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Hum BhojpuriaJanuary 23, 20211min11320

लेखक- मनोज भावुक

लरकोरी हो गइली अनुष्का शर्मा. उनका बेटी भइल काल्ह. बधाई होखे विराट भाई ! जिलेबी बंटाव.

जी हाँ, टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली अब पापा बन गइल बाड़न. उ ट्वीट क के खुशखबरी देले बाड़न. जान जाईं कि विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरा के बीचे से भारत लौटे के पड़ल. एकरा पहिले उ वनडे टी-20 आ पहिला टेस्ट मैच में टीम के हिस्सा रहलें. पापा बनला के बाद विराट कोहली ट्विटर पर खुशी जाहिर करत भावुक होके लोग बाग़ के शुभकामना खातिर धन्यवाद देले बाड़न.

विराट कोहली ट्वीट क के कहले बाड़न कि “हम दोनों को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमारे घर बेटी हुई है. हम आपके प्यार और शुभकामनओं के लिए दिल से आभारी हैं. अनुष्का और हमारी बेटी, दोनों बिल्कुल ठीक हैं. हमारा यह सौभाग्य है कि हमें जिंदगी का यह चैप्टर अनुभव करने का मौका मिला. हम जानते हैं कि आप यह जरूर समझेंगे कि इस वक्त हमें थोड़ी प्राइवेसी चाहिए.”

होला का कि अक्सर फैंस के दिलचस्पी अपना पसंदीदा क्रिकेटर आ फिल्म स्टार में एह हद तक होला कि उ ओकरा निजी जिंदगी में भी ताके-झांके भा टिक्का-टिप्पड़ी करे से बाज ना आवे. दरअसल सेलिब्रिटी पब्लिक प्रॉपर्टी हो जाला आ ओकर निजता हमेशा लोग के कैमरा के फोकस पर रहेला. रउरा लोग सैफ-करीना के बबुआ तैमूर के लेके फैंस आ पैपराजी के जूनून के बारे में सुनलही होखब. ओइसही फैंस लोग के विराट आ अनुष्का के बेटी के पहिला झलक देखे के जूनून सवार भइल बा आ काल्ह से लेके आजतक में गूगल पर ई टर्म ‘विराट की बेटी की पहली तस्वीर’ काफी सर्च भइल बा. इहे कारण बा कि विराट पहिलही सबका से अपना निजता के  सम्मान करे खातिर निहोरा कइले बाड़न.

सोशल मीडिया से बच्ची के रखिहें दूर

 

हालाँकि अनुष्का एगो इंटरव्यू के दौरान पहिलही साफ़ क चुकल बाड़ी कि उ आ विराट अपना  बच्ची के सोशल मीडिया से दूरे रखी लोग. उ लोग नइखे चाहत कि उनकर बच्चा के दूसरा बच्चन से स्पेशल बनावल जाय. अनुष्का इहो बतवले बाड़ी कि उ अपना बच्चा खातिर जेंडर न्यूट्रल नर्सरी तैयार कइले बाड़ी. उ एह बात के जोर देके कहली कि, ‘’ मैं नहीं मानती कि लड़कियों को पिंक पहनना चाहिए और लड़कों को ब्लू. मेरी परवरिश में सभी रंग होंगे.’’

प्रेग्नेंसी के दौरान भी एक्टिव रहली अनुष्का

अनुष्का पेट से बाड़ी. ई खुशखबरी अनुष्का आ विराट कोहली अगस्ते में सबका साथ शेयर कइले रहे लोग. बतवले रहे लोग कि जनवरी में उ लोग दू से तीन हो जाई लोग. अनुष्का त एह  दौरान ऐड शूट आ मैग्जीन शूट भी कइली. बेबी बम्प में आपन खूबसूरत तस्वीरो पोस्ट कइली, जवना के उनकर फैन्स लोग बड़ी सरधा से नेशनल न्यूज के तरह देखल आ वायरल कइल.

एह सबसे पहिले एगो ज्योतिष पंडित जगन्नाथ गुरूजी त इहाँ तक भविष्यवाणी क देले रहनी कि विराट आ अनुष्का के बेटिये होई.

अच्छा एगो रोचक आ संजोग के बात अउर देखीं कि ज्यादातर महान क्रिकेटर लोग के पहिलौंठी के लइका बेटिये भइल बा. सर डॉन ब्रेडमैन के अगर छोड़ दिहल जाए त सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, रिकी पॉन्टिंग जइसन कई गो महान क्रिकेटर्स के घरे सबसे पहले बेटिये के जन्म भइल बा. विराट कोहली के समकालीन कई गो भारतीय क्रिकेटर के भी पहिला संतान बेटिये बाड़ी, जइसे कि महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, गौतम गंभीर, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, चेतेश्वर पुजारा, आर अश्विन, अजिंक्य रहाणे आदि. अक्सर एह सब खिलाड़ी के साथ कुदरत के एह  संयोग के प्रतिफल भी सुंदर रहल बा माने बेटी के आइल शुभ साबित भइल बा. बेटी के अइला के बाद क्रिकेट मैच में बेहतरीन प्रदर्शन कइले बा लो ई लोग. करियर ऊपरे गइल बा. विराटो अपना करियर के ग्यारहवाँ आईसीसी वर्ल्ड टूर्नामेंट खेले वाला बाड़न त बढ़िया आ बेहतर प्रदर्शन के उम्मीद कइल जाय.

