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Hum BhojpuriaOctober 22, 20211min450

मनोज भावुक

भादो चल रहल बा, अबे कुछ दिन पहिले सावन बीतल ह। ई दुनु महीना सबसे ढेर बरखा खातिर जानल जाला। ई महीना किसान के होठे मुस्की लिआवेला, त गोरी के अपना प्रेमी के इयाद में तड़पावेला। कहल जाला कि सावन में बड़ा त्योहार अउरी उत्सव होला त भादो आवते सब बंद हो जाला। भादो के लेके कई गो लोकोक्ति भी बा। जइसे भादो में काम धंधा चौपट हो जाला। कुछ लोग कहेला कि ‘का हो, एहि आँखि भादो खेपबs! कहे के माने कि भादो के भीषण बरखा खाली बूंदे ना विपत्ति के ओला भी ले आवेला। एगो इहो मुहावरा फेमस बा कि सावन में जनमलs आ भादो में बाढ़ आइल आ कादो अइसन बाढ़े ना देखनी। खैर…

ई सावन-भादो से सिनेमा उद्योग हमेशा मलाइये चांपेला। गाना बा, ‘मेरे नैना सावन भादो, फिर भी मेरा मन प्यासा’। बाकिर सिनेमा आ संगीत के मन एही मौसम में त प्यास बुझावेला।

सिनेमा में बारिश के ऊपर बहुते फिलिम बनल बा। कई गो फ़िल्मन के नामे बरखा के ऊपर रखाइल बा। कई गो फ़िल्मन में बारिश के गीत ओकर मुख्य आकर्षण बा आ ओकर बॉक्स ऑफिस बिजनेस पर बड़ा प्रभाव छोड़ले बा। कुछ फ़िल्मन में बारिश के इर्द गिर्द ही कहानी भा पटकथा बुनल बा। कई गो में बारिश के दृश्य क्लाइमेक्स के सीन बनल बा। अक्सर फ़िल्मन के फाइट सीन में गंभीरता देखावे खातिर बारिश के प्रयोग कइल जाला। फिल्मकारन खातिर बारिश एगो अइसन डिवाइस बा कि जब फ़िल्म के कवनो दृश्य में वीभत्सता लिआवे के होला, शोक लिआवे के होला त बारिश के इस्तेमाल कइल जाला। रउआ अक्सर देखले होखब, फ़िल्म के कवनो विशेष किरदार के मृत्यु भइल त बरखा होखे लागी, अगर कवनो किरदार बहुत उदास बा, टूट गइल बा त बरखा होखे लागी। इहाँ तक कि हॉलीवुड में भी मुख्य किरदारन के मरला पर जब लोग ओकनी के अंतिम क्रिया कइल जाला त बरखा के माहौल सेट रहेला ताकि सीन में इंटेंसिटी आवे। आ ई सच बा कि बरखा दृश्य में गहनता लिआवेला। रउआ सभे एह बात के मानब कि जवन बरखा कवनो कवनो दृश्य में खुशी अउरी उन्माद के कारण बनेला, हीरो-हिरोइन के बीच प्यार के बिया पोंगावेला; उहे बरखा कबो मातम के गवाह बनेला त कबो क्रूरता अउरी हिंसा के समर्थक बनेला।

इहे बा बरखा के अनेक रूप, जवना के फ़िल्मकार लोग बढ़िया से बूझेला अउरी परिस्थिति के हिसाब से प्रयोग करेला। चलीं कुछ फ़िल्मन के मिसाल ले लिहल जाव जहाँ बरखा के दृश्य फ़िल्म के कहानी के विकास खातिर बड़ घटक बनल। 1959 के फ़िल्म ‘कागज के फूल’ देखले होखब। फ़िल्म में निर्देशक के भूमिका निभा रहल गुरुदत्त जब एगो बेसहारा सुंदर युवती शांति से मिलsतारें त बरखे बरसत बा। दिल्ली के उ रात के बरखा में बेचारी एगो युवती के बरखा में भीजत देख गुरुदत्त आपन कोट दे देतारें। उनके किरदार टैलेंट स्काउटिंग खातिर आइल रहत बा जवन अपना फिलिम के हीरोइन खोज रहल बा। बाद में उ युवती जब बम्बई जा तिया त उनके कोट लौटावत बिया आ एही क्रम में अइसन घटना होत बा कि गुरुदत्त के शांति में आपन फ़िल्म के हीरोइन लउक जात बिया। असहीं फ़िल्म ‘थ्री इडियट्स’ में बारिश के दू जगह बखूबी प्रयोग भइल बा। पहिला जब एगो मेधावी इंजीनियरिंग छात्र जॉय लोबो पढ़ाई आ प्रिंसिपल के प्रेशर में आत्महत्या कर लेता तब ओकरा अंतिम क्रिया के टाइम बरखा के इस्तेमाल बा। दुसरका जब फ़िल्म के क्लाइमेक्स बा। अति-स्वाभिमानी प्रिंसिपल के बड़ बेटी के जब डिलीवरी के टाइम आवsता अउरी भीषण बरखा के चलते चारु ओर पानी भर जाता, कवनो उपाय नइखे रहत कि ओके हॉस्पिटल ले जाइल जाव तब हीरो रैंचो ओही बरखा के त्रासदी के बीच डिलीवरी करवावत बा। ई दृश्य एक तरह से फ़िल्म के क्लाइमेक्स ही बा। एकरा बादे सब कुछ बदल जाता।

फ़िल्म ‘तुम मिले’ इमरान हाशमी अउरी सोहा अली खान के फ़िल्म ह जवन मुम्बई में 2005 में आइल भयंकर बाढ़ के आस-पास सेट बा। फ़िल्म में हीरो हीरोइन पहिले से एक दूसरा के साथे रहि चुकल बाड़ें। फेर अचानक 6 साल बाद मुम्बई में भारी बरखा के चलते भीषण बाढ़ में फँसल एक दूसरा से मिलत बाड़ें। पूरा फ़िल्म एही बाढ़ से जीवटता के लड़ाई पर बा। ई फ़िल्म भी बड़ा देखल गइल। बारिश के बैकड्रॉप में ताल फ़िल्म सेट बा। पूरा फ़िल्म में जेतना भी दृश्य पहाड़ के बा, उहाँ बरखा के बहुते देखावल गइल बा। एकर कारण ई भी बा कि ओहसे पहाड़न के खूबसूरती बढ़ जाता। ‘ताल से ताल मिला’ गाना के के भुला सकेला। लगान फ़िल्म के ‘बरसो रे मेघा-मेघा’ किसानन के उ दर्द बयां कइले बा कि कइसे सूखा के बेरा किसान हरदम आसमान के ओर आंख टिकवले रहेला।

 

राज कपूर साहब के त 1949 में बरसात नाम के फ़िल्म आइल, जवन बहुत हिट रहल। फ़िल्म श्री 420 में राज साहब बरखा में ही ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ गवलें। फ़िल्म छलिया (1960) के गाना ‘डम डम डिगा डिगा’ त राज साहब के हिट गीतन में बटले बा, आजुओ लोग के जुबान पर बा। हालांकि बरसात नाम से दु गो फिलिम अउरी आइल। साल 1995 में बॉबी देओल, ट्विंकल खन्ना के आ फेर साल 2005 में बॉबी देओल, विपाशा बसु अउरी प्रियंका चोपड़ा के।

‘टिप-टिप बरसा पानी’ गाना में बरसत पानी अउरी पियर साड़ी में नाचत रवीना आ करिया कोट में नाचत अक्षय सभकरा इयाद होइयें। ई गाना त बूझी जे सिनेमा में बरखा के पर्याय बन गइल बा।


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Hum BhojpuriaOctober 12, 20211min950

लेखक- मनोज भावुक

अमन वतन के बनल रहे बस, हवा में थिरकन बनल रहे बस

इहे बा ख्वाहिश वतन के धरती, वतन के कण-कण बनल रहे बस

जब बात वतन में अमन के होई त देशभक्ति के बात होखबे करी। जब देशभक्ति के बात होई त राजनीतिक, कूटनीतिक आ सीमा सुरक्षा के हाल-चाल भी होई। सिनेमा में भी भइल बा।

रउआ बॉलीवुड के फिलिम देखब त सीधा पता चली कि भारत के सबसे बड़ दुश्मन पाकिस्तान बा, ओकरा बाद चीन बा। शुरुआती दौर के बॉलीवुड फिलिम में अंग्रेजन के कइल जुल्म आ शासन के केंद्र में रख के खूब फिलिम बनल। ओकरा बाद भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध पर फिलिम बने लागल। धीरे-धीरे फिलिम कूटनीति, गुप्तचर, सीमा-सुरक्षा आ बंटवारा पर फोकस होखे लागल। बाद में राजनीतिक स्थिति बदलल, आतंकवाद के बोलबाला भइल त देशभक्ति फिलिम के केंद्र में जिहाद, आतंकवाद अउरी अलगाववाद के स्थान मिलल। बॉलीवुड में खेल से जुड़ल अउरी स्वतंत्रता सेनानी के ऊपर आधारित फिलिम भी देशभक्ति के रंग में रंगके बनल बा। बॉलीवुड के देशभक्ति फिलिम में मनोज कुमार, राजकुमार, धर्मेन्द्र, सनी देओल, आमिर खान फेर अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम जइसन स्टार खूब फिलिम बनवलें अउरी बनावsतारें।

बात अगर हॉलीवुड के होखे त अमेरिका में बने वाला ज्यादातर पेट्रियोटिक फिलिम वॉर-फिलिम होला जे में युद्ध के महिमा-मंडन होला। एकरा पीछे अमेरिका के राजनीतिक स्थिति भी बा। सभके पता बा कि अमेरिका विश्व के सबसे बड़ हथियार सप्लायर देश ह। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स जवन अपना सुपर हीरो फिलिम सीरीज जइसे आयरनमैन, कैप्टन अमेरिका आ एवेंजर्स खातिर जानल जाला, ओकरा केंद्र में भी हथियार अउरी युद्ध ही बा। आयरनमैन कहाये वाला टोनी स्टार्क के कैरेक्टर भी त अमेरिका के सबसे बड़ आ आधुनिक हथियार निर्माता बा। अइसहीं पाकिस्तान में बनल देशभक्ति फिलिम के केंद्र में कश्मीर के भारत से छीने के पाकिस्तानी मंशा रहेला। हिंदुस्तान से कवनो अनजान दुश्मनी के बदला रहेला। इहेे हाल हर देश के फिलिमन के बा। रउआ कहीं के अउरी कौनो भाषा के सिनेमा उठा लीं, ओकरा देशभक्ति फिलिम में तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक अउरी कूटनीतिक समस्या आ इतिहास के कवनो राष्ट्रीय मुद्दा ही थीम होला। देशभक्ति फिलिम में रिसर्च के बड़ा काम होला लेकिन भोजपुरी सिनेमा में ई रिसर्च गायबे रहेला।

एही तरह भोजपुरी भी एगो बड़ आ फलत-फूलत सिनेमा इंडस्ट्री बा, जवना के निर्माता-निर्देशक लोग में हाल के कुछ साल से देशभक्ति फिलिम बनावे के होड़ मचल बा। लेकिन अगर रउआ हॉलीवुड-बॉलीवुड के भूमिका पढ़ के सोचत होखब कि भोजपुरी में भी अइसहीं राजनीतिक परिदृश्य देखावत देशभक्ति फिलिम बन रहल बा, त रुक जाईं, राउर सोचल गलत साबित होई। भोजपुरी के देशभक्ति फिलिम अपना अलग ही परी-कथा अउरी परिस्थिति के निर्माण कइलेबा। भोजपुरी के अधिकांश देशभक्ति फिलिम के हीरो पाकिस्तान जाता अउरी उहां के एगो सुन्दर मुस्लिम लड़की ले आवता भा पाकिस्तानी लड़की भारत आवतिया आ एगो देशभक्त आ वन मैन आर्मी टाइप लड़का से टकरा जा तिया। उ लड़की के भारतीय लड़का से प्यार हो जाता। उ ओकरा घर-परिवार में रच बस जा तिया। फेर वापस अपना वतन पाकिस्तान लौट जा तिया आ लइका अपना प्यार के पावे खातिर भा देश के दुश्मन आ अपना प्यार के दुश्मन पाकिस्तानी से लड़े खातिर बिना वीजा-पासपोर्ट, पाकिस्तान में बहुत आसानी से घुस जाता। पाकिस्तानी सेना आ आतंकवादी के नाक से चना चबवावता आ पाकिस्तानी दुलहिनिया लेके भारत आ जाता। ई जवन हम एगो कॉमन कांसेप्ट बतवनी ह, इहे पिछला कुछ साल में आइल अधिकांश भोजपुरी फिलिम के पटकथा के आधार बा। अपवाद हर जगह होला, ओइसहीं इहां भी बार्डर-सिक्योरिटी आ आर्मी के ऊपर कुछेक फिलिम बन गइल बा। भोजपुरी फिलिम के स्त्री-विरोधी मानसिकता एह देशभक्ति फिलिमन में भी कवनो ना कवनो रूप में प्रकट होता। अगर रउआ ई देशभक्ति फिलिमन में हॉलीवुड-बॉलीवुड जइसन गंभीर बात, राजनीतिक आ कुटनीतिक विमर्श आ कवनो सार्थक सन्देश ढूंढे के कोशिश करब त लगभग नाकामी ही मिली। फिर भी, भोजपुरी में देशभक्ति फिलिम बनऽता आ बनावे के कोशिश होता त एह कोशिश के सराहना होखे के चाहीं, काहें कि पिछला दौर में त एको देशभक्ति फिलिम बनावे के कोशिश नइखे भइल।

