया अउर उम्मीद लगा के बइठल बिया कि इ समस्या के निदान भी भारत निकाल के विश्वगुरु के ओर एक अउर सफल कदम बढ़ा सकेला। विचारणीय विषय ई बा कि जवन तरीका से चाहे उ शक्तिशाली देश होखे या कमजोर देश होखे सब मानवतावादी अउर शान्ति के राह छोड़ के विध्वंसक हथियार बनावे के होड़ में जुटल बा। ई बात मानवता खातिर घातक साबित होई। इ समय युद्ध के नइखे बल्कि शांति कायम करके मानवीयता देखावे के बा ताकि समस्त मानवजाति सुकून अउर अमन से जिनगी बिता सके। कोरोना पहिलहीं से जनमानस के रुला रहल बा अइसे में अगर अब तीसरा विश्व युद्ध छिड़ गइल त परिणाम विध्वंसक हो

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