बेटी के लक्ष्मी के रूप अइसहीं थोड़े कहल गइल बा. उ घर में चाहें बेटी के रूप में आवे या बहू  के रूप में, ओकरा अइला से बरक्कते होला. रउरा ईयाद होई कि बेटी जब ब्याह के घर से विदा कइल जाला त ओह दिन एगो रस्म होला, घर भरावल. उ रस्म एही खातिर होला कि घर के  लक्ष्मी के त हमनी दोसरा के देतानी बाकिर जाये से पहिले अगर उ अपना हाथ से घर भर दी  त कबहूँ बेटी के मायका में समृद्धि के कमी ना होई.

विराट कोहली के ज़िन्दगी में एगो गज़ब के इत्तेफ़ाक़ बा. उ साल के 11वां महीना में जनमलें, 11 तारीख के परिणय सूत्र में बंधलें आ 11 तारीख के पिता बनलें. अतने ना विराट कोहली अकेले एगो अइसन कप्तान बाड़न जे एक कैलेंडर साल में 11 सौ रन बनवलें बाड़न.

बबीता फोगाट के बेटा भइल बा

भारत के स्टार महिला पहलवान बबीता फोगाट के बेटा भइल बा. बबीतो आपना पति विवेक सुहाग के साथ ट्विटर पर एगो पोस्ट शेयर क के एह बात के जानकारी देले बाड़ी. लिखले बाड़ी कि, “हमारे बेटे से मिलिए. सपनों में विश्वास करिए, ये पूरे होते हैं. हमारे पूरे हुए हैं. नीले कपड़ो में देखिए.”

2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीते वाली बबीता 2018 दिसंबर में विवेक सुहाग के साथे शादी कइली. उ 2020 नवंबर में इंस्टाग्राम पर एगो पोस्ट के जरिए अपना मां बने के  खबर देले रहली.

जान जाईं कि बबीता के पति विवेक सुहाग भी एगो पहलवान हउवन. एह लोग के मुलाकात छह साल पहिले भइल रहे. विवेक भारत केसरी रह चुकल बाड़न. 1 दिसंबर 2019 के दूनो लोग के  शादी भइल. बबीता 2014 में भइल कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करत देश खातिर  गोल्ड मेडल जीतली. बबीता के ऊपर बॉलीवुड में दंगल फिल्म भी बन चुकल बा, जेकरा के  लोग खूब पसंद कइल.

कहे के मतलब कि कोरोना काल खाली उदासी, फ्रस्ट्रेशन, डिप्रेशन आ बेरोजगार होखे के साल नइखे रहल. प्लानिंग, क्रियेशन आ योजना के साल भी रहल बा. ओकर फल सामने बा. सपना  साकार भइल बा.

फिलहाल अनुष्का शर्मा आ बबीता फोगाट सोईरी में बा लोग. बच्चा-जच्चा खातिर हमार शुभकामना.

 


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Hum BhojpuriaDecember 30, 20201min15360

‘’ आप भोजपुरी में ब्रेक नहीं देते तो शायद मैं और मेरी पहचान अधूरी रह जाती ’’- रवि किशन  

लेखक- मनोज भावुक

निर्माता-निर्देशक मोहन जी प्रसाद ना रहनी। 17 नवम्बर दोपहर 2 बजे मुंबई में उहाँ के निधन हो गइल। मोहन जी के भोजपुरी सिनेमा के तीसरा चरण भा मॉडर्न युग के जन्मदाता भी कहल जाला। अभिनेता रवि किशन के भोजपुरी में उहें के लॉन्च कइनी। रवि जी के पहिला, दूसरा, तीसरा आ चौथा लगातार चार गो फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक उहें के रहनी।

उहाँ के निधन के बाद सांसद-अभिनेता रवि किशन अपना फेसबुक पेज पर शोक सन्देश लिखलें कि ‘’ श्री मोहन जी प्रसाद जी ने ब्रेक दिया था. फिर लगातार blockbuster फ़िल्म साथ की। मोहन जी आज दोपहर 2 बजे हम सबका साथ त्याग दिए। मोहन जी बहुत कुछ सिखा आपसे। आप भोजपुरी में ब्रेक नहीं देते तो शायद मैं और मेरी पहचान अधूरी रह जाती। धन्यवाद आपको। महादेव आपको अपने चरणो मैं स्थान दे। ओम् शांति शांति ‘’

रवि किशन जी तुरंत एगो अउर पोस्ट कइले- ‘’ आज भोजपुरी इंडस्ट्री के जनक का देहांत हो गया। मोहन जी आपके वजह से तीसरे दसक में सबको रोज़ी रोटी मिली। भोजपुरी इंडस्ट्री का काला दिन आज आपका जाना. ॐ शान्ति शान्ति ‘’