भोजपुरी के देशभक्ति फिलिम

भोजपुरी सिनेमा में ज्यादातर देशभक्ति फिलिम ‘भारत-पाकिस्तान’ के केंद्र में रख के बनल बा। एकर शुरुआत 2015 में दिनेशलाल यादव निरहुआ के फिलिम ‘पटना से पाकिस्तान’ के बनला से भइल रहे। ए फिलिम के लेखक आ निर्देशक संतोष मिश्रा बाड़ें। ए फिलिम के कहानी कबीर नाम के एगो युवा के बा जे आंतकवादी द्वारा कइल बम विस्फोट में अपना पूरा परिवार के खो देता। उ आतंकवादियन के खिलाफ आपन लड़ाई में पहिले सरकार से मदद मांगता, जवना पर सरकार के कवनो खास प्रतिक्रिया नइखे होत। ओकरा बाद भी उ निराश नइखे होत बल्कि अकेलही पाकिस्तान जा के आतंकवादी सन के खिलाफ लड़ाई लड़ता। एही बीच ओकर मुलाकात शहनाज नाम के एगो लड़की से होता। ए दूनो जाने के बीच धीरे-धीरे इश्क हो जाता। आगे के कहानी भी बहुते दिलचस्प बनल बा। एह फिलिम के सफलता भोजपुरी में देशभक्ति फिलिम के ट्रेंड शुरू कर देहलस। फिलिम में निरहुआ के प्रेमिका के भूमिका में काजल राघवानी रहली जिनके बम विस्फोट में मौत हो जाता। पाकिस्तानी लड़की के रोल में आम्रपाली दुबे रहली।

ई त बात भइल ट्रेंड शुरू करे वाला फिलिम के। एकरा से पहिले अगर भोजपुरी फिलिम के पुरनका दौर के बात कइल जाव त ओ काल में अइसन कौनो उल्लेखनीय फिलिम नइखे जेकरा के देशभक्ति फिलिम के तमगा देहल जाव। बाकी आधुनिक दौर शुरू भइल त एगो फिलिम जरूर आइल रहे ‘आपन माटी आप देश’। 2009 के ई फिलिम में रविकिशन आ हिंदी टीवी के नामचीन कलाकार सुदेश बेरी मुख्य भूमिका में रहलें। फिलिम के दूसर बड़ कलाकार में सुरेन्द्र पाल आ सिकंदर खरबंदा रहे लोग। फिलिम के कहानी एगो किसान आ जवान के रहे। उहे किसान जब खेत में होखे त किसान आ जब सीमा पर जाए त जवान। फिलिम में ई समस्या के भी दिखावल गइल रहे कि कइसे एगो जवान देश खातिर अउर अपना लोग खातिर सब कुछ त्याग के सीमा पर लड़ेला आ उहे समाज के कुछ लोग ओकरा पत्नी, परिवार के परेशान करेला।

विशुद्ध आर्मी वाला एगो अउर फिलिम 2018 में पवन सिंह के आइल रहे। उ फिलिम के नाम रहे ‘मां तुझे सलाम’। असलम शेख द्वारा लिखित अउर निर्देशित ई फिलिम भी ब्लॉकबस्टर साबित भइल। फिलिम लगभग 17 करोड़ के लागत से बनल आ सिनेमाघर में सफल रहल। फिलिम के निर्माण यशी फिल्म्स कइलस। एह फिलिम में पवन सिंह बजरंगी अली खान के एगो अइसन किरदार में बाड़न जे हर धरम के समान मानता। एह फिलिम में आगे, जब भारत पर आतंकवादी हमला होता त बजरंगी अली खान पाकिस्तान के साजिश के खिलाफ उठ खड़ा होता। एह फिलिम में पवन सिंह के साथे मधु शर्मा, अक्षरा सिंह, सुरेंद्र पाल जइसन कलाकार भी बाड़न।

खेसारी के एगो फिलिम ‘आतंकवादी’2017 में रिलीज भइल रहे। एह फिलिम से खेसारी बहुते वाहवाही बटोरले रहलन। शुभी शर्मा उनका साथे लीड रोल में रहली। भारत पाकिस्तान ही मुख्य विषय रहे।

भारत-पाकिस्तान अउरी पाकिस्तानी लड़की के इर्द-गिर्द बनल फिलिम में कई गो नाम बा जवन निरहुआ के ‘पटना से पाकिस्तान’ के बाद बनल। चिंटू पाण्डेय के ‘दुल्हन चाहीं पाकिस्तान से’- एक अउरी दू, विशाल सिंह के ‘ले आइब दुलहिनिया पाकिस्तान से’, रानी चटर्जी के ‘इलाहाबाद से इस्लामाबाद’, यश मिश्र के ‘इंडिया वर्सेज पाकिस्तान’ अउर विक्रांत सिंह के ‘पाकिस्तान में जय श्री राम’ आदि।

देशभक्ति फिलिमन के होड़ में निरहुआ भी आपन बैनर तले एगो फिलिम ‘बॉर्डर’ बनइलन। एह फिलिम के निर्देशक संतोष मिश्रा बाड़न। ई एगो मल्टीकास्ट फिलिम रहे अउर भोजपुरी सिनेमा के देशभक्ति फिलिमन में मील के पत्थर साबित भइल।

पवन सिंह के ‘गदर’ फिलिम अपना गीत खातिर बड़ा मशहूर भइल बाकी एकरो कहानी कमोबेश पाकिस्तान में जाके उहां के लड़की से इश्क कइला के रहे। फिलिम में पवन सिंह एगो ब्राह्मण के बेटा रहलें जे धर्म-कर्म में काफी ध्यान देता आ ओकरा एगो पाकिस्तानी मुसलमान लड़की से प्यार हो जाता।

निरहुआ के 2019 में एगो देशभक्ति फिलिम ‘शेर-ए-हिंदुस्तान’ मार्च के समय में आइल जवन भारत-पाकिस्तान के कहानी से हटके भारत-नेपाल के सीमा से हो रहल आतंकी घुसपैठ आ तश्करी पर आधारित रहे। फिलिम के लेखक-निर्देशक मनोज नारायण विषय बदललें, जवन अच्छा बात बा। फिलिम में निरहुआ एगो कमांडो के भूमिका में रहलें। उनका अपोजिट हीरोइन नीता धुन्गना रहली जे नेपाली फिलिम इंडस्ट्री के बड़ नाम बाड़ी।

पवन के 2019 में दूगो फिलिम आइल। एगो ‘क्रेक फाइटर’ आ दूसरका ‘जय हिन्द’। ‘क्रेक फाइटर’ एगो एक्शन फिलिम ह लेकिन एकरा कहानी में देशभक्ति के थोड़ा सा रंग बा। फिलिम में पवन सीक्रेट सर्विस के एजेंट के रोल में बाड़ें जे आपन पहचान छुपा के एगो ड्राइवर के रूप में रहऽता लेकिन माफिया के ई असलियत पता चल जाता। ई फिलिम लगभग 3 करोड़ के लागत से बनल आ सिनेमाघर में अच्छा कलेक्शन कइलस। उनके दूसरका फिलिम ‘जय हिन्द’ देशभक्ति फिलिम रहे आ एहमें वापस से पाकिस्तान वाला रंग रूप देखावल गइल रहे।

इहे कुछ उल्लेखनीय देशभक्ति फिलिम बा जवन भोजपुरी में बनल। देशभक्ति फिलिम बनावल एगो गंभीर आ शोधपरक काम ह जवना पर भोजपुरी फिल्मकार आ लेखक लोग ध्यान नइखे देत। भोजपुरी में भी अउर भाषा के इंडस्ट्री जइसन तनी गंभीरता से आ विषय के गहनता से अध्ययन करके देशभक्ति भा राजनीतिक फिलिम बनित त कुछ अच्छा अउरी फ्रेश सिनेमा दर्शकन के मिलित।


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Hum BhojpuriaSeptember 20, 20211min2190

मनोज भावुक

भोजपुरी सिनेमा में माई के अहमियत दर्शावे वाला कई गो फिलिम बनल बा। भोजपुरी फिलिम अक्सर गांव के कहानी पर केन्द्रित रहेला। गांव में रिश्तन के कद्र आजुओ शहर से ज्यादा बा। एही से भोजपुरी फिलिम में माई के रोल भले तनी कम होखे, बाकिर रहेला जरूर।

हम इहां भोजपुरी सिनेमा में माई अउर भोजपुरी स्टार के ऑनस्क्रीन आ ऑफस्क्रीन माई के बात करे जा रहल बानी। माई के का-का योगदान बा अपना बेटा चाहे बेटी के हीरो-हीरोइन बनावे में, एहू पर चर्चा करब। इहो बताइब कि भोजपुरी सिनेमा में कवना तरह के माई गढ़ल जात रहल बाड़ी। साथहीं कुछ अइसन माई के भी जिक्र करब जे खुद भोजपुरी फिलिम के अभिनेत्री बाड़ी, माई बनत बाड़ी आ अपना बेटियो के हीरोइन बना देले बाड़ी। कबो-कबो त उ खुद अपना बेटियो के माई बनत बाड़ी। त ऑफस्क्रीन माई के ऑनस्क्रीन माई बनला पर ओकर संतान केतना सहज या असहज रहेला, इहो जानल दिलचस्प होई। भोजपुरी के सुप्रसिद्ध अभिनेत्री अक्षरा सिंह के माई नीलिमा सिंह भी भोजपुरी सिनेमा में काम करेली अउर बहुत सारा फिलिमन में उ माई के रोल कइले बाड़ी। नवोदित अभिनेत्री काजल यादव के माई माया यादव भी भोजपुरी सिनेमा के पुरान आर्टिस्ट बाड़ी अउर बहुत सारा फिलिमन में उहो माई के रोल कइले बाड़ी।

भोजपुरी सिनेमा में भी सब भाषा के सिनेमा जइसन अधिकतर फिलिम में माई के भूमिका गढ़ल जाला लेकिन भोजपुरी में माई के कई गो रूप नइखे देखावल गइल। अमूमन भोजपुरी फिलिमन में माई के किरदार गढ़त समय कुछ विशेष पैटर्न के इस्तेमाल कइल जाला, जे कि किरदार के स्कोप कम करके ओकरा के स्टीरियोटाइप बना देला, जइसे कि भोजपुरी फिलिम में माई, बाबूजी के मर गइला के बाद लाचार विधवा बन जाली, फेर आपन पति के कातिलन से बदला लेवे खातिर अपना बच्चन के तइयार करेली। कबो माई मूक-दर्शक बनके अत्याचार सहत-सहत तलवार उठा लेली, लेकिन ई ओही परिस्थति में होला जब उनका पास उनकर हीरो बेटा ना होला। अगर फिलिम के कहानी में माई अउर बाबूजी दूनो जिंदा बाड़न त माई उहां मात्र एगो फिलर के रूप में रहेली। हालांकि कई गो फिलिम अइसन बनल बा, जेकरा के मदर इंडिया के लीक पर बनल मानल जा सकता, जइसे कि राम बाबू के बनावल फिलिम ‘माई’ जे सन् 1989 में बनल रहे। ई फिलिम माई के केंद्र में रख के बनावल गइल रहे। एह फिलिम में एगो माई अपना बच्चन खातिर संघर्ष करत बाड़ी।