मोहन जी हिंदी में भी कई गो पारिवारिक फिल्म देले बानी। एगो लेखक-निर्देशक आ निर्माता के रुप में ‘औरत तेरी यही कहानी’, नाचे नागिन गली-गली,‘घर परिवार’ ( राजेश खन्ना, ऋषि कपूर, मौसमी, मीनाक्षी आदि स्टारकास्ट रहे), ‘दोस्ती के सौगन्ध’, फूलवती, दिवाना हूँ पागल नहीं, आ ‘मेघा’ (करिश्मा कपूर, राहुल रॉय, शम्मी कपूर स्टारकास्ट रहे ) आदि प्रमुख फिल्म बा। मोहन जी निर्मित निर्देशित लिखित बंगला फिल्म ‘विधातार खेला’ आ ‘माधुरी’ भी उल्लेखनीय बा।

 

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Hum BhojpuriaDecember 17, 20201min17600

लेखक – मनोज भावुक

16 फरवरी 1961, भोजपुरी सिनेमा खातिर एगो ऐतिहासिक तिथि बा। आजे पटना के ऐतिहासिक शहीद स्मारक पर भोजपुरी के पहिला फिलिम ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ के मुहूर्त समारोह संपन्न भइल आ अगिला दिने शूटिंग शुरू हो गइल। वरिष्ठ पत्रकार अउर भोजपुरी चलचित्र संघ के अध्यक्ष आलोक रंजन के अनुसार ई ऊ शुभ घड़ी ह, जब भोजपुरी फिलिम के अनिश्चित काल खातिर बंद पड़ल निर्माण के द्वार हमेशा खातिर खुल गइल, बाकिर एह स्थिति तक पहुंचे में केतना पापड़ बेले के पड़ल, ई कहानी बहुते रोचक आ संघर्षपूर्ण बा। हिन्दी फिलिम के क्षितिज पर एगो नया शक्ति के उदय केतना क्रांतिकारी कदम होई …. उहो ओह समय में जबकि केहू से भोजपुरी फिलिम बनावे के बारे में बतियावल बुरूबके बनल रहे। ओह घरी ई केहू के यकीने ना रहे कि उत्तर पूर्व भारत के एह लोकप्रिय भाषा भोजपुरियो में कवनो फिलिम बन सकत बा। काहे कि फिल्मकार लोगन के मन में इहे धारणा रहे कि भोजपुरी लोकगीत आ लोकधुन के लिहाज से त बेशक समृद्ध बा बाकिर सामाजिक संदर्भ में भोजपुरी में बतियावल आदमी के जाहिले-गंवार साबित करी। एही से हिन्दी फिलिम में भोजपुरी गीतन के उपयोग (डकइती) त फिल्मकार लोग व्यावसायिक लाभ खातिर करत रहे, बाकिर भोजपुरी के फिलिम बनावे के नाम पर नाक भौं सिकोड़े लागत रहे।…… बाकी होनी के के टाल सकत बा?

आज के ‘सांच’ ओह दिन के ‘सपना’ बन के जद्दनबाई नाम के एगो मशहूर अदाकारा के आंखि में नाचे लागल। ई उहे जद्दनबाई हई जे निर्देशक महबूब खान से जिद्द क के हिंदी फिलिम में भोजपुरी गीत डलववले रहली। ओह गीत के सफलता के बाद जद्दनबाई के मन में कम्पलीट भोजपुरी फिलिम के भूख अउरो बढ़ गइल रहे। उ अपना संपर्क में आइल हर भोजपुरी बोले आ समझे वाला फिल्मकारके ई समुझावस कि ‘हिन्दी फिलिम में खाली भोजपुरी गीत के प्रयोग हतना फायदा देता त भोजपुरिये में बनल फिलिम केतना फायदा दी।’

बनारसे के रहे वाला चरित्र अभिनेता कन्हैया लाल, जे खुदे तन-मन से विशुद्ध ‘बनारसी बाबू’ रहले, के ई बात खूब जंचल आ उहो भोजपुरी फिलिम निर्माण खातिर लोगन के उकसावे लगले। एही बीचे उनकर भेंट गाजीपुर के रहेवाला मशहूर चरित्र अभिनेता आ संवेदनशील लेखक नाजिर हुसैन से हो गइल, जे खुदे भोजपुरी में फिलिम बनावे खातिर बेचैन रहलें।

के रहलें नाज़िर नाज़िर हुसैन 

नाज़िर हुसैन के भोजपुरी सिनेमा के पितामह कहल जाला. उहे के प्रयास रहे कि भोजपुरी सिनेमा कल्पना से हकीकत बन पावल आ भोजपुरी के पहिला फिल्म बनल. नाज़िर साहेब हिंदी में बहुत सफल अभिनेता रहनी आ बिमल रॉय अउरी देव आनंद के फिल्मन के अनिवार्य अभिनेता रहनी. गाजीपुर के दिलदारनगर में 15 मई 1922 के जनमल नाज़िर साहेब के बारे में बहुत कम लोग जानेला कि उहाँ के पहिले रेलवे में फायरमैन फेर ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तरफ से विश्वयुद्ध द्वितीय लड़े वाला सिपाही भी रहनी. जब ब्रिटेन जापान से युद्ध हार गइल त नाज़िर साहेब अउर 60 हज़ार सिपाहियन के साथे बंदी हो गइनी आ जापानी सेना के खूब अत्याचार सहनी. उहें ऊ दुःख दर्द भुलाये खातिर लिखल आ अभिनय कइल शुरू कइनी. एक बार जब खुदीराम बोस जापान में बंदी सिपाहियन से मिले गइनी त उहाँ के लिखल नाटक ही मंचित भइल आ बोस बहुत प्रभावित भइनी. जब सुभाषचन्द्र बोस आजाद हिन्द फ़ौज के गठन करत रहनी त ऊ भी नाज़िर साहेब से मुलाकात कइनी. बोस सिंगापुर रेडियो पर नाज़िर हुसैन कार्यक्रम कई बेर सुनले रहनी. जब आजाद हिन्द फ़ौज के विघटन के बाद नाज़िर साहेब भारत अइनी त कलकत्ता में न्यू थिएटर में नाटक करे लगनी. एहिजा ही उहाँ के मुलाकात बिमल रॉय से भइल आ बिमल रॉय के ऊ असिस्टेंट बन गइनी. बिमल रॉय ‘पहला आदमी’ फिल्म बनावत रहनी, नाज़िर साब एह फिल्म में खाली अभिनय ही ना कइनी बल्कि एकर कहानी लेखक सह संवाद लेखक भी रहनी. ई फिल्म उहाँ के स्थापित कर देलस. नाज़िर हुसैन फिल्म ‘मुनीम जी’ में पहिला बार देवानंद के साथे दिखनी . एह फिल्म के ऊ पटकथा-संवाद भी लिखले रहनी. देवानंद आ नाज़िर साब के दोस्ती एही जा से शुरू भइल आ आजीवन चलल.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद दिहनी भोजपुरी फिल्म बनावे के आइडिया

भोजपुरी फिलिम बनावे के प्रेरणा उ नाज़िर हुसैन के देशरत्न डा. राजेन्द्र प्रसाद के सानिध्य से मिलल रहे। जब उ अपना मन के बात राजेन्द्र बाबू के सामने रखले रहले त राजेन्द्र बाबू कहले रहले कि ‘बात त बहुत नीक बा बाकिर एकरा खातिर बहुते हिम्मत चाहीं, ओतना हिम्मत होखे त जरूर बनाईं।’

दरअसल भइल ई कि एक बार राजेन्द्र बाबू फिल्म समारोह में मुंबई गइनी ओहिजा उनका बगल में बइठल नाज़िर साहेब से परिचय भइल. जब राजेन्द्र बाबू जननीं कि नाज़िर हुसैन भोजपुरी     भाषी हईं त भोजपुरिये में कहनी कि रउआ जइसन कलाकार भोजपुरिया  बा तबो भोजपुरी में अभी ले कौनो फिल्म ना बनल ?

राजेन्द्र बाबू के ई बतिया नाज़िर साब के बेचैन क देलस जल्दी से भोजपुरी फिलिम बनावे खातिर। उ बड़ी लगन से एगो भोजपुरी फिलिम के कहानियो (स्क्रिप्ट) तइयार क लिहले, जवन उनका जुबान से सुनला पर कहानी ना बलुक भोजपुरी इलाका के साफ-सुथरा आ जीयत-जागत तस्वीर मालूम पड़े। कहानी सुनला पर (हिंदी फिलिम बनावे खातिर) कई गो निर्माता लोग स्क्रिप्ट झींटे खातिर लपकल। इहां तक कि ओह समय के महान फिल्मकार विमल राय भी नाजिरसाहेब से ओह स्क्रिप्ट पर फिलिम बनावे के प्रस्ताव पेश कइलें बाकिर नाजिर हुसैन एह स्क्रिप्ट पर भोजपुरी में फिलिम बनावे खातिर संकल्पित रहले आ उ अपना जिद्द पर अड़ल रहले कि ‘ई फिलिमिया चाहे जहिया बनो, बनी त भोजपुरिये में।’ पता ना कवना आत्मिक शक्ति का वजह से उनका ई भरोसा रहे कि कबो ना कबो, केहू ना केहू त अइसन मिलबे करी जे पक्का भोजपुरिया होई आ उनही के तरे बुलन्द हौसला वाला होई।