भोजपुरी फिलिमन के माई ओतना प्रगतिशील नइखी, जेतना कि दूसर भाषा के फिलिम के माई। दूसर भाषा के फिलिमन में जहां बेटी के शिक्षा खातिर उ अपना पति अउर पूरा समाज से लड़ जाली, पन्ना-धाय के तरह बलिदानी होखेली, त कबो अइसन बागी बन जाली, जे अपना बच्चन के खुशी खातिर अपना घर-परिवार के छोड़ के अकेले निकल जाली, उहें भोजपुरी फिलिमन में माई के अइसन संघर्ष आ जीवटता दुर्लभ बा। जबकि असल जिनगी में हमनी के समाज में अइसन त्याग बाटे। भोजपुरी फिलिम इंडस्ट्री में बरिसन से माई के किरदार करे वाली कुछ अभिनेत्री लोग से हमार बात भइल। आईं ओह बात के रउआ लोग से साझा करत बानी।

बंदिनी मिश्रा –

सन् 1984 में आइल फिलिम ‘पान खाए सइयां हमार’ में हीरो सुजीत कुमार के साथे हीरोइन के भूमिका से डेब्यू करे वाली बंदिनी मिश्रा बाद के फिलिमन में माई के सफल किरदार निभवले बाड़ी। बकौल बंदिनी उ अभी ले 70 के करीब भोजपुरी फिलिम कऽ लेले बाड़ी, जेकरा में माई के भूमिका वाला कई गो रोल रहल बा। उनका माई के किरदार वाला कुछ फिलिमन में खून पसीना, बारूद, सात सहेलियां अउर दीवाना प्रमुख बा। दीवाना फिलिम के गाना ‘तोहरा में बसेला परनवा’ अउर सात सहेलियां के ‘माई हऊ माई बुझऽ माई के दरदिया’ इनका पर फिल्मावल खूबसूरत गाना बा।

पुष्पा वर्मा –

100 गो से ऊपर भोजपुरी फिलिम करे वाली पुष्पा वर्मा के माई के भूमिका निभावे खातिर भोजपुरी के ‘निरूपा रॉय’ भी कहल जाला। उ भोजपुरी के तकरीबन हर बड़का कलाकार के साथे काम कर चुकल बाड़ी। उनका माई के मजबूत किरदार वाला कुछ फिलिम में ‘माई के चरनिया में चारो धाम’, मनोज तिवारी के फिलिम ‘देहाती बाबू’ अउर ‘दामाद जी’, पवन सिंह के फिलिम ‘देवरा बड़ा सतावेला’ अउर ‘प्रतिज्ञा’ बाटे।

 

माया यादव –

साल 2001 में रवि किशन के फिलिम ‘सइयां हमार’ से आपन करियर के शुरुआत करे वाली माया यादव फिलिम में भाभी अउर माई के किरदार खूब निभवले बाड़ी। नवोदित अभिनेत्री काजल यादव माया यादव के ही बेटी हई। पुरनका भोजपुरी फिलिमन के प्रसिद्ध अभिनेत्री माधुरी मिश्रा उनका के भोजपुरी फिलिम में काम करे के सलाह देले रहली। बकौल माया, उ अभी तक 250 से ऊपर फिलिम कर चुकल बाड़ी, जेकरा में माई के दमदार रोल वाला सराहनीय फिलिमन में दिनेशलाल यादव निरहुआ के ‘दिलेर’ अउर ‘बिदेसिया’, खेसारीलाल के ‘लाडला’, विराज भट्ट के फिलिम ‘आंधी और तूफान’ उल्लेखनीय बा। फिलिम ‘लाडला’ के एगो गाना उनका पर फिल्मावल गइल रहे, जवन कि ओ बेरा खूब चलल रहे। गाना के बोल रहे ‘ममता के अनमोल खजाना कबो ना दिल से तेजे,  कुहुकेला हरदम बेटा खातिर माई के करेजा।’

 

नीलिमा सिंह –

मशहूर भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह के माई नीलिमा सिंह भी भोजपुरी फिलिमन में माई के कई गो किरदार निभवले बाड़ी। हालांकि उनकर नेगटिव किरदार ज्यादा मशहूर रहल बा। उ हिट टीवी शो ‘निमकी मुखिया’ में अनारो देवी के रोल खातिर भी जानल जाली। बकौल नीलिमा, उ अभी ले भोजपुरी में 50 से अधिक फिलिम कर चुकल बाड़ी। उनका माई के रोल वाला कुछ चर्चित अउर बढ़िया फिलिम में, ‘उगऽ हो सूरुज देव’, ‘बिदाई’, ‘आज के करण अर्जुन’ अउर ‘ससुराल’ रहल बा जवन कि उनका किरदार के चलते भी खूब चलल रहे। फिलिम ‘उगऽ हो सूरुजदेव’ में उनका ऊपर एगो गाना ‘अनमोल रतन धन’ फिल्मावल बा जेकरा में माई के ममता के सुंदर रूप देखावल गइल बा।

किरण यादव –

साल 2003 में कुणाल सिंह के फिलिम ‘कन्यादान’ से आपन करियर शुरू करे वाली किरण यादव भी माई के दमदार रोल निभवले बाड़ी। निरहुआ के अधिकांश फिलिम में माई के रोल करे वाली किरण यादव मनोज तिवारी के फिलिम ‘दरोगा बाबू आई लव यू’ में पहिला बार माई के रोल कइले रहली। उ लाचार माई से लेके वंश खातिर कवनो हद तक जाये वाली माई के भूमिका निभवले बाड़ी। फिलिम ‘लहू के दो रंग’ में उनकर किरदार उनका सबसे ज्यादा पसंद बा काहे कि ओकरा में औरत के डोली से ब्याह के अइला से लेके अर्थी पर अंतिम यात्रा तक के कहानी बा। एकरा अलावा फिलिम ‘कच्चे धागे’ में कुटिल सौतेली माई जे बाद में कोमल हो जात बाड़ी, के भी लोग खूब पसंद कइले बा। ‘बेटा’ फिलिम में जेल में एगो बच्चा के पैदा करे वाली माई के संघर्ष भी उनका दिल के बहुते करीब बा। निरहुआ के फिलिम ‘जिगरवाला’ में उनका पर फिल्मावल गइल गाना ‘अमृत के धार’ काफी सुंदर बन पड़ल बा।

 

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Hum BhojpuriaJune 15, 20211min4170

लेखक – मनोज भावुक

जन्मतिथि – 1 अक्टूबर 1919            पुण्यतिथि – 24 मई 2000

गीतकार मजरुह सुल्तानपुरी प पोथी प पोथी लिखाइल बा। हिंदी सिनेमा में एक से बढ़ के एक गीत देले बाड़न उ। ओह पर बहुत कुछ नइखे कहे के। एह छोट आलेख में कहाइयो नइखे सकत। अँटबे ना करी। आँटे के त भोजपुरियो ठीक से ना आँटी। एह से भोजपुरी सिनेमा में उनका ओह योगदान, ओह गीतन के बात करत बानी, जवन लोग के जुबान पर त चढ़बे कइल, फिलिमियो के हीट करवलस।

बात शुरू करत बानी उनका लोकप्रिय गीत के एगो अंतरा से –

हम त रहनी एगो भोली रे चिरईया

चिरई का पीछे-पीछे लागल बा बहेलिया, लागल बा बहेलिया,

चिरई का जालवा में फँसल बहेलिया गोहार करेला

गोरी हमके छोड़ावs हो गोहार करेला

मजरुह साहेब के बहेलिया एकदम इन्नोसेंट बा। बहेलिया के नाम बा असीम कुमार। चिरई बाड़ी कुमकुम। फिल्म के नाम बा लागी नाहीं छूटे राम आ ई गीतवा सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर आ तलत महमूद के आवाज़ में बा। संगीत चित्रगुप्त जी के बा। छतीस बार सुनले होखब हम। फिलिमियो सत्रह बार से कम ना देखले होखब आ तब ई दावा करे के मन करेला कि ए चनेसर भोजपुरी के गरियावs मत। अश्लील मत कहs। भोजपुरी के समरथ के जाने के बा त फिल्म लागी नाहीं छूटे राम देखs। ई 1963 के फिल्म ह।

त 1963 के बात 2020 में काहे जी? काहे, बाप-दादा के बात ना होई? बिगड़ल त ससुरा नाती-पोता बाड़न स नू ? एह से ओकनी के ईयाद दियावत बानी कि देखs लोग बाप-दादा भोजपुरी के केतना गौरवशाली छवि बना के गइल बा। हाँ, भोजपुरी सिनेमा में गीत के बात होई त शैलेन्द्र आ मजरुह सुल्तानपुरी बापे-दादा नू बा लोग ।

त अब बात आगे बढ़ावत बानी। ऊ चिरई आगे का पूछsतारी आ उनका का जबाब मिलsता। देखीं गीत के खूबसूरती देखीं आ बात के पकड़ी।

  • घूमी-घूमी देखs तारs काहे मोर चलवा
  • तनिक छँहाई ल घमाई जाई गलवा, घमाई जाई गलवा
  • चलीं चाहे घमवा में बैठीं चाहे छँहवा हो काहे मुएला
    गोरे गलवा का पीछे केहू काहे मुएला
    – हो कि रस चुएला …

एकरा के कहल जाला बोलत-बतियावत गीत, करेजा छूअत गीत। आज हम ओही गीतकार के बात करत बानी जेकर ई गीत भोजपुरी त भोजपुरी गैर भोजपुरी भाषी के जुबान पर भी बा। का जी, के नइखे सुनले ई गीत-

  • लाल-लाल ओठवा से बरिसे ललइया हो कि रस चुएला
    जइसे अमवा के मोँजरा से रस चुएला
  • लागे वाली बतिया ना बोलs मोरे राजा हो करेजा छुएला
    तोरी मीठी-मीठी बोलिया करेजा छुएला हो करेजा छुएला

का कमाल के पोएट्री बा। अइसने पोएट्री प पगला के रजवा राजपाट लिख देत रहलन ह स कवि जी के। राजपाट माने राजेपाट ना होला, अशर्फियो ( स्वर्ण मुद्रा) दीहल भी होला ।

  • भागेलू त हमके बोलावेला अँचरवा
    अँखियाँ चुरावेलू त हँसेला कजरवा हो हँसेला कजरवा
  • जिया के जंजाल भइल हमरी सुरतिया डगर रोकेला
    जहाँ जाँई तहाँ लोगवा डगर रोकेला
    –  हो कि रस चुएला …

आजकल एकरा पसंघो में गीत नइखे लिखात या लिखाता त उहाँ ना प्रोड्यूसर पहुंचता, ना डाइरेक्टर आ उ पहुंचियो के का करी? ओकर त चले ना। चलेला हीरो के आ हीरो लोग अल्बम इंडस्ट्री से आइल बा। ओही जी से नाशल शुरू भइल बा।

खैर, मजरूह साहब के दुनिया गाँव- कस्बा के दुनिया रहे। जहां गुड्डा-गुड्डी के बिआह होखे, जहाँ माई लोरी गा के लइकन के सुतावे। ई लोरी उनका ज़ेहन में रहे। 1965 में एगो फिल्म आइल- भउजी। ओह में मजरुह साहेब के लोरी आइल। लोरी प तरह-तरह के चर्चा चलल। चित्रगुप्त जी के धुन प लता जी के स्वर में गजब खिलल बा ई गीत। हालाँकि कवनो-कवनो घर में माई एकरो से बढ़िया राग में गावेली सन। हम मम्मी लोग के बात नइखीं करत। गाना देखीं।

ए चंदा मामा आरे आव पारे आवs

नदिया किनारे आवs

सोना के कटोरिया में दूध भात ले ले आवs

बबुआ के मुहवा में घुटुक

 

आवs हो उतर आवs हमरी मुंडेर

कब से पुकारिले भइल बड़ी देर

भइल बड़ी देर हो बाबू के लागल भूख

ए चंदा मामा आरे आव पारे आवs…

 

मनवा हमार अब लागे कही ना

रहिले जे एक घड़ी बाबू के बिना

एक घड़ी हमरा त लागे सौ जुग

ए चंदा मामा आरे आव पारे आवs…

 

चांद जइसन मुखड़ा जे देखs एक बार

तोहरा के मोह लिहि बबुआ हमार

बबुआ हमार जइसे तोहरे स्वरूप

ए चंदा मामा आरे आव पारे आवs…

 

एही फिल्म (भौजी) में एगो अउर गीत जवन रफ़ी साहेब के आवाज़ में बा, ओकरा के लोग सराहल- हम गरीबन से भइल प्या

दरअसल मजरुह साहब बहुत बड़ा शायर रहनी। समय आ समाज के धड़कन उनका शायरी आ गीतन के स्वर रहे। सिचुएशनल गीत में भी एकर गुंजाइश उ निकालिए लेस। एही से उ भोजपुरियो में कालजयी रचना कइलें। फिल्म लागी नाहीं छूटे राम के टाइटल ट्रैक हीं लीं ना। इहो तलत महमूद आ लता जी के आवाज़ में बा।

  • जा जा रे सुगना जा रे कहि दे सजनवा से
    लागी नाहीं छूटे रामा चाहे जिया जाए
  • भइली आवारा सजनी पूछलs पवनवा से
    लागी नाहीं छूटे …

हई पोएट्री देखीं। जबाब नइखे ।

  • दिया रोज हारि जाला संग संग जलि के
  • चँदवा भी थाकि जाला मोरा संग चलि के

तड़पइले रात दिन कौनारे जमनवा से
लागी नाहीं छूटे …

एह फिल्म के सगरी गीतवे कमाल बा। हर साल राखी पर पूर्वांचल में सबसे बेसी इहे गीत गूंजेला –

रखिया बन्हा ल भईया सावन आइल जीयs तू लाख बरिस हो

तोहरा के लागे भईया हमरो उमिरिया बहिना त देले असीस हो

हई लाइन सुन के त मन मोहा जाता। नेग में का माँगतारी बहिन। कहsतारी कि जब भउजी अइहें त-

अँचरा में भरि-भरि लेइब रुपइया, गाँव लेइब दस-बीस हो

अंतिम लाइन त करेजा काढ़ लेता –

अइसन ना होखे कहीं अँखियाँ निहारे जाये सावन ऋतु बीत हो

रखिया बन्हा ल भईया सावन आइल जीयs तू लाख बरिस हो

अगर केहू के पति भकचोन्हर मिल जाय त हेसे बढ़िया गीत त ना मिली। माने हर सिचुएशन में कमाल बाड़े मजरुह चचा। गीत के मजा लीं।

सखिया सहेलिया के पिया अलबेला

बनवारी हो हमरा के बलमा गँवार

 

जामुन जइसन रंग पिया के

ओऽपर लाल लिबास।

तवना उपर पान चबावे

हँसे ननद अउर सास

बनवारी हो

बनवारी हो ताना मारे सगरे जवार

बनवारी हो हमरा के बलमा गँवार

 

 

टिकुली सटनी सेनुर भरनी

कइनी सब सिंगार

बइठल टुकुर टुकुर ताकेला

जिया भइल अंगार

बनवारी हो

बनवारी हो जर गइल एंड़ी से कपार

बनवारी हो हमरा के बलमा गँवार

भागलपुर से फैजाबाद तक घुमनी गाँवे गाँव

बागड़पन में बलमा जइसन केहू के नईखे नाँव

बनवारी हो

बनवारी हो केकर होई अइसन भतार

ओही तरे आशा भोंसले और मन्ना डे के आवाज़ में ‘’ अजी मुंहवा से बोलs कनखिया न मारs ‘’ ग़ज़ब के नोंक-झोंक वाला गीत बा। चाहे ‘’ मोरी कलइया सुकुवार हो चुभि जाला कंगनवा / जब से भइल नैना चार हो चुभि जाला कंगनवा ’’ चाहे सुमन कल्यानपुरी के आवाज़ में ‘’ सज के त गइनी रामा पिया के नगरिया से भुलाई हो गइले ना / हमरी माथे के टिकुलिया भुलाई हो गइले ना ‘’… एह सब गीत में मजरुह साहब के चिंतन, भाव के जादूगरी आ अंदाजे बयां मन मोह लेता।

मजरुह साहब के गीतन में श्रृंगार आ जीवन दर्शन गजब के घुसपैठ बनइले बा।

लोक जीवन के रंग आ लोक संगीत के तेवर उनका हिंदी गीतन में भी मौजूद बा। फ़िल्म ‘धरती कहे पुकार के’ गीत के रंग देखीं –

जे हम तुम चोरी से, बंधे इक डोरी से

जइयो कहां ऐ हुजूर

अरे ई बंधन है प्यार का… जे हम तुम चोरी से

चाहे हई गीत देखीं –

ठाड़े रहियो ओ बांके यार हो

ठहरो लगा आऊं नैनों में कजरा

चोटी में गूंध आऊं फूलों का गजरा

मैं तो कर आऊं सोलह सिंगार रे

ठाड़े रहियो ओ बांके यार रे

अउर अब मजरुह साहब के, आज के समय के सबसे जरुरी, सबसे प्रासंगिक दू गो सदाबहार गीत के साथे आपन बात ख़तम करत बानी ।

पहिलका गीत –

राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है

दुख तो अपना साथी है

सुख है एक छांव ढलती

आती है जाती है, दुख तो अपना साथी है

आ दुसरका गीत –

इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल

जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल

दूजे के होठों को देकर अपने गीत

कोई निशानी छोड़ फिर दुनिया से डोल


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Hum BhojpuriaJune 7, 20211min4840

जन्मदिवस विशेष: 23 अप्रैल 1969

लेखक- मनोज भावुक 

कुछ लोग के ज़िन्दगी के कहानी स्वेट मार्डेन, शिव खेड़ा, नेपोलियन हिल आदि के प्रेरक पुस्तक से कम रोचक आ मोटिवेशनल ना होला। कोरोना काल में अइसने कहानियन के जरूरत बा जे गहन निराशा में आशा के किरण जगावे।

कहल जाला कि मन में हिम्मत होखे आ अपना लक्ष्य खातिर जुनून होखे त कवनो रास्ता पहाड़ नइखे। पश्चिमी चंपारण के एगो छोट गाँव बेलवा के रहे वाला लइका बॉलीवुड के एगो श्रेष्ठ अभिनेता बन गइल, एकरा  पीछे अथक मेहनत आ अटूट लगन के हाथ बा। एह बिहारी अभिनेता के नाम ह मनोज बाजपेयी जे सामान्य किसान परिवार से होखला के बादो फिल्म अभिनेता बनला के फ़ैन्सी सपना ना खाली देखलें बल्कि ओकरा के पूरो कइलें। 23 अप्रैल 1969 के मनोज बाजपेयी के जन्म भइल। मनोज अपना पाँच भाई बहिन में दुसरा नंबर के संतान हवें। उनके शुरुआती पढ़ाई गाँवे के प्राथमिक विद्यालय से आ हाईस्कूल के पढ़ाई के. आर. हाईस्कूल बेतिया से भइल।

मनोज 1986 में 17 साल के उमिर में दिल्ली पढ़े आ गइलें। बचपन से अभिनेता बने के शौख उनका मन में रहे, एही से इहाँ आके थियेटर से जुड़ गइलें। उनकर नाम मनोज भी ओ बेरा के हिट फिल्म कलाकार मनोज कुमार के नाम पर रखाइल रहे आ मन में कलाकार बने के अरमानों मचलत रहे त थियेटर के प्रति झुकाव स्वाभाविक रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करत समय मनोज के जान पहचान थियेटर के दुनिया के बड़ बड़ लोग से हो गइल। तबे उनका पता चलल कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अभिनय के बेहतरीन प्रशिक्षण होला। उ ओह में दाखिला खातिर लगातार कोशिश कइलें, बाकिर तीन बेर असफल भइलें। मनोज एकदम निराश हो गइल रहलें। बने के अभिनेता रहे आ रास्ता मिलते ना रहे। लाइफ लाइन के तलाश जारी रहल। एह अन्हरिया सफर में भेंटइले रघुबीर यादव (प्रसिद्ध अभिनेता)। उनका सलाह पर मनोज मशहूर अभिनय कोच बैरी जॉन के थियेटर कंपनी जॉइन कs लेहलें। शाहरुख खान भी बैरी जॉन किहाँ से अभिनय के कोचिंग लेले बाड़ें। थियेटर के दिन में मनोज आ शाहरुख के मुलाकात भी भइल रहे। मनोज बाजपेयी ए थियेटर कंपनी के साथे कई गो प्ले कइलें अउरी साथ ही अपना अंग्रेजी भाषा के कॉम्प्लेक्स के दूर कइलें। एगो इंटरव्यू में उ बतवलें कि बिहार से आवे वाला अक्सरहा युवक अंग्रेजी से घबड़ाला। हमरा भी बहुत चिंता होखे कि हम कइसे बढ़िया अंग्रेजी बोलीं। कुछ दोस्त लोग के मदद से अंग्रेजी भाषा पर कमांड कइनी आ आज उ काम देता ।

ओही थियेटर के दिन में मनोज बाजपेयी चौथा बार एनएसडी में दाखिला खातिर फेर कोशिश कइलें। एह बेरी उहाँ बोर्ड में बइठल लोग इनका के चिन्हत रहे आ इनका प्रतिभा के मुरीद रहे। उ लोग कहल कि मरदे, अब तू सीखे ना सिखावे आवs.  मनोज गइल रहलें ओहिजा चेला बने आ उनके गुरु बने के नेवता मिल गइल। बाकिर उ मना क दिहलें। उनके अभिनय चलत रहल। साल 1994 में गोविंद निहलानी ओमपुरी आ नसीरुद्दीन के लेके फिल्म बनावत रहलें। उ मनोज के एक मिनट के एगो छोट रोल में कास्ट कइलें आ ई रहे भविष्य के एगो चमकत फिल्म सितारा के पहिला पर्दा-पदार्पण। ओही साल मशहूर फिल्मकार शेखर कपूर कुख्यात डाकू फूलन देवी के जीवन पर फिल्म ‘बैन्डिट क्वीन’ बनावत रहलें आ उनके फिल्म में टाइटल रोल के समानांतर भूमिका खातिर एगो अइसन नवयुवक के तलाश रहे जे कुशल अभिनेता होखे। मनोज के मित्र आ ओह फिल्म के कास्टिंग कर रहल तिग्मांशु धूलिया शेखर कपूर से मनोज के नाम सुझवलें। मनोज बाजपेयी के मामला लगभग सेट हो गइल, तले कुछ दिन बाद उनके रोल में निर्मल पाण्डेय के कास्ट कर लिहल गइल। मनोज के हिस्से एगो छोट रोल आइल बाकिर ई रोल उनके अभिनय क्षमता प्रमाणित करे खातिर काफी रहे।

कुछ समय बाद मनोज बाजपेयी मुंबई के रुख कर देहलें आ उहाँ उनकर संघर्ष के असली दौर शुरू भइल। बाकिर उनके दिल्ली के कुछ मित्र मुंबई में पहिले से रहलें आ स्थापित होत रहलें। एहीसे उनके मुंबई फिल्म उद्योग में घुसे में मदद भी मिलल। मनोज अपना मित्र सौरभ शुक्ला के साथे मुंबई में आपन शुरुआती दिन गुजरलें। एगो साक्षात्कार में एगो रोचक किस्सा बतवलें कि उ लोग संघर्ष के दिन में अभिनय के लगातार माँजत रहल लोग। केहू भी मित्र आवे त मुर्गा आ मटन पार्टी होखे अउरी मनोज एकरा बदले में आपन कुछ रिहर्सल कइल सीन देखावस।

मनोज के 1995 में महेश भट्ट के टीवी शो स्वाभिमान मिलल। ओह में हालांकि मनोज के छोट रोल रहे लेकिन उ एतना लोकप्रिय भइल कि उनके रोल दू साल से ऊपर तक शो में चलल। एकरा बाद उनके रामगोपाल वर्मा से मुलाकात भइल, जब उ एगो कॉमेडी फिल्म दौड़ के कास्टिंग करत रहलें। रामू उनके प्रतिभा देख के एतना प्रभावित भइलें कि उनके कहलें कि हेतना छोट रोल तहरा लायक नइखे। हम तोहरा के अगिला फिल्म में बड़हन रोल देम। मनोज के पैसा के गरज रहे एहीसे उ रोल कइलें। बाकिर रामू अपना वादा मुताबिक अगिला फिल्म सत्या में हीरो के समानांतर भीकू म्हात्रे नाम के गैंगस्टर के रोल दिहलें। ई रोल अउरी फिल्म एतना हिट भइल कि मनोज बाजपेयी पूरा देश में मशहूर हो गइलें। ई फिल्म बहुत सफल भइल आ मनोज के अभिनय के भूरी भूरी प्रशंसा भइल। मनोज के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलल। एही जा से मनोज बाजपेयी के बढ़िया फिल्म मिले लागल। कुछ साल में उनके शूल, कौन, अक्स, जुबैदा, दिल पे मत ले यार आइल। ई फिल्मन में मनोज बाजपेयी के मुख्य भूमिका रहल आ उनके अभिनय के बड़ा तारीफ भइल। बाकिर मनोज बाजपेयी के फिल्मन के बिजनेस कवनो खास ना रहल।