वक्त के रफ्तार के साथे निर्माता जोहे के कोशिश अनवरत आगे बढ़त रहल। ई एगो अइसन अन्हरिया सफर रहे जवना के भोर कब, कहां आ कइसे होई, केहू ना जानत रहे। चारो तरफ बस एगो दरदीला सन्नाटा पसरल रहे। अइसन अन्हरिया सफर में नाजिर साहेब के हमसफर बनलें बनारस के असीम कुमार, जे तब हिन्दी फिलिम के नामी-गिरामी अदाकार रहलें। नाजिर साहेब अपना भावी फिलिम में उनहीं के हीरो बनावे के फैसला क लेलें। ओह घरी उ अपना हर मुलाकात में असीम कुमार से कहस कि ‘अरे असीमवा कोई मिल जाय त कइसहूं ई फिलिमिया बना लिहती।’ खैर निर्माता त उनका बरिसन ले ना मिलले बाकी एगो अइसन आदमी से भेंट जरूर हो गइल जे जद्दनबाई से प्रेरित होके खुदे भोजपुरी फिलिम के सूत्रधार बने के कल्पना लोक में डूबल रहे। ई रहलें, मुंगेर, बिहार के रहनिहार बच्चा पटेल। पटेल मूलतः फिलिम के निर्माण-प्रबंधन, नियंत्रण आ वितरण के काम से संबंधित रहलें। हालांकि उनका लगे पूरा फिलिम बनावे लायक पूंजी ना रहे बाकिर उ रहलें एगो जोगाड़ी आदमी आ जोगाड़ जुटाइये के दम लेले। उनका विश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी नाम के एगो फरिस्ता भेंटा गइल, जेकरा के ऊ बम्बई से लगभग दू हजार किलोमीटर दूर गिरिडीह, बिहार में कोइला के खान से खींच ले अइले। बंधु छपरा, शाहाबाद (बिहार) निवासी विश्वनाथ शाहाबादी के फिलिम निर्माण के कवनो अनुभव ना रहे, बाकिर उ दिलीप कुमार आ वैजयन्ती माला के तत्कालिन प्रदर्शित फिलिम ‘गंगा-जमुना’ में अवधिया संवाद के प्रयोग का कारण ओकरा सफल आ लोकप्रिय भइला से काफी प्रभावित रहलें आ खुदे भोजपुरी फिलिमोद्योग खातिर एगो नया राह गढ़े के सोचत रहले, तले उनका सोच के दिशा देवे खातिर उनकर संघतिया बच्चा पटेल उनका के बम्बई खींच ले गइलें। ई भगवानो के लीला अजीब ह….. केंगऽ-केंगऽ कवना चीज के सेटिंग करेलें, उहे बुझस। देखीं केने-केने छिटाइल, भोजपुरी फिलिम बनावे खातिर छपिटाइल सब भोजपुरी प्रेमियन के जुटान होइए नू गइल। शाहाबादी जी फिलिम में धन लगावे खातिर तइयार हो गइले आ आगे के कार्यवाही खातिर नाजिर हुसैन के हरी झंडी देखा दिहले। फेर का? स्क्रिप्ट तइयारे रहे। जनवरी 1961 के समय रहे। फिलिम के नांव रखाइल -‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’। निर्देशन खातिर बनारस के कुंदन कुमार चुनइले। गीत आ संगीत लेखन के दायित्व क्रमशः शैलेन्द्र आ चित्रगुप्त के संउपल गइल। मुख्य कलाकार के रूप में असीम कुमार, कुमकुम, नाजिर हुसैन, बच्चालाल पटेल, भगवान सिन्हा, पद्मा खन्ना, रामायण तिवारी आदि के टीम बनल। 16 फरवरी 1961 के पटना में मुहूर्त समारोह के बाद शूटिंग शुरू हो गइल।

लगभग एक साल बाद 1962 में ई फिलिम सबसे पहिले बनारस के प्रकाश टाकीज में लागल। लोग कहेला कि गांव के गांव ओनह के बनारस आवे लागल। शहरो के लोग खाइल-पियल भुला गइल। जहां पहिले वितरक लोग एह फिलिम के कीने में नाकुर-नुकुर करत रहलें, अब दांते अंगुरी काटे लगलन। जहां-तहां लोग बतियावे- गंगा नहा, विश्वनाथ जी के दर्शन करऽ आ ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ देख के तब घरे जा।

एह फिलिम के मोल रहे दर्शक से एकर आत्मीयता। दहेज, बेमेल बियाह, नशाबाजी, सामंती संस्कार, अंधविश्वास से निकलल समस्या भोजपुरिया लोग के अपना जिनिगी के समस्या लागल। गीतकार शैलेन्द्र आ संगीतकार चित्रगुप्त गीतन के अतना मोहक बनवलन कि गीत गली-गली बाजे लगलन स ….‘काहे बांसुरिया बजवले’ …….. ‘सोनवा के पिंजरा में बन्द भइल हाय राम’ ….. ‘मोरी कुसुमी रे चुनरिया इतर गमके’….‘अब हम कइसे चली डगरिया’……. ‘हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो, सइयां से कर द मिलनवा’…… पूर्वोत्तर भारत के गांव- गंाव में गूंजे लागल। पांच लाख के पूंजी से बनल ‘गंगा मइया …..’ लगभग पचहत्तर लाख रुपिया के व्यवसाय कइलस। ई देख के त कुछ व्यवसायी लोग भोजपुरी फिलिम के सोना के अंडा देबे वाली मुरगी कहे लगलन। नतीजा ई भइल कि दनादन सइ गो भोजपुरी फिलिम के निर्माण के घोषणा हो गइल। बाकिर ओह में अधिकांश निर्माता के नजर खाली सोनवा के अंडा पर रहे, मुर्गी पर ना। उ अंडा का लोभ में मुर्गियो के हलाल करे लगलन। ……भोजपुरिया संस्कृति आ संस्कारे के हत्या होखे लागल जवना के बहुते बुरा परिणाम सामने आइल। ….. खैर, पहिला फिलिम बनल आ एतना सफल भइल कि सिनेमा के आकाश में भोजपुरी के सूरज चमके लगलें। अब एह सूरज के कब-कब, कहां-कहां आ कइसे-कइसे गरहन लागल, ई त टीसे आ टभके वाली कहानी होई. अच्छा बात बा कि एह इंडस्ट्री से लाखो लोग के चूल्हा जलsता. दुनिया में भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार भी होता. स्वाभिमान के भाषा भोजपुरी अपमानित मत होखे बस अतने खेयाल राखे के बा. जे एकर रोटी खाता उ एकरा के डंसो मत ना त राजेन्द्र बाबू समेत ओह सब लोग के आत्मा कलपी जे भोजपुरी के सँवारे में अपना के होम कइले बा.