मनोज 2010 तक के पीरियड में कई गो फिल्मन में नजर अइलें बाकिर उनकर मुख्य भूमिका रहल फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल ना देखा पवली सन। एही से पता चलता कि हिन्दी फिल्म दर्शकन के केतना दुर्भाग्य बा कि उ बढ़िया कलाकारन के कबो कैश ना करेला आ लिपल पुतल तथाकथित स्टार चेहरा पर छिछिआइल रहेला। साल 2010 में प्रकाश झा के मल्टीस्टारर राजनीतिक फिल्म राजनीति रिलीज भइल आ फिल्म सुपरहिट भइल। एह में मनोज के नेगटिव रोल के बहुत प्रशंसा भइल। फेर साल 2012 में फिल्म आइल गैंग्स ऑफ वासेपुर आ उनके किरदार सरदार खान अमर हो गइल ओइसहीं जइसे भीकू म्हात्रे। मनोज बाजपेयी ओइसे भी घर घर में पहुँच चुकल रहलें, एह फिल्म के बाद वाली पीढ़ी के भी स्मृति में बस गइलें। साल 2016 में उनके फिल्म ‘अलीगढ़’ रिलीज भइल जेके चारु ओर खूब तारीफ भइल, एक बार फेर मनोज अपना अभिनय से सभके चकित कर देहलें। उनके एकरा खातिर प्रतिष्ठित एशिया पेसिफिक स्क्रीन अवॉर्ड से नवाजल गइल। साल 2018 के फिल्म गली गुलेयां भी मनोज बाजपेयी के फिल्मोग्राफी के बेहतरीन फिल्म ह। एह फिल्म के देश विदेश में खूब तारीफ मिलल।

साल 2019 मनोज बाजपेयी खातिर बढ़िया साल रहल। एही साल उनके पद्म श्री के उपाधि मिलल आ एही साल उनके फिल्म भोंसले रिलीज भइल जे में उ टाइटल रोल कइलें। पिछला साल फिल्म भारत में भी ओटीटी पर प्रदर्शित भइल। ई फिल्म देश विदेश में खूब नाम कमइलस। साल 2021 में उनके भोसले फिल्म खातिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार मिलल ह।

मनोज बाजपेयी के अमेजॉन प्राइम पर रिलीज भइल शो द फैमिली मैन के बड़ा प्रसिद्धि मिलल आ उ शो सुपर डुपर हिट रहल। उनके फिलहाल जीफाइव पर साइलेंस नाम के थ्रिलर ड्रामा रिलीज भइल बा आ जलदिए द फैमिली मैन के अगिला सीरीज रिलीज होखे वाला बा।


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Hum BhojpuriaMay 22, 20211min4630

मनोज भावुक

कोरोना काल में सबसे जादा कवनो टीवी सीरियल टीआरपी बटोरलस त उ बा रामायण आ महाभारत. 30-35 साल पहिले जब ई दुनों सीरियल आइल तब सबसे जादा टीवी बिकाइल. हमरा ईयाद बा चौथा-पांचवा में पढ़त रहनी. रोड प सन्नाटा छा जाव ए भाई जइसे लॉकडाउन में सन्नाटा छा जाला.

चइत महीना. चारो तरफ चइता में रामे राम गूँजेला ए रामा. रामजी के जनम के महिना ह. रामनवमी पर जन्मोत्सव होला. लोक में आ लोक गीत में राम त बसले बाड़े. मन भइल ह तनी सिनेमो में राम के देखल-समझल जाय. खोजल शुरू कइनी हं त अचरज में पड़ गइनी हं. पचास से बेसी फिलिम आ धारावाहिक बनल बा रामकथा पर.

राम पर 1917 में बनल पहिलका फिलिम लंका दहन

दादा साहेब फालके के नाम के नइखे जानत. राम पर पहिलका फिल्म उहे बनवले 1917 में. फिलिम के नाम बा ‘लंका दहन’. ई एगो मूक फिल्म ह. माने राम जी गूंग बाड़े….आ मजेदार बात ई बा कि एह में राम आ सीता के रोल एकही आदमी अन्ना सालुंके कइले बाड़न. फिल्म के जानकार लोग बतावेला कि भारतीय सिनेमा के पहिला डबल रोल फिलिम ‘लंका दहन’ में ही निभावल गइल बा.

चंद्रसेना’ 1931 में मराठी में आ 1935 में हिंदी में रिलीज भइल

1931 में प्रभात फिल्म्स मराठी भाषा में एगो फिलिम बनवलस ‘चंद्रसेना’. चंद्रसेना महिरावण के पत्नी रहली. महिरावण अउरी अहिरावण के मदद से रावण के बेटा इंद्रजीत राम लक्ष्मण के अपहरण करवा लेहलस. चंद्रसेना राम जी के भक्त रहली, एही से उ हनुमान जी के मदद कइली राम लक्ष्मण के पाताल लोक से निकलवावे में. एह फिलिम के वी शांताराम निर्देशित कइले. एह फिल्म में बढ़िया स्पेशल इफेक्ट के प्रयोग भइल बा, प्रोडक्शन कंपनी प्रभात फिल्म्स ओह बेरा नया तकनीक से फिल्म बनावे खातिर जानल जाव. 1935 में इहे फिल्म हिंदी में भी रिलीज भइल, ओही नाम से.

विजय भट्ट राम जी पर 12 साल में चार गो फिलिम बनवलें (19421954)

विजय भट्ट नाम के निर्माता-निर्देशक राम के ऊपर रचित वाल्मीकि रामायण से एतना प्रभावित भइलें कि उ चार गो फिल्म राम कथा के ऊपर बना देहले. उनके पहिला तीन गो फिल्म ट्रायोलॉजी में आइल. पहिला फिल्म रहे ‘भरत मिलाप’ जवन 1942 में आइल. एह में राम के रोल में प्रेम अदीब रहले आ सीता के रोल में शोभना समर्थ रहली. फिल्म के खूब लोकप्रियता मिलल. विजय भट्ट के फिल्मन के अबतक के राम पर बनल सिनेमा में सबसे उत्कृष्ट सिनेमा मानल जाला. विजय भट्ट के पोता विक्रम भट्ट आज के टाइम के मशहूर फिल्म निर्देशक बाड़ें. भरत मिलाप में राम के तीसरा भाई भरत के कहानी रहे जे राम के अनन्य भक्त रहलें आ राम के वनवास चल गइला के बाद उनसे एक बार मिले आइल रहलें.

भरत मिलाप के बाद फिल्म आइल 1943 में राम राज्य. जइसन कि नामे से पता लागत बा, ई फिल्म राम जी के आदर्श राज के इर्द गिर्द बनल रहे. फिल्म ओह साल के तीसरा सबसे ज्यादा कमाई करे वाला फिल्म बनल.

फेर साल 1946 में आइल, फिल्म राम बाण. रामबाण भी सफल भइल बाकिर ओकरा कुछ फिल्म- आलोचक लोग से कड़ा रिव्यू भी मिलल. फिल्म में राम के किरदार निभावे वाला कलाकार के डील डौल पर आ सीता के किरदार निभावे वाली अभिनेत्री के शारीरिक स्थिति पर प्रसिद्ध फिल्म आलोचक बाबूराव पटेल सवाल उठवलें आ ई सवाल ओह बेरा के मिडिया में खूब उछ्लल.

फेर लगभग 8 साल बाद आइल फिल्म रामायण (1954), जे में राम सीता के किरदार उहे अभिनेता निभवलें जे पिछला तीन गो में निभा चुकल रहलें मतलब राम के रोल में प्रेम अदीब आ सीता के रोल में शोभना समर्थ. ओह घरी ई जोड़ी ओइसहीं हिट भइल रहे जइसे अरुण गोविल आ दीपिका चिखलिया के जोड़ी रामानंद सागर के सुपर डुपर शो रामायण में राम सीता के रूप में हिट भइल रहे. इ फिल्म उत्तर रामायण काण्ड पर केंद्रित बा जवना में रामजी वनवास बिता के अयोध्या में अइनी आ जनता के दबाव में अपना गर्भवती पत्नी सीता के जंगल में भेज देहनी. ओही जी लव कुश के जन्म भइल आ पूरा कहानी ओही लोग पर केंद्रित बा.

एन टी रामा राव बनलें राम त फिल्म भइल सिल्वर जुबली (1958)

साल 1958 में तमिल भाषा में राम के सम्पूर्ण जीवन पर फिल्म बनल ‘सम्पूर्ण रामायण’. एह फिल्म में राम के रोल निभवलें साउथ के मेगा स्टार अउरी आंध्र प्रदेश के तीन बार के मुख्यमंत्री रहल एन टी रामा राव जिनके एन टी आर नाम से जानल जाला. ई फिल्म सिल्वर जुबली भइल आ 264 दिन ले पर्दा से उतरबे ना कइल. ई फिल्म 1960 में एही नाम से हिन्दी में डब भइल आ उत्तर भारत में खूब देखल गइल.

दक्षिण भारतीय भाषा में राम जी पर खूब फिल्म बनल 

तमिल भाषा के ‘सम्पूर्ण रामायण’ के बाद साल 1971 में तेलुगु भाषा में भी सम्पूर्ण रामायण नाम से ही फिल्म बनल जवन भगवान राम के जीवन गाथा देखवलस. एह फिल्म में राम के किरदार शोभन बाबू निभवलें. एकर निर्देशक बापू रहलें.

बापू के ही निर्देशन में साल 2011 में फिल्म बनल श्री राम राज्यम. एह फिल्म में नन्दमूरी बालकृष्ण राम के रोल निभवले बाड़ें, उ तेलुगु के सुपरस्टार हवें. फिल्म में सीता के रोल में नयनतारा बाड़ी जे दक्षिण के मशहूर हिरोइन हई. एह फिल्म के कहानी उत्तर रामायण कांड पर आधारित बा.

राम पर मल्टीस्टारर फिल्म बन रहल बा आदिपुरुष

एगो मल्टीस्टारर अउरी बड़ा बजट के फिल्म ‘आदिपुरुष’ बन रहल बा, जेकर निर्देशक बाड़ें ओम राउत. जे 2020 में मराठा योद्धा पर आधारित सुपरहिट फिल्म ताना जी बना चुकल बाड़ें. फिल्म आदिपुरुष में भगवान राम के किरदार प्रभास निभइहें आ सीता के रोल कीर्ति सैनन के मिलल बा. रावण के रोल में सैफ अली खान बाड़ें. ई फिल्म के निर्माण चल रहल बा अउरी 11 अगस्त 2022 में ई रिलीज होई. फिल्म हिन्दी अउरी तेलुगु में एके साथे शूट होई. एह में हॉलीवुड से वीएफएक्स टीम आई.

दंगल फ़ेम निर्देशक नितेश तिवारी राम पर तीन गो फिल्म के सीरीज लेके आ रहल बाड़े

हिन्दी फिल्म दंगल फ़ेम निर्देशक नितेश तिवारी आ रवि उदयवार रामायण पर तीन गो फिल्म के सीरीज बनावे वाला बा लोग, जवन 3डी में बनी. हालांकि 2019 के अनाउन्समेंट के बाद एह पर कवनो नया खबर नइखे आइल. एकर निर्माण हिंदी के अलावा तमिल आ तेलुगु में भी होई आ एकर निर्माता अल्लू अरविंद, नमिता मल्होत्रा आ मधु मेंटेना बा लोग.

भोजपुरी सिनेमा में राम नइखन

भोजपुरी भाषा में शायद राम के जीवन पर कवनो फिल्म नइखे बनल. हाँ राम के जीवन पर छोट-छोट वीडियो आ गाना एल्बम त खूब बा. भोजपुरी के लोक गीतन में राम हर जगह बाड़ें, सबसे अधिक रामलीला भोजपुरिये क्षेत्र में खेलल जाला बाकिर भोजपुरिया सिनेमा में राम के अनुपस्थिति अचरज में डालत बा.