 

 

 


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Hum BhojpuriaOctober 1, 20201min15940

  लेखक : मनोज भावुक

रविकिशन

रविकिशन आधुनिक भोजपुरी सिनेमा के पहिला सुपरस्टार हउवें। उनकर शुरुआत हिंदी सिनेमा से भइल बाकिर उनका नाम आ दाम भोजपुरी से मिलल। 17 जुलाई 1969 के मुंबई के सातांक्रूज इलाका में उनकर जनम भइल। उनकर पिता जी पहिले मुंबई में दूध के व्यापार करत रहलें। जब बिजनेस ठप पड़े लागल त उ अपना गांवे जौनपुर लौट गइलें।रवि के बचपन उहवेंबीतल। 17 साल के उम्र में रविकिशन अपना माई के कहला पर फिलिम में काम करे मुंबई आ गइलें।

आज रविकिशन उत्तर भारत से लेके दक्षिण भारत तक हर जगह पहुंच चुकल बाड़े जबकि एगो समयअइसन रहे कि फिलिम में काम करे खातिर उ सड़क पर छिछियात फिरस। उ90 के दशक में बी-ग्रेड हिंदी फिलिम‘पीताम्बर’से आपन शुरुआत कइलें। उनकर संघर्ष चलत रहल आ हिंदी फिलिम जइसे कि ‘आग का तूफान’, ‘उधार की जिंदगी’मेंछोट-छोट रोल करत रहलन। एही बीच 1996 में उनका नितिन मनमोहन के फिलिम‘आर्मी’ मिलल। एह फिलिमके लीड रोल में एक्टर शाहरुख खान अउर श्रीदेवी रहे लोग।

रविकिशन के किस्मत त तब पलटल जब साल 2003 में उनके सलमान खान के अपोजिट फिलिम‘तेरे नाम’ मिलल। एह में रवि हीरोइन निर्मला (भूमिका चावला) के मंगेतर रामेश्वर के भूमिका निभवले रहलें अउरी उनके शानदार अभिनय खातिर बहुत वाहवाही मिलल। रवि किशन के माता जी एक बेर कहले रहली कि तू गांव वाला लोग खातिर कवनो फिलिम काहे नइखऽ करत। संजोग देखीें, ओही साल रविकिशन के मोहनजी प्रसाद के भोजपुरी फिलिम ‘सइयां हमार’ में मुख्य भूमिका निभावे के मौका मिलल। ई फिलिम खूब चर्चा में आइल। काहे कि उ ठप्प पड़ल भोजपुरी सिनेमा उद्योग के शुरुआती फिलिम रहे; आ अच्छा कलेक्शन कइलस। एकरा बाद त रविकिशन के भोजपुरी में लगातार फिलिम आॅफर होखे लागल। उनके फिलिम‘पंडित जी बताईं ना बियाह कब होई’ त 5 करोड़ तक के व्यवसाय कइलस। 2005 में आइल उनके फिलिम ‘कब होई गवना हमार’ के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिलिम के राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिलल। रविकिशन लगातार फिलिम पर फिलिम करत गइलें आ उनका साथे भोजपुरी इंडस्ट्री भी आपन उठान के ओर बढ़त गइल। एह तरे रवि किशन भोजपुरी के सुपरस्टार अभिनेता बन गइलें।

रविकिशन के फिलिम‘जरा देब दुनिया तोहरा प्यार में’ अमेरिका के प्रोडक्शन कम्पनी पन फिल्म्सके बैनर से बनल आ कांस फिल्मफेस्टिवल में देखावल गइल। 2006 में रविकिशन मशहूर टीवी शो बिग बाॅस में गइल रहलें। रविकिशन लगातार भोजपुरी, हिंदी आ तमिल-तेलुगु के फिलिम करत रहेलें। उनके फिलिम बाॅक्स आॅफिस पर भी कमाल करत रहेेला। बाॅलीवुड आ साउथ के कई गो हीरोइन के भोजपुरी में ले आवे के श्रेय भी रवि किशन के जाता काहे कि उ पहिले से एह इंडस्ट्री में सक्रिय रहलें।

रविकिशन 2019 में गोरखपुर सीट जीत के मोदी 2ण्0 सरकार में सांसद बनल बाड़ें आ जनता से कइल वादा निभावे में लागल बाड़ें।हाल ही में उ भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा दियावे के बात संसद में रखलें ह।

उल्लेखनीय भोजपुरी फिलिम-सइयां हमार, पंडित जी बताईं ना बियाह कब होई, बिदाई, पंडित, कब होई गवनवा हमार, गंगा, धर्मवीर, बिहारी माफिया, रामपुर के लक्ष्मण, कइसन पियवा के चरित्तर बा, देवरा बड़ा सतावेला, हम बाहुबली, गंगोत्री, दूल्हा मिलल दिलदार आदि।

मनोज तिवारी

मनोज तिवारी भोजपुरी सिनेमा के आधुनिक युग के ऊ प्रतिमान हउवें जिनके डेब्यू फिलिम‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ मृतप्राय भोजपुरी सिनेमा उद्योग के जिया देहलस। उनकरफिलिम29 लाख के लागत में बनल आ लगभग 34 करोड़ के कमाई कइलस।ई 11 गो शहर में 50 सप्ताह तक सिनेमाघर से उतरबे ना कइलस। एह फिलिम के बाद भोजपुरी सिनेमा के एगो बड़ दर्शक-समूह बन गइल।

कैमूर (बिहार) के भभुआ के अतरवलिया गांव में 1 फरवरी 1971 में पैदा भइल मनोज तिवारी चार भाई में तीसरा नम्बर के हवें। किशोरावस्था में ही उनका पिता के देहावसान हो गइल जे शास्त्रीय संगीत के गायक रहलें। मनोज तिवारी के संगीत के प्रति झुकाव बाद में बढ़ गइल। उखुद से बांसुरी बजावे के सीखलें आ जब सीख लेलें त जवन पहिला गाना उनका बांसुरी के धुन बनल, उरहल मोहम्मद रफी के ‘जल्दी जल्दी चल रे कहंरा….सूरज डूबे रे नदिया।’

बी.पीएड. अउरी एम.पीएड. कइला के बाद मनोज तिवारी गायकी खातिर कोशिश करे लगलें। उदिल्ली टी-सीरिज के आॅफिस पर लगातार चार साल चक्कर कटलें बाकिर कुछ ना भइल। एक बार वैष्णो देवी से लवटत समय फेर दिल्ली के टी-सीरिज आॅफिस में गइलें। ओहिजा के अधिकारी इनके पहचान गइल रहलें।मनोज उनसे कहलें कि हम एगो नया कैसेट लेके आइल बानी-मैया के गीत के। गुलशन कुमार तब बरामदा में खड़ा रहलें। मनोज जाके पांव छुवलें आ आपन नाम बतवलें। गुलशन कुमार उनका एल्बम के पहिला गाना ‘निमिया के डाढ़’ सुनत मन्त्र मुग्ध हो गइलें। एह तरे टी-सीरिज से1996 में रिलीज भइल उनकर पहिला एल्बम। फेर त मनोज तिवारी पीछे मुड़के ना देखलें। मनोज तिवारी के संगीत के लेके अलग सोच उनके सफलता के चोटी पर पहुंचा देहलस। उ परम्परागत भोजपुरी संगीत के लीक से हट के आधुनिकीकरण के तरफ कदम बढ़वलें आ एक से बढ़ के एक युथ के पसंद आवे वाला, बोलबाजी आ टोन मारे वाला मनोरंजक गीत गवलेंजइसे कि बगल वाली जान मारेली, चट देनी मार देलें रिन्किया के पापा अउरी कुछ सामाजिक विद्रूपता पर गीत जइसे जातिवाद के जहर फइलल, पूरब के बेटा, नौकरी ना मिलल, एमे में लेके एडमिशन कम्पटीशन देता आदि गीत गाके संगीत के बाजार में आपन जगह बना लेहलन।

मनोज तिवारी फिलिम‘कन्यादान’ में ‘हीरो होंडा खोजतिया’ गीत गवलें आ कैमियो भी कइलें। उनका लगे सुधाकर पाण्डेय एगो फिलिम में काम करे के आॅफर लेके अइलें। मनोज के उ आॅफर पसंद आइल लेकिन तब उनका एह बात के तनिको अंदाजा ना रहे कि ई फिलिमिया उनका के मशहूर गायक से भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार बना दी। ओकरा बाद के कहानी सभे जानत बा कि उनका झोरी मंे केतना बड़ा-बड़ा प्रोड्यूसर के फिलिम गिरल आ उ कहां से कहां पहुंच गइलें। मनोज तिवारी 2010 में बिग बाॅस में गइलें, जहां उनका बारे में खूब चर्चा भइल। फेर 2014 में उ भाजपा के तरफ से चुनाव में खड़ा भइलें अउरी उत्तर पूर्वी दिल्ली से जीत गइलें। उनके कद पार्टी में बढ़े लागल आ उ एतना लोकप्रिय भइलें कि भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बन गइलें। 2019 के चुनाव में भी आपन जीत के परचम लहरवलें। एह तरे मनोज तिवारी गायक से अभिनेता आ अभिनेता से नेता के सफर मंे हर जगह सफल भइलें।

मनोज तिवारी अपना स्टूडेंट लाइफ में क्रिकेट के भी खिलाड़ी रहल बाड़े आ उबनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का ओर से खेललहूं बाड़न। हिन्दुस्तान केफिलिम स्टार्स के क्रिकेट सीसीएल (सेलीब्रिटी क्रिकेट लीग) में भोजपुरी सिनेमा के टीम भोजपुरिया दबंग के कैप्टन भी रहल बाड़न मनोज तिवारी। महेंद्र सिंह धोनी से उनकर शुरू से दोस्ती रहल बा।

उल्लेखनीय फिलिम-ससुरा बड़ा पइसावाला, दरोगा बाबू आई लव यू, दामाद जी, रणभूमि, गंगा, गंगा जमुना सरस्वती, धरती कहे पुकार के, भोजपुरिया डाॅन, ठेला नंबर 501, देवा, धरतीपुत्र, भोले शंकर, देहाती बाबू, देवरा भइल दिवाना, ए भउजी के सिस्टर आदि।