रामकथा प आधारित बनल फिलिमन के एगो संक्षिप्त सूची –

  • लंका दहन (1917)
  • चंद्रसेना (1931)
  • रामायण (1954)
  • संपूर्ण रामायण (1958)
  • राम राज्य (1967)
  • संपूर्ण रामायण (1971)
  • सीता कल्याण (1976)
  • बजरंगबली (1976)
  • दसावतार
  • महिरावण
  • रावण (1984)
  • रामायणम् (1996)
  • भरत मिलाप (1942)
  • राम राज्य (1943)
  • . राम बाण (1946)
  • ब्रह्मर्षि विश्वामित्र
  • हनुमान पाताल विजय
  • हनुमान विजय
  • इंद्रजीत (सती सुलोचना)
  • कंचन सीता
  • लव-कुश
  • पादुका पट्टाभिशेखम्
  • रामजन्म
  • राम पादुका पूजन
  •  रामायणी
  • रुद्राक्ष
  • संपूर्ण रामायण (तीन खंड)
  •  सती अहिल्या
  • सीता-राम जन्म
  • सीता राम कल्याण
  • श्रीहनुमान चलिसा
  • श्रीराम भक्त हनुमान
  • श्रीराम राज्यम्

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Hum BhojpuriaMay 3, 20211min5760

लेखक- मनोज भावुक

फिल्म जगत में फेस्टिवल पर फिल्म रिलीज करे के फैशन बा। ओकर सम्बन्ध बिजनेश से भी बा। अबकी होली पर खेसारीलाल यादव आ दिनेश लाल यादव निरहुआ के फिल्म रिलीज भइल ह। आईं एह दूनू फिल्मन पर बात कइल जाय।

 

खेसारीलाल यादव के फिल्म सइयां अरब गइले ना

कुछ कर गुजर ऐसा कि दुनिया तमाम हो जाए, आशिकों के जुबान पर तेरा भी नाम हो जाए

इहे शे’र फिल्म के हीरो बोलत बा। अइसन एगो अउर शेर बा,

कसम है तेरे इंतज़ार का, एतबार तेरा टूटने नहीं दूंगा

रिश्ता तुझसे जनम जनम का है, साथ तुझसे छूटने नहीं दूंगा

इ दुनू शेर पढ़ के पता त चलिए गइल होई कि फिल्म के कहानी एगो लव स्टोरी बा आ प्रेमी अपना प्रेमिका के पावे खातिर कुछओ करे के तइयार बा। प्रेमिका के अपना हीरो पर ऐतबार बा। फिल्म के नाम ह ‘सइयाँ अरब गइले ना’ आ प्रेमी के भूमिका में बाड़ें खेसारीलाल यादव अउरी प्रेमिका के भूमिका में बाड़ी काजल राघवानी। इ फिल्म भोजपुरी में बनल बा आ होली के त्योहार पर यूपी बिहार के सिनेमाघर में रिलीज भइल ह। हालांकि कोरोना के बढ़त प्रकोप के चलते सिनेमाघर में ऑक्यूपेन्सी कम बा। त अब आवे वाला सप्ताह निर्धारित करी कि भोजपुरिया क्षेत्र में काफी लोकप्रिय खेसारी लाल के इ फिल्म केतना लोग देखलस।

फिल्म के टाइटल खेसारी के ही एगो हिट गाना ‘सइयाँ अरब गइले ना’ से लिहल बा। इ गाना खेसारी के करियर के एगो माइलस्टोन गाना कहल जा सकेला काहें कि एकरा बाद खेसारी के लोकप्रियता तेजी से बढ़ल। एमें उनकर लौंडा नाच के लोग चाव से देखल आ बाद में ई खेसारी के सिग्नेचर स्टाइल बन गइल जेकरा के अभियो खेसारी भुनावत रहेलें। फिल्म के नाम उनके हिट गाना पर रखला के पीछे के रणनीति भी इहे बा कि दर्शक के लुभावल जा सके। बाकिर फिल्म लोगन के केतना लुभाई ई त बाद में पता चली।

फिल्म के निर्माण यशी फिल्म्स कइले बा बाकिर एह में तीन गो निर्माता बाड़ें, अभय सिन्हा, प्रशांत जम्मूवाला आ अपर्णा शाह। फिल्म के शूटिंग दुबई के सुंदर लोकेशन पर भी भइल बा। फिल्म के लेखक भोजपुरी सिनेमा खातिर लगभग 80 गो फिल्म लिख चुकल मनोज के। कुशवाहा बाड़ें। एकर निर्देशक प्रेमांशु सिंह बाड़ें जे भोजपुरी के कई गो सफल फिल्म दे चुकल बाड़ें। फिल्म के संगीत ओम झा के बा।

 

कहानी:

हीरो एगो साधारण परिवार से बा। एक बेर साइकिलिंग करत में ओकर टक्कर हिरोइन से अचके हो जाता आ टकरइला के बाद का होला, रउरा जानते बानी। धीरे-धीरे अंखलड़उअल से शुरू होके दिल लगउअल तक बात पहुँचता बाकिर मुश्किल ई बा कि हिरोइन अमीर बाप के दुलरी बेटी बाड़ी आ हीरो गरीब त दुनू के क्लास में काफी अंतर पड़ जाता। हिरोइन के मामा जवन फिलिम में कॉमिक रिलीफ़ खातिर रखल गइल बाड़ें (ई आजमावल फार्मूला बा कि मुख्य विलेन के साला जरूर मसखरा होला जे गंभीर दृश्यन में भी कॉमेडी लिआवत रही), उ अपना भगिनी के हीरो के साथे देख लेतारें अउर घर पs बता देतारें। बाप बेटी खातिर बहुत फिक्रमंद रहता, जाहिर बा उ बेचैन हो जाता। लेकिन, जब ओकरा पता चलता कि दुनू एक दोसरा के बहुत प्यार करेलें त उ हीरो से डील करsता। डील होता कि हीरो 15 दिन में 15 लाख रुपया कमा के लिआई त बाप हिरोइन के बियाह ओकरा से कर दी। हीरो बड़ा फेर में पड़sता। बाकिर कसहूँ जोगाड़-तोगाड़ कs के दुबई कमाए चल जाता। उहाँ जाता त ओकरा कवनो कामे नइखे मिलत। तले ओकरा जिनगी में एगो अमीर लइकी आवत बिया आ ओकरा के बड़ बड़ जगह के सैर करावत बिया। दरअसल उ लइकी हीरो के फाँसे आइल बिया जवन बाद में पता चलत बा। हीरोइन के बाप असल में हीरो से अपना लइकी के बियाह नइखे करे के चाहत, एही से झूठमूठ के डील करके ओकरा के रास्ता से हटावत बा आ एने लइकी के बियाह कहीं और करे के तइयारी करत बा। हीरो दुबई में फंस गइला के बाद कइसे अपना वतन वापस लवटत बा, कइसे उ अपना प्रेमिका के पावत बा आ कइसे ओकरा बाप के प्रपंच के जवाब देता आ ओकर विचार बदलत बा, इहे फिल्म में आगे देखावल बा। ई देखे खातिर दर्शक के सिनेमा घर में जाए के पड़ी।

संगीत:

फिल्म के संगीत ओम झा के बा आ गीत कई गो गीतकार लोग लिखले बा। गीत कवनो जुबान पर चढ़े वाला नइखे। हाँ कुछ समय तक थिरका जरूर सकेला। फिल्म के एगो गाना ‘जब पटना वाली ने दिल तोड़ा तो पटाया गुजरात वाली को’ बड़ा वायरल होता अउरी विवाद के कारण भी बनल बा।

निर्देशन और अभिनय:

फिल्म के निर्देशन प्रेमांशु सिंह के बा जे खेसारी के साथ लगभग आधा दर्जन फिल्म कर चुकल बाड़ें। उनकर खेसारी के साथे एगो फिल्म बलम जी आई लव यू काफी सफल फिल्म रहल। निर्देशक रोमांटिक कॉमेडी के साथे एक्शन के छंवक वाला फिल्म बनावेले आ एह फिल्म में भी उनके उहे अंदाज लउकल बा। खेसारी के जवन टिपिकल कॉमेडी स्टाइल होला ओकरा से इतर दृश्य के बनावल गइल बा। फिल्म में अभिनय जेकर सराहे वाला बा उ हिरोइन के बाप के बा बाकिर शुभी शर्मा भी ठीक लागत बाड़ी। काजल आ खेसारी जइसन करेला लोग ओइसने कइले बा लोग। फिल्म के नायक-नायिका के केमिस्ट्री कुछ खास जमल नइखे जबकि दुनू जाना के जोड़ी के लगभग दू दर्जन से ऊपर फिल्म आ चुकल बा।

फिल्म कुछ खास कमाल नइखे देखवले बाकिर दुबई के लोकेशन बड़ा सुंदरता से देखावल गइल बा जवना खातिर छायाकार सरफराज खान के सराहे के चाहीं। फिल्म खेसारी के फैन सब के ध्यान में रख के   बनावल गइल बा।

 

निरहुआ के फिल्म रोमियो राजा शिक्षा माफिया के वर्चस्व पर सवाल कर रहल बा

कवनो भी देश में ओकरा नागरिक खातिर शिक्षा आ स्वास्थ्य के बड़ा महत्व बा आ अधिकांश देश एकरा के कर निशुल्क यानी कि टैक्स फ्री रखले बा काहें कि ई उद्योग ना बल्कि सेवा ह आ एहसे धन ना बल्कि पुण्य कमाइल जाला। बाकिर भारत में ई दुनू निशुल्क होखला के बावजूदो उद्योग के बड़ साधन बन गइल बा। भारत में अधिकांश लोग अपना लइका-बच्चा के प्राइवेट स्कूल-कॉलेज में पढ़ावत बा आ आपन इलाज प्राइवेट अस्पताल में करावत बा। सरकारी में उहे जाता जेकरा लगे प्राइवेट में जाए के बूता नइखे। हालांकि एकरा पीछे कई गो कारण बा आ एही सब के मुद्दा बना के एगो भोजपुरी फिल्म बनल बा, रोमियो राजा। नाम से फिल्म कॉमर्शियल लागत बा आ बटलो बा बाकिर निर्माता निर्देशक एतना महत्वपूर्ण विषय लेके फिल्म बनावे के हिम्मत कइले बा लोग, ई कम बात नइखे।

‘तोहर डिजिटल जवानी, इंटरनेशनल बा रानी’ गावत निरहुआ के ई फिल्म एह होली पर रिलीज भइल बा। बतइबे कइनी ह फिल्म के नाम बा ‘रोमियो राजा’। जस नाम बा तस टाइटल रोल निभावत निरहुआ के चरित्र भी बा। स्टाइलिश लुक अउरी चटख रंग के कपड़ा पहिन के घूमे वाला लइका आ एगो तेज तर्रार, केहू से ना डेराये वाली, अपना हक खातिर लड़-भिड़ जाए वाली लइकी के बीच रचल-बसल  कहानी बा, रोमियो राजा।

सोहम फिल्म्स के बैनर तले बनल ई फिल्म के ट्रेलर पिछले साल रिलीज भइल आ एकर प्रदर्शन भी पिछला साल होखे वाला रहे बाकिर कोरोना के बढ़त प्रभाव फिल्म के रिलीजिंग रोक देलस। अबकी होली पर एकरा के रिलीज त कइल गइल ह बाकिर एह बेरी भी कोरोना के मार फेर बढ़ रहल बा आ सिनेमाहॉल पर एकर असर बा। हालांकि निरहुआ के फैन फॉलोइंग बहुत बा त एह से आशा बा कि फिल्म कलेक्शन कर पाई। भोजपुरी फिल्म अभी तक मल्टीप्लेक्स में रिलीज ना होला, ऊ सिंगल स्क्रीन तक ही सीमित रहि जाला। सिंगल स्क्रीन के संख्या भी कम हो रहल बा। एह से भोजपुरी फिल्मन के कलेक्शन पर बड़ प्रभाव एकरो पड़ेला। एही से अक्सर भोजपुरी फिल्म के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ही बिजनेस हो पावेला आ एह में निरहुआ के धाक बा। उनकर कई गो फिल्मन के व्यूज कई सौ मिलियन में बा।

 

फिल्म ‘रोमियो राजा’ के लेखक-निर्देशक मनोज नारायण बाड़ें जे एकरा से पहिले भी निरहुआ के साथे ‘शेर-ए-हिंदुस्तान’ बना चुकल बाड़ें। इ फिल्म होली 2019 में रिलीज भइल रहे आ बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कइले रहे। उ फिल्म भी भारत नेपाल के राजनीतिक सामाजिक रिश्ता पर बनल रहे आ भोजपुरी खातिर नया विषय रहे। ‘शेर-ए-हिंदुस्तान’ भी भोजपुरी में ढर्रा पर बन रहल फिल्मन से हट के बनल बा।

 

कहानी:

फिल्म के कहानी नायक नायिका के बीच द्वन्द्व के आस पास बुनल गइल बा। नायक रोमियो राजा एगो अनपढ़, नकचढ़ल, अमीर बाप के औलाद बा जवन अपना बाप के पइसा आ ठाट पर गुमान करsता आ पूरा दुनिया के आपन बपौती समझत बा। हीरो के बाप बिहारी सिंह शिक्षा माफिया बाड़ें। ई किरदार दिनेश लाल यादव निरहुआ निभवले बाड़ें। फिल्म के हिरोइन एगो सरकारी हेडमास्टर के बेटी बिया जवन ना केहू से डेरात बिया आ ना अपना अधिकार से समझौता करत बिया। इ भूमिका आम्रपाली दुबे निभवले बाड़ी।

हीरो के बाप बिहारी सिंह (अवधेश मिश्रा) चाहत बा कि पैसा से, धमकी से, भ्रष्टाचार से, कइसहूँ आपन साम्राज्य बड़ा कइल जाव, नया-नया स्कूल खोलल जाव, अमीर के साथे गरीब के भी बहका के, मजबूर करके लूटल जाव। एह में ओकर साथ देता ओकर लइका माने कि फिल्म के हीरो। फिल्म के हिरोइन मानवता आ सेवा धर्म में भरोसा करत बिया। ऊ अपना पिता के सिखावल मूल्यन पर चलत बिया। बिहारी सिंह सरकारी स्कूल बंद करवावल चाहsतारें, रोमियो ओकरा साथे बा, हीरोइन बीच में दीवार बनके खाड़ा हो जात बिया। एही दरम्यान हीरो के हिरोइन से प्यार हो जाता आ ऊ ओकरा से बियाह करे के जिद कर लेत बा। फेर कइसे कइसे सरकारी स्कूल के खतम करे के प्रपंच होता आ हिरोइन अपना सूझ बूझ आ हिम्मत से बाप बेटा के सामना कर बिया। बिहारी सिंह अउर रोमियो के होश ठिकाने लिआवत बिया आ दिल में मानवता जगावत बिया, इहे फिल्म के कहानी बा। फिल्म के कथा बड़ा सुंदर बा आ एकरा के देखे खातिर सिनेमाहॉल में जाए के चाहीं।

 

निर्देशन और अभिनय:

फिल्म के लेखन-निर्देशन मनोज नारायण के बा जे अलग हट के विषयन पर फिल्म बनवेलें। उ एकरा से पहिले रानी चटर्जी अउरी विराज भट्ट के लेके कईगो हिट फिल्म दे चुकल बाड़ें। मनोज के निरहुआ के साथे ई दुसरका फिल्म ह बाकिर अउर दु गो फिल्म ई जोड़ी निकट भविष्य में ले आई। फिल्म में कथा आ निर्देशन सराहनीय बा आ लीक से हटके काम करे के कोशिश भइल बा।

अभिनय के मामले में अवधेश मिश्रा आ आम्रपाली के काम सराहनीय बा। निरहुआ भी आपन चरित्र के बढ़िया से निभवले बाड़ें आ उनके नेगटिव अउरी पाज़िटिव शेड दुनू जमल बा। संजय महानंद, प्रकाश जैस आ मनोज टाइगर सरकारी टीचर के भूमिका में बा लोग जे खात त बा सरकार के बाकिर गुण बोर्डिंग स्कूल के गावत बा लोग। ई लोग भी अपना किरदार से न्याय कइले बा लोग।

संगीत:

फिल्म के संगीत मधुकर आनंद के बा। फिल्म के एगो गाना ‘डिजिटल जवानी’ बड़ा लोकप्रिय भइल बा आ एह के विडिओ के कोरियोग्राफी भी बढ़िया भइल बा। फिल्म में एगो गाना संजय महानंद पर फिल्मावल बा जवन थोड़ा आश्चर्य भरल बा काहें कि अक्सर कॉमेडियन के खाली कॉमिक रिलीफ़ तक ही सीमित रखल जाला। गाना भी अच्छा बा आ बढ़िया से पिक्चराइज कइल बा।

रोमियो राजा एगो लीक से हट के विषय पर बनल एक सार्थक फिल्म बा आ एकरा के देखे सिनेमाहॉल में जाए के चाहीं। ताकि एह तरह के फिल्मन के आमद भोजपुरी में भी बढ़े आ सिनेमा के उद्धार हो सके।

 

 


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Hum BhojpuriaJanuary 23, 20211min10860

लेखक- मनोज भावुक

हिरोइन त सुन्दरे होला लो. ना रहित लोग त हिरोइन के बनाइत बाकिर आम्रपाली दुबे कुछ बेसिए सुन्दर बाड़ी. इंडियन क्लासिक लुक बा, भरल-पूरल देह आ होठ प बुझाला जे मुस्कान थिरकता. आज उनकर जन्मदिन ह. जन्मदिन के बधाई.

जान जाईं कि छवे साल में छा गइल बाड़ी आम्रपाली दुबे. टॉप पर पहुंच गइल बाड़ी. दर्शकन के दिल में उतर गइल बाड़ी. आम्रपाली दुबे गोरखपुर उत्तर प्रदेश के रहे वाला हई. हिंदी सीरियल ‘रहना है पलकों की छाँव में’ से आपन करियर शुरू करे वाली आम्रपाली भोजपुरी में 2014 में निरहुआ हिन्दुस्तानी से डेब्यू कइली. एह फिल्म में उनके किरदार सोना काफी मशहूर भइल. एही फिल्म से आम्रपाली के जोड़ी निरहुआ के साथे अइसन बनल कि ओकरा बाद निरहुआ के अधिकतर फिल्म में आम्रपाली मुख्य भूमिका में दिखे लगली. आम्रपाली के करियर मात्र अभी 6-7 साल के भइल बा लेकिन ऊ आपन एगो अलग मुकाम बना लेले बाड़ी आ टॉप हीरोइन के रेस में आगे बाड़ी.

त जान जाईं कि आम्रपाली दुबे आज 34 साल के हो गइली. 11 जनवरी, 1987 के गोरखपुर में जनमल आम्रपाली आज भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे महंग एक्ट्रेस में से एक बाड़ी. उनका के भोजपुरी में यूट्यूब क्वीन के नाम से भी जानल जाला. काहे कि यूट्यूब पर चढ़ते उनकर गाना एगो नया रिकॉर्ड बना देला.

आम्रपाली के बाबूजी उनका के डॉक्टर बनावल चाहते रहलें लेकिन उनका भाग में त फ़िल्मी पर्दा प गर्दा उड़ावल लिखल रहे. उनकर बाबा मुंबई शिफ्ट हो गइल रहले लिहाज़ा पूरा परिवार संगे उ मुंबईये में रहत रहली. मुंबईये के भवन कॉलेज से पढ़ाईयो पूरा कइली हालाँकि पढ़ाई में उनकर ख़ास मन ना लागल आ कॉलेजिए टाइम से लगली ऑडिशन देवे.

‘रहना है पलकों की छाँव में’ सीरियल से उनका पहचान मिलल बाकिर ओकरा पहिले उ सात फेरे, मायका अउर मेरा नाम करेगी रोशन में भी अहम भूमिका निभा चुकल रहली. खैर, अब त भोजपुरी के होके रह गइल बाड़ी.

अब तक लगभग तीन दर्जन फिल्मन में अभिनय कर चुकल बाड़ी जवना में निरहुआ रिक्शावाला’, काशी अमरनाथ, ‘पटना से पाकिस्तान, मोकामा जीरो किलोमीटर, निरहुआ चलल ससुराल-2, निरहुआ चलल लंदन, निरहुआ हिन्दुस्तानी, निरहुआ हिन्दुस्तानी-2, निरहुआ हिन्दुस्तानी-3, राजा बाबू, राम लखन, जिगरवाला, आशिक आवारा, बम बम बोल रहा काशी, निरहुआ सटल रहे, सिपाही, बार्डर आ लागल रहा बताशा आदि प्रमुख बा.

फिल्मन के नाम देखीं. ढेर फिल्म में निरहुआ सटल बा. त जान जाईं कि लोग आँख मूँद के बिना पोस्टर देखले बता देला कि निरहुआ हीरो बा त हीरोइन आम्रपाली होइहें, 2014 के बाद से. ओकरा पहिले त लोग कहत रहे कि निरहू बाड़े त कहीं ना कहीं पाखी होइहें. पाखी माने पाखी हेगड़े. त कहे वाला त इहो कहेला कि आखिर आम्रपाली कवन मंतर मरली कि पाखी एकदम्मे से साइड हो गइली. खैर, फिल्म इंडस्ट्री में ई सब सामान्य बात बा.

ई साँच बा कि आम्रपाली भोजपुरिये के ना, निरहुओ के हिरोइन बाड़ी. नब्बे प्रतिशत फिल्म में निरहुआ उनकर हीरो बाड़न. ‘सत्या’, ‘दुल्हन गंगा पार के’, ‘मैंने उनको सजन चुन लिया’, ‘बागी भईल सजना हमार’ आ ‘लागल रहा बताशा’ जइसन कुछ फिल्मन में दिनेश लाल यादव निरहुआ उनका साथे नइखन. फिल्म ‘शेर सिंह’ में आम्रपाली पहिला बार अभिनेता पवन सिंह के साथ एगो पूरा किरदार में नजर आइल बाड़ी.

दरअसल भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्रीज खातिर साल 2014 सफलता के साल रहे. एह साल लगभग 60 गो फिल्म प्रदर्शित भइल, ओही में दिनेश लाल यादव के निरहुआ हिन्दुस्तानी कामयाबी के झण्डा गाड़ देहलस. आदिशक्ती इंटरटेनमेंट के बैनर के ई फिल्म दर्शक के सिनेमाहाल तक खींच ले अइलस. एही फ़िल्म से आम्रपाली दुबे भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री में एंट्री कइली. उनके क़िरदार सोना एगो शहर के अकड़ू अउरी चालू लइकी रहतिया जवन निरहुआ से बिआह अपना बाप के प्रॉपर्टी पावे खातिर करsतिया लेकिन ओकरा निरहुआ के गांव अइला के बाद प्यार हो जाता अउर उ निरहुआ के साथे रहे लागsतिया. बाद में जब असलियत पता चलता त बहुत बवाल होता. कॉमेडी के साथ परिवार के इर्द गिर्द बुनल ई फ़िल्म दर्शक के खूब पसंद आइल. एही फ़िल्म के सफलता रहे कि आम्रपाली दुबे अउरी निरहुआ के जोड़ी एतना हिट भइल कि आगे आवे वाला साल में अमूमन हर फिल्म में साथ लउके लागल लोग..आ बेर-बेर साथे लउकल कवनो गुनाह ना ह. अरे भाई जोड़ी हिट होता त केहू का करो

2015 में भोजपुरी फिल्मन के हिट करावे के एगो नया ट्रेंड चल पड़ल. ए ट्रेंड के नाम रहे भोजपुरी फिल्मन के पाकिस्तान कनेक्शन. माने कि जेंगा हिंदी में देशभक्ति फ़िल्म एगो टाइम में पाकिस्तान आ हिंदुस्तान के बीच के जंग, घुसपैठ, जासूसी अउरी अमन संदेश के केंद्र में रखके बने लागल, उहें कुछ भोजपुरी में भी शुरू भइल आ खूब चलल, चलते जाता.

एकर शुरुआत कइलें निर्माता अनंजय रघुराज अउरी लेखक निर्देशक संतोष मिश्रा. दुनो लोग निरहुआ के लीड में लेके एगो फ़िल्म बनावल लोग पटना से पाकिस्तान. निरहुआ के साथे एह फ़िल्म में आम्रपाली दुबे अउरी काजल राघवानी रहली. फ़िल्म के कहानी कबीर नाम के एगो युवक के रहे जवन आतंकवादी के मंदिर पर हमला नाकाम कर देता अउरी पाकिस्तान के अखबार में प्रमुखता से छपता. जब आतंकवादी गुट के सरगना ई देखता त उ कबीर के मारे के प्लानिंग करता. ओह प्लानिंग के तहत भइल बम विस्फोट में कबीर त बच जाता लेकिन ओकर प्रेमिका अउरी पूरा परिवार मर जाता. पहिले कबीर सरकार से मदद मांगता, जब नइखे मिलत त खुद बीड़ा उठा लेता अउरी पाकिस्तान में घुसके आतंकवाद से लड़ता. एही दरमयान ओकरा एगो पाकिस्तानी लड़की से प्यार भी हो जाता. इहे फ़िल्म के कहानी बा. एह कहानी में पाकिस्तानी लड़की शहनाज़ के रूप में आम्रपाली के अभिनय के खूब नोटिस कइल गइल.

निरहुआ के फ़िल्म राजा बाबू, मंजुल ठाकुर के निर्देशन में बनल बेहतरीन फ़िल्म रहे, बल्कि साल के सबसे सफल फ़िल्म में से एक रहे. एहू फिल्म में आम्रपाली के अभिनय सराहे लायक बा. ओही तरे मोकामा 0 किलोमीटर, निरहुआ चलल ससुराल 2, बेटा में भी आम्रपाली आपन प्रभाव छोडली.