 

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Hum BhojpuriaSeptember 16, 20201min9990

भोजपुरी सिनेमा के संवारे-सजावे आ प्रतिष्ठित करे में बहुत लोगन के योगदान बा। ओही में से कुछ नगीना के रउरा से परिचय करा रहल बानी। 

नाजिर हुसैन, अभिनेता, लेखक, निर्देशक

नाजिर हुसैन के भोजपुरी सिनेमा के पितामह कहल जाला। उहें के प्रयास से भोजपुरी के पहिला फिलिम बन पावल। नाजिर साहेब हिंदी के बहुत सफल अभिनेता रहनी आ बिमल राॅय अउरी देव आनंद के फिलिमन के अनिवार्य अभिनेता रहनी। गाजीपुर के दिलदारनगर में 15 मई 1922 के जनमल नाजिर साहेब के बारे में बहुत कम लोग जानेला कि उहां के पहिले रेलवे में फायरमैन, फेर ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तरफ सेद्वितीय विश्वयुद्ध लड़े वाला सिपाहियो रहनी। जब ब्रिटेन जापान से युद्ध हार गइल त नाजिर साहेब 60 हजार सिपाहियन के साथे बंदी बना लिहल गइनी आ जापानी सेना के खूब अत्याचार सहनी। जेेल में उहां के दुःख दर्द भुलाए खातिर लिखल आ अभिनय कइल शुरू कइनी। एक बार जब खुदीराम बोस जापान में बंदी सिपाहियन से मिले गइनी त उहें के लिखल नाटक के मंचन भइल। बोस साहेब बहुत प्रभावित भइनी। जब सुभाषचन्द्र बोस ‘आजाद हिन्द फौज’ के गठन करत रहनीउहों के नाजिर साहेब से मुलाकात कइनी। सुभाषचन्द्र बोस सिंगापुर रेडियो पर नाजिर हुसैन के कार्यक्रम कई बेर सुनले रहनी। जब आजाद हिन्द फौज के विघटन के बाद नाजिर साहेब भारत अइनी त कलकत्ता में न्यू थिएटर में नाटक करे लगनी। एहिजा उहां के मुलाकात बिमल राॅय से भइल। उहां के बिमल राॅय के असिस्टेंट बन गइनी। बिमल राॅय ‘पहला आदमी’ फिलिम बनावत रहनी। नाजिर साहेब एह फिलिम में खाली अभिनयेना कइनी, एकर कहानी आसंवाद लेखन भी कइनी।ई फिलिम उहां के स्थापित क देलस।नाजिर हुसैन फिलिम ‘मुनीम जी’ में पहिला बार देवानंद के साथे दिखनी। एहूफिलिम के पटकथा आसंवाद उहें के लिखले रहनी। देवानंद आ नाजिर साहेब के दोस्ती एही जा से शुरू भइल आ आजीवन चलल।

भोजपुरी फिलिम बनावे के आइडिया इहां के डाॅ. राजेंद्र प्रसाद देहले रहनी। एक बार राजेन्द्र बाबू फिलिम समारोह में मुंबई अइनी। ओहिजा उहां के बगल में बइठल नाजिर साहेब से परिचय भइल। जब राजेन्द्र बाबू जननीं कि नाजिर हुसैन भोजपुरी भाषी हईं त भोजपुरिए में कहनी कि ‘रउआ जइसनभोजपुरियाकलाकार के रहते भोजपुरी में अभी ले कौनो फिलिम ना बनल।’ …. ई बात नाजिर साहेब के लाग गइल। उहां के ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ के स्क्रिप्ट लिखनी आ प्रोड्यूसर के इंतजार करे लगनी। संजोग से विश्वनाथ शाहाबादी से उहां के मुलाकात भइल आ भोजपुरी के पहिला फिलिम बनल जवन आवते भोजपुरिया क्षेत्र में एगो नया बाजार खड़ा कर देलस। नाजिर साहेब पहिला फिलिम के बाद भोजपुरी खातिर समर्पित हो गइनी। उहां के कई गोफिलिम में अभिनय कइनी, कई गो फिलिम लिखनी आ बनवनी । उहां के फिलिम में शुरू से भोजपुरिया लोक संस्कृति, ग्रामीण जीवन आ लोक-रंग के प्रभाव रहल। बतौर निर्देशक उहां के बलम परदेसिया, रूस गइले सइयां हमार जइसन सफल फिलिम देहनी। नाजिर हुसैन के निधन 16 अक्टूबर 1987 के मुंबई में भइल। उहां के पुत्र मुमताज हुसैन भी फिलिम बनावेनी।

 

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भोजपुरी के थाती, भोजपुरी के धरोहर, भूलल बिसरल नींव के ईंट जइसन शख्सियत से राउर परिचय करावे के बा। ओह लोग के काम के सबका सोझा ले आवे के बा अउर नया पीढ़ी में भोजपुरी  खातिर रूचि पैदा करे के बा। नया-पुराना के बीच सेतु के काम करी भोजपुरिआ। देश-विदेश के भोजपुरियन के कनेक्ट करी भोजपरिआ। साँच कहीं त साझा उड़ान के नाम ह भोजपुरिआ।


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