निरहुआ हिंदुस्तानी काफी सफल फ़िल्म रहे. ओकर सीक्वल आइल अउरी उ भी खूब चलल अउर चलली आम्रपाली भी. फ़िल्म के देसी कनेक्ट के कारण लोग बहुत पसंद कइलस आ ई देसी कनेक्ट निरहुओ में बा, आम्रपालियो में. एही से ई फ़िल्म यूट्यूब पर सबसे ज्यादा बार देखल गइल.

प्रियंका चोपड़ा के प्रोडक्शन कंपनी पर्पल पेबल भोजपुरी फ़िल्म निर्माण में आइल अउरी फ़िल्म बनल काशी अमरनाथ. फ़िल्म के निर्देशक रहलें संतोष मिश्रा. काशी के रोल में रहलें निरहुआ. आम्रपाली एहू फिल्म में आपन छाप छोड़ली.

डायरेक्टर ब्रज भूषण के फिल्म आइल काजल, जवना में बस एगो आइटम सांग में आके फिल्म के हीट करा देले बाड़ी आम्रपाली.

आम्रपाली नृत्य में पारंगत बाड़ी. खूबसूरत आ मिलनसार बाड़ी. विनम्र आ व्यवहार कुशल बाड़ी. समय आ कमिटमेंट के पक्का बाड़ी. समय के राग आ नब्ज के उनका पहचान बा. एही से भोजपुरी सिनेमा के लगभग तीन दर्जन हिरोइन लोग में उ अगिला कतार में भी आगे खड़ा बाड़ी. उ अउर आगे जास, सफल होखस आ खुल के-खिल के मुस्कुरास ..जन्मदिन पर इहे शुभकामना बा.

(लेखक मनोज भावुक भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार हैं.)          

 

 


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Hum BhojpuriaJanuary 23, 20211min10120

लेखक- मनोज भावुक

लरकोरी हो गइली अनुष्का शर्मा. उनका बेटी भइल काल्ह. बधाई होखे विराट भाई ! जिलेबी बंटाव.

जी हाँ, टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली अब पापा बन गइल बाड़न. उ ट्वीट क के खुशखबरी देले बाड़न. जान जाईं कि विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरा के बीचे से भारत लौटे के पड़ल. एकरा पहिले उ वनडे टी-20 आ पहिला टेस्ट मैच में टीम के हिस्सा रहलें. पापा बनला के बाद विराट कोहली ट्विटर पर खुशी जाहिर करत भावुक होके लोग बाग़ के शुभकामना खातिर धन्यवाद देले बाड़न.

विराट कोहली ट्वीट क के कहले बाड़न कि “हम दोनों को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हमारे घर बेटी हुई है. हम आपके प्यार और शुभकामनओं के लिए दिल से आभारी हैं. अनुष्का और हमारी बेटी, दोनों बिल्कुल ठीक हैं. हमारा यह सौभाग्य है कि हमें जिंदगी का यह चैप्टर अनुभव करने का मौका मिला. हम जानते हैं कि आप यह जरूर समझेंगे कि इस वक्त हमें थोड़ी प्राइवेसी चाहिए.”

होला का कि अक्सर फैंस के दिलचस्पी अपना पसंदीदा क्रिकेटर आ फिल्म स्टार में एह हद तक होला कि उ ओकरा निजी जिंदगी में भी ताके-झांके भा टिक्का-टिप्पड़ी करे से बाज ना आवे. दरअसल सेलिब्रिटी पब्लिक प्रॉपर्टी हो जाला आ ओकर निजता हमेशा लोग के कैमरा के फोकस पर रहेला. रउरा लोग सैफ-करीना के बबुआ तैमूर के लेके फैंस आ पैपराजी के जूनून के बारे में सुनलही होखब. ओइसही फैंस लोग के विराट आ अनुष्का के बेटी के पहिला झलक देखे के जूनून सवार भइल बा आ काल्ह से लेके आजतक में गूगल पर ई टर्म ‘विराट की बेटी की पहली तस्वीर’ काफी सर्च भइल बा. इहे कारण बा कि विराट पहिलही सबका से अपना निजता के  सम्मान करे खातिर निहोरा कइले बाड़न.

सोशल मीडिया से बच्ची के रखिहें दूर

 

हालाँकि अनुष्का एगो इंटरव्यू के दौरान पहिलही साफ़ क चुकल बाड़ी कि उ आ विराट अपना  बच्ची के सोशल मीडिया से दूरे रखी लोग. उ लोग नइखे चाहत कि उनकर बच्चा के दूसरा बच्चन से स्पेशल बनावल जाय. अनुष्का इहो बतवले बाड़ी कि उ अपना बच्चा खातिर जेंडर न्यूट्रल नर्सरी तैयार कइले बाड़ी. उ एह बात के जोर देके कहली कि, ‘’ मैं नहीं मानती कि लड़कियों को पिंक पहनना चाहिए और लड़कों को ब्लू. मेरी परवरिश में सभी रंग होंगे.’’

प्रेग्नेंसी के दौरान भी एक्टिव रहली अनुष्का

अनुष्का पेट से बाड़ी. ई खुशखबरी अनुष्का आ विराट कोहली अगस्ते में सबका साथ शेयर कइले रहे लोग. बतवले रहे लोग कि जनवरी में उ लोग दू से तीन हो जाई लोग. अनुष्का त एह  दौरान ऐड शूट आ मैग्जीन शूट भी कइली. बेबी बम्प में आपन खूबसूरत तस्वीरो पोस्ट कइली, जवना के उनकर फैन्स लोग बड़ी सरधा से नेशनल न्यूज के तरह देखल आ वायरल कइल.

एह सबसे पहिले एगो ज्योतिष पंडित जगन्नाथ गुरूजी त इहाँ तक भविष्यवाणी क देले रहनी कि विराट आ अनुष्का के बेटिये होई.

अच्छा एगो रोचक आ संजोग के बात अउर देखीं कि ज्यादातर महान क्रिकेटर लोग के पहिलौंठी के लइका बेटिये भइल बा. सर डॉन ब्रेडमैन के अगर छोड़ दिहल जाए त सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, रिकी पॉन्टिंग जइसन कई गो महान क्रिकेटर्स के घरे सबसे पहले बेटिये के जन्म भइल बा. विराट कोहली के समकालीन कई गो भारतीय क्रिकेटर के भी पहिला संतान बेटिये बाड़ी, जइसे कि महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, गौतम गंभीर, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, चेतेश्वर पुजारा, आर अश्विन, अजिंक्य रहाणे आदि. अक्सर एह सब खिलाड़ी के साथ कुदरत के एह  संयोग के प्रतिफल भी सुंदर रहल बा माने बेटी के आइल शुभ साबित भइल बा. बेटी के अइला के बाद क्रिकेट मैच में बेहतरीन प्रदर्शन कइले बा लो ई लोग. करियर ऊपरे गइल बा. विराटो अपना करियर के ग्यारहवाँ आईसीसी वर्ल्ड टूर्नामेंट खेले वाला बाड़न त बढ़िया आ बेहतर प्रदर्शन के उम्मीद कइल जाय.

बेटी के लक्ष्मी के रूप अइसहीं थोड़े कहल गइल बा. उ घर में चाहें बेटी के रूप में आवे या बहू  के रूप में, ओकरा अइला से बरक्कते होला. रउरा ईयाद होई कि बेटी जब ब्याह के घर से विदा कइल जाला त ओह दिन एगो रस्म होला, घर भरावल. उ रस्म एही खातिर होला कि घर के  लक्ष्मी के त हमनी दोसरा के देतानी बाकिर जाये से पहिले अगर उ अपना हाथ से घर भर दी  त कबहूँ बेटी के मायका में समृद्धि के कमी ना होई.

विराट कोहली के ज़िन्दगी में एगो गज़ब के इत्तेफ़ाक़ बा. उ साल के 11वां महीना में जनमलें, 11 तारीख के परिणय सूत्र में बंधलें आ 11 तारीख के पिता बनलें. अतने ना विराट कोहली अकेले एगो अइसन कप्तान बाड़न जे एक कैलेंडर साल में 11 सौ रन बनवलें बाड़न.

बबीता फोगाट के बेटा भइल बा

भारत के स्टार महिला पहलवान बबीता फोगाट के बेटा भइल बा. बबीतो आपना पति विवेक सुहाग के साथ ट्विटर पर एगो पोस्ट शेयर क के एह बात के जानकारी देले बाड़ी. लिखले बाड़ी कि, “हमारे बेटे से मिलिए. सपनों में विश्वास करिए, ये पूरे होते हैं. हमारे पूरे हुए हैं. नीले कपड़ो में देखिए.”

2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीते वाली बबीता 2018 दिसंबर में विवेक सुहाग के साथे शादी कइली. उ 2020 नवंबर में इंस्टाग्राम पर एगो पोस्ट के जरिए अपना मां बने के  खबर देले रहली.

जान जाईं कि बबीता के पति विवेक सुहाग भी एगो पहलवान हउवन. एह लोग के मुलाकात छह साल पहिले भइल रहे. विवेक भारत केसरी रह चुकल बाड़न. 1 दिसंबर 2019 के दूनो लोग के  शादी भइल. बबीता 2014 में भइल कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करत देश खातिर  गोल्ड मेडल जीतली. बबीता के ऊपर बॉलीवुड में दंगल फिल्म भी बन चुकल बा, जेकरा के  लोग खूब पसंद कइल.

कहे के मतलब कि कोरोना काल खाली उदासी, फ्रस्ट्रेशन, डिप्रेशन आ बेरोजगार होखे के साल नइखे रहल. प्लानिंग, क्रियेशन आ योजना के साल भी रहल बा. ओकर फल सामने बा. सपना  साकार भइल बा.

फिलहाल अनुष्का शर्मा आ बबीता फोगाट सोईरी में बा लोग. बच्चा-जच्चा खातिर हमार शुभकामना.

 


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Hum BhojpuriaDecember 30, 20201min14300

‘’ आप भोजपुरी में ब्रेक नहीं देते तो शायद मैं और मेरी पहचान अधूरी रह जाती ’’- रवि किशन  

लेखक- मनोज भावुक

निर्माता-निर्देशक मोहन जी प्रसाद ना रहनी। 17 नवम्बर दोपहर 2 बजे मुंबई में उहाँ के निधन हो गइल। मोहन जी के भोजपुरी सिनेमा के तीसरा चरण भा मॉडर्न युग के जन्मदाता भी कहल जाला। अभिनेता रवि किशन के भोजपुरी में उहें के लॉन्च कइनी। रवि जी के पहिला, दूसरा, तीसरा आ चौथा लगातार चार गो फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक उहें के रहनी।

उहाँ के निधन के बाद सांसद-अभिनेता रवि किशन अपना फेसबुक पेज पर शोक सन्देश लिखलें कि ‘’ श्री मोहन जी प्रसाद जी ने ब्रेक दिया था. फिर लगातार blockbuster फ़िल्म साथ की। मोहन जी आज दोपहर 2 बजे हम सबका साथ त्याग दिए। मोहन जी बहुत कुछ सिखा आपसे। आप भोजपुरी में ब्रेक नहीं देते तो शायद मैं और मेरी पहचान अधूरी रह जाती। धन्यवाद आपको। महादेव आपको अपने चरणो मैं स्थान दे। ओम् शांति शांति ‘’

रवि किशन जी तुरंत एगो अउर पोस्ट कइले- ‘’ आज भोजपुरी इंडस्ट्री के जनक का देहांत हो गया। मोहन जी आपके वजह से तीसरे दसक में सबको रोज़ी रोटी मिली। भोजपुरी इंडस्ट्री का काला दिन आज आपका जाना. ॐ शान्ति शान्ति ‘’

मोहन जी हिंदी में भी कई गो पारिवारिक फिल्म देले बानी। एगो लेखक-निर्देशक आ निर्माता के रुप में ‘औरत तेरी यही कहानी’, नाचे नागिन गली-गली,‘घर परिवार’ ( राजेश खन्ना, ऋषि कपूर, मौसमी, मीनाक्षी आदि स्टारकास्ट रहे), ‘दोस्ती के सौगन्ध’, फूलवती, दिवाना हूँ पागल नहीं, आ ‘मेघा’ (करिश्मा कपूर, राहुल रॉय, शम्मी कपूर स्टारकास्ट रहे ) आदि प्रमुख फिल्म बा। मोहन जी निर्मित निर्देशित लिखित बंगला फिल्म ‘विधातार खेला’ आ ‘माधुरी’ भी उल्लेखनीय बा।

 